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गजल, कहानी, गीत, उपन्यास लिखने का शौक ऐसा कि 84 वर्ष की उम्र में भी युवा बने हुए हैं अजमेर के विनोद सोमानी हंस

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एस पी मित्तल, अजमेर

देश दुनिया में ऐसे अनेक साहित्यकार मिल जाएंगे, जिन्होंने अपने जीवनकाल में कई उपन्यास, कहानियां, गजलें, गीत आदि लिखे। लेकिन ऐसे साहित्यकार बहुत कम होंगे जो 84 साल की उम्र में भी स्वयं को युवा मान कर लेखन का काम कर रहे हैं। ऐसे साहित्यकार हैं अजमेर के विनोद सोमानी हंस। 5 अप्रैल को सुबह जब मेरी 84 वर्षीय विनोद सोमानी से फोन पर बात हुई तो आवाज से ऐसा लगा ही नहीं कि मैं किसी बुजुर्ग से बात कर रहा हंू। उन्होंने बताया कि वे आज भी सुबह चार बजे उठते हैं और दिन भर अपने कामों में व्यस्त रहते हैं। हालांकि उनके पुत्र और अजमेर के सुप्रसिद्ध मित्तल अस्पताल के उपाध्यक्ष श्याम सोमानी ने घर पर सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा रखी हैं, लेकिन फिर भी विनोद सोमानी आत्मनिर्भर जिंदगी जीने में यकीन करते हैं। पत्नी विद्या सोमानी को भले ही ऑक्सीजन की जरुरत पड़े, लेकिन विनोद सोमानी पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। इस उम्र में भी स्वस्थ रहने की वजह यही है कि उनका लेखन आज भी जारी है। असल में गजल और गीत लिखने से मन हमेशा युवा बना रहता है और जब मन युवा रहता है तो फिर शरीर पर उम्र का कोई असर नहीं होता। सुबह चार बजे उठने के बाद हंसको रात 9 बजे सुकून की नींद आ जाती है। हंस की उपाधि के संबंध में सोमानी ने बताया कि 1954 में जब वे दसवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब स्कूल के समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा मुख्य अतिथि के तौर पर आए। तब मुझे एक साथ तीन पुरस्कार मिलने पर सुखाडिय़ा ने पीठ थपथपाई। मुख्यमंत्री की प्रशंसा से प्रभावित होकर ही स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि विनोद तुम तो स्कूल के हंस हो। तभी से मेरे नाम के साथ हंस जुड़ गया और यह खूबसूरत हंस मेरे जीवन के साथ आज भी जुड़ा हुआ है। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि अंतिम सांस तक में गीत और गजल लिखता रहंू। विनोद सोमानी हंस की इस जिंदा दिली के लिए मोबाइल नंबर 9351090005 पर हौसला अफजाई की जा सकती है

सोमानी की साहित्यिक यात्रा:
विनोद सोमानी का प्रथम कविता संग्रह त्रिकोण 1968 में प्रकाशित हुआ, जिसकी भूमिका प्रख्यात हिन्दी सांसद सेठ गोविंद राम ने लिखी। अब तक हिन्दी में 23 तथा राजस्थानी भाषा में 9 साहित्यिक कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। 14 कविता संग्रह, 6 उपन्यास, 8 कहानी संग्रह, एक जीवनी, एक निबंध संग्रह, एक व्यंग्य संग्रह तथा अनुवाद प्रकाशित है। सोमानी को प्रतिष्ठित लखोटिया पुरस्कार के साथ साथ राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर के भी अनेक पुरस्कार मिले हैं। राजस्थानी भाषा में मगध अनुवाद के लिए केंद्रीय साहित्य अकादमी का पुरस्कार भी मिला है। महाकाव्य म्हारा दाता गिरधारी के लिए मीरा स्मृति संस्थान चित्तौड़ का महाकवि मीरा काव्य पुरस्कार प्राप्त हुआ। महाराष्ट्र दलित साहित्य अकादमी द्वारा प्रेमचंद लेखक पुरस्कार, राजस्थानी विकास मंच संस्थान जालौर द्वारा बीआर लिट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। देश की प्रमुख साहित्यिक पुस्तकों में सोमानी के गीत, गजल, कहानी आदि प्रकाशित हुए।

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