देश भर में गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। इस कड़ी में श्रीनगर में गुरुवार को गर्मी ने नया रिकॉर्ड बनाया है। यहां पर 54 साल बाद अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने 23 मई के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि 24 से 26 मई तक गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। वहीं पाकिस्तान की पोल खोलने और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में दुनिया को बताने के लिए सर्वदलीय सांसदों का दल कई देशों का दौरा कर रहा है। इस कड़ी में डीएमके सांसद कनिमोझी की अगुवाई में एक दल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचा है। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की 10वीं जमानत याचिका एक बार फिर ब्रिटिश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। लंदन की रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जस्टिस माइकल फोर्डहैम ने कहा कि नीरव मोदी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आधार पर सबूत मौजूद हैं”, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध का मामला बनता है। इधर दिल्ली सरकार ने आम आदमाी पार्टी के शासनकाल के दौरान उपराज्यपाल (एलजी) के अधिकारों को चुनौती देने वाले सात मामले वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इनमें यमुना सफाई से जुड़ा मामला भी शामिल है।
चौंका रहा श्रीनगर का पारा : 54 साल बाद 34 पार, 133 वर्ष बाद मई का तीसरा सबसे गर्म दिन रहा गुरुवार
श्रीनगर के साथ ही जम्मू में भी लोग गर्मी से परेशान रहे। यहां पर दिन का पारा 38.5 डिग्री रहा हवा के कारण यहां बुधवार की अपेक्षा पारे में कमी आई और यह 2.9 डिग्री कम रहा। बुधवार को जम्मू में अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री था।

श्रीनगर में वीरवार को गर्मी ने रिकार्ड बनाया। यहां पर 54 साल बाद अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने 23 मई के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि 24 से 26 मई तक गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।
बीते 54 वर्षों की बात करें तो श्रीनगर में 54 साल बाद पारा 34 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा है। इससे पहले 28 मई 1971 को तापमान 34.3 डिग्री दर्ज किया गया था। घाटी की खूबसूरती के अलावा यहां का मौसम अन्य राज्यों के पर्यटकों को यहां खींचकर लाता है। गर्मी की छुट्टियों में घूमने के लिए कश्मीर एक बेहतर जगह है। लेकिन, अब गर्मी भी यहां तेवर दिखा रही है। बाजार और सड़क पर दोपहर में निकलना मुश्किल हो रहा है।
गुरुवार को श्रीनगर का अधिकतम तापमान सामान्य से नौ डिग्री ज्यादा रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 3.4 डिग्री अधिक है। गुलमर्ग में तापमान 25.4 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 8.8 डिग्री ज्यादा है। वहीं पहलगाम में तापमान 27.8 डिग्री दर्ज किया गया जो सामान्य से 5.6 डिग्री अधिक है।
कश्मीर के दरवाजे काजीगुंड में 33.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। यह 1956 से अब तक मई में तीसरा सबसे अधिक तापमान है। कोकरनाग में 33.3 डिग्री तापमान दर्ज किया गया जो 1978 के बाद सबसे अधिक तापमान है। इससे पहले कोकरनाग में 15 मई 2001 को 32.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। जम्मू संभाग के बनिहाल में 31 डिग्री, बटोट में 29.2 डिग्री, भद्रवाह में 32.1 डिग्री, कटड़ा में 36.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है।
133साल बात मई का तीसरा सबसे गर्म दिन
मौसम विभाग के मुताबिक, श्रीनगर में गर्मी ने वीरवार को दो रिकार्ड बनाए। यह 133 साल में मई का तीसरा सबसे गर्म दिन रहा। इससे पहले 24 मई 1968 को सर्वाधिक तापमान 36.4 डिग्री और 31 मई 1956 को 35.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
न ट्रेड न टॉक, अब बस PoK पर होगी बात… पीएम मोदी ने शहबाज-ट्रंप दोनों को दे दिया दो टूक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पड़ोसी मुल्क को करारी चोट देने के बाद पीएम मोदी ने सरहदी बीकानेर जिले में हुई जनसभा से पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को स्पष्ट संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ न ट्रेड यानी व्यापार होगा और न टॉक (वार्ता) होगी। अब बात होगी तो सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके की होगी। इस बात की उम्मीद पहले से ही थी कि पीएम मोदी आतंक को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब जरूर देंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर पाकिस्तान को दो टूक चेतावनी दी है। ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पड़ोसी मुल्क को करारी चोट देने के बाद पीएम मोदी ने सरहदी बीकानेर जिले में हुई जनसभा से पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को स्पष्ट संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ न ट्रेड यानी व्यापार होगा और न टॉक (वार्ता) होगी। अब बात होगी तो सिर्फ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके की होगी। इस बात की उम्मीद पहले से ही थी कि पीएम मोदी आतंक को संरक्षण देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब जरूर देंगे।
सरहदी जिले बीकानेर से पाकिस्तान को लताड़
हुआ भी वैसा ही राजस्थान के बीकानेर में प्रधानमंत्री ने करीब 41 मिनट तक भाषण दिया, इस दौरान उनके निशाने पर पाकिस्तान और आतंकवाद का मुद्दा ही रहा। पीएम मोदी ने आतंक पर तल्ख तेवर दिखाते हुए कहा कि भारत में अब कोई भी आतंकवादी घटना होती है तो भारत आतंकियों और आतंक की सरपरस्त सरकार को अलग-अलग नहीं देखेगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान दुनिया को भी स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की ओर से लिए गए फैसलों पर किसी भी देश की दखल बर्दाश्त नहीं होगा।
शहबाज के साथ ट्रंप को भी पीएम मोदी की खरी-खरी
पीएम मोदी का इशारा कहीं न कहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर था, जिन्होंने शुरू में दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान में सीजफायर के दौरान उन्होंने अहम रोल निभाया। हालांकि, बाद में ट्रंप अपने दावे से पलट गए थे। दूसरी ओर भारत की ओर से लगातार ये कहा गया कि सीजफायर का फैसला का द्विपक्षीय था। इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता या दखल नहीं था। इसके साथ-साथ भारत ने ये भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है।
पीएम मोदी की टिप्पणी पर एक्सपर्ट्स ने क्या कहा
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने जिस तरह से कहा कि ‘न ट्रेड और न टॉक, अब सिर्फ POK पर बात’ होगी, ये पड़ोसी मुल्क को साफ संदेश है। प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया के सामने साफ कर दिया कि पाकिस्तान से अब किसी भी तरह की व्यापारिक बातचीत नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पर बात नहीं हो जाती। यही नहीं सिंधु जल समझौते का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के हक का पानी पाकिस्तान को नहीं मिलेगा।
पीओके का जिक्र क्यों?
पीएम मोदी ने पीओके का जिक्र यूं ही नहीं किया है। ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि पाकिस्तान ज्यादातर आतंकियों के कैंप्स पीओके में ही चलाते हैं। यहीं आतंकियों को ट्रेनिंग दी जाती है। पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, भारत में हमेशा से पीओके को लेकर आवाज उठती रही है। अब पीएम मोदी ने साफ-साफ शब्दों में पाकिस्तान को खरी-खरी सुना दी है। प्रधानमंत्री ने दुनियाभर के देशों को भी इसे लेकर भारत का रुख स्पष्ट कर दिया।
‘परमाणु बम की गीदड़ भभकियों से डरने वाला नहीं भारत‘
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के लोगों के खून से खेलने की कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत कभी भी परमाणु बम की गीदड़ भभकियों से डरने वाला नहीं है। भारत किसी से कमजोर नहीं है। 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर हमारी बहनों की मांग का सिंदूर उजाड़ दिया था। वह गोलियां तो पहलगाम में चली थीं लेकिन उन गोलियों से 140 करोड़ देशवासियों का सीना छलनी हुआ था। इसके बाद हर देशवासी ने एकजुट होकर संकल्प लिया था कि आतंकवादियों को मिट्टी में मिला देंगे। उन्हें कल्पना से भी बड़ी सजा देंगे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र कर क्या बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि आज आपके आशीर्वाद से, देश की सेना के शौर्य से, हम सब उस प्रण पर खरे उतरे हैं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद हमारी सरकार ने तीनों सेनाओं को खुली छूट दे दी थी और तीनों सेनाओं ने मिलकर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। इसी के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया था।
. पाकिस्तान ने खतरे में डाली 227 यात्रियों की जान
पाकिस्तान की शर्मनाक हरकत एक बार फिर से दुनिया के सामने उजागर हुई है। बुधवार को इंडिगो की दिल्ली-श्रीनगर फ्लाइट ऑपरेट करने वाले पायलट ने अचानक ओलावृष्टि का सामना करने के बाद अशांति से बचने के लिए लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में जाने की अनुमति मांगी थी। जानकार लोगों का कहना है कि लाहौर एटीसी ने इस अनुमति से इनकार कर दिया। ऐसे में 220 लोगों को लेकर एयरबस ए321 उड़ा रहे पायलट ने श्रीनगर एटीसी को आपातकाल की सूचना दी। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों सहित 220 से अधिक लोगों को लेकर विमान आखिरकार श्रीनगर में सुरक्षित रूप से उतरा, लेकिन ओलावृष्टि में इसका रेडोम या नोज कोन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
.अमेरिका में इजरायली दूतावास के 2 कर्मचारियों की हत्या
अमेरिकी की राजधानी वॉशिंगटन में स्थित कैपिटल यहूदी संग्रहालय के सामने दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों इजरायली दूतावास के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। घटना बुधवार रात की है। मरने वाले में एक महिला और एक पुरुष है। इजरायली मीडिया आउटलेट यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी संग्रहालय के सामने हुई, जहां अमेरिकी यहूदी समिति एक कार्यक्रम का आयोजन कर रही थी। अमेरिकी की होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी किस्टी नोएम ने हत्या की पुष्टि की है
अमेरिकी की राजधानी वॉशिंगटन में स्थित कैपिटल यहूदी संग्रहालय के सामने दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों इजरायली दूतावास के कर्मचारी बताए जा रहे हैं। घटना बुधवार रात की है। मरने वाले में एक महिला और एक पुरुष है। इजरायली मीडिया आउटलेट यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी संग्रहालय के सामने हुई, जहां अमेरिकी यहूदी समिति एक कार्यक्रम का आयोजन कर रही थी। अमेरिकी की होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी किस्टी नोएम ने हत्या की पुष्टि की है।
नोएम ने एक्स पर लिखा ‘आज रात वाशिंगटन डीसी में यहूदी संग्रहालय के पास दो इज़रायली दूतावास कर्मचारियों की बेवजह हत्या कर दी गई। हम सक्रिय रूप से जांच कर रहे हैं और साझा करने के लिए अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए काम कर रहे हैं।’ डीसी पुलिस ने कहा कि वह एफबीआई के वाशिंगटन फील्ड ऑफिस के सामने सड़क पर हुई गोलीबारी की जांच कर रही है, जो संग्रहालय के पास स्थित है।
‘आजाद फिलिस्तीन’ का लगाया नारा
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस एक संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ कर रही है। संदिग्ध के दाढ़ी थी। उसने नीली जैकेट और नीली जींस पहनी हुई थी। तीन अधिकारियों ने NBC4 वॉशिंगटन को बताया कि संदिग्ध के गिरफ्तारी के समय फ्री फिलिस्तीन का नारा लगाया। एबीसी न्यूज़ ने बताया कि एफ़बीआई संयुक्त आतंकवाद कार्य बल वर्तमान में घटना की जांच कर रहा है।
इजरायली राजदूत सुरक्षित
सीएनएन ने इजरायली दूतावास के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इजरायली राजदूत सुरक्षित हैं। जब गोलीबारी हुई तब वह उस स्थान पर नहीं थे। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह और डीसी के लिए कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो कैपिटल यहूदी संग्रहालय के बाहर गोलीबारी के घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।
वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित, जानिए तीन दिनों की सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तीन दिनों तक चली सुनवाई पूरी हो गई है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को तीन मुद्दों पर अपना अंतरिम आदेश सुरक्षित रख लिया। इसमें ‘अदालतों द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने की शक्ति भी शामिल है। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने संशोधित वक्फ कानून का विरोध करने वाली याचिकाओं को सुना।
235 रन बनाकर भी हांफ गई लखनऊ सुपरजायंट्स, गुजरात के खिलाफ जैसे-तैसे बची इज्जत
इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 64वें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स ने गुजरात टाइटंस को 33 रन से हरा दिया। इस सीजन में लखनऊ की 13 मैचों से छठी जीत थी। हालांकि, इस जीत का लखनऊ को कोई खास फायदा नहीं होगा। लखनऊ और गुजरात के बीच यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया था। मैच में गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी लखनऊ की टीम ने मिचेल मार्श की तूफानी शतक और निकोलस पूरन की फिफ्टी से निर्धारित 20 ओवर के खेल में 2 विकेट के नुकसान पर 235 रन का स्कोर खड़ा किया था, लेकिन इसके जवाब में गुजरात टाइटंस 20 ओवर में 9 विकेट पर 209 रन ही बना पाई।
इंडियन प्रीमियर लीग 2025 के 64वें मैच में लखनऊ सुपरजायंट्स ने गुजरात टाइटंस को 33 रन से हरा दिया। इस सीजन में लखनऊ की 13 मैचों से छठी जीत थी। हालांकि, इस जीत का लखनऊ को कोई खास फायदा नहीं होगा। लखनऊ और गुजरात के बीच यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया था। मैच में गुजरात के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी का फैसला किया था।
पहले बल्लेबाजी करने उतरी लखनऊ की टीम ने मिचेल मार्श की तूफानी शतक और निकोलस पूरन की फिफ्टी से निर्धारित 20 ओवर के खेल में 2 विकेट के नुकसान पर 235 रन का स्कोर खड़ा किया था, लेकिन इसके जवाब में गुजरात टाइटंस 20 ओवर में 9 विकेट पर 202 रन ही बना पाई। इस तरह गुजरात की टीम को अपने घरेलू मैदान पर हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इसके बावजूद गुजरात ने अपने घर में लखनऊ की हालत खराब कर दी।
टॉस हारकर लखनऊ सुपरजायंट्स की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 235 रन का स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में गुजरात के लिए शुभमन गिल और साई सुदर्शन ने धमाकेदार शुरुआत की। शानदार फॉर्म में चल रहे सुदर्शन का बल्ला इस मैच में ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाया और वह 16 गेंद में 21 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, इसके बाद शुभमन गिल ने 35 रनों की पारी खेलकर लखनऊ के खेमे को दहशत में ला दिया था। शुभमन को पारी में अच्छी शुरुआत मिली थी, लेकिन वह उसे बड़े स्कोर में नहीं बदल पाए।
शुभमन के बाद जोस बटलर भी शानदार लय में दिखे। ऐसा लगा कि बटलर अपनी तेज तर्रार बैटिंग से मैच को निकाल ले जाएंगे, लेकिन आकाश सिंह के खिलाफ वह 33 रन बनाकर बोल्ड हो गए। टॉप ऑर्डर के इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद शेफरन रदरफोर्ड और शाहरुख ने गुजरात के लिए मैच में रोमांच भर दिया। दोनों ने मिलकर एक समय लखनऊ को मुश्किल में डाल दिया था, लेकिन लखनऊ के लिए विलियम ओरुर्रक ने पूरी बाजी को पलट दी।
रदरफोर्ड और शाहरुख भी नहीं दिला पाए जीत
लखनऊ के खिलाफ इस मुकाबले में रदरफोर्ड और शाहरुख खान ने कमाल की बैटिंग की। टीम के लिए शाहरुख खान ने 29 गेंद में 57 रनों की पारी खेली। अपनी इस पारी में उन्होंने 5 चौके और 3 छक्के भी लगाए। इसके अलावा रदरफोर्ड ने 22 गेंद में 38 रनों का पारी खेली। इन दोनों के आउट होते ही गुजरात की पारी पूरी तरह से बिखर गई और मैच लखनऊ की झोली में चला गया।
वहीं गेंदबाजी की बात करें तो लखनऊ की तरफ से विलियम ओरुर्रक ने अपना कमाल दिखाया। उन्होंने अपने चार ओवर के स्पेल में 27 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा आवेश खान और आयुष बडोनी ने 2-2 विकेट लिए जबकि आकाश सिंह और शाहबाज अहमद के खाते में एक-एक विकेट आया।
लखनऊ के लिए मिचेल मार्श ने लगाया शतक
गुजरात के खिलाफ मुकाबले में लखनऊ के ओपनर बल्लेबाज मिचेल मार्श ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अपना पहला शतक लगाया। मिचेल मार्श की इस शतकीय पारी की मदद से लखऊ ने 2 विकेट पर 235 रन बनाए।मार्श ने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 64 गेंद में आठ छक्कों और 10 चौकों से 117 रन बनाए और पूरन (नाबाद 56 रन, 27 गेंद, पांच छक्के, चार चौके) के साथ दूसरे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी करके टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाया।
मार्श ने इससे पहले एडेन मार्करम (36) के साथ पहले विकेट के लिए 91 रन जोड़कर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। सुपर जाइंट्स की टीम पहले ही प्ले ऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है जबकि टाइटंस की टीम प्ले ऑफ में जगह सुनिश्चित कर चुकी है। टॉस हारकर बल्लेबाजी करने उतरे सुपर जाइंट्स को मार्करम और मार्श की सलामी जोड़ी ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों ने पावर प्ले में 53 रन जोड़े।
उबर को नोटिस, ओला और रैपिडो की बारी… सरकार का ‘टिप’ पर सख्त रुख, शुरू कर दी जांच
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उबर को नोटिस भेजा है। उबर पर आरोप है कि वह ग्राहकों को जल्दी सेवा के लिए पहले से टिप देने के लिए मजबूर कर रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इसे गलत बताया है। उन्होंने कहा कि सीसीपीए ओला और रैपिडो जैसे अन्य ऐप की भी जांच कर रही है। अगर वे भी ऐसा करते पाए गए तो उन्हें भी नोटिस भेजा जाएगा।
दरअसल, उबर पर यह आरोप है कि वह ग्राहकों को ‘एडवांस टिप‘ देने के लिए कह रही है। मतलब, सेवा मिलने से पहले ही टिप देने को कहा जा रहा है। प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘एडवांस टिप’ का ट्रेंड बहुत चिंताजनक है।’ उनका कहना है कि ग्राहकों को टिप देने के लिए मजबूर करना गलत है।
सीसीपीए के नोटिस पर उबर को देना है जवाब
मंत्री ने कहा है कि टिप सेवा पूरी होने के बाद दी जाती है। यह सेवा से खुश होने पर दी जाती है। इसे पहले नहीं दिया जा सकता। उन्होंने सीसीपीए को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया था।
जोशी ने बताया कि सीसीपीए ने उबर को नोटिस जारी कर इस बारे में जवाब मांगा है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों के साथ बातचीत में ईमानदारी और पारदर्शिता होनी चाहिए। जवाबदेही भी जरूरी है।
सीसीपीए अब उबर से जवाब मिलने का इंतजार कर रहा है। साथ ही, वह ओला और रैपिडो जैसे अन्य ऐप की भी जांच कर रहा है। अगर ये ऐप भी ग्राहकों को पहले से टिप देने के लिए कहते हैं तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी कंपनी ग्राहकों का गलत फायदा न उठाए।
‘एडवांस टिप’ देने के लिए मजबूर करना गलत
प्रल्हाद जोशी के अनुसार, ‘जल्दी सेवा के लिए यूजर्स को ‘एडवांस टिप’ देने के लिए मजबूर करना या उकसाना अनैतिक और शोषणकारी है। इस तरह की कार्रवाइयां अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आती हैं।’ इसका मतलब है कि ग्राहकों को टिप देने के लिए कहना गलत है। यह एक तरह का गलत तरीका है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि टिप सेवा पूरी होने के बाद दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, ‘टिप देना सेवा पूरी होने के बाद दी जाने वाली सराहना का प्रतीक है। इसे पहले नहीं दिया जा सकता।’
DMK सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में भारतीय दल रूस पहुंचा
भारत का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल 33 देशों की राजधानियों का दौरा कर रहा है। सात अलग-अलग दलों में 51 सांसदों के अलावा कई राजनयिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौकरशाह भी शामिल हैं। आतंकवाद पर पाकिस्तानी सरकार की नीतियों को बेनकाब करने के लिए इन प्रतिनिमंडलों को भेजा गया है। डीएमके सांसद कनिमोझी की अगुवाई में एक दल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचा, जबकि दो अन्य दल जापान और यूएई का दौरा कर चुके हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर पड़ोसी देश पाकिस्तान की सरकार और सेना की नीतियों को पूरी दुनिया के सामने उजागर करने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में देश की 59 हस्तियों को सात अलग-अलग सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में 33 देशों के दौरे पर भेजा जा रहा है। तमिलनाडु से निर्वाचित लोकसभा सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में एक दल को रूस समेत कुछ अन्य देशों के दौरे पर भेजा गया है। रूस की राजधानी मॉस्को पहुंचने के बाद कनिमोझी समेत दल में शामिल अन्य लोगों की तस्वीर सामने आई। मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल का स्वागत रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने किया। इस प्रतिनिधिमंडल में राजीव राय, कैप्टन बृजेश चौटा, श्री प्रेम चंद गुप्ता, डॉ. अशोक कुमार मित्तल, राजदूत मंजीव सिंह पुरी शामिल हैं
रूस पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल – फोटो : एएनआई
पाकिस्तान के आतंक की पोल खोलने और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में दुनिया को बताने के लिए सर्वदलीय सांसदों का एक दल रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच गया है। इस दल की अध्यक्षता डीएमके सांसद के. कनिमोझी कर रही है। बता दें कि, देश की 59 हस्तियों को सात अलग-अलग सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में 33 देशों के दौरे पर भेजा गया है।
रूस के पूर्व प्रधानमंत्री से भी मिलने का कार्यक्रम
अपने कार्यक्रम के बारे में कनिमोझी ने बताया, हम अंतरराष्ट्रीय मामलों की समिति के प्रथम उप-अध्यक्ष आंद्रे डेनिसन से मिलेंगे…हम रूस के उप-विदेश मंत्री से मिलेंगे…हम रूस के पूर्व प्रधानमंत्री मिखाइल येफिमोविच फ्राडकोव से भी मिलेंगे। हम थिंक टैंक और रूसी मीडिया के लोगों से भी मिलेंगे। हम बताएंगे कि भारत में क्या हुआ और आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें कैसे एक साथ आना है।
‘सिंदूर अब न्याय और शक्ति का पर्याय बन गया है’
यूएई की राजधानी अबू धाबी में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, ‘सिंदूर अब न्याय और शक्ति का पर्याय बन गया है। मैं इसके लिए हमारे सशस्त्र बलों को सलाम करती हूं। मैं पीएम मोदी के नेतृत्व की भी सराहना करती हूं।’
पूरी दुनिया के सामने बेनकाब होगा पाकिस्तान
सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे का मकसद बताते हुए डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद पर भारत के एकीकृत रुख को बताना और वैश्विक स्तर पर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का मुकाबला करना है। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य भारत के संदेश को विभिन्न देशों तक ले जाना, देश में जो हुआ है उसे समझाना और पूरी दुनिया को सच्चाई समझाना है। हमें इस समस्या का समाधान करना होगा और दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना होगा।’ भारत के रुख को पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट करने की जरूरत पर कनिमोझी ने कहा, ‘हमने आतंकवाद के कारण 26 लोगों की जान गंवाई। हम इस बारे में बात करना चाहते हैं कि आतंकवाद के कारण इस देश में क्या हुआ और क्या हो रहा है। हम इसे रोकना चाहते हैं। निहित स्वार्थ वाले लोग अलग-अलग कहानियां गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए सच बताया जाना चाहिए।
मॉस्को पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का कार्यक्रम
रूस पहुंचे भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल सांसद और राजनयिक कई अहम बैठकों और बातचीत के कार्यक्रमों में शरीक होंगे। मॉस्को में भारतीय दूतावास से जारी बयान के मुताबिक इस दौरे का मकसद पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के तहत की गई कार्रवाई और दहशतगर्दों के खिलाफ भारत सरकार के निरंतर प्रयासों से पूरी दुनिया को अवगत कराना है। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल आतंकवाद के खतरे के खिलाफ भारत के सैद्धांतिक और दृढ़ रुख को आगे बढ़ाने का प्रयास भी कर रहा है। मॉस्को पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य रूसी संघ की संघीय विधानसभा के फेडरेशन काउंसिल (उच्च सदन) और स्टेट ड्यूमा (निचले सदन) के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, विदेश मंत्रालय और थिंक टैंक और मीडिया में अन्य प्रमुख वार्ताकारों के साथ बातचीत भी करेंगे। मॉस्को पहुंचने से पहले इस दल ने रूस के ऊपर से लिए गए एरियल शॉट भी शेयर किए।
नीरव मोदी की हाईकोर्ट में 10वीं जमानत याचिका खारिज
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की 10वीं जमानत याचिका एक बार फिर ब्रिटिश हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। लंदन की रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जस्टिस माइकल फोर्डहैम ने कहा कि नीरव मोदी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आधार पर सबूत मौजूद हैं”, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनके खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध का मामला बनता है।
‘नीरव मोदी के रिहा होने पर फरार होने की आशंका ज्यादा’
इस दौरान जज फोर्डहैम ने कहा, ‘मैं दोहराना चाहूंगा कि ब्रिटेन की अदालतें पहले दो बार यह तय कर चुकी हैं कि नीरव मोदी के खिलाफ पेश किए गए सबूत प्रथम दृष्टया दोष दर्शाते हैं।’ अदालत ने यह भी माना कि अगर नीरव मोदी को रिहा किया गया तो उनके फरार होने की आशंका बहुत अधिक है।
क्या है पूरा मामला?
54 वर्षीय नीरव मोदी पर भारत में 13,800 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंक घोटाले का आरोप है। दिसंबर 2019 में भारत की अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था। यह घोटाला पंजाब नेशनल बैंक से जुड़ा है, जिसमें नीरव मोदी और उनके साथियों ने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग के जरिए विदेशी बैंकों से पैसा निकलवाया। ब्रिटेन हाई कोर्ट ने माना कि नीरव मोदी इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं और उनके खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध के आरोप हैं। अदालत ने यह भी कहा कि उन्होंने गवाहों को प्रभावित करने और सबूत नष्ट करने की कोशिश की थी।
नीरव मोदी पर क्या है आरोप?
नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने पीएनबी को गुमराह कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेशी बैंकों से पैसा निकलवाया। अदालत ने बताया कि इस घोटाले में लगभग 1,015.35 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 8,400 करोड़ रुपये) की हेराफेरी हुई। 2018 में नीरव मोदी ने एक मोबाइल फोन और दुबई में स्थित एक कंप्यूटर सर्वर के सबूत नष्ट किए। नीरव मोदी ने यूके में रहते हुए यह सब किया, जिससे यह साबित होता है कि वह जांच में सहयोग नहीं करना चाहते थे।
जमानत याचिका पर क्या हुआ?
यह नीरव मोदी की 10वीं बार जमानत की कोशिश थी, जिसे भारतीय एजेंसियों की कड़ी आपत्ति के बाद खारिज कर दिया गया। भारत की तरफ से सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने इस केस में यूके की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के जरिए कोर्ट में मजबूत पक्ष रखा। सीबीआई ने प्रेस रिलीज में बताया कि, ‘सीबीआई की मजबूत दलीलों और लंदन में मौजूद टीम की मदद से यह जमानत याचिका खारिज हुई।’ नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटिश अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था और तब से वे जेल में हैं। ब्रिटेन की अदालत पहले ही नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी है। दिसंबर 2022 में यूके सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। भारत में सीबीआई और ईडी ने उनके खिलाफ कई केस दर्ज किए हैं, जिनमें संपत्तियों की जब्ती भी शामिल है।
एलजी के अधिकारों को चुनौती देने वाले सात केस वापस लेगी दिल्ली सरकार
दिल्ली की भाजपा सरकार ने आम आदमी पार्टी के शासनकाल के दौरान उपराज्यपाल (एलजी) के अधिकारों को चुनौती देने वाले सात मामले वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इनमें यमुना सफाई से जुड़ा मामला भी शामिल है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की ओर से दायर आवेदन को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की ओर से दायर आवेदन को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि शीर्ष कोर्ट में लंबित सात मामलों को वापस लेने की मांग की गई है, जिनमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, यमुना सफाई और अधिनियमों व अध्यादेशों की वैधता के खिलाफ कई समितियों में उपराज्यपाल के अधिकार को चुनौती दी गई है।
भाटी ने कहा, इन मामलों के चलते अदालत को परेशान नहीं होना होगा। तत्कालीन आप सरकार की ओर से दायर मामले में शीर्ष अदालत ने जुलाई 2023 में एनजीटी के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उपराज्यपाल को यमुना नदी के कायाकल्प से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति का प्रमुख बनाने के लिए कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस लोकुर बोले- चुनावी बॉन्ड पर अदालत का फैसला अधूरा, SIT गठित..
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस (सेवानिवृत्त) मदन लोकुर ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन होना चाहिए था। जस्टिस लोकुर ‘इंडिया इंक्ड’ नामक एक नई किताब के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह किताब पत्रकार पूनम अग्रवाल ने लिखी है, जिसमें भारत में चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक चंदे से जुड़ी बातें बताई गई हैं। किताब में इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम का भी जिक्र है, जिसे फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पूरा सच नहीं खोला- लोकुर
जस्टिस लोकुर ने कहा, ‘फैसला तो आया, लेकिन वह अधूरा था। उन्होंने इसे असंवैधानिक तो बताया, लेकिन इससे आगे नहीं बढ़े। दो बातें जरूरी थीं- एक पारदर्शिता और दूसरा आगे की कार्रवाई। अगर किसी ने 1000 करोड़, 200-300 करोड़ दिए हैं, तो यह पैसा कहां से आया? यह तो सफेद धन माना जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों की तह तक जाने के लिए एसआईटी बनानी चाहिए थी ताकि सच्चाई सामने आए।
ADR संस्थापक ने कहा- ‘ऑपरेशन सफल, मरीज मर गया’
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के संस्थापक जगदीप छोकर, जो इस मामले में याचिकाकर्ताओं में शामिल थे, ने कहा कि यह स्कीम एक ‘सफल ऑपरेशन’ थी, लेकिन ‘मरीज मर गया।’ उन्होंने कहा, ‘इस स्कीम ने पारदर्शिता लाने का दावा किया, लेकिन असल में दानदाताओं की पहचान ही छुपाई गई।’
विपक्ष को नुकसान हुआ- कांग्रेस
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि यह स्कीम विपक्ष के लिए अनुचित थी। ‘सरकार को दानदाताओं की जानकारी मिलती थी, लेकिन विपक्ष को नहीं। हमने संसद में इस बिल का विरोध किया था’। हालांकि, छोकर ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने इस कानून को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख क्यों नहीं किया। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) का उदाहरण दिया, जो इस मामले में याचिकाकर्ता थी।
छोकर ने सवाल किया, ‘कांग्रेस चाहती तो दान चेक से ले सकती थी। उन्होंने अदालत का रुख क्यों नहीं किया?’। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का संसद में विरोध ‘सिर्फ औपचारिकता’ था और उसमें कोई जुनून नहीं दिखा। जगदीप छोकर ने कहा कि अब राजनीतिक दल चुनाव को जनप्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं मानते, बल्कि केवल सत्ता पाने का जरिया समझते हैं। ‘वे सिर्फ जीतना चाहते हैं’।
नागरिकों के लिए है चुनाव, पार्टियों के लिए नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा कि हमें चुनाव प्रक्रिया में और पारदर्शिता चाहिए। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में चुनाव पार्टियों के लिए नहीं, नागरिकों के लिए होता है। ताकि वे अपने प्रतिनिधि चुन सकें।’
चुनाव आयोग सीमाओं में बंधा होता है- अशोक लवासा
पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहा कि चुनाव आयोग हमेशा कानून की सीमाओं में रहकर काम करता है। ‘चुनाव आयोग तो नियमों के तहत काम करता है, लेकिन लोगों की अपेक्षाएं बहुत अधिक होती हैं’। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग चुनाव लड़ते हैं, वे जीतने की सोचते हैं, नियमों की नहीं।
ब्रिटेन में यौन अपराधियों का रासायनिक बंध्याकरण; जेलों में बढ़ती भीड़ पर नकेल की कवायद
ब्रिटेन सरकार यौन अपराधियों को केमिकल बंध्याकरण (केमिकल कास्ट्रेशन) करने जा रही है। इसका मकसद जेलों में भीड़ कम करना है। इस योजना के तहत यौन अपराधियों को ऐसी दवा जाएगी, जिससे उनकी यौन इच्छा में जबरदस्त कमी आएगी। इससे इस तरह के हजारों अपराधियों को उनकी सजा का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा जेल में काटने के बाद रिहा किया जा सकता है।
ब्रिटेन की न्याय मंत्री शबाना महमूद ने गुरुवार को गंभीर यौन अपराधियों के लिए अनिवार्य केमिकल कास्ट्रेशन (रासायनिक बंध्यता) लागू करने कहा, यह कदम जेलों में बढ़ती भीड़ को कम करने और यौन अपराधों पर नियंत्रण पाने के लिए कारगर साबित होगा। सरकार पहले से ही कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट चला रही है, और अब इसे दो क्षेत्रों के 20 जेल में लागू करने की तैयारी है। यह योजना एक स्वतंत्र सजा समीक्षा रिपोर्ट की सिफारिशों पर आधारित है, जिसमें 48 सुझाव दिए गए हैं। इस रिपोर्ट का नेतृत्व पूर्व न्याय मंत्री डेविड गॉक ने किया है।
जेलों की हालत गंभीर, सरकार की चिंता
ब्रिटेन की जेलें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं – करीब 90,000 कैदी इन जेलों में हैं। अपराध दर घटी है, लेकिन सख्त सजाओं और लंबी जेल अवधि के कारण जेलों पर दबाव बढ़ा है। शबाना महमूद ने कहा कि अगर समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो न्याय प्रणाली चरमरा सकती है। इससे न केवल अपराधियों को सजा मिलने में देरी होगी, बल्कि पुलिस भी गिरफ्तारी से पीछे हट सकती है।
शबाना महमूद ने कहा कि यह तरीका तब ही कारगर होता है जब इसके साथ-साथ मनोवैज्ञानिक इलाज भी दिया जाए, जिससे अपराध के पीछे की मानसिकता- जैसे किसी पर हक जताना- को भी बदला जा सके।
60% तक अपराध दोहराने की संभावना कम
एक स्वतंत्र समीक्षा में पाया गया कि यह तरीका कुछ मामलों में 60% तक अपराध दोहराने की संभावना को घटा सकता है। हालांकि यह हर तरह के यौन अपराधियों पर लागू नहीं होता, खासकर उन पर जिनका मकसद यौन संतुष्टि नहीं बल्कि नियंत्रण और शक्ति का प्रदर्शन होता है।
क्या है केमिकल कास्ट्रेशन?
यह एक चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसमें कुछ दवाओं के जरिए यौन इच्छा और विचारों को दबाया जाता है। यह पहले से जर्मनी, डेनमार्क और पोलैंड जैसे देशों में इस्तेमाल हो रहा है।
मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष ने जताया विरोध
कंजरवेटिव पार्टी के प्रवक्ता रॉबर्ट जेनरिक ने कहा कि छोटे अपराधों पर जेल की सज़ा खत्म करना चोरी, हमला और सेंधमारी जैसे अपराधों को ‘गैर-आपराधिक’ बना देगा। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग (कैदियों की निगरानी के लिए पहनाई जाने वाली डिवाइस) की तुलना ‘आग बुझाने वाले अलार्म’ से की – जो आग नहीं बुझा सकते। इसके जवाब में शबाना महमूद ने कहा कि वह पूर्व सरकार की 14 साल की लापरवाही की सफाई कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिटेन में विक्टोरियन युग के बाद अब तक की सबसे बड़ी जेल विस्तार योजना शुरू की गई है। यह योजना जहां एक ओर अपराधियों को सुधारने की दिशा में एक प्रयास है, वहीं कई मानवाधिकार संगठनों और निगरानी संस्थाओं ने इसकी नैतिकता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।