आज के बड़े इवेंट्स
- ईरान और इजरायल जंग जारी है। ऐसे में भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इजरायल से भारतीय लोग वापस लाए जाएंगे, रेस्क्यू के लिए केंद्र सरकार ऑपरेशन चलाने की तैयारी में है।
- गुजरात में ग्राम पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग आज, सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक मतदान होगा। वोटों की गिनती 25 जून को होगी।
- आज अमित शाह छत्तीसगढ़ राज्य के दौरे पर रहेंगे।
- आरएसएस का मदुरै में आज भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा
- दिल्ली में भारी बारिश के साथ आज या कल आ सकता है मॉनसून। मौसम विभाग के अनुसार आज बादल छाए रहेंगे।

आखिरकार अमेरिका भी इजरायल-ईरान जंग में कूद पड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाया है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी जेट अभियान पूरा करके ईरान के हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘हमने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर अपना बहुत सफल हमला पूरा कर लिया है, जिसमें फोर्डो, नतांज़ और एस्फाहान शामिल हैं। सभी फाइट जेट अब ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर हैं। फोर्डो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया है। हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई और सेना नहीं है, जो ऐसा कर सकती थी। अब शांति का समय है!’
इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ जंग में कूदा अमेरिका, 3 न्यूक्लियर साइट पर अटैक
आखिरकार अमेरिका भी इजरायल-ईरान जंग में कूद पड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर अपना बहुत सफल हमला पूरा कर लिया है, जिसमें फोर्डो, नतांज़ और एस्फाहान शामिल हैं
आखिरकार अमेरिका भी इजरायल-ईरान जंग में कूद पड़ा है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर इसका ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट को निशाना बनाया है। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी जेट अभियान पूरा करके ईरान के हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘हमने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर अपना बहुत सफल हमला पूरा कर लिया है, जिसमें फोर्डो, नतांज़ और इस्फाहान शामिल हैं। सभी फाइटर जेट अब ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर हैं। फोर्डो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया है। हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई और सेना नहीं है, जो ऐसा कर सकती थी। अब शांति का समय है!’
इजरायल से जंग के बीच बड़ा अपडेट… ईरान की फोर्डो साइट पर बरसने जा रहे अमेरिका के बंकर बस्टर बम?
इजरायल ने अमेरिका से ईरान में हमले करने का अनुरोध किया है। इस बीच अमेरिका के सबसे खतरनाक और सबसे महंगे बमवर्षक विमान बी-2 की गुआम में तैनाती ईरान-इजरायल संघर्ष में अमेरिकी भागीदारी की संभावना को बढ़ाती नजर आ रही। माना जा रहा कि अमेरिकी फौज अब ईरान पर हमले के बिल्कुल करीब है।
अमेरिका के मिसौरी में वाइटमैन एयर फोर्स बेस से B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स को गुआम के रणनीतिक एयरबेस पर तैनात किया है। यह तैनाती ईरान पर इजरायली हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच हुई है। शनिवार को छह अमेरिकी B-2 स्टील्थ बमवर्षक विमान मिसौरी से उड़ान भरकर पश्चिमी प्रशांत महासागर स्थित माइक्रोनेशिया के अमेरिकी द्वीप गुआम के एयरबेस पर पहुंचे। अमेरिका के सबसे खतरनाक और सबसे महंगे बमवर्षक विमानों (B-2) की गुआम में तैनाती ईरान-इजरायल संघर्ष में अमेरिकी भागीदारी की संभावना को बढ़ाती है। माना जा रहा है कि अमेरिकी फौज अब ईरान पर हमले के बिल्कुल करीब है।
B-2 विमानों के साथ चार बोइंग KC-46 पेगासस ईंधन भरने वाले विमान भी देखे गए हैं, जिनमें से दो ने प्रशांत महासागर के ऊपर बमवर्षकों को फ्यूल दिया। फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि बमवर्षकों को भारी मात्रा में ईंधन टैंक के बिना उड़ान भरने की अनुमति दी गई होगी, क्योंकि उनमें भारी मात्रा में पेलोड था, जो बंकर-बस्टर बम हो सकते हैं।
ईरान पर हमले की तैयारी!
ईरान की फोर्डो सुविधा जैसे भूमिगत बंकरों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम एकमात्र हथियार GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) है, जो 13.6 टन का विस्फोटक है। इसे आमतौर पर बंकर बस्टर बम कहा जाता है। यह बंकर-बस्टर 200 फीट से अधिक गहराई तक प्रवेश कर सकता है। हालांकि अभी तक इसका इस्तेमाल ऐसी साइट पर हमले के लिए नहीं किया गया है।
जमीन के नीचे 200 फीट तक मजबूत कंक्रीट को तोड़ने की क्षमताओं वाले जीबीयू-57 को केवल B-2 बॉम्बर पर ही तैनात किया जा सकता है। ऐसे में इन स्टील्थ लड़ाकू विमानों की गुआम में तैनाती से लगता है कि अमेरिका फोर्डो पर हमला कर सकता है। इस साइट के बारे में दावा है कि ईरान ने यहां सैकड़ों फीट नीचे परमाणु कार्यक्रम चला रखा है।
दुनिया का सबसे महंगा सैन्य विमान
B-2 स्पिरिट को नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने बनाया है। यह नियमित और परमाणु, दोनों हथियार ले जा सकता है। 6,000 समुद्री मील से अधिक की उड़ान रेंज और हवा में ईंधन भरने की क्षमता के साथ B-2 परमाणु स्थलों जैसे भारी किलेबंदी वाले लक्ष्यों को मार सकता है। यह GBU-57A/B सहित 40,000 पाउंड तक के बम ले जा सकता है। B-2 दूसरे बम, जैसे JDAMs, JSOWs और JASSMs भी ले जा सकता है, जो इसे विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए उपयोगी बनाता है।
यह लड़ाकू विमान अमेरिका की परमाणु रक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो 16 B83 परमाणु बमों तक ले जाने में सक्षम है। B-2 को रडार के चकमा देते हुए सीक्रेट, सुरक्षित और लचीले मिशनों के लिए खास तरह से डिजाइन किया गया है, जो इसे प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाता है। एक B-2 की कीमत करीब 2.1 अरब डॉलर है, जो इसे दुनिया के सबसे महंगे सैन्य विमानों में एक बनाती है।
योग ‘पॉज बटन’ है… विशाखापत्तनम में ऐसा क्यों बोले पीएम मोदी
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि योग एक पॉज बटन है, जिसकी मानवता को जरूरत है। यह जीवन में संतुलन बनाने के लिए भी जरूरी है। आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य ने योग दिवस पर 23 वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाए। उनमें दो गिनिस रेकॉर्ड हैं। पीएम मोदी के साथ योग करने के लिए 3.03 लाख लोग जमा हुए। इससे एक ही जगह पर सबसे ज्यादा लोगों के योग करने का वर्ल्ड रेकॉर्ड बना। 22,122 आदिवासी स्टूडेंट्स ने एक ही जगह 108 मिनट तक 108 सूर्य नमस्कार करके दूसरा गिनिस वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया।
अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशाखापत्तनम में योग किया। तो वहीं 1740 किलोमीटर दूर स्थित उनके जन्मस्थान वडनगर में एक अनूठा विश्वास रिकॉर्ड बना। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में 2,121 लोगों ने काेबरा पोज में योग किया। इस सामान्य भाषा में भुजंगासन कहते हैं। इतना ही नहीं इस विश्व रिकॉर्ड को शर्मिष्ठा तलाब पर बनाया गया। यह वहीं तलाब है जो पीएम नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ा है। बचपन में वह इसी तलाब से एक मगरमच्छ के बच्चे को पकड़कर घर ले आए थे। वडनगर में बने इस विश्व रिकॉर्ड को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। इससे पहले साल 2023 में गुजरात सबसे बड़ा योग पाठ हुआ था। तब रिकॉर्ड 147,952 प्रतिभागी शामिल हुए थे। तब भी यह कीर्तिमान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल क गई थी।
वडनगर में बना रिकॉर्ड
‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’ थीम के साथ मनाए गए आज के योग दिवस कार्यक्रम में वडनगर के प्रसिद्ध शर्मिष्ठा झील के तट पर एक साथ 2121 लोगों ने भुजंगासन आसन कर विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसके लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। वर्ष 2023 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सूरत में एक साथ 1.50 लाख लोगों के सामूहिक योगाभ्यास तथा वर्ष 2024 में 108 स्थानों पर एक साथ 50 हजार लोगों द्वारा सामूहिक सूर्य नमस्कार का विश्व कीर्तिमान बनाने के बाद मुख्यमंत्री ने आज वडनगर से एक बार फिर योग के वैश्विक मानचित्र पर विश्व कीर्तिमान की विजय पताका फहराने की गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए गुजरातवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमारी सनातन, अनंत, कालजयी योग संस्कृति को विश्वभर में मान्यता दिलाई है। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ पूरे विश्व को एक परिवार मानता है तथा योग एक ऐसा विज्ञान है जो हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है।
वडनगर के शमिष्ठा तलाब पर हुआ कोबरा पोज की मुद्रा में योग।।
मोटापा मुक्त गुजरात का संकल्प
मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 11वीं कड़ी तथा माननीय प्रधानमंत्री के सेवाकाल के 11 वर्ष पूरे होने को शुभ संयोग बताया। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि योग की यह प्राचीन परंपरा ‘मोटापा मुक्त गुजरात, स्वस्थ गुजरात’ का निर्माण करके विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण होगी। उधर पीएम मोदी ने PM मोदी ने विशाखापट्टनम में 3 लाख लोगों और 40 देशों के राजनयिक के साथ योग किया। PM ने कहा कि अभी नेवी के जहाज में भी योगा कार्यक्रम चल रहा है। चाहे ओपेरा हाउस की सीढ़ियां हों, या एवरेस्ट की चोटियां, या समुंदर का विस्तार हो एक ही संदेश आता है कि योग सभी का है और सभी के लिए है। पीएम मोदी ने कहा कि योग उस ‘पॉज बटन’ की तरह है जिसकी इंसानियत को जरूरत है- ताकि हम रुक सकें, सांस ले सकें, संतुलन बना सकें और फिर से खुद को पूर्ण महसूस कर सकें।
फिक्स किया गया चुनाव… राहुल के आरोपों पर चुनाव आयोग का तगड़ा जवाब
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि साफ दिख रहा है कि ‘मैच फिक्स’ है जो लोकतंत्र के लिए जहर है। वहीं चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर राहुल गांधी की सीसीटीवी फुटेज की मांग को खारिज दी और एक-एक करके जवाब दिया।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्षराहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने इलेक्ट्रॉनिक डेटा से संबंधित निर्वाचन आयोग के निर्देश का हवाला देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि साफ दिख रहा है कि “मैच फिक्स” है जो लोकतंत्र के लिए जहर है। वहीं चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी की सीसीटीवी फुटेज की मांग को खारिज दी और एक एक करके जवाब दिया।
चुनाव आयोग ने एक-एक कर दिया जवाब
राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव में धांधली का आरोप लगाने के बाद CCTV फुटेज की मांग की थी। आयोग ने कहा कि फुटेज देने से लोगों की निजता का उल्लंघन होगा।साथ ही, यह कानून के खिलाफ भी है। आयोग ने यह भी कहा कि फुटेज सिर्फ अंदरूनी निगरानी के लिए है। इसे सिर्फ अदालत के आदेश पर ही दिया जा सकता है। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया है।
चुनाव आयोग ने CCTV फुटेज देने से इनकार करने के कई कारण बताए हैं। पहला, इससे लोगों की निजता का हनन होगा। अगर फुटेज सार्वजनिक कर दिया जाता है, तो यह पता चल जाएगा कि किसने वोट दिया और किसने नहीं। इससे लोगों पर दबाव डाला जा सकता है। उनके साथ भेदभाव हो सकता है। असामाजिक तत्व उन्हें डरा भी सकते हैं। आयोग ने कहा कि “फुटेज साझा करने से, कोई भी समूह या व्यक्ति आसानी से मतदाताओं की पहचान कर सकता है। इससे वोट देने वाले और वोट न देने वाले, दोनों पर असामाजिक तत्वों द्वारा दबाव, भेदभाव और धमकी का खतरा बढ़ जाएगा।”
दूसरा, आयोग ने कहा कि ऐसा करना जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन होगा। चुनाव आयोग के अनुसार, “मतदान केंद्रों से CCTV फुटेज को सार्वजनिक करना, जनप्रतिनिधित्व कानून और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करेगा।”
तीसरा, आयोग ने यह भी कहा कि ये वीडियो सिर्फ अंदरूनी निगरानी के लिए हैं। इन्हें सिर्फ अदालत के आदेश पर ही दिया जा सकता है। पिछले महीने, चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे चुनाव प्रक्रिया के वेबकास्टिंग और वीडियो फुटेज को 45 दिनों के बाद नष्ट कर दें। ऐसा तभी किया जाए, जब परिणाम को अदालत में चुनौती न दी गई हो।
राज्य निर्वाचन अधिकारियों को क्या मिले थे निर्देश
आयोग ने अपने इलेक्ट्रॉनिक डेटा का उपयोग ‘दुर्भावनापूर्ण विमर्श’ गढ़ने के लिए किए जाने की आशंका के चलते अपने राज्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि 45 दिन में चुनाव को अदालत में चुनौती नहीं दी जाती तो वे सीसीटीवी कैमरा, वेबकास्टिंग और चुनाव प्रक्रिया के वीडियो फुटेज को नष्ट कर दें। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 30 मई को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि उसने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई रिकॉर्डिंग उपकरणों के साथ ही फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी और वेबकास्टिंग के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को रिकॉर्ड करने के निर्देश जारी किए हैं।
Rahul Gandhi
निर्वाचन आयोग पर आगबबूला हुए राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘वोटर लिस्ट? ‘मशीन रीडेबल फ़ॉर्मेट’ नहीं देंगे। सीसीटीवी फुटेज? कानून बदलकर छिपा दी। चुनाव की फोटो-वीडियो? अब 1 साल नहीं, 45 दिनों में ही मिटा देंगे।’ उन्होंने दावा किया कि जिससे जवाब चाहिए था, वही सबूत मिटा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, “साफ दिख रहा है – मैच फिक्स है। और फिक्स किया गया चुनाव, लोकतंत्र के लिए जहर है।”
विपक्ष ने की थी डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करने की मांग
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से 2024 के लोकसभा चुनाव और महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए डिजिटल वोटर लिस्ट जारी करने को भी कहा था। उन्होंने चुनाव आयोग से मतदान के दिन शाम 5 बजे के बाद महाराष्ट्र के मतदान केंद्रों से लिए गए सभी CCTV फुटेज जारी करने के लिए भी कहा था। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों द्वारा 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों से शाम 5 बजे के बाद के सीसीटीवी फुटेज जारी करने की मांग की थी। पिछले साल दिसंबर में, सरकार ने सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग फुटेज जैसे कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के साथ-साथ उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए सार्वजनिक निगरानी को रोकने के मकसद से चुनाव नियम में बदलाव किया था।
डॉन ब्रैडमैन का अद्भुत रिकॉर्ड चूर-चूर, यशस्वी जायसवाल ऐसा करने वाले टेस्ट में दुनिया के पहले बल्लेबाज बने
भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए बहुत अच्छा रहा। शुभमन गिल के नाबाद 127, यशस्वी जायसवाल के शानदार शतक और उप-कप्तान ऋषभ पंत की सधी हुई पारी की बदौलत भारत ने लीड्स में इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के पहले दिन स्टंप्स तक 359/3 का मजबूत स्कोर बनाया। जायसवाल ने 159 गेंदों में 101 रनों की पारी खेलकर शुरुआत की। इसमें 16 चौके और एक छक्का शामिल था। इस पारी के दौरान यशस्वी ने ऑस्ट्रेलिया के महानतम बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन का एक खास रिकॉर्ड चकनाचूर कर डाला।
यशस्वी जायसवाल ने चकनाचूर किया डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड
दरअसल, जायसवाल ने इंग्लैंड के खिलाफ 10 पारियों में 813 रन बनाए हैं। उनका औसत 90.33 है। उन्होंने डॉन ब्रैडमैन को पीछे छोड़ दिया है। ब्रैडमैन का इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट औसत 89.78 था। जायसवाल इंग्लैंड के खिलाफ 90 से ज्यादा औसत वाले पहले बल्लेबाज हैं।
https://1c25b61f2094488c65a6fb40f93de0f0.safeframe.googlesyndication.com/safeframe/1-0-45/html/container.html?n=0
मैच की बात करें तो इसके बाद गिल ने कप्तानी पारी खेली और नाबाद 127 रन बनाए। ऋषभ पंत ने भी उनका अच्छा साथ दिया और नाबाद 65 रन बनाए हैं। इस शानदार प्रदर्शन से भारत ने इंग्लैंड की धरती पर टेस्ट मैच के पहले दिन का अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया।
https://d-29587835423652495328.ampproject.net/2505300108000/frame.htmlhttps://d-29587835423652495328.ampproject.net/2505300108000/frame.html
जयदेव उनादकट (118 टेस्ट मैच का अंतराल: 2010-2022)यह नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे लंबे अंतराल का पर्याय बन गया है। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने अपना टेस्ट डेब्यू 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में किया था। इसके बाद, ऐसा लगा जैसे उनका टेस्ट करियर एक ही मैच का होकर रह गया। 12 साल तक वह टीम से बाहर रहे, लेकिन घरेलू क्रिकेट, खासकर रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे। सौराष्ट्र को रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाने में उनकी भूमिका अहम रही। उनकी मेहनत और धैर्य का फल तब मिला जब दिसंबर 2022 में बांग्लादेश दौरे पर उन्हें फिर से टेस्ट टीम में शामिल किया गया। 118 टेस्ट मैचों का यह अंतराल भारतीय क्रिकेट में एक रिकॉर्ड है, जो उनकी अटूट भावना और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।- दिनेश कार्तिक (87 टेस्ट मैच का अंतराल: 2010-2018)दिनेश कार्तिक, भारतीय क्रिकेट के ‘फिनिशर’ के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2004 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद, उन्होंने कुछ समय तक नियमित रूप से टीम में जगह बनाई। हालांकि, 2010 में बांग्लादेश के खिलाफ चटगांव टेस्ट के बाद, वह टीम से बाहर हो गए। महेंद्र सिंह धोनी और बाद में रिद्धिमान साहा जैसे विकेटकीपर-बल्लेबाजों की उपस्थिति ने उनकी वापसी को मुश्किल बना दिया। लेकिन कार्तिक ने हार नहीं मानी। 8 साल और 87 टेस्ट मैचों के लंबे अंतराल के बाद 2018 में इंग्लैंड दौरे पर उन्हें अचानक टेस्ट टीम में बुलाया गया। यह उनकी फिटनेस, अनुभव और भारतीय क्रिकेट के प्रति उनके जुनून का प्रमाण था।
पार्थिव पटेल (83 टेस्ट मैच का अंतराल: 2008-2016)पार्थिव पटेल, भारतीय क्रिकेट के सबसे कम उम्र के टेस्ट विकेटकीपर, ने 2002 में 17 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने कुछ समय तक टीम में अपनी जगह बनाई, लेकिन 2008 में श्रीलंका के खिलाफ कानपुर टेस्ट के बाद वह टीम से बाहर हो गए। धोनी के उदय के साथ, पार्थिव के लिए वापसी के रास्ते बंद से लगने लगे। लेकिन रणजी ट्रॉफी में लगातार रन बनाते हुए और अपनी विकेटकीपिंग में सुधार करते हुए, उन्होंने 8 साल और 83 टेस्ट मैचों के अंतराल के बाद 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ मोहाली टेस्ट में शानदार वापसी की। यह उनकी निरंतरता और दृढ़ता की कहानी है, जिसने उन्हें वापसी का मौका दिलाया। करुण नायर (77 टेस्ट मैच का अंतराल: 2017-2025)करुण नायर का नाम इस सूची में एक अलग तरह से शामिल है। करुण ने 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में तिहरा शतक लगाकर इतिहास रचा था। वह वीरेंद्र सहवाग के बाद भारत के दूसरे तिहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बने। इसके बावजूद 2017 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। यह खबर कई क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि एक तिहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी को इतने कम समय में बाहर कर दिया गया था। 77 टेस्ट मैचों का यह अंतराल और लंबे इंतजार का दौर खत्म हो गया।- अभिनव मुकुंद (56 टेस्ट मैच का अंतराल: 2011-2017)बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज अभिनव मुकुंद ने 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था। उन्हें कुछ मौके मिले, लेकिन वह उन्हें भुना नहीं पाए और टीम से बाहर हो गए। हालांकि, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में रन बनाना जारी रखा। 6 साल और 56 टेस्ट मैचों के अंतराल के बाद 2017 में उन्हें श्रीलंका दौरे पर फिर से टेस्ट टीम में शामिल किया गया। यह वापसी भी उनकी दृढ़ता और घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन का परिणाम थी, जिसने उन्हें एक और मौका दिया।
भारतीय बल्लेबाजों का लीड्स में जलवा
जायसवाल ने टी ब्रेक के बाद अपना विकेट गंवाया। उन्हें इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने आउट किया। स्टोक्स ने 2/43 विकेट लिए। भारत का 359 रनों का स्कोर इंग्लैंड में उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन है। इससे पहले 2022 में एजबेस्टन में 338/7 रन बनाए थे। इंग्लैंड में किसी भी टीम द्वारा पहले दिन सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दक्षिण अफ्रीका के नाम है। उन्होंने 2003 में ओवल में 362/4 रन बनाए थे।
गिल और पंत क्रीज पर जमे हुए हैं। भारत दूसरे दिन अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहेगा। वहीं, इंग्लैंड की टीम जल्दी विकेट लेकर वापसी करना चाहेगी। पहले दिन जायसवाल और केएल राहुल ने 91 रनों की साझेदारी की। गिल और पंत के बीच 138 रनों की साझेदारी हुई। गिल ने टेस्ट क्रिकेट में 2,000 रन पूरे किए। पंत ने 3,000 रन पूरे किए।नित्यानंद पाठक, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर और स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। उनका पत्रकारिता का सफर एक दशक पहले दैनिक भास्कर, नागपुर से शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने नव भारत, दैनिक भास्कर डिजिटल, और नेटवर्क-18 जैसे प्रमुख मीडिया हाउसेस के साथ काम किया। खेलों के प्रति उनकी गहरी रुचि है और वह चुनौतियों को स्वीकार करना पसंद करते हैं।
अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान परमाणु केंद्रों पर किया हमला; ट्रंप ने की पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन परमाणु संवर्धन केंद्रों पर हमला किया है। ट्रंप ने कहा कि इस तरह से हम सीधे-सीधे इस्राइल के उन प्रयासों में शामिल हो गए हैं, जिनके जरिए वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना चाहता है। इस बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष छिड़ सकता है।हर बीतते दिन के साथ मध्य पूर्व में इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और विकराल होता जा रहा है। अब अमेरिका भी ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल हो गया है और उसने तीन परमाणु स्थलों को निशाना बनाया है। यह कदम अमेरिका द्वारा गुआम में कई बी-2 स्टील्थ बॉम्बर जेट भेजने के बाद उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फ़हान परमाणु स्थलों पर हमलों की पुष्टि की है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर ईरान के तीन परमाणु स्थलों पर हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हमने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बहुत सफल हमला किया है, जिसमें फोर्डो, नतांज़ और इस्फ़हान शामिल हैं। सभी विमान अब ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर हैं। प्राथमिक स्थल फोर्डो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया। सभी विमान सुरक्षित रूप से अपने घर की ओर जा रहे हैं। हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई दूसरी सेना नहीं है जो ऐसा कर सकती थी। अब शांति का समय है! इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद।’
बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमान को गुआम भेजा
इस्राइल-ईरान युद्ध में शामिल होकर अमेरिका ने यह कदम तब उठाया है जब अमेरिका ने अपने सबसे घातक लड़ाकू विमान बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमान को गुआम के एंडरसन एयरबेस पर तैनाती के लिए भेजा है। कहा जा रहा है कि इस बमवर्षक का असली ठिकाना हिंद महासागर में स्थित द्वीप डिएगो गार्सिया एयरबेस है, जहां से अमेरिका ने इराक पर हमले किए थे।माना जा रहा है कि ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले फोर्डो परमाणु स्थल को तबाह करने के लिए इसे भेजा गया है। यह परमाणु स्थल जमीन में करीब 90 मीटर नीचे है, जिसे तबाह करने में बी-2 स्टील्थ बमवर्षक ही सक्षम है।
इस्राइल ईरान के खिलाफ लंबे अभियान के लिए तैयार
इस बीच, इस्राइल ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ “लंबे अभियान” के लिए तैयार है क्योंकि वह ईरानी परमाणु और सैन्य स्थलों पर हमले जारी रखे हुए है। वहीं, इस्राइली हमलों से ईरान में मरने वालों की संख्या अब 430 हो गई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में इस्राइली हमलों के कारण 3,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। वहीं इस्राइल में, अधिकारियों ने पिछले सप्ताह संघर्ष के बढ़ने के बाद से कम से कम 24 मौतों की सूचना दी है।
ईरान पहले ही दे चुका है अमेरिका को धमकी
यह हमला अमेरिका के लिए एक खतरनाक निर्णय है, क्योंकि ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि यदि अमेरिका इस्राइली हमले में शामिल हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह युद्ध में सक्रिय रूप से भागीदार होता तो यह सभी के लिए बहुत-बहुत खतरनाक होगा। साथ ही, ट्रंप के लिए भी यह एक खतरनाक निर्णय है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका को विदेशी संघर्षों से दूर रखने के वादे पर व्हाइट हाउस में एंट्री ली थी। अमेरिकी हस्तक्षेपवाद के मूल्य का उपहास उड़ाया था।
अब तक 1117 भारतीयों की ईरान से वतन वापसी, बोले- देश आकर जान में जान आई; सरकार का जताया आभार
ऑपरेशन सिंधु के तहत ईरान में फंसे अब तक 1117 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी हो चुकी है। ईरान से लौटे भारतीय नागरिकों ने सरकार का धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत वापस आकर अब उनकी जान में जान आई है। वहां के हालात बहुत खराब हैं। इसके अलावा, भारत ने श्रीलंका को भी आश्वासन दिया है कि वह ईरान में फंसे श्रीलंकाई नागरिकों को निकालने में उसकी मदद करेगा।
गौरतलब है कि इस्राइल और ईरान में पिछले कुछ दिनों से सैन्य टकराव बढ़ गया है। दोनों देश एक दूसरे पर बमबारी और मिसाइल हमला कर रहे हैं। सैन्य टकराव के चलते भारत सरकार ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु चलाया है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी कराई जा रही है। ईरान से लौटने के बाद भारतीय नागरिकों ने आपबीती सुनाई। सुरक्षित वतन वापस लौटे एक भारतीय नागरिक ने कहा, ‘मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। वहां मिसाइलें थीं। हमें वहां डर लग रहा था। हम वहां एक हफ्ते तक फंसे रहे।’
तेहरान में स्थिति गंभीर, अन्य स्थानों पर थोड़ी राहत
ईरान से भारत लौटे नवीद ने बताया कि वह कश्मीर से है और एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र है। नवीद ने कहा कि भारत लौटने पर वह अच्छा महसूस कर रहा है। उसने कहा कि वह भारत सरकार का शुक्रगुजार है, जिसने युद्ध के बीच में से उसे ईरान से निकाल लिया। वहीं, बिहार के सिवान के रहने वाले एक नागरिक ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से ईरान में था। उसने बताया कि तेहरान में स्थिति गंभीर है, जबकि अन्य स्थानों पर थोड़ी राहत है।
ईरान में हालात बहुत अच्छे नहीं: उश्ताक
ईरान से भारत लौटे मोमिन उश्ताक कहते हैं कि वह कश्मीर हैं। उन्होंने बताया कि ईरान में हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। वहीं, परवीन कहती हैं कि वह सुरक्षित वतन वापसी पर बहुत खुश हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से शुक्रिया अदा किया। परवीन ने कहा कि हमारी सरकार ने हमें वापस लाने में मदद की, इसके लिए वह शुक्रगुजार हैं।
भारत सरकार के प्रयास से संभव हुई वतन वापसी: इंदिरा
ऑपरेशन सिंधु के तहत भारत लौटीं इंदिरा कुमारी ने कहा कि भारत सरकार के प्रयासों के चलते हमारी वतन वापसी संभव हो सकी है। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की शुक्रगुजार हूं। वहीं, मोहम्मद अशफाक ने कहा, ‘अपने देश लौटकर मुझे अच्छा लग रहा है। मैं वहां के दूतावास का आभारी हूं, जिसने हमारी अच्छी देखभाल की। मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूं।’
ईरान में फंसे श्रीलंकाई लोगों को निकालने का भारत ने दिया आश्वासन
भारत ने शनिवार को श्रीलंका को भरोसा दिलाया कि वह ईरान में फंसे हुए श्रीलंकाई नागरिकों को भी वहां से सुरक्षित बाहर निकालने में मदद करेगा। ईरान इस समय इस्राइल के साथ तनाव में है, और वहां रह रहे कई विदेशी लोग फंसे हुए हैं। श्रीलंका ने भारत को इसके लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि यह दोनों देशों की मजबूत दोस्ती और सहयोग का उदाहरण है। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, ‘हम ईरान में फंसे श्रीलंकाई नागरिकों की मदद करने के लिए भारत सरकार का दिल से धन्यवाद करते हैं।’ इससे पहले, ईरान में भारतीय दूतावास ने कहा था कि वह नेपाल और श्रीलंका के निवासियों को भी निकालने में मदद करेगा, क्योंकि दोनों देशों ने भारत से यह अनुरोध किया था।
इस्राइल और ईरान में तमिलों की मदद के लिए दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित
तमिलनाडु सरकार ने इस्राइल और ईरान में फंसे तमिलों को सहायता प्रदान करने के लिए नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भारतीय दूतावास के माध्यम से उन देशों में रहने वाले तमिलों को हर संभव मदद पहुंचाने के लिए तत्काल कदम उठाएं। शनिवार को राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार सहायता प्रदान करने के लिए नई दिल्ली स्थित तमिलनाडु हाउस में 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष खोला गया है। इसका हेल्पलाइन नंबर: 011 24193300 और मोबाइल नंबर: 9289516712 और ईमेल: tnhouse@tn.gov.in, procofficetnh@gmail.com है। बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने पुनर्वास एवं अनिवासी तमिल कल्याण विभाग के अधिकारियों को दोनों देशों में रह रहे तमिलों के संपर्क में रहने का निर्देश दिया है, ताकि तमिल नागरिकों को कोई असुविधा न होने पाए।
US के बिना ईरान के सामने दो हफ्ते तक युद्ध में टिक पाएगा इस्राइल? तेहरान से लंबी लड़ाई आसान नहीं
इस्राइल और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि यदि दोनों देशों के बीच पूर्ण हवाई युद्ध छिड़ा रहता है, तो क्या अमेरिका की प्रत्यक्ष उपस्थिति के बिना इस्राइल आगामी 14 दिनों तक टिक पाएगा? सामरिक विशेषज्ञों ने यह विश्लेषण सामरिक शक्ति, सैन्य क्षमताओं, सहयोगी देशों, भौगोलिक स्थितियों, हथियार प्रणालियों और नागरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
पश्चिम एशिया की ज्वलंत होती लड़ाई में आने वाले दो सप्ताह बेहद निर्णायक हो सकते हैं। इस्राइल लगातार नौ दिनों से ईरान समर्थित ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हवाई हमले कर रहा है, लेकिन सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह मोर्चा अब जटिलता की ओर बढ़ रहा है। क्या इस्राइल इसी आक्रामक शैली में टिका रहेगा, या फिर अमेरिका की सीधी भूमिका के अभाव में उसे रणनीतिक विराम लेना पड़ेगा। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बदले हुए सुर कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं। इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस्राइल को थकान और रणनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
इस्राइली मिलिट्री इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख और आईएनएसएस (इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज) के वरिष्ठ विश्लेषक अमोस यादलिन का मानना है कि इस्राइल के पास रणनीतिक बढ़त है, लेकिन वह लंबी लड़ाई के लिए नहीं बना है। ईरान अपने प्रॉक्सी नेटवर्क के माध्यम से मोर्चा खींच रहा है, जिससे इस्राइल को हर दिन संसाधनों और सैन्य मनोबल की कीमत चुकानी पड़ रही है। यादलिन ने चेताया कि यदि अमेरिका निर्णायक सैन्य समर्थन नहीं देता तो इस्राइल को अगले 10–15 दिनों में ठहराव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान के लिए मददगार साबित होंगे छोटे सहयोगी
ईरान और अमेरिकी विदेश नीति के जानकार करीम सादजपोर के अनुसार, ईरान की रणनीति स्पष्ट है, वह प्रत्यक्ष युद्ध के साथ-साथ अपने छोटे सहयोगी (प्रॉक्सी ग्रुप्स) जैसे हिजबुल्लाह, हूती और इराकी मिलिशिया के जरिये इस्राइल को थकाए रखना चाहता है। जब तक अमेरिका खुलकर मैदान में नहीं उतरता, ईरान खुद को ‘शिकार’ के रूप में पेश करेगा, लेकिन हर जवाबी हमले की जिम्मेदारी प्रत्यक्ष तौर पर निभाता रहेगा। इस्राइली रक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस युद्ध में ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप गोपनीय रूप से पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं।
अमेरिका की भूमिका निर्णायक लेकिन अब तक सीमित
ईरान की परमाणु नीति और धार्मिक सत्ता की गहरी जानकारी रखने वाले काउंसिल आफ फॉरेन रिलेशंस के विश्लेषक रे तकीह ने कहा कि व्हाइट हाउस ईरान के साथ सीधे युद्ध में जाने से बचना चाहता है, लेकिन यदि अगले 2 हफ्तों में हिजबुल्लाह या ईरान समर्थित किसी तत्व द्वारा इस्राइली शहरों पर बड़ा हमला हुआ तो अमेरिका को हस्तक्षेप करना ही पड़ेगा। फिलहाल अमेरिका सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी देने तक ही सीमित है। हालांकि अमेरिका द्वारा सीधे दखल देने के बाद यह आग पश्चिम एशिया के साथ वैश्विक स्तर पर फैल सकती है।
ट्रंप बोले, ईरान हमसे बात करना चाहता है, यूरोप से नहीं
इस्राइल-ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए यूरोप की कूटनीतिक पहल को खारिज करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान यूरोपीय शक्तियों के बजाय वाशिंगटन के साथ सीधी वार्ता करना पसंद करता है। उन्होंने कहा, ईरान यूरोप से नहीं, हमसे बात करना चाहता है। उन्होंने मध्यस्थता के लिए यूरोप की क्षमता पर सवाल उठाया। मालूम हो कि डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों विभिन्न देशों के बीच मध्यस्थता कर शांतिदूत बनने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने डिएगो गार्सिया एयरबेस के लिए भेजे B-2 बमवर्षक
इस्राइल-ईरान युद्ध में अभी तक अमेरिका प्रत्यक्ष तौर पर नहीं कूदा है, लेकिन बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस बीच, अमेरिका ने अपने सबसे घातक लड़ाकू विमान बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमान को गुआम के एंडरसन एयरबेस पर तैनाती के लिए भेजा है। कहा जा रहा है कि इस बमवर्षक का असली ठिकाना हिंद महासागर में स्थित द्वीप डिएगो गार्सिया एयरबेस है, जहां से अमेरिका ने इराक पर हमले किए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, छह बी-2 स्टील्थ बमवर्षक भेजे गए हैं। इनके साथ केसी-135 ईंधन भरने वाले टैंकर विमान भी हैं जो हवा में ही बमवर्षक में ईंधन भरेंगे। बी-2 स्टील्थ बमवर्षक को अमेरिका के मिसौरी स्थित व्हाइटमैन एयरबेस से भेजना इसलिए अहम है क्योंकि यह 30,000 पाउंड (लगभग14,000 किलोग्राम) के जीबीयू-57 बंकर बस्टर बम को जे जाने में सक्षम है। यह तैनाती सामान्य तैनाती से अलग मानी जा रही है। माना जा रहा है कि ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले फोर्डो परमाणु स्थल को तबाह करने के लिए इसे भेजा गया है। यह परमाणु स्थल जमीन में करीब 90 मीटर नीचे है, जिसे तबाह करने में बी-2 स्टील्थ बमवर्षक ही सक्षम है।
डिएगो गार्सिया से पश्चिम एशिया पहुंचना आसान
डिएगो गार्सिया ब्रिटेन का द्वीप है जिसे अमेरिका लीज पर इस्तेमाल करता है। हिंद महासागर में होने की वजह से यहां से पश्चिम एशिया तक पहुंचने के लिए अमेरिका को किसी दूसरे देश के हवाईक्षेत्र से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 1991 के खाड़ी युद्ध और 2001 के अफगानिस्तान ऑपरेशन में भी यहीं से अमेरिकी विमानों हमले किए थे। अगर बी-2 बमवर्षक को यहां तैनात किया जाता है तो इसका मतलब होगा कि ईरान पर अमेरिका हमला जल्द शुरू होने वाला है। ट्रंप प्रशासन के करीबी सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान ने आगे इस्राइल के नागरिक इलाकों पर हमला किया तो हमला तय है।
हूती विद्रोहियों ने दिया अमेरिकी जहाजों पर हमले की चेतावनी
इस बीच, ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमले की चेतवानी दी है। हूती विद्रोहियों ने चेताया है कि अगर अमेरिका इस्राइल के पक्ष में ईरान के साथ युद्ध में शामिल हुआ तो वह लाल सागर से गुजरने वाले अमेरिकी जहाजों पर हमले करेगा।
अंबुवासी महायोग: आज से तीन दिनों के लिए मां कामाख्या के कपाट बंद
असम के गुवाहाटी शहर के पास नीलाचल पर्वत पर कामाख्या धाम में अंबुवासी महायोग-2025 की तैयारियां पूरी हो गई हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस बार भी इस उत्सव में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे। गुवाहाटी पुलिस आयुक्त पार्थ सारथी महंत के मुताबिक, इस हिसाब से प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।हर वर्ष देश और दुनिया से तंत्र-मंत्र साधक अंबुवासी मेले में आते हैं। मां तीन दिनों के लिए रजस्वला हो जाती हैं, इसलिए इस दौरान मां के दर्शन नहीं होते। मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। यह स्त्री की सृजनात्मक शक्ति, स्त्रीत्व, उर्वरता की पवित्रता का उत्सव है। इस दौरान किसान खेतों की जुताई नहीं करते।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, 22 से 26 जून तक चलने वाले इस महायोग के दौरान 22 जून को दोपहर 2:56 बजे 27 सेकेंड से कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद हो जाएंगे। इसके बाद 26 जून सुबह देवी स्नान और दैनिक अनुष्ठानों के बाद तीर्थयात्रियों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए जाएंगे। वहीं, 22 से 27 जून तक वीआईपी दर्शन के लिए कोई पास जारी नहीं किया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाला यह उत्सव देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का प्रतीक है। मान्यता के अनुसार, तंत्र साधना की पूर्णाहुति अंबुवासी योग के दौरान ही होती है। इसलिए नीलांचल पहाड़ी की कई गुफाओं में तंत्र साधक इस दौरान कठिन तपस्या कर तंत्र साधना की अंतिम क्रिया को संपन्न करते हैं।
स्त्रीत्व, उर्वरता और सृजन का उत्सव
देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है कामख्या देवी शक्तिपीठ। मान्यता है कि जब सुदर्शन चक्र से कटकर देवी सती के अंग भूमि पर गिरे थे, तब योनी भाग यहां गिरा था। यही वजह है कि इसे कामक्षेत्र, कामरूप यानी कामदेव का क्षेत्र भी कहा जाता है। जिस स्थान पर देवी सती का योनी भाग गिरा था उस स्थान (नीलाचल पहाड़, जो गुवाहाटी से करीब 14 किलोमीटर दीर है) पर विश्व प्रसिद्ध कामख्या देवी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को तंत्र साधना का प्रमुख स्थान माना जाता है। हर वर्ष देश और दुनिया से तंत्र-मंत्र साधक अंबुवासी मेले में आते हैं। मां तीन दिनों के लिए रजस्वला हो जाती हैं, इसलिए इस दौरान मां के दर्शन नहीं होते। मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। यह स्त्री की सृजनात्मक शक्ति, स्त्रीत्व, उर्वरता की पवित्रता का उत्सव है।
अंबुवासी मेले का नाम इसलिए पड़ा
भक्तों को प्रसाद के रूप में कपड़ा दिया जाता है। इसे अंबुवासी कहते हैं। इसी कारण इस मेले का नाम अंबुवासी मेला कहा जाता है। मान्यता के मुताबिक मां (देवी) के रजस्वला होने के दौरान प्रतिमा के आस-पास सफेद कपड़ा बिछा दिया जाता है। तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल होता है। कहा जाता है कि जिस भी भक्त को यह वस्त्र मिलता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाता हैं। हर साल जून के महीने में यह मेला लगता है।
नहीं जोते जाएंगे खेत, नहीं होगी पूजा
मां कामाख्या धाम मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही किसानी से संबंधित सारे काम बंद हो जाते हैं। चार दिन तक हल नहीं चलेंगे, खेत जोते नहीं जाएंगे। बगीचे में किसी भी तरह के फल या सब्जी तोड़े नहीं जाएंगे। बाजार में वही सब्जी आएंगी, जो पहसे तोड़ी गई है। इस दौरान घरों और मंदिरों में पूजा नहीं की जाएगी। कोई भी धार्मिक कार्य नहीं होंगे, केवल तपस्या की जा सकती है।
उमानंद के दर्शन के बिना दर्शन अधूरी
देवी के मंदिर के पास ही ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच उमानंद भैरव का भव्य मंदिर है। मान्यता है कि इनके दर्शन के बिना कामाख्या देवी की यात्रा अधूरी मानी जाती है। इस मंदिर की प्रसिद्ध इसकी वास्तुशिल्प के कारण भी है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर को किसी इनसान ने नहीं बल्कि यह गर्भ से निकला है।
US ने किया ईरान के तीन परमाणु केंद्रों पर हमला; तेहरान ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर गया है। संघर्ष विराम के लिए स्विट्जरलैंड के जिनेवा में ईरान और यूरोपीय देशों के बीच हुई बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला है। इसके बाद से दोनों तरफ से हमले तेज हो गए हैं। इस्राइल ने शनिवार को ईरान के तीन और वरिष्ठ कमांडरों को मार गिराने का दावा किया। उसने ईरान के परमाणु अनुसंधान केंद्र और मिसाइल निर्माण संयंत्र को भी निशाना बनाया। ईरान की तरफ से भी इस्राइल में कई ठिकानों पर मिसाइलें दागी गईं।
अमेरिका ने ईरान के 3 परमाणु स्थलों पर हमला किया
ईरान इस्राइल के बीच जारी जंग में अब अमेरिका भी खुलकर शामिल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन परमाणु संवर्धन केंद्रों पर हमला किया है। ट्रंप ने कहा कि इस तरह से हम सीधे-सीधे इस्राइल के उन प्रयासों में शामिल हो गए हैं, जिनके जरिए वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना चाहता है। इस बीच ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है जिससे व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष छिड़ सकता है।
सऊदी अरब ने ईरान पर हुए इस्राइली हमले की निंदा की
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ईरान के खिलाफ इस्राइली आक्रामकता की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह हमला ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा को कमजोर करता है, और यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे इलाके की शांति और स्थिरता को खतरा है। फरहान ने यह बात शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को तुर्की के इस्तांबुल शहर में हुई इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की एक बैठक में कही। उन्होंने कहा कि अब और लड़ाई बंद होनी चाहिए। तनाव नहीं बढ़ना चाहिए, और ईरान व बाकी दुनिया के बीच बातचीत दोबारा शुरू होनी चाहिए।
इस्राइल से अपने नागरिकों की घर वापसी के लिए अमेरिका ने शुरू कीं उड़ान सेवाएं
अमेरिका ने इस्राइल से अपने नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी के लिए उड़ान सेवाएं शुरू कर दी हैं। इस्राइल में अमेरिकी राजदूत राजदूत माइक हुकाबी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, चूंकि इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। इसलिए अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए उड़ानें शुरू की जा रही हैं। उन्होंने कहा ऐसे अमेरिकी नागरिक जो वापस आना चाहते हैं उनके लिए एक ऑनलाइन फॉर्म जारी किया गया है। उस पर विवरण देकर उड़ान प्रस्थान की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। हुकाबी ने साथ ही कहा कि अमेरिका ने ईरान में अपने नागरिकों से भी कहा है कि जो लोग वापस आना चाहते हैं वे आ सकते हैं। इसके अलावा अमेरिकी नागरिक अजरबैजान, आर्मेनिया या तुर्की भी जा सकते हैं।
ट्रंप बोले, ईरान हमसे बात करना चाहता है, यूरोप से नहीं
इस्राइल-ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए यूरोप की तरफ से शुरू की गई कूटनीतिक पहल को खारिज करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान यूरोपीय शक्तियों के साथ बातचीत करने के बजाय वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत करना पसंद करता है। उन्होंने कहा कि ईरान यूरोप से नहीं, हमसे बात करना चाहता है। उन्होंने मध्यस्थता करने के यूरोप की क्षमता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल युद्ध में अच्छा कर रहा है और ईरान के लिए उसे रोकना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि, बातचीत के मुद्दे पर ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक इस्राइल की तरफ से हमला रुकता नहीं है, तब तक वह अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई बात नहीं करेगा।
अमेरिकी सैन्य भागीदारी पर ईरान ने चेताया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघाची ने इस्राइल के साथ युद्ध में अमेरिकी सैन्य भागीदारी के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि युद्ध में अमेरिका का शामिल होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा और यह सभी के लिए बहुत खतरनाक होगा। अरघाची ने इस्तांबुल में इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक से इतर बातचीत में यह चेतावनी दी।
परमाणु ठिकाने पर हमला
इस्राइल ने ईरान के इस्फहान के पास परमाणु अनुसंधान केंद्र पर हमला किया। यहां से धुआं निकलता देखा गया है। इस्राइली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हमले का लक्ष्य दो सेंट्रीफ्यूज उत्पादन स्थल थे। इस्फहान प्रांत के सुरक्षा मामलों के उप-गवर्नर अकबर सालेही ने परमाणु इकाई पर इस्राइली हमले की पुष्टि की और कहा कि इसमें प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचा है, लेकिन कोई मानवीय क्षति नहीं हुई है। ईरान ने भी इस्राइल पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए, लेकिन नुकसान के बारे में तत्काल कोई खबर नहीं मिली सकी। इस्राइली अधिकारियों ने इसे छोटा हमला बताया और कहा कि इसे इस्राइली वायु रक्षा प्रणाली ने बहुत हद तक नाकाम कर दिया।.
बंकर में छिप कर गुजारा कर रहे खामनेई, तीन संभावित उत्तराधिकारियों को किया नामित
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई बंकर में छिपकर गुजारा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी हत्या की स्थिति में अपने तीन उत्तराधिकारियों को नामित कर दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने तीन वरिष्ठ मौलवियों को नामित किया है, जो उनकी जगह ले सकते हैं। इनमें अलीरेजा अराफी अली असगर हेजाजी, हासिम हुसैनी बुशहरी, अली अकबर वेलायती के नाम शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई इस समय एक गहरे बंकर में छिपे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को अपने आसपास के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी उनकी लोकेशन को ट्रैक न कर सके। यह जानकारी ईरान के तीन अधिकारियों ने दी, जो उनकी इमरजेंसी युद्ध योजना से जुड़े हैं।
खामेनेई का बेटा उत्तराधिकारी के तीन नामों में शामिल नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई का बेटा मोजतबा, जो एक मौलवी और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के करीबी भी हैं। अब तीन नामों में शामिल नहीं हैं, जबकि पहले उन्हें खामेनेई का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। ईरान के पूर्व रूढ़ीवादी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी 2024 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे जाने से पहले सबसे आगे चलने वाला उम्मीदवार माना जा रहा था।
अस्पताल पर हमला करने के लिए खामेनेई को जिम्मेदार ठहराया जाएगा: कैट्ज
शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को इस्राइल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता को अब और अस्तित्व में नहीं रहने दिया जा सकता। कैट्ज का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने इस्राइल के एक अस्पताल पर मिसाइल हमला किया। कैट्ज ने कहा कि अस्पताल पर हमले के लिए खामेनेई को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
IDF ईरानी नेता को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा
उन्होंने कहा, ‘खामेनेई एक बंकर में छिपा हुआ है और इस्राइल के अस्पतालों और घरों पर मिसाइलें चला रहा है। ये युद्ध अपराध हैं और उसे इसके लिए सजा मिलनी चाहिए।’ उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इस्राइल रक्षा बल (IDF) ईरानी नेता को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
इस्राइल समर्थित समूह की ट्रंप प्रशासन से गुहार, गाजा में मदद पहुंचाने के लिए दें 30 मिलियन डॉलर
इस्राइल समर्थित समूह गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन ने गाजा में राहत सामग्री बांटने के लिए अमेरिका से करीब 30 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। यह मदद मांगने वाला आवेदन ट्रंप प्रशासन को दिया गया है। इस जानकारी की पुष्टि तीन अमेरिकी अधिकारियों और संगठन के दस्तावेज़ों से हुई है।
इस्राइल समर्थित समूह गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन ने गाजा में राहत सामग्री बांटने के लिए अमेरिका से गुहार लगाई है। फाउंडेशन ने अमेरिका से करीब 30 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। इसके लिए समूह ने अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) को वित्तपोषण आवेदन दिया है।
गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन के आवेदन में पहली बार इसके काम और कुछ वित्तीय जानकारी दी गई है। फाउंडेशन का कहना है कि मई के आखिर से उसने दक्षिणी गाजा में लाखों फलस्तीनियों को भोजन उपलब्ध कराया है, क्योंकि इस्राइल की नाकाबंदी और सैन्य अभियान ने गाजा में भुखमरी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। लेकिन इसमें बड़ी परेशानी यह है कि जब लोग राहत सामग्री लेने पहुंचते हैं, तो उन पर लगभग रोज गोलियां चलती हैं और कई लोग मारे जा चुके हैं। कुछ बड़े मानवीय संगठनों ने फाउंडेशन पर यह भी आरोप लगाया है कि वह इस्राइल के साथ मिलकर हमास के खिलाफ काम कर रहा है, जो मानवीय नियमों के खिलाफ है।
USAID को दिया वित्तपोषण आवेदन
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, फाउंडेशन ने वित्तपोषण का आवेदन अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) को प्रस्तुत किया था। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारियों ने कहा कि यह एजेंसी अब अमेरिकी विदेश विभाग में मिलाई जा रही है, इसलिए यह उसके आखिरी फैसलों में से एक हो सकता है। दो अधिकारियों ने बताया कि शायद अमेरिका इस फंड को मंजूरी देने जा रहा है, लेकिन उससे पहले जांच और समीक्षा की जरूरत होती है।
फाउंडेशन ने एक पत्र भी भेजा
फाउंडेशन की तरफ से बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को एक पत्र भी भेजा गया, जिसमें गाजा मानवतावादी फाउंडेशन के सचिव लोइक हेंडरसन ने कहा कि वे अमेरिका के साथ साझेदारी करके गाजा में ‘जान बचाने वाले अभियान’ जारी रखना चाहते हैं। हालांकि, न तो विदेश विभाग और न ही हेंडरसन ने शनिवार को टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब दिया।
इस्राइल का आरोप- संयुक्त राष्ट्र की मदद हमास के हाथों में चली जाती है
इस्राइल का कहना है कि यह फाउंडेशन एक नई राहत प्रणाली की शुरुआत है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कम होगी। इस्राइल का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र की मदद हमास के हाथ में चली जाती है। इस्राइल की योजना यह है कि गाजा की 20 लाख आबादी को दक्षिण में केंद्रित किया जाए, ताकि बाकी हिस्सों में वह हमास के खिलाफ आसानी से लड़ सके। सहायता कार्यकर्ता डर रहे हैं कि यह योजना धीरे-धीरे गाजा से फलस्तीनियों को हटाने की कोशिश है, जिसे जबरन विस्थापन माना जा सकता है।
फाउंडेशन के पास अनुभव और पारदर्शिता की कमी: संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र और कई बड़े एनजीओ का कहना है कि इस फाउंडेशन के पास न अनुभव है, न पारदर्शिता, और न ही युद्ध जैसी स्थिति में तटस्थता (निष्पक्षता) बनाए रखने की समझ। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि जब से यह संगठन काम कर रहा है, राहत सामग्री पाने की कोशिश करते समय कई सौ लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस्राइली सैनिक भारी गोलीबारी करते हैं ताकि भीड़ को रोका जा सके। हालांकि, इस्राइली सेना का कहना है कि वे सीधे नागरिकों पर गोली नहीं चलाते, बल्कि चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई जाती हैं या उन लोगों पर जो संदेहास्पद लगते हैं और सैनिकों के बहुत पास आ जाते हैं।
फाउंडेशन को अभी तक किसने पैसे दिए, यह स्पष्ट नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस फाउंडेशन को अभी तक किसने पैसे दिए हैं। अमेरिका ने पहले कहा था कि वह इसे कोई पैसा नहीं दे रहा है। फाउंडेशन ने कहा कि मई में उसे ‘कुछ सरकारी स्रोतों’ से करीब 119 मिलियन डॉलर मिले, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि वो सरकारें कौन-सी थीं। जून के लिए उन्हें उन्हीं स्रोतों से 38 मिलियन डॉलर की उम्मीद है, और अमेरिका से 30 मिलियन डॉलर की उम्मीद है। आवेदन में निजी परोपकार या किसी अन्य स्रोत से कोई फंडिंग नहीं दिखाई गई है।
रूस के ड्रोन हमलों का ऐसे मुकाबला करेगा यूक्रेन; तैयार कर रहा इंटरसेप्टर ड्रोन
रूस यूक्रेन के बीच जारी जंग खत्म होती नहीं दिख रही है। हालांकि दोनों शांति समझौते के लिए दोनों पक्षों से वार्ता जारी है। इस बीच, सामने आया है कि यूक्रेन अपने शहरों पर हो रहे रूसी ड्रोन हमलों को नाकाम करने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन के तेजी से विकास पर काम कर रहा है। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी अधिकारियों ने हाल के दिनों में रूसी हमलों में ईरानी डिजाइन वाले शाहेड ड्रोनों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी है।
जेलेंस्की ने वीडियो संबोधन में कहा, हम इंटरसेप्टर ड्रोन पर भी अलग से काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य शाहेड ड्रोन के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाना है। हमारे कई घरेलू उद्योग कई प्रकार के ड्रोन बना रहे हैं। इंटरसेप्टर ड्रोन के उत्पादन में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि शत्रु ज्यादा से ज्यादा शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में हम अलग तकनीक की तलाश कर रहे हैं।
इससे पहले वायु सेना के प्रवक्ता यूरी इहनात ने इस हफ्ते यूक्रेनी मीडिया को बताया था कि ड्रोन वायु रक्षा हमें अपने साधनों का तर्कसंगत तरीके से उपयोग करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा, हम दुश्मन के ड्रोनों का पीछा करने के लिए लगातार दुर्लभ वायु और विमान भेदी निर्दिष्ट मिसाइलों और विमान का उपयोग नहीं कर सकते। बता दें कि रूसी सेना एक ही रात में 400 से अधिक ड्रोन हमले कर रही है। इस हफ्ते कीव पर संयुक्त हमले में 440 ड्रोन व 32 मिसाइलें दागी गई। इन हमलों में अपार्टमेंट का एक हिस्सा ढह गया था, जिसमें 28 लोग मारे गए थे।
रूस ने अपने ही 20 मृत सिपाहियों के शव यूक्रेन को सौंप दिए
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि हालिया अदला-बदली के दौरान रूस ने अपने ही 20 मृत सिपाहियों के शव यूक्रेन को सौंप दिए। जेलेंस्की ने घायल व मृत सैनिकों की अदला-बदली में रूस पर लापरवाही व अव्यवस्था का आरोप लगाया है।