अग्नि आलोक

*18 जून की ताजा खबर:’ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं…’,बारिश से दिल्ली हुई बेहाल,भारतीय वायु सेना की बढ़ेगी ताकत,बिहार के छह जिलों में वज्रपात में 12 लोगों की जान गई,’अमेरिका को पता है कहां छिपे हैं खामनेई,ईरान के आसमान पर अमेरिकी कंट्रोल, गैंगस्टर ने तिहाड़ जेल से भेजा स्पर्म*

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आज के बड़े इवेंट

ट्रंप की धमकी, बोले- ईरानी आसमान पर हमारा कंट्रोल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका को पता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई कहां छिपे हैं, और ईरान के ऊपर आसमान पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करना होगा। ट्रंप ने चेतावनी में कहा है कि हम जानते हैं कि सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई कहां छिपे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अमेरिका खामेनेई को मारने नहीं जा रहा है, लेकिन कहा कि हम नहीं चाहते कि मिसाइलें नागरिकों या अमेरिकी सैनिकों पर दागी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अमेरिका के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि अब ईरान के ऊपर आसमान पर हमारा पूरा और संपूर्ण नियंत्रण है। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी हथियारों की तारीफ भी की।

ट्रंप ने खामेनेई को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक के बाद एक तीन पोस्ट किए। इनमें से एक में उन्होंने लिखा, “बिना शर्त आत्मसमर्पण।” उन्होंने दूसरे पोस्ट में लिखा, हम ठीक से जानते हैं कि तथाकथित “सर्वोच्च नेता” कहां छिपा है। वह एक आसान लक्ष्य है, लेकिन वहां सुरक्षित है – हम उसे मार नहीं सकते (मार नहीं सकते!), कम से कम अभी तो नहीं। लेकिन हम नहीं चाहते कि मिसाइलें नागरिकों या अमेरिकी सैनिकों पर दागी जाएं। हमारा धैर्य खत्म हो रहा है। इस मामले पर आपका ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”

उन्होंने एक और पोस्ट में लिखा, “अब ईरान के ऊपर आसमान पर हमारा पूरा और संपूर्ण नियंत्रण है। ईरान के पास अच्छे स्काई ट्रैकर और अन्य रक्षात्मक उपकरण थे, और बहुत सारे थे, लेकिन यह अमेरिका द्वारा निर्मित, कल्पना की गई और निर्मित “सामान” की तुलना में नहीं है। कोई भी इसे अमेरिका से बेहतर नहीं कर सकता।”

इससे पहले ट्रंप ने ईरान की राजधानी तेहरान के निवासियों को शहर खाली करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने अपने संदेश में कहा था,”सभी को तेहरान तत्काल खाली कर देना चाहिए।” बाद में ट्रंप ने इस बात से इनकार किया कि वह संघर्ष विराम पर काम करने के लिए जल्दबाजी में जी7 शिखर सम्मेलन छोड़कर स्वदेश लौटे हैं। वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं संघर्ष विराम की तरफ नहीं देख रहा हूं। हम उससे भी बेहतर चीज की तरफ देख रहे हैं।” हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी।

 अमेरिका टैरिफ लगाए या हटाए, चीन पर फर्क नहीं

चीन एक बार फिर दुनिया को चौंका रहा है। सस्ते सामानों से इंडोनेशिया, जर्मनी और ब्राजील जैसे देश प्रभावित हैं। अमेरिका के टैरिफ के बाद चीन दूसरे देशों में सामान भेज रहा है। इससे व्यापार अधिशेष बढ़ गया है। कई देशों में मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है और नौकरियां जा रही हैं।

 आजकल दुनिया चीन के एक और ‘शॉक’ का सामना कर रही है। यह शॉक इंडोनेशिया, जर्मनी और ब्राजील जैसे देशों तक फैल रहा है। पहले चीन ने सस्ते सामान बनाकर अमेरिका को चौंका दिया था। अब जब अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लगाए हैं तो चीन अपने सामान को दूसरे देशों में भेज रहा है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में बदलाव आ रहा है। दुनिया के साथ चीन का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) लगभग 500 अरब डॉलर है। यह पिछले साल से 40% ज्यादा है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध चल रहा है। ऐसे में बाकी दुनिया को एक और बड़े ‘चीन शॉक’ के लिए तैयार रहना होगा। भारत भी इससे अछूता नहीं है।

चीन की अर्थशास्त्री लीया फाही का कहना है कि चीन के पास निर्यात करने के लिए बहुत कुछ है। अमेरिका चाहे टैरिफ लगाए या नहीं, चीन के सामान के प्रवाह को रोकना मुश्किल है। चीन से निर्यात में बाढ़ आने का कारण सरकार की नीतियां और घरेलू अर्थव्यवस्था का धीमा होना है। चीन में रियल एस्टेट का संकट है। इससे लाखों लोगों को नुकसान हुआ है। इसलिए चीन सरकार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पैसा लगा रही है। इससे चीन में जरूरत से ज्यादा सामान बन रहा है।

असमंजस में पड़ गए हैं दुन‍िया के कई देश

चीन अपने सामान को दक्षिण पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और यूरोप में भेज रहा है। इससे अमेरिका से मांग में गिरावट का असर कम हो गया है। लेकिन, इससे चीन के व्यापारिक साझेदारों के साथ टकराव हो सकता है। कारण है कि उन पर भी अमेरिका का दबाव है। ट्रंप उन देशों पर भी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं, जहां चीनी सामान ज्यादा आ रहा है। जैसे वियतनाम, कंबोडिया और इंडोनेशिया।

हालांकि, अभी बातचीत के लिए इन टैरिफ को रोक दिया गया है। कुछ देशों को विदेशी कंपनियों से निवेश का फायदा हुआ है। ये कंपनियां चीन से अपना प्रोडक्शन शिफ्ट करने की कोशिश कर रही हैं। कुछ देश चीनी सामान को अमेरिका को निर्यात करके भी फायदा उठा रहे हैं। लेकिन, वे अगर टैरिफ को कम नहीं करा पाते हैं तो दक्षिण पूर्व एशिया और अन्य जगहों की कंपनियां चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगी।

ट्रंप ने व्यापार में ऐसे टैरिफ लगाए हैं जो पिछले 100 सालों में नहीं देखे गए। लेकिन, चीन के निर्यात में यह बदलाव उनके आने से पहले ही शुरू हो गया था। चीन में प्रॉपर्टी का संकट 2021 में शुरू हुआ था। मकानों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई थी, कीमतें गिर रही थीं और कंपनियां दिवालिया हो रही थीं। चीन की सरकार ने तुरंत सस्ते लोन डेवलपर्स से हटाकर एक्सपोर्टर्स और मैन्युफैक्चरर्स को दे दिए। इससे कंस्ट्रक्शन में आई गिरावट को कम किया जा सका। कंस्ट्रक्शन एक समय में आर्थिक विकास का एक तिहाई हिस्सा था। बीजिंग के लिए यह आजमाया हुआ तरीका था: समस्या पर पैसा फेंको।

मैन्युफैक्चरिंग को और भी ज्यादा बढ़ावा दिया

कॉमर्जबैंक के अर्थशास्त्री टॉमी वू ने कहा, ‘वे अक्सर पहले बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं और फिर सरकार की नीतियां इसमें मदद करती हैं। इसी वजह से आज यह समस्या है।’ चीन ने 2015 में ‘मेड इन चाइना 2025’ नाम से एक घरेलू औद्योगिक नीति शुरू की थी। इसका मकसद था कि चीन उच्च-कुशल और अधिक मूल्यवान सामान बनाए। जैसे कंप्यूटर चिप और इलेक्ट्रिक वाहन। इस वजह से अमेरिका और यूरोप ने इलेक्ट्रिक कारों, सोलर पैनलों और अन्य हाई-टेक्नोलॉजी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए। लेकिन, प्रॉपर्टी मार्केट के गिरने के बाद चीन ने मैन्युफैक्चरिंग को और भी ज्यादा बढ़ावा दिया है। चीन अब सस्ते सामान भी बना रहा है, जो वह 20 साल पहले बनाता था।

अर्थशास्त्रियों को गलत कर दिया है साबित

चीन ने अर्थशास्त्रियों को गलत साबित कर दिया है। सिंगापुर की अर्थशास्त्री प्रियंका किशोर ने कहा, ‘चीन आर्थिक सिद्धांत के अनुसार विकास नहीं कर रहा है और अब हम एक नए मॉडल का सामना कर रहे हैं।’ किशोर पारंपरिक अर्थव्यवस्थाओं की बात कर रही थीं, जो विकसित होने पर लो-एंड मैन्युफैक्चरिंग से दूर चली जाती हैं। उन्होंने कहा, ‘यह एक चुनौती है क्योंकि इससे बाकी दुनिया पर दबाव बढ़ रहा है।’

टैरिफ की वजह से व्यापार और सप्लाई चेन बदल रही हैं। इसका असर दिखने लगा है। जर्मनी में पिछले महीने चीनी सामान का शिपमेंट 20% बढ़ गया। वहां की कंपनियों ने चिंता जताई है। कार बनाने वाली कंपनियां सबसे ज्यादा परेशान हैं। चीन ने इस साल 45% ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बनाए हैं। लेकिन, चीन में कंपनियां कीमतों को लेकर आपस में लड़ रही हैं। कारण है कि वहां ग्राहकों की मांग कम हो रही है। चीनी ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात इस साल 64.6% बढ़ गया है।

दुनिया के सामने खड़ा कर दिया है संकट

जिन देशों में चीनी सामान ज्यादा आ रहा है, वहां मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट आई है। इससे नौकरियां जा रही हैं और कंपनियां दिवालिया हो रही हैं। इंडोनेशिया में गारमेंट फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। उनका कहना है कि वे चीन से सस्ते कपड़ों से मुकाबला नहीं कर सकतीं। इंडोनेशियाई फिलामेंट यार्न एंड फाइबर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रेडमा गीता विरावास्ता ने कहा कि 2023 और 2024 में गारमेंट इंडस्ट्री में 250,000 लोगों की नौकरियां चली गईं। थाई ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों की वजह से बंद हो गए हैं। ब्राजील की कार बनाने वाली कंपनियों ने सरकार से चीन में बनी कारों की जांच करने को कहा है।

नोमुरा के चीफ इकोनॉमिस्ट सोनल वर्मा ने कहा कि ज्यादातर देशों के पास दो विकल्प हैं। पहला, कुछ न करें और मैन्युफैक्चरिंग को खोखला होते देखें। दूसरा, टैरिफ बढ़ाएं और कुछ सेक्टरों में संरक्षणवादी उपाय करें। जैसे अमेरिका ने चीन के साथ किया है। इससे चीन नाराज हो सकता है। वह व्यापार और निवेश को अपनी कूटनीति में इस्तेमाल करता है। या फिर अमेरिका नाराज हो सकता है। वर्मा ने कहा, ‘सप्लाई चेन भू-राजनीतिक लाइनों के साथ बंट रही हैं। देशों के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि वे किसके साथ खड़े हों?’

एयर इंडिया का विमान आसमान में लगाता रहा चक्कर

इंडोनेशिया से दिल्ली जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट को खराब मौसम के कारण वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर उतरना पड़ा। विमान में 187 यात्री थे, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। दिल्ली में मौसम खराब होने के कारण विमान को वाराणसी में उतारा गया। 

 अहमदाबाद एयरपोर्ट में एयर इंडिया विमान हादसे के बाद से लोगों में डर का माहौल है। हादसे के बाद से एयर इंडिया के कई विमानों में तकनीकी खराबी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। जिसके चलते बोइंग ड्रीमलाइनर पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच मंगलवार को इंडोनेशिया से दिल्ली आ रहा विमान आसमान में चक्कर लगाता रहा, जिससे यात्रियों की सांसें अटक गईं। विमान को वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट पर उतारा गया। बताया जा रहा है कि दिल्ली में मौसम खराब होने के चलते विमान को वाराणसी में उतारा गया। करीब दो घंटे बाद विमान दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

एयर इंडिया का विमान एआई 2146 इंडोनेशिया के डेनपसार एयरपोर्ट से तीन बच्चों समेत 187 लोगों को लेकर दिल्ली के लिए उड़ान भरा था। वहीं, राजधानी दिल्ली में मौसम खराब होने के चलते विमान आसमान में चक्कर लगाता रहा। काफी देर आसमान में चक्कर लगाने के चलते विमान में फ्यूल खत्म होने लगा। विमान के पायलट ने तुरंत वाराणसी एटीसी अधिकारियों से संपर्क किया और मौसम खराब होने की जानकारी दी। इसके बाद विमान वाराणसी एयरपोर्ट पर शाम करीब 4:20 बजे उतरा।

इजरायल में भारतीयों की वापसी को लेकर बड़ा अपडेट

भारत में इजरायल के राजदूत, रेउवेन अजार ने भारतीय नागरिकों को निकालने के बारे में बड़ी जानकारी दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि वे MEA के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अजार ने कहा, भारतीयों को निकालने के लिए, वे परिवहन मंत्रालय के माध्यम से व्यवस्था कर रहे हैं। इजरायली राजदूत ने कहा जो राजनयिक और विदेशी नागरिक जाना चाहते हैं, उनके लिए ज़मीनी और समुद्री रास्ते हैं। वे इस पर भी ध्यान दे रहे हैं।

इजराइल ने शुक्रवार को ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य जगहों को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला किया था जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए तथा कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए। इससे दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। अब दोनों देशों में भारतीय छात्र फंसे हुए हैं।

कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि ईरान में 1,500 से अधिक भारतीय छात्र अनिश्चितता की स्थिति में हैं और विदेश मंत्रालय से कहा कि उसे महज परामर्श जारी करने से आगे बढ़कर इन विद्यार्थियों की निकासी सुनिश्चित करने पर तत्काल काम करना चाहिए। कांग्रेस का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में भारतीयों से रविवार को कहा गया कि वे घबराएं नहीं, सावधानी बरतें और इजराइल द्वारा हमले के बाद देश में मौजूदा स्थिति के मद्देनजर तेहरान में भारतीय दूतावास के साथ उसके सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से संपर्क बनाए रखें।

बिहार के 6 जिलों में कहर बना ठनका: वज्रपात से 12 लोगों की मौत

 बिहार के छह जिलों में बीते 24 घंटों के दौरान वज्रपात की घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इन हादसों पर गहरा शोक जताया है और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आपदा की इस घड़ी में हम पूरी तरह से प्रभावित परिवारों के साथ हैं।’

नीतीश कुमार ने कहा कि ‘वज्रपात से पिछले 24 घंटे में बक्सर में 4, पश्चिम चंपारण में 3, कटिहार में 2, कैमूर में 1, लखीसराय में 1 एवं सीतामढ़ी में 1 व्यक्ति की मृत्यु दुःखद। मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है। लोगों से अपील है कि खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें। वज्रपात से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से समय-समय पर जारी किए गए सुझावों का अनुपालन करें। खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहें।’

वज्रपात की घटनाएं बक्सर, पश्चिम चंपारण, कटिहार, कैमूर, लखीसराय और सीतामढ़ी जिलों में दर्ज की गईं। बक्सर जिले में सबसे अधिक चार लोगों की मौत हुई है। पश्चिम चंपारण में तीन, कटिहार में दो और कैमूर, लखीसराय तथा सीतामढ़ी में एक-एक व्यक्ति की जान गई है। सोमवार को हुई बारिश के दौरान ये घटनाएं हुईं, जिनमें 11 लोग गंभीर रूप से झुलस भी गए हैं।

पेड़ के नीचे बैठे लोग चपेट में, महिलाओं और बच्चों की भी मौत

बक्सर के चौसा थाना क्षेत्र में गंगा किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे छह लोग बैठे थे, जब अचानक ठनका गिरा और तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। कैमूर के मोहनियां में देवकली गांव में एक महिला की मौत हुई। पश्चिम चंपारण के रामनगर और लौरिया इलाकों में ठनका गिरने से तीन अन्य की जान चली गई। इन घटनाओं में चार महिलाएं समेत कुल सात लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

कटिहार, लखीसराय और भागलपुर में भी नुकसान

कटिहार जिले में तीन, लखीसराय और भागलपुर में एक-एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। राज्य भर में अचानक बदले मौसम के कारण लगातार वज्रपात की घटनाएं हो रही हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

 अजरबैजान किसका दोस्त और किसका दुश्मन? एक साथ दो देशों ले लिया ‘पंगा’

पाकिस्तान के दोस्त अजरबैजान ने इजरायल और ईरान दोनों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी है। अजरबैजान ने तीसरे पक्ष पर हमलों के लिए अपने क्षेत्र का किसी भी तरह से उपयोग न करने की चेतावनी दी है। शनिवार को अजरबैजान ने पड़ोसी ईरान को आश्वस्त किया कि वह उसके ठिकानों पर अभूतपूर्व इजरायली हमलों के बाद तेहरान के खिलाफ हमलों के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देगा। ईरान ने लंबे समय से चिंता व्यक्त की है कि इजरायल हमलों को अंजाम देने के लिए अजरबैजान की भूमि का उपयोग कर सकता है। इजरायल, अजरबैजान का एक करीबी सहयोगी और एक प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश है।

अजरबैजान ने क्या कहा

अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से कहा, “अजरबैजान अपने क्षेत्र का इस्तेमाल मित्रवत ईरान सहित तीसरे देशों पर हमलों के लिए कभी नहीं होने देगा।” अजरबैजान के विदेश मंत्रालय की प्रेस सेवा ने AFP को बताया कि अराघची के साथ एक फोन कॉल में बायरामोव ने चेतावनी दी कि “संघर्ष के व्यापक क्षेत्र में फैलने का जोखिम है” और “आगे बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयासों” का आह्वान किया। मंत्रालय ने कहा कि अजरबैजान ने इजरायली हमलों के जवाब में ईरान द्वारा अपना हवाई क्षेत्र बंद करने के बाद अपनी सीमा पार भूमि पारगमन की सुविधा प्रदान की थी।

अजरबैजान और इजरायल ने दशकों से रणनीतिक संबंध बनाए रखे हैं, जो साझा हितों और व्यापक सैन्य सहयोग पर आधारित हैं। अजरबैजान, इजरायल को तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि यह उन्नत इजरायली हथियार-ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और अत्याधुनिक रक्षा तकनीकें हासिल करता है। 2020 के नागोर्नो-कराबाख युद्ध के बाद संबंध और गहरे हो गए, जब इजरायली हथियारों ने अजरबैजान की युद्ध के मैदान में सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई। दोनों देश ईरान की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चिंतित हैं।

ईरान का तो पड़ोसी है अजरबैजान

अजरबैजान का इजरायल के साथ गहरा रक्षा संबंध है, लेकिन वह ईरान के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है। इसके अलावा वह ईरान की सीमाओं के भीतर एक महत्वपूर्ण जातीय अजरबैजानी आबादी को होस्ट करता है। इतना ही नहीं, अजरबैजान और ईरान में आर्मेनिया को लेकर तनाव भी है। अजरबैजान पिछले कुछ वर्षों से आर्मेनिया के क्षेत्र में स्थित जांजगीर कॉरिडोर पर कब्जा करना चाहता है। अजरबैजान और तुर्किये इस कॉरिडोर का समर्थन करते हैं, जबकि आर्मेनिया इस पर अपना नियंत्रण चाहता है।

‘ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं…’, ट्रंप के समझौते की बात पर भी बोलीं टैमी ब्रूस

ईरान और इस्राइल के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने बात की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख स्पष्ट है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने ईरान के साथ ट्रंप के परमाणु समझौते को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि हर देश को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है।

रान और इस्राइल के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद ही ट्रंप ने यह साफ कर दिया था।

ब्रूस ने आगे कहा कि ट्रंप सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में अमेरिकी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। इसी मकसद से, विदेश विभाग ने ‘मध्य पूर्व टास्क फोर्स’ का गठन किया है। यह अमेरिका के नागरिकों, दूतावासों, कर्मचारियों और अन्य राजनयिक कामों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इसके अलावा, अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रखने के लिए, हमने इस क्षेत्र के अलग-अलग देशों के लिए 30 से ज्यादा सुरक्षा चेतावनियां जारी की हैं। 

बारिश से दिल्ली हुई बेहाल, जलभराव-जाम ने खोली सरकार और निकायों की तैयारियों की पोल

दक्षिण-पश्चिम मानसून के दस्तक देने से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को झमाझम बारिश हुई। दोपहर से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर शाम तक जारी रही। 

सबसे अधिक असर धौला कुआं से एयरपोर्ट और गुरुग्राम की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे-48 पर देखने को मिला, यहां घंटों तक वाहन रेंगते नजर आए। महिपालपुर, वसंत कुंज, धौला कुआं और आईजीआई एयरपोर्ट की ओर जाने वाले मार्गों पर गाड़ियों की कतारें लगी रहीं। लोग घंटों तक फंसे रहे। बारिश ने पश्चिमी, उत्तर-पश्चिमी व बाहरी दिल्ली के कई इलाकों को भी चपेट में लिया।

उत्तम नगर, मुंडका, विकासपुरी, शालीमार बाग और धौली प्याऊ में जलभराव के कारण निवासियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इंद्रलोक अंडरपास, नजफगढ़ रोड, रोहतक रोड और मोती बाग जैसे व्यस्त मार्गों पर पानी भरने से यातायात पूरी तरह बाधित रहा।

रिहायशी इलाकों में भी संकट
कई रिहायशी इलाकों से भी जलभराव की शिकायतें सामने आईं। एमसीडी के पास दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, कर्मपुरा, कीर्ति नगर, सुदर्शन पार्क, जनकपुरी, रोहिणी सेक्टर-25, शास्त्री नगर, भलस्वा डेयरी, मुखर्जी नगर, धीरपुर और पश्चिम विहार के लोगों को जलभराव के कारण घरों तक पहुंचने में परेशानी हुई। वसंत कुंज के नवादा इलाके में राधे-राधे वेलफेयर सोसाइटी के पास भी सड़कें पानी में डूब गईं।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल
सोशल मीडिया पर लोगों ने बारिश के दौरान बने हालात की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनमें जलभराव से भरी सड़कों व जाम की भयावहता साफ नजर आई। यूजर्स ने दिल्ली सरकार, एमसीडी और अन्य एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल बारिश के समय यही स्थिति होती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया।

खराब मौसम के कारण उड़ानें प्रभावित
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दस्तक देने से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को झमाझम बारिश हुई। दोपहर से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर शाम तक जारी रही। मौसम सुहाना हो गया और तापमान में आई गिरावट ने लोगों को तपिश व उमसभरी गर्मी से राहत दी। हालांकि, कुछ जगहों पर जलभराव से यातायात बाधित हुआ और दिल्ली हवाईअड्डे पर खराब मौसम के कारण 14 उड़ानों को दूसरे शहरों में भेजना पड़ा। 400 उड़ानें देरी से हुईं। आंधी से कई जगह पेड़ भी धराशायी हो गए।

दिल्ली में शाम 5:30 बजे तक 10.4 मिमी बारिश दर्ज की गई। पालम इलाके में सर्वाधिक 37.2 मिमी और आयानगर में 22.8 मिमी बारिश हुई। कई जगह ओले भी गिरे। मंगलवार को अधिकतम तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री कम 36.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग ने बुधवार को भी बारिश और आंधी का यलो अलर्ट जारी किया है और लोगों को बिना वजह घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।

मानसून की दस्तक अगले सप्ताह 
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले सप्ताह तक मानसून दिल्ली पहुंचने के आसार हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि मानसून 19 से 25 जून के बीच दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर पश्चिम भारत के सभी हिस्सों तक पहुंच सकता है। राष्ट्रीय राजधानी में अमूमन मानसून 27 से 30 जून के आसपास पहुंचता है। बीते साल 28 जून और वर्ष 2023 में 26 जून को मानसून पहुंचा था। इस बार केरल में एक हफ्ते पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी थी।

येरेवन पहुंचे 110 भारतीय छात्रों की आज देश वापसी; आर्मेनिया बॉर्डर पर नॉरदुज चौकी से बसों से निकाल रहे

भारत ने अपने छात्रों को निकालने के लिए ईरान में आर्मेनिया के राजदूत से बात की है। छात्रों को आर्मेनिया बॉर्डर पर नॉरदुज चौकी से बसों से निकाला जाएगा। ईरान में 1,500 कश्मीरी छात्रों सहित लगभग 10 हजार भारतीय फंसे हैं। ईरान और इस्राइल के युद्ध के बीच फंसे 600 भारतीय छात्रों को भारतीय दूतावास ने सोमवार को कौम स्थानांतरित किया गया था। इनमें से उर्मिया यूनिवर्सिटी के 110 छात्रों को आर्मेनिया भेजा गया था। इनमें से 90 छात्र कश्मीरी हैं। मंगलवार को ये छात्र आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंच गए। बुधवार को इन्हें हवाई जहाज से दिल्ली लाया जाएगा। इनके परिजन बेसब्री से इनका इंतजार कर रहे हैं। वहीं अन्य छात्रों को स्थानांतरित करने के प्रयास जारी है।

आर्मेनिया के राजदूत से बात की
भारत ने अपने छात्रों को निकालने के लिए ईरान में आर्मेनिया के राजदूत से बात की है। छात्रों को आर्मेनिया बॉर्डर पर नॉरदुज चौकी से बसों से निकाला जाएगा। ईरान में 1,500 कश्मीरी छात्रों सहित लगभग 10 हजार भारतीय फंसे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा हालात में देश के हवाईअड्डे भले ही बंद हैं, लेकिन जमीनी सीमाएं खुली हैं। छात्रों को ईरान छोड़ने से पहले राजनयिक मिशनों के जरिये ईरान के जनरल प्रोटोकॉल विभाग को अपना नाम, पासपोर्ट नंबर, गाड़ी डिटेल्स, देश से निकलने का समय और जिस सीमा से जाना चाहते हैं, उसकी जानकारी पहले से देनी होगी।

इससे पहले, सोमवार को भारतीय दूतावास ने तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से सभी भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था। शहीद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के सभी भारतीय विद्यार्थियों को कोम शहर के लिए रवाना किया गया। मंगलवार को शिराज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रों को निकालने की प्रक्रिया जारी रही। भारतीय दूतावास ने अराक विश्वविद्यालय से सभी भारतीय छात्रों को निकालने में मदद करने का अनुरोध किया है। भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों और छात्रों से घर के अंदर रहने और आधिकारिक चैनलों पर नजर रखने के लिए कहा है।

भारतीयों को तेहरान छोड़ने की सलाह
वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा कि अन्य भारतीय निवासी जिनके पास आवाजाही के साधन हैं उन्हें भी बदलते हालात के मद्देनजर शहर से बाहर चले जाने को कहा गया है।ईरान में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि सभी भारतीय नागरिक और पीआईओ जो अपने स्वयं के संसाधनों से तेहरान से बाहर जा सकते हैं, उन्हें शहर के बाहर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।

24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम स्थापित
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान और इस्राइल में चल रहे घटनाक्रमों के मद्देनजर मंत्रालय में एक 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम से इन नंबरों – 1800118797 (टोल-फ्री) +91-11-23012113 +91-11-23014104 +91-11-23017905 +91-9968291988 (व्हाट्सएप) पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा ईमेल आईडी situationroom@mea.gov.in पर भी बात की जा सकती है।

निकासी के लिए आर्मेनिया पहली पसंद
ईरान की सीमा सात देशों से लगती है। ये देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान, आर्मेनिया, तुर्किये और इराक हैं। इसके अलावा समुद्री सीमा ओमान के साथ है। आर्मेनिया सीमा ईरान के प्रमुख शहरों से कम दूरी पर है। आर्मेनिया के साथ भारत के संबंध काफी अच्छे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते भी हुए हैं। आर्मेनिया राजनीतिक रूप से स्थिर है और भारत से उसके दोस्ताना संबंध हैं। वहां से उड़ानों का परिचालन तेजी से संभव है क्योंकि येरेवन हवाईअड्डा पूरी तरह चालू है। ईरान और आर्मेनिया के बीच फिलहाल कोई सीमा विवाद या सैन्य तनाव नहीं है। यही वजह है कि भारतीय छात्रों की निकासी के लिए आर्मेनिया को चुना गया है।

भारतीय वायु सेना की बढ़ेगी ताकत, लड़ाकू जेट बेड़े के लिए जल्द मिलेगा स्वदेशी स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार

भारतीय वायु सेना को जल्द ही स्वदेशी स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार (SAAW) मिलने वाला है। यह एक तरह का स्मार्ट बम है, जो 100 किमी दूर तक मार कर सकता है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। यह हथियार दुश्मन के एयरबेस पर सटीक हमला करने में सक्षम है। इसे भारतीय वायु सेना के सभी लड़ाकू विमानों पर लगाया जा सकेगा। 

भारतीय वायु सेना को जल्द ही स्वदेशी स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार का एक उन्नत संस्करण मिलने वाला है। यह हथियार वायु सेना के Su-30 MKI समेत लगभग सभी लड़ाकू जेट के बेड़े पर लगाया जा सकेगा। इस हथियार के चलते वायु सेना की ताकत और बढ़ जाएगी। 

स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार (SAAW) एक तरह का बम है, जो हवा से छोड़ा जाता है। यह 100 किलोमीटर दूर के लक्ष्य को भी बहुत सटीकता से मार सकता है। यह बम उपग्रह से निर्देशित होता है। इस बम के लिए भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय द्वारा जल्द ही चर्चा किए जाने की उम्मीद है। 

डीआरडीओ ने बनाया है हल्के वजन वाला बम
SAAW को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बनाया है। इस बम को स्वदेशी रूप से विकसित और डिजाइन किया गया है और इसका वजन 120 किलोग्राम है। हल्के वजन का उच्च परिशुद्धता वाला निर्देशित बम विश्व स्तरीय हथियार प्रणालियों में से एक है। 

दुश्मन के एयरबेस को पलक झपकते ही नष्ट कर देगा
SAAW को डीआरडीओ के अनुसंधान केंद्र (आरसीआई), हैदराबाद में स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। इसका मकसद दुश्मन के एयरबेस में मौजूद रडार, बंकर, रनवे, टैक्सी ट्रैक आदि को पलक झपकते ही नष्ट करना है। स्टैंड ऑफ हथियार पाकिस्तान में बालाकोट हवाई हमलों में इस्तेमाल किए गए स्टैंड ऑफ हथियारों के समान है।

प्रस्ताव पर जल्द रक्षा मंत्रालय में होगी चर्चा
इस प्रस्ताव पर जल्द ही रक्षा मंत्रालय में चर्चा होने वाली है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब भारतीय सेना भविष्य की लड़ाइयों को देखते हुए लंबी दूरी की स्टैंड ऑफ हथियार प्रणालियों की तलाश कर रही है। 

डीआरडीओ की सफल परियोजनाओं में से एक SAAW
SAAW DRDO द्वारा की गई सफल परियोजनाओं में से एक है। DRDO ने इस हथियार को जल्द से जल्द सेना को देने के लिए आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत रक्षा बलों को SAAW मिसाइलों की पेशकश भी की है। भारतीय वायु सेना खुद को और ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए मिसाइलों और दूसरी आधुनिक तकनीकों से लैस हो रही है।

‘अमेरिका को पता है कहां छिपे हैं खामनेई, बिना शर्त आत्मसमर्पण करे ईरान’

Donald Trump On Israel-Iran Conflict: ईरान-इस्राइल तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा नियंत्रण है और खामनेई कहां छिपे हैं, यह भी पता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल हम खामनेई को नहीं मारना चाहते, लेकिन ईरान को अब बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए। 

इस्राइल-ईरान तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, अब हमारा ईरान के आसमान पर पूरी तरह नियंत्रण है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब इस तरह की अटकलें तेज हुई हैं कि क्या अमेरिका ईरान पर इस्राइल के हमलों में शामिल होगा या नहीं? 

ईरान के आसमान पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण’
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, अब हमारे पास ईरान के आसमान पर पूर्ण और पूरी तरह नियंत्रण है। उन्होंने अमेरिका में बने हथियारों की तारीफ की, हालांकि उन्होंने इस्राइल का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। उन्होंने लिखा, कोई भी यह काम हमसे बेहतर नहीं करता – पुराने और भरोसेमंद अमेरिका से अच्छा कोई नहीं।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामनेई

आत्मसमर्पण करे ईरान: ट्रंप का आग्रह
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जानता है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई कहां छिपे हुए हैं। लेकिन हम उन्हें मारना नहीं चाहते हैं। उन्होंने ईरान से अब बिना शर्त आत्मसमर्पण करने का आग्रह किया। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट में ईरान से ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ करने का अनुरोध किया, क्योंकि पांच दिनों से चल रहा इस्राइल-ईरान संघर्ष बढ़ता ही जा रहा है।

इस्राइल-ईरान तनाव 

इस्राइली हमले में ईरानी सेना प्रमुख की मौत, ईरान ने मोसाद मुख्यालय को बनाया निशाना
इस्राइल और ईरान के बीच लगातार पांच दिनों से संघर्ष जारी है। मंगलवार को भी दोनों देशों ने एक-दूसरे के बड़े शहरों पर मिसाइलें दागी। इस्राइल ने ईरान के नवनियुक्त सेना प्रमुख अल शादनामी को भी मार गिराने का दावा किया है। वहीं ईरान ने कहा है कि उसने इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद और सैन्य गुप्तचर एजेंसी के मुख्यालय पर मिसाइलें दागी हैं। दोनों देशों में संघर्ष बढ़ने के संकेत के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कनाडा में जी-7 की बैठक से जल्दी लौट गए हैं। जाते-जाते उन्होंने कहा कि वह ईरान और इस्राइल के बीच संघर्ष विराम नहीं, बल्कि समस्या का असली समाधान चाहते हैं।

इस्राइली सेना के एक अधिकारी ने कहा कि इस्राइल ने ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़े दर्जनों ठिकानों पर रात भर हमला किया और ईरान के सैन्य नेतृत्व को भागने पर मजबूर कर दिया। तेहरान पर हमला कर ईरान के सेना प्रमुख जनरल शादनामी को मार गिराया है। हालांकि, ईरान ने शादनामी के मारे जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिन्हें हाल ही में अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के तहत आने वाले खतम अल-अनबिया के केंद्रीय मुख्यालय का प्रमुख नियुक्त किया गया था। ईरान ने रिवोल्यूशनरी गार्ड और नियमित सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों की जगह अन्य जनरलों को नियुक्त किया है।

वहीं, ईरानी मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्राइली खुफिया क्षमताओं को कमजोर करने के लिए ईरान ने तेल अवीव में मोसाद और अमान के मुख्यालय को निशाना बनाया है। ईरानी मिसाइल हमलों का मुख्य निशाना ग्लीलोट में अमान के लॉजिस्टिक सेंटर था। यहीं से इस्राइल की सैन्य खुफिया गतिविधियों का संचालन होता है। हमले के बाद सेंटर में आग लग गई, मीडिया में इसका एक वीडियो भी जारी किया गया है। एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मिसाइल हमलों में मोसाद का मुख्यालय और यूनिट 8200 के कुछ गुप्त बैकअप ठिकानों को भी तबाह कर दिया गया। यूनिट 8200 इस्राइल की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और खुफिया इकाई है जो साइबर युद्ध और डाटा इंटेलिजेंस में विशेषज्ञ मानी जाती है। इस्राइली सेना ने इन हमलों को मामूली बताया है।

ईरान के परमाणु हथियारों का अंत चाहते हैं : ट्रंप
इससे पहले, कनाडा से रवाना होने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि वह संघर्ष विराम नहीं, बल्कि ईरान के परमाणु हथियारों का अंत चाहते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वह ईरानी अधिकारियों से मिलने के लिए मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ या उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भेज सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस्राइल ईरान पर हमले कम नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु बम बनाने के करीब है। लेकिन सीधी सी बात है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता है। उसके पास परमाणु बम नहीं हो सकता। उसे इस मुद्दे पर सरेंडर करना ही होगा, उससे कम कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए।

निशाने पर फोर्डो परमाणु केंद्र
इस्राइली सेना के एक अधिकारी ने कहा कि इस्राइली वायुसेना ने ईरान के भूमिगत फोर्डो परमाणु संयंत्र को अभी निशाना नहीं बनाया है, लेकिन कभी भी उसे निशाना बनाया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि इस्राइल परमाणु आपदा से बचने के लिए सावधानी बरत रहा है। हालांकि, फोर्डो परमाणु संयंत्र को नष्ट करना इस्राइल के लिए आसान भी नहीं है क्योंकि यह जमीन के नीचे बहुत गहराई में है। इसे खत्म करने के लिए कम से कम 30,000 पाउंड (14,000 किलोग्राम) का बंकर बम चाहिए, जो सिर्फ अमेरिका के पास है। इस बम को अमेरिकी बी-2 स्टील्थ बमबर्षक से ही गिराया जा सकता है।

रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज –

सद्दाम जैसा होगा खामनेई का हश्र
ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों को मार डालने के बाद इस्राइल ने अब सीधे उसके सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामनेई को धमकी दे दी है। इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने मंगलवार को कहा कि खामनेई का हश्र इराक के पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन की तरह हो सकता है। काट्ज ने कहा, याद रखिए कि ईरान के पड़ोसी देश के तानाशाह के साथ क्या हुआ था जो इस्राइल के खिलाफ था। काट्ज का बयान ऐसे समय आया है जब ऐसी आई थीं कि इस्राइल खामनेई की हत्या करने वाला था लेकिन अमेरिका ने उसे ऐसा करने से रोक दिया था।

जी-7 शिखर सम्मेलन में कनाडाई पीएम कार्नी व अन्य देशों के नेता 

जी-7 के नेताओं ने इस्राइल का समर्थन किया
कनाडा के कनानस्किस में जी-7 की बैठक में समूह के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि इस्राइल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है। नेताओं ने कहा कि हम इस्राइल की सुरक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराते हैं। बयान में इस्राइल और ईरान के बीच लड़ाई कम करने का आह्वान किया गया है और इस बात भी जोर दिया गया कि ईरान को परमाणु बम रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

क्यों ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों को छू नहीं सका इस्राइल, तबाही के लिए US से कौन सा हथियार मांगा?

इस्राइल के हमले में ईरान के जिन दो प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान न पहुंचने की बात हो रही है, वह कौन से हैं? इस्राइल की एयरस्ट्राइक के बावजूद इनमें तबाही क्यों नहीं मची? खासकर फोरडाओ कितनी सुरक्षित है? इसके अलावा इस्राइल ने जो ‘खास हथियार’ अमेरिका से मांगा है, वह क्या है और कितना खतरनाक है? आइये जानते हैं…

इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने चरम पर है। इस बीच दोनों देशों के बीच जंग छिड़ने के आसार नजर आने लगे हैं। दरअसल, इस्राइल ने ईरान में परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के साथ उसके सैन्य अधिकारियों पर भी हमले किए हैं। इसमें ईरान के सेना प्रमुख और वायुसेना प्रमुख के साथ ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख की भी जान गई है। दूसरी तरफ ईरान ने भी इस्राइल पर ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए जबरदस्त हमला बोला है और उसके कई अहम ठिकानों को तबाह किया है। इस पूरे संघर्ष में अब अमेरिका के जुड़ने के भी आसार लगाए जा रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन अब संघर्षविराम के लिए नहीं, बल्कि अंत के लिए काम कर रहा है।

इस्राइल ने शुक्रवार (13 जून) को जब ईरान पर हमले शुरू किए थे, तब उसने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों- नतांज, फोरडाओ और इशाफान स्थित परमाणु परिसर को निशाना बनाने की कोशिश की थी। इनमें अब तक जो सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं, उनमें नतांज में जमीन से ऊपर बने कुछ ठिकानों को नुकसान की पुष्टि हुई है। हालांकि, अंडरग्राउंड ठिकाने सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं, फोरडाओ में कोई नुकसान की खबर नहीं आई। इशफान को कुछ नुकसान की बात सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मुताबिक, उसे फिलहाल ईरान में कहीं रेडिएशन फैलने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, उसने निगरानी जारी रखी है। 

दूसरी तरफ ईरान के परमाणु ठिकानों, जिनमें फोरडाओ प्रमुख है, उसे नुकसान न पहुंचने की खबरों के बाद इस्राइल ने अमेरिका से मदद मांगी है। रिपोर्ट्स की मानें तो इस्राइल ने अमेरिका से एक खास हथियार- ‘बंकर बस्टर बम’ (Bunker Buster Bomb) भेजने की मांग की है। माना जा रहा है कि अमेरिका इस बम को सीधे तौर पर इस्राइल को देने की जगह ईरान पर खुद इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इस्राइल के हमले में ईरान के जिन दो प्रमुख परमाणु ठिकानों को नुकसान न पहुंचने की बात हो रही है, वह कौन से हैं? इस्राइल की एयरस्ट्राइक के बावजूद इनमें तबाही क्यों नहीं मची? खासकर फोरडाओ कितनी सुरक्षित है? इसके अलावा इस्राइल ने जो ‘खास हथियार’ अमेरिका से मांगा है, वह क्या है और कितना खतरनाक है? आइये जानते हैं…

इस्राइल के हमले के बाद कितने सुरक्षित हैं ईरान के परमाणु ठिकाने?

1. नतांज परमाणु केंद्र
आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक नतांज में ईरान अपने यूरेनियम के संवर्धन का मुख्य काम करता है। यहां इस्राइल के हमले में जमीन के ऊपर बनी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, जमीन के नीचे बने परमाणु केंद्रों पर निशाना नहीं लगा है। ग्रोसी के मुताबिक, संवर्धन प्लांट के पास अंडरग्राउंड बने हॉल पर किसी तरह के हमले की बात भी सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि इस्राइल की सेना ने शुक्रवार को अपने हमले के बाद कहा था कि ईरान के जमीन के नीचे के ठिकानों को भी उसके बमों से नुकसान हुआ है। ईरान के नतांज परमाणु केंद्र को बिजली मुहैया कराने वाले कुछ सबस्टेशनों को जरूर नुकसान हुआ है।

बताया जाता है कि नतांज में दो परमाणु केंद्र हैं। इनमें मुख्य साइट पर संवर्धन प्लांट जमीन से 40 फीट तक नीचे है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि नतांज में इस केंद्र को तबाह करना आसान नहीं है और इस्राइल की सिर्फ 1.8 टन वाली रॉक्स मिसाइल और 1.6 टन वाली एयर लोरा मिसाइलों के एक के बाद एक कई वार ही नतांज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

2. फोरडाओ परमाणु केंद्र
फोरडाओ ईरान का सबसे सुरक्षित परमाणु केंद्र है, जिसे पहाड़ों के बीच जमीन के कई मीटर अंदर बनाया गया है। अपनी लोकेशन की वजह से यह क्षेत्र काफी सुरक्षित है और इस पर सीधा हमला काफी मुश्किल और नुकसान न पहुंचाने वाला साबित हुआ है। आईएईए के ही मुताबिक, एक बड़े पहाड़ के 250 से 300 फीट नीचे मौजूद इस परमाणु केंद्र को बिल्कुल नुकसान नहीं दिख रहा। एजेंसी का कहना है कि ईरान इन्हीं दोनों परमाणु केंद्रों में 408.6 किलोग्राम यूरेनियम को 60 फीसदी तक संवर्धित कर चुका है और अगर संवर्धन जारी रहा तो उसके पास जल्द एक परमाणु बम होगा। 

हॉलीवुड एक्टर टॉम क्रूज को मिलेगा ऑस्कर, लिस्ट में इन एक्टर्स के नाम भी हैं शामिल

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टॉम क्रूज को ऑस्कर अवॉर्ड मिल रहा है। इस नामी हॉलीवुड एक्टर के अलावा कुछ और एक्टर्स को भी ऑस्कर अवॉर्ड मिलेगा। जानिए, टॉम क्रूज के अलावा कौन है वो एक्टर्स। 

एपी न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार मशहूर हाॅलीवुड एक्टर टॉम क्रूज को आखिरकार ऑस्कर मिलने वाला है। उनके अलावा ऑस्कर पाने वालों की लिस्ट में डॉली पार्टन, डेबी एलेन और व्यान थॉमस भी शामिल होंगे। हॉलीवुड फिल्म अकादमी ने मंगलवार को बताया कि एक्शन फिल्म स्टार टॉम क्रूज और सिंगर-एक्ट्रेस डॉली पार्टन उन हस्तियों में शामिल हैं जिन्हें इस साल लाइफटाइम अचीवमेंट्स के ऑस्कर अवॉर्ड के लिए चुना गया है। 

टॉम क्रूज के लिए बड़ी उपलब्धि
टॉम क्रूज को ऑस्कर में पहला नॉमिनेशल लगभग पच्चीस साल पहले मिला था। अब जाकर उन्हें Honorary Oscars से सम्मानित किया जाएगा। फिल्म अकादमी ने मंगलवार को बताया कि टॉम क्रूज, कोरियोग्राफर डेबी एलन और ‘डू द राइट थिंग’ के प्रोडक्शन डिजाइनर व्यान थॉमस को ऑनरेरी ऑस्कर अवॉर्ड के लिए चुना गया है। डॉली पार्टन को एजुकेशन और सोशल वर्क करने के लिए जीन हर्शोल्ट ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड दिया जाएगा। अकादमी के अध्यक्ष जेनेट यांग ने कहा, ‘इस साल के गवर्नर्स अवार्ड्स में चार महान लोगों को सम्मानित किया जाएगा, जिनके बेहतरीन करियर हमारे सिनेमा पर गहरा असर छोड़ा है।’ यह अवॉर्ड 16 नवंबर को लॉस एंजिल्स के रे डॉल्बी बॉलरूम में एक खास फंक्शन के दौरान दिए जाएंगे।

MI सीरीज के लिए दुनिया भर में मशहूर टॉम क्रूज 
62 साल के हो चुके टॉम क्रूज ने अपने एक्टिंग करियर में कई हॉलीवुड फिल्में की हैं। मगर उनकी सबसे ज्यादा चर्चित फिल्में ‘मिशन इंपॉसिबल’ सीरीज की रही है। हाल ही में टॉम क्रूज की फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल 8’ रिलीज हुई। इस फिल्म को दुनिया भर में पसंद किया गया, भारत में भी इस फिल्म ने अच्छा कलेक्शन किया है। अब टॉम क्रूज को सिनेमा में दिए गए इस योगदान के लिए ऑस्कर अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। 

जांच के लिए इंदौर वाले फ्लैट पहुंची मेघालय पुलिस; हत्या के बाद यहीं छिपी थी सोनम

राजा रघुवंशी मर्डर केस की जांच में तेजी आई है। आयदिन नए-नए खुलासे सामने आ रहे है। इसी बीच मेघालय पुलिस की टीम इंदौर पहुंची और देवास नाका इलाके में उस फ्लैट की तलाशी ली जहां हत्या के बाद आरोपी पत्नी सोनम के छिपे होने की आशंका है। पुलिस ने सहकार नगर स्थित रघुवंशी के घर जाकर परिजनों के बयान भी दर्ज किए।

राजा रघुवंशी मर्डर केस में आय दिन कोई ना कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इसी बीच मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए मेघालय पुलिस की एक टीम मंगलवार को इंदौर पहुंची। टीम ने उस फ्लैट का निरीक्षण किया, जहां हत्या के बाद मुख्य आरोपी और रघुवंशी की पत्नी सोनम के कुछ दिन छिपे रहने की आशंका जताई जा रही है। यह फ्लैट इंदौर के देवास नाका इलाके में स्थित है। वहीं स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमें जानकारी मिली है कि हत्या के बाद सोनम कुछ दिन इस फ्लैट में रुकी थी। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश चली गई, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

राजा रघुवंशी के घर पहुंची पुलिस
जांच के लिए मेघालय पुलिस टीम ने इंदौर के सहकार नगर इलाके में राजा रघुवंशी के घर का भी दौरा किया और परिजनों के बयान दर्ज किए। राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने बताया कि तीन सदस्यीय पुलिस टीम हमारे घर आई थी। वे करीब आधे घंटे तक रुके और सोनम के व्यवहार के बारे में सवाल किए। उन्होंने यह भी पूछा कि शादी के बाद वह हमारे साथ कितने दिन रही।

क्या है पूरा मामला
बता दें कि मामले में सोनम, कथित तौर पर उसके प्रेमी राज कुशवाह  और उसके तीन दोस्त, विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह हत्या 23 मई को मेघालय में हुई थी, जब रघुवंशी और सोनम हनीमून पर थे। जहां राजा रघुवंशी का क्षत-विक्षत शव दो जून को मेघालय के सोहरा (चेरापूंजी) इलाके के एक झरने के पास गहरे खड्ड में मिला था।

इंदौर के कारोबारी का दावा
हालांकि इससे चार दिन पहले, इंदौर के एक कारोबारी शिलॉम जेम्स ने दावा किया था कि आरोपी विशाल चौहान ने 30 मई को उनसे मिलकर देवास नाका इलाके में एक फ्लैट 17,000 रुपये मासिक किराए पर लिया था। आशंका है कि हत्या के बाद सोनम इसी फ्लैट में कुछ दिन छिपी रही। पुलिस अब मामले की हर कड़ी को जोड़कर सच तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

170 खिलाड़ियों पर आज लगेगी बोली, यूपी टी-20 लीग का मिनी ऑक्शन के बाद तैयार होगी छह टीमें

लीग के मुकाबले इस बार 23 अगस्त से लेकर 16 सितंबर तक लखनऊ और कानपुर में होने की संभावना है, जिस पर बुधवार को होने वाले मिनी ऑक्शन में मुहर लगेगी।

इस दौरान लीग में भाग ले रही सभी छह फ्रेंचाइजी टीमें सुविधा के अनुसार बल्लेबाज, गेंदबाज, हरफनमौला और विकेटकीपर पर बोली लगाएंगे। लीग के मुकाबले इस बार 23 अगस्त से लेकर 16 सितंबर तक लखनऊ और कानपुर में होने की संभावना है, जिस पर बुधवार को होने वाले मिनी ऑक्शन में मुहर लगेगी।

टीमें और रिटेन खिलाड़ी

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