आज के बड़े इवेंट
दुनियाभर में प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की आज से होगी शुरुआत।
अमेरिका ने चीन के साथ किए व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर
टैरिफ मुद्दे पर चीन के साथ तनाव के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ने चीन के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया है कि चीन और अमेरिका के बीच किस तरह का सौदा हुआ है।
ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब व्हाइट हाउस में वे एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सरकारी खर्च विधेयक को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि हमने अभी चीन के साथ (व्यापार समझौते) पर हस्ताक्षर किए हैं। हम हर किसी के साथ सौदे नहीं करने जा रहे हैं, लेकिन हम कुछ बेहतरीन सौदे कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हम शायद भारत के साथ भी एक सौदा करने जा रहे हैं, एक बहुत बड़ा सौदा। हम भारत को खोलने जा रहे हैं। ऐसी चीजें जो वास्तव में कभी नहीं हो सकती थीं। हर देश के साथ संबंध बहुत अच्छे रहे हैं।
‘स्पेन दोस्तों के लिए दोस्ताना’; सांचेज का रक्षा खर्च बढ़ाने से इनकार; ट्रंप की धमकियों को किया अनदेखा
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस सप्ताह नाटो शिखर सम्मेलन में यह साफ कह दिया कि उनका देश रक्षा पर ज्यादा खर्च नहीं करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही टैरिफ लगाने की धमकी दी हो, लेकिन सांचेज अपने फैसले पर कायम हैं।स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बावजूद रक्षा खर्च बढ़ाने से इनकार कर दिया है। उन्होंने नाटो शिखर सम्मेलन में साफ कह दिया कि उनका देश रक्षा पर ज्यादा खर्च नहीं करेगा।
रक्षा खर्च को जीडीपी का 5 फीसदी बढ़ाने पर सहमत हुए सदस्य देश
बुधवार को सैन्य गठबंधन के शिखर सम्मेलन में, सदस्य देशों ने अपने रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5 फीसदी तक बढ़ाने पर सहमति जताई, लेकिन सांचेज ने इसके लिए छूट ले ली। उन्होंने कहा कि स्पेन सिर्फ 2.1 फीसदी खर्च करेगा, जो पर्याप्त और व्यावहारिक है।
थोड़ी सी मुफ्त की सवारी चाहता है स्पेन: ट्रंप
शिखर सम्मेलन के बाद ट्रंप ने स्पेन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्पेन थोड़ी सी मुफ्त सवारी चाहता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को व्यापार में टैरिफ लगाकर इसकी भरपाई करनी होगी। इस मुद्दे पर यूरोपीय नेताओं के बीच बृहस्पतिवार को चर्चा हुई। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ट्रंप क्या कहना चाहते हैं, यह समझना हमेशा आसान नहीं होता। वे स्पेन पर अलग से टैक्स कैसे लगाएंगे, यह भी एक रहस्य है। शायद कुछ खास उत्पादों पर होगा। हमें इंतज़ार करना होगा।’
अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पेन का कदम सांचेज के लिए कठिन क्षण
अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पेन का कदम सांचेज के लिए एक कठिन क्षण में आया है, क्योंकि उनके कुछ करीबी लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, और इस वजह से कुछ वामपंथी सहयोगी समय से पहले चुनाव की मांग कर रहे हैं, लेकिन सांचेज ने इनकार किया है। राजनीतिक विश्लेषक मोंटसेराट ने कहा, ‘जैसे ट्रंप नाटक करते हैं, वैसे ही सांचेज भी जवाब दे रहे हैं। वे 5 फीसदी खर्च का विरोध करके अपने वामपंथी साथियों को भी इशारा कर रहे हैं कि वे पूरी तरह झुके नहीं हैं।’
पिछले साल स्पेन ने सबसे कम रक्षा खर्च किया
गठबंधन के अनुमान के अनुसार, पिछले साल स्पेन ने नाटो देशों में सबसे कम रक्षा खर्च किया था- जीडीपी का सिर्फ 1.28 फीसदी। इस साल अप्रैल में सांचेज ने कहा था कि यह खर्च 2 फीसदी तक होगा, लेकिन कुछ वामपंथी नेताओं ने इसकी भी आलोचना की।
सांचेज का नाटो खर्च से अलग हटना गलत: गारमेन्डी
बृहस्पतिवार को स्पैनिश कॉन्फेडरेशन ऑफ बिजनेस ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष एंटोनियो गारमेन्डी ने कहा कि सांचेज का नाटो खर्च से अलग हटना गलत है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने दोस्तों के साथ चलना चाहिए। अगर हम अलग चलते हैं तो हमें दंड झेलना पड़ सकता है।’ गारमेन्डी ने कहा कि स्पेन यूरोपीय संघ का हिस्सा होते हुए भी टैरिफ का शिकार हो सकता है, जिससे इसके कमजोर उद्योगों को नुकसान हो सकता है- खासकर इस्पात, कार और जैतून के तेल के क्षेत्रों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘कुछ उद्योग हैं, जो प्रभावित हो सकते हैं, और हमें इसकी चिंता करनी चाहिए।’
खामनेई बोले- ईरान ने अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा
इस्राइल के साथ हिंसक संघर्ष को लेकर ईरान बीते दो हफ्ते से अधिक समय से सुर्खियों में है। ईरान ने इस्राइल और अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद मिसाइलों से पलटवार किया था। ईरान और इस्राइल के सीजफायर के बाद अब ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने पहली बार 12 दिनों तक चले संघर्ष को लेकर बयान दिया है। जानिए खामनेई ने क्या कुछ कहा?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कहा, उनके देश ने ‘अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा है।’ उन्होंने भविष्य में होने वाले किसी भी अमेरिकी हमले के खिलाफ चेतावनी भी दी। उनकी यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि 12 दिनों के वार-पलटवार के बाद इस्राइल के साथ संघर्षविराम हुआ और अब खामनेई ने पहली सार्वजनिक टिप्पणी की है। गुरुवार को खामनेई का संदेश देश के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 जून के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर मीडिया के सामने आए खामनेई पहले से अधिक थके और शारीरिक रूप से थोड़े कमजोर भी दिखे।
खामनेई की दो टूक- अमेरिका को इस लड़ाई से कोई फायदा नहीं हुआ
इस्राइल के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी हस्तक्षेप को लेकर खामनेई ने कहा, अमेरिका ने युद्ध में केवल इसलिए हस्तक्षेप किया क्योंकि उसे लगा कि अगर हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इस्राइल में यहूदी शासन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। खामनेई ने कहा कि अमेरिका को इस युद्ध से “कोई लाभ नहीं हुआ।
अगर ईरान पर हमला हुआ तो दुश्मन को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी
उन्होंने कहा, इस्लामी गणराज्य विजयी रहा। बदले में ईरान ने अमेरिका के चेहरे पर तमाचा मारा। उन्होंने कथित तौर पर सोमवार को कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे- अल उदीद पर ईरानी मिसाइल हमले की तरफ संकेत दिया। हालांकि, ईरान के इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ। खामनेई ने चेतावनी दी और कहा, ऐसी कार्रवाई भविष्य में भी दोहराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान इस क्षेत्र (पश्चिम एशिया) में अमेरिका के प्रमुख केंद्रों तक आसानी से पहुंच सकता है। जब भी जरूरी होगा, ईरान कार्रवाई कर सकता है। चेतावनी भरे लहजे में ईरान के सुप्रीम लीडर ने कहा, अगर कोई आक्रमण होता है, तो दुश्मन को निश्चित रूप से भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
गौरतलब है कि 86 वर्षीय खामनेई बीते 13 जून को इस्राइल के साथ टकराव शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखे गए थे। इस्राइली सेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों, प्रमुख सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों को निशाना बनाया था। इसके बाद खामनेई गुप्त स्थान पर चले गए थे। सीजफायर होने के दो दिन बाद गुरुवार को देश की जनता को संबोधित करने सामने आए खामनेई भूरे रंग के साधारण परदों के सामने बैठकर संदेश दिया। उन्होंने 19 जून को भी ऐसा ही किया था।
मधेसी पार्टी जसपा ने वापस लिया समर्थन, उच्च सदन में अल्पमत में आई ओली सरकार
नेशनल असेंबली में 18 सदस्यों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद 16 सदस्यों के साथ नेपाली कांग्रेस है जबकि ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के 11 सदस्य हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत समाजवादी) के पास आठ सीटें हैं।
नेपाल में प्रमुख मधेसी पार्टी जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन से औपचारिक रूप से समर्थन वापस ले लिया है। इससे ओली सरकार उच्च सदन नेशनल असेंबली में अल्पमत में आ गई है। हालांकि उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जसपा के समर्थन वापस लेने से गठबंधन सरकार पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास प्रतिनिधि सभा में पर्याप्त संख्या है।
ओली की पार्टी ने कहा कि उसे जसपा नेपाल के समर्थन वापस लेने का कोई कारण नहीं दिखता है। जसपा नेपाल ने 23 और 24 जून को हुई पार्टी की कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान सरकार से समर्थन वापस लेने का निर्णय लिया था। जसपा नेपाल के उपाध्यक्ष शिव लाल थापा ने बताया कि पार्टी अब कुछ दिनों में संसदीय दल की बैठक बुलाने के बाद संसद के अध्यक्ष को आधिकारिक रूप से अपना निर्णय बताएगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल नेपाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार का नेतृत्व संभालते समय ओली ने भ्रष्टाचार समाप्त करने, सुशासन लाने, आर्थिक प्रगति करने और संविधान में संशोधन करने का वादा किया था। हमने इन चार एजेंडों पर सरकार को समर्थन दिया था। लेकिन एक साल बाद भी हमें नहीं लगता कि सरकार को इन मुद्दों की कोई चिंता है। इसलिए हमने ओली के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।
नेशनल असेंबली में 18 सदस्यों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद 16 सदस्यों के साथ नेपाली कांग्रेस है जबकि ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के 11 सदस्य हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत समाजवादी) के पास आठ सीटें हैं। अन्य में, जसपा नेपाल के पास तीन सीटें, राष्ट्रीय जनमोर्चा और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के पास एक-एक सीट है तथा एक निर्दलीय है। इस तरह नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (यूएमएल) के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 59 सदस्यीय सदन में 27 सीटें हैं।
यूपी में सामूहिक आत्महत्या : बढ़ता गया ब्याज का बोझ, सवा लाख का कर्ज बढ़कर हुआ छह लाख
यूपी के बिजनौर स्थित गांव टंढेरा में बेटी पूनम की शादी के लिए साहूकारों और फाइनेंस कंपनियों का सवा लाख रुपये का कर्ज भट्ठा मजदूर परिवार की तीन जिंदगियों को निगल गया। ब्याज के साथ बढ़ कर कर्ज के छह लाख रुपये नहीं चुका पाने से तंग भट्ठा मजदूर पुखराज ने पत्नी और दो बेटियों के साथ जहर निगल लिया। पत्नी रमेशिया (50), बेटी अनीता उर्फ नीतू (21), शीतू (18) की मौत हो गई। पुखराज की भी गंभीर हालत बनी हुई है। इस परिवार ने कर्ज की मासिक किस्त 25 जून तक जमा नहीं कर पाने के कारण आत्मघाती कदम उठाया। डीएम ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है।
पुलिस के अनुसार चार साल पहले पुखराज, उसकी पत्नी और बेटे ने बेटी की शादी के लिए साहूकारों और फाइनेंस कंपनियों से सवा लाख रुपये कर्ज लिया था जो अब बढ़कर करीब छह लाख रुपये हो गया है। कर्ज की अदायगी और तकादा बढ़ने पर पुखराज का अपने बेटे सचिन से झगड़ा भी होता था।
बेहद नाजुक है पुखराज की हालत
गांव टंढेरा में भट्ठे पर घोड़ा बुग्गी से कच्ची ईंटें ढोने वाले पुखराज, उसकी पत्नी रमेशिया, बेटी अनीता उर्फ नीतू और शीतू ने गुरुवार की सुबह आठ बजे जहर निगल लिया। सभी जहर निगलने के बाद झोपड़ी से बाहर की ओर दौड़े। ग्राम प्रधान रईस अहमद ने पुलिस को सूचना दी। करीब 8:30 बजे चारों को नूरपुर सीएचसी में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर सभी को बिजनौर मेडिकल अस्पताल में ले जाया गया। जहां रमेशिया और अनीता की मौत हो गई, जबकि यहां से रेफर हुई छोटी बेटी शीतू ने मेरठ मेडिकल अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुखराज की हालत भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
सवा लाख का कर्ज बढ़कर हुआ छह लाख
पुलिस के अनुसार चार साल पहले पुखराज, उसकी पत्नी और बेटे ने बेटी की शादी के लिए साहूकारों और फाइनेंस कंपनियों से सवा लाख रुपये कर्ज लिया था जो अब बढ़कर करीब छह लाख रुपये हो गया है। कर्ज की अदायगी और तकादा बढ़ने पर पुखराज का अपने बेटे सचिन से झगड़ा भी होता था। 25 जून को उसे मासिक किस्त देनी थी, जिसके लिए वह पैसे नहीं जुटा पाया और उसने तंग आकर परिवार के साथ जहर निगल कर जान देने का आत्मघाती रास्ता अपनाया।
जहर से महिला और उसकी दो बेटियों की मौत हुई है। पुखराज का इलाज चल रहा है। इस परिवार पर करीब छह लाख रुपये का कर्ज था। मामले की जांच की जा रही है। जांच कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -अभिषेक झा, एसपी, बिजनौर
इस मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। किसने कर्ज दिया और कर्ज वसूलने के लिए परेशान किया, इसका पता भी कराया जा रहा है। परिवार में कलह की बात भी सामने आ रही है। -जसजीत कौर, डीएम, बिजनौर

फटाफट क्रिकेट का रोमांच होगा दोगुना! ICC ने प्लेइंग कंडीशन में किया बदलाव, अब इतने ओवर का होगा पावरप्ले
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने गुरुवार को टी20 मैचों के लिए नए पावरप्ले नियमों की घोषणा की। ये नियम उन मैचों के लिए होंगे जिनमें किसी वजह से ओवर काट लिए गए हों और पूरे 20 ओवर का खेल संभव न हो। आईसीसी ने बताया कि टी20 के लिए नए प्लेइंग कंडीशन में पावरप्ले के दौरान कितने फील्डर्स को 30 यार्ड सर्कल से बाहर रहने की अनुमति होगी। आईसीसी के इस फैसले से टी20 क्रिकेट का रोमांच दोगुना हो सकता है।
ये नियम जुलाई से लागू कर दिए जाएंगे। इसके मुताबिक, अगर किसी पारी के शुरू होने से पहले ओवर घटाकर आठ ओवर का कर दिया जाता है, तो उसमें अब 2.2 ओवर का पावरप्ले होगा। पावरप्ले के दौरान 30 यार्ड सर्कल के बाहर सिर्फ दो फील्डर्स रहेंगे। पहले अगर किसी पारी में आठ ओवर का खेल कर दिया जाता था तो तीन ओवर का पावरप्ले होता था। इसी तरह नए नियम के मुताबिक, अब पांच ओवर की पारी में 1.3 ओवर का पावरप्ले होगा।
आईसीसी की वेबसाइट पर तालिका में कहा गया है कि छह ओवर की पारी के लिए 1.5 ओवर पावरप्ले के होंगे, सात ओवर की पारी के लिए 2.1 ओवर पावरप्ले के होंगे, आठ ओवर की पारी के लिए 2.2 ओवर, जबकि नौ ओवर की पारी के लिए 2.4 ओवर पावरप्ले के होंगे। 10 ओवर की पारी के लिए तीन ओवर पावरप्ले के होंगे। 11 ओवर की पारी के लिए 3.2 ओवर पावरप्ले के होंगे, 12 ओवर की पारी के लिए 3.4 ओवर पावरप्ले के होंगे।
इसी प्रकार, 13 ओवर की पारी के लिए 3.5 ओवर का पावरप्ले होगा, 14 ओवर की पारी के लिए 4.1 ओवर का पावरप्ले होगा, 15 ओवर की पारी के लिए 4.3 ओवर का पावरप्ले होगा और 16 ओवर की पारी के लिए 4.5 ओवर का पावरप्ले का नियम बनाया गया है। इससे ज्यादा ओवर की पारी होने पर पावरप्ले के ओवर्स नहीं कटेंगे , यानी छह ओवर का ही पावरप्ले होगा।
राजनाथ सिंह ने SCO समिट में साइन से किया इनकार?
चीन के किंगदाओ में गुरुवार को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में साझा बयान पारित नहीं हो सका। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
चीन के किंगदाओ में गुरुवार को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में साझा बयान पारित नहीं हो सका। भारत ने इसका कारण बताते हुए कहा कि उसने इस दस्तावेज में आतंकवाद को लेकर अपनी चिंताओं को शामिल करने की मांग की थी, जो कि एक सदस्य देश को स्वीकार नहीं थी, इसलिए सहमति नहीं बन सकी और इसलिए दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। कहा जाए तो राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे सबक सिखा दिया। वहीं, राजनाथ सिंह के इस एक्शन से चीन को भी नसीहत मिल गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमें जानकारी है कि रक्षा मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान को अपनाया नहीं जा सका। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि कुछ मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई। भारत की ओर से हम चाहते थे कि दस्तावेज में आतंकवाद से संबंधित हमारी चिंता को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, लेकिन एक सदस्य देश को यह स्वीकार नहीं था, फिर भारत ने हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया।
रक्षामंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया
जायसवाल ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में एससीओ सदस्य देशों से एकजुट होकर आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ लड़ने की अपील की। उन्होंने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ बैठक को संबोधित करते हुए आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद को क्षेत्रीय शांति और विश्वास के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और इनके खिलाफ वैश्विक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।
राजनाथ सिंह ने पहलगाम हमले का भी किया जिक्र
उन्होंने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए सीमा पार आतंकी ढांचे को ध्वस्त किया।
रक्षा मंत्री ने एससीओ देशों से आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड को छोड़ने और आतंकवाद को समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराने की अपील भी की। एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह ने दो टूक कहा कि आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति को भी दोहराया।
महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर बवंडर, अठावले भी कूदे
महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी भाषा को पढ़ाए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा होता हुआ दिखाई दे रहा है। मनसे चीफ राज ठाकरे के बाद अब उद्धव ठाकरे भी आरपार के मूड में आ गए हैं। 7 जुलाई को मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन की घोषणा कर दी है।
महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किया गया है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज ठाकरे ने मुंबई में 6 जुलाई को मार्च के आह्वान किया तो उद्धव ठाकरे ने 7 जुलाई को मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन की घोषणा कर दी है। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख ने महाराष्ट्र सरकार पर हिंदी भाषा को जबरदस्ती थोपने का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य पर ‘हिंदी लादने’ की कोशिश कर रही है। ठाकरे बोले कि उनका किसी भाषा या हिंदी भाषी समुदाय से कोई विरोध नहीं है, बल्कि वह जबरन किसी भाषा को थोपने के खिलाफ हैं। ठाकरे की पार्टी की व्यंग्य पत्रिका मार्मिक में कुछ दिन पहले इसी मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस का कॉर्टून कवर पेज पर छपा था। इसमें इसी मुद्दे को उठाया गया था। अब ठाकरे ने अल्टीमेटम दे दिया है। इस मुद्दे पर राज ठाकरे पहले से सरकार पर हमलावर हैं, तो वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महाराष्ट्र में हिंदी भाषा के सम्मान होना चाहिए।
आंदोलन में आने की अपील
ठाकरे ने कहा कि बीजेपी की ‘बांटने और काटने’ की नीति स्पष्ट है। वह मराठी और अन्य भाषियों के बीच जो एकता है, उसे खत्म करने की कोशिश कर रही है। उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया है कि बीजेपी की ओर से भाषाई आपातकाल लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने आपातकाल लगाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने बुधवार को इसका विरोध किया, लेकिन मैं कह रहा हूं कि भाषाई आपातकाल है। उन्होंने कहा कि हिंदी की आड़ में निरंकुशता थोपने की बीजेपी की कोशिश को मराठी भाषी चुनौती दिए बिना नहीं रहेंगे। उद्धव ठाकरे ने लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मराठी भाषियों को दलीय मतभेद भुलाकर आंदोलन में भाग लेना चाहिए। साथ ही साहित्यकारों, कलाकारों, वकीलों, मराठी भाषा के बेटों, मराठी दिल में बसने वालों और बीजेपी में सच्चे मराठी प्रेमियों को भी इस आंदोलन में भाग लेना चाहिए।
आठवले ने मनसे को घेरा
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आठवले ने कहा कि भारत में कई भाषाएं हैं, जैसे मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ओड़िया और बंगाली। लेकिन, देश में एक सामान्य भाषा की जरूरत है, जिसके लिए संविधान सभा और बाबासाहेब आंबेडकर ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में चुना। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी का सम्मान सभी को करना चाहिए। महाराष्ट्र में कुछ लोग हिंदी के खिलाफ बोल रहे हैं, खासकर राज ठाकरे की पार्टी, जिसका आठवले ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि मराठी मीडियम स्कूलों में हिंदी को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए, ताकि दोनों भाषाओं का सम्मान हो। आठवले ने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया इस मुद्दे पर रैली निकालेगी।
केएल राहुल के फैसले ने दिल जीत लिया, करेंगे सलाम
केएल राहुल ने इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें उन्होंने हेडिंग्ले टेस्ट में 137 रनों की बेहतरीन पारी खेली। दिल्ली कैपिटल्स के कोच हेमांग बदानी ने उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने नवजात बच्चे से पहले देश को प्राथमिकता दी।
भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल ने इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज में शानदार शुरुआत की है। हेडिंग्ले में खेले गए पहले टेस्ट मैच में उन्होंने पहली पारी में 42 रन बनाए और उसके बाद शानदार 137 रनों की पारी खेली। हालांकि, इसके बावजूद टीम इंडिया को पहले टेस्ट में जीत नहीं मिल पाई, लेकिन अच्छी बात ये रही कि केएल राहुल ने अपने बेहतरीन लय में दिखे। इसके साथ ही रोहित शर्मा के संन्यास के बाद केएल राहुल को ओपनिंग करने का भी मौका मिल रहा है।
इससे पहले टीम इंडिया में केएल राहुल के लिए कोई भी बैटिंग नंबर फिक्स नहीं था। उन्हें बैटिंग लाइन-अप में एक फ्लोटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब ऐसा लगता है कि वह टीम इंडिया के लिए लंबे समय तक ओपनिंग करते हुए दिखेंगे। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट में उनके प्रदर्शन का श्रेय उनकी प्रतिबद्धता को भी जाता है। बता दें कि इसी साल मार्च में केएल राहुल पिता बने थे। राहुल के लिए यह खास पल था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के लिए खुद को तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
केएल राहुल के फैसले से गदगद हैं हेमंग बदानी
दिल्ली कैपिटल्सके मुख्य कोच हेमंग बदानी ने राहुल की प्रतिबद्धता की सराहना की है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी ने अपने नवजात बच्चे पर देश को प्राथमिकता दी। हेमंग बदानी ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए कहा, मुझे यह बहुत पसंद आया कि वह ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कहा मैं इंग्लैंड जल्दी जाना चाहता हूं। मैं साइड गेम खेलना चाहता हूं। आप उनके शतक को भूल जाओ वह बाद में आया। इरादा यही मायने रखता है। जल्दी वहां पहुंचने का, तैयार रहने का, टीम के साथ रहने का इरादा। यह मत भूलिए, वह एक युवा पिता हैं, और मुझे नहीं लगता कि उनका बच्चा शुरू में उनके साथ यात्रा कर रहा है। इसलिए उनके लिए यह कहना, ‘मेरे बच्चे पर देश’ यह एक बहुत बड़ा निर्णय है।’
शुभांशु शुक्ला ने कभी अंतरिक्ष में जाने का प्लान नहीं किया था
लखनऊ के शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष मिशन पर जाने से उनके शिक्षक बेहद खुश हैं। शिक्षकों ने बताया कि शुभांशु थोड़ा शर्मीला था, लेकिन पढ़ाई और खेल दोनों में ही उत्कृष्ट था। उन्होंने कहा कि शुभांशु का साइंस पसंदीदा विषय था और वह हमेशा अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहता था।
भारत के अंतरिक्ष मिशन पर गए शुभांशु शुक्ला को लेकर लखनऊ में उनके शिक्षकों ने खुशी जाहिर की है। शिक्षकों ने कहा कि वह थोड़ा शर्मीला था। खेल पर बहुत ज्यादा ध्यान देता था। हालांकि, पढ़ाई में भी वह काफी बेहतर था। आज वह देश का नाम रोशन कर रहा है, हम लोगों को बहुत खुशी हो रही है। लखनऊ में गुरुवार को शुभांशु शुक्ला के शिक्षकों के साथ बातचीत की सामने आई है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दिनों में शुभांशु ने कभी अंतरिक्ष में जाने के बारे में प्लान नहीं किया था।
शुभांशु शुक्ला की शिक्षिका श्वेता सक्सेना ने कहा कि शुभांशु स्वभाव से थोड़ा शर्मीला था, लेकिन पढ़ाई में ध्यान देता था। वह खेलकूद में ज्यादा अव्वल रहता था, फिर भी शिक्षा हमेशा उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण रही, जिसने शायद उसे इस उपलब्धि तक पहुंचने में मदद की। हम लोगों की ओर से उसे बहुत शुभकामनाएं हैं। हम चाहते हैं कि वो अपना टारेगट पूरा कर हम लोगों के पास सुरक्षित लौट आए।
शिक्षिका ने आगे बताया कि वह पढ़ाई में टॉप-10 में आता था। सभी सवालों का अच्छे से जवाब देता था। साइंस उसका पसंदीदा विषय था। खेल में उसकी बहुत रूचि थी। जितना खेल पर ध्यान देता था, उतना ही पढ़ाई पर भी ध्यान देता था। उसकी यात्रा बहुत अच्छी रही है। हम चाहते हैं कि हमारे सभी छात्र शुभांशु की तरह की सफल हों।
शिक्षिका अर्चना अग्रवाल ने कहा कि वह हमेशा अपने लक्ष्य को लेकर फोकस रहता था। हालांकि शुरू में उसने कभी विशेष रूप से अंतरिक्ष में जाने के बारे में सोचा नहीं था। हालांकि, उसमें कुछ करने का जज्बा था, उसे अपना नाम बनाना था। आज उसने अपना नाम बनाया है। जिसे देखकर हमें बहुत खुशी हो रही है।
क्लास रूम से अंतरिक्ष तक का सफर
एक अन्य शिक्षिका ने कहा कि शुभांशु मेरी देखरेख में कक्षा 6, 7 और 8 के दौरान हमारे सेक्शन में ही रहा, वह बहुत ही प्यारा बच्चा था। वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करता था, दोस्तों के साथ घुलमिल जाता था, खेल और पढ़ाई में अव्वल था, और हमेशा कुछ हासिल करने और अपना नाम बनाने की तीव्र इच्छा रखता था।
डॉक्टर सुनीता पांडे ने बताया कि शुभांशु शुक्ला काफी अच्छा बच्चा था। खेल में काफी अच्छा था। वह भारत का नाम रोशन कर रहा है तो हमें काफी गर्व है। हमारे लिए बहुत अच्छी बात है। वह क्लास रूम से सीधे अंतरिक्ष तक पहुंचा है, हमें बहुत अच्छा महसूस हो रहा है।
तो पाकिस्तान नहीं खरीद रहा चीनी J-35 फाइटर जेट?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चीन से J-35 लड़ाकू विमानों की 2026 तक डिलीवरी का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान J-35 लड़ाकू विमान को लेकर मीडिया में बातें चल रही हैं। पहले ऐसी खबरें थीं कि पाकिस्तान ने चीन से 40 J-35 विमान खरीदने का समझौता किया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चीन से पांचवीं पीढ़ी के J-35 लड़ाकू विमानों की खरीद लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान को 2026 तक J-35 लड़ाकू विमान नहीं मिल रहा है, बल्कि यह सब मीडिया का किया धरा है। इससे पहले तक ऐसी रिपोर्ट्स थी कि पाकिस्तान ने चीन से 40 J-35 लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर समझौता किया है और वर्ष 2026 तक इन विमानों की डिलीवरी भी शुरू हो जाएगी। J-35 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें चीन ने विकसित किया है। हालांकि, ये विमान अभी परीक्षणों के दौर से गुजर रहे हैं।
ख्वाजा आसिफ ने क्या कहा
ख्वाजा आसिफ से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि J-35 लड़ाकू विमानों के बारे में क्या जानकारी है, क्या ये 2026 तक डिलीवर किए जाएंगे। इस पर ख्वाजा आसिफ ने कहा, “यह केवल मीडिया में है, यह बिक्री के लिए अच्छा है।” इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पाकिस्तान सच में J-35 लड़ाकू विमानों को नहीं खरीद रहा। हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया पिछले एक साल से ज्यादा समय से J-35 की खरीद का ढोल पीट रही है और भारत के खिलाफ एक बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत करती है।
J-35A मध्यम दूरी के संचालन के लिए डिजाइन किया गया एक नई पीढ़ी का स्टील्थ विमान है। इसे एयर सुपीरियॉरिटी और स्ट्राइक मिशन दोनों के लिए डिजाइन किया गया है। नेक्स्ट जेनरेशन के एवियोनिक्स और उन्नत स्टील्थ तकनीक की विशेषता वाले J-35 को J-20 से छोटा बताया गया है, लेकिन कथित तौर पर इसमें जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमताओं के लिए सुधार किया गया है।
J-35 लड़ाकू विमान के दो वेरिएट
चीन के पास J-35 विमान के कथित तौर पर दो वेरिएंट हैं। एक भूमि-आधारित वेरिएंट जिसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स (पीएलएएएफ) के लिए डिजाइन किया गया है। दूसरा, एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरने वाला वेरिएंट है, जिसे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवल एयर फोर्स (पीएलएएनएएफ) के लिए कैटापुल्ट-असिस्टेड टेकऑफ़ (सीएटीओबीएआर) के लिए डिजाइन किया गया है।
पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख ने किया था खरीदने का ऐलान
J-35 लड़ाकू विमान को खरीदने का ऐलान पाकिस्तान के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू ने किया था। 2024 की शुरुआत में संकेत दिया था कि J-35 जल्द ही पाकिस्तान के शस्त्रागार में शामिल हो जाएगा। वहीं, बीओएल न्यूज की रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तानी वायु सेना के पायलट 2024 की शुरुआत से चीन में J-35 विमान को उड़ाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
भारत ने तरेरी आंख तो घुटनों पर आया बांग्लादेश
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस ने देश की कमान संभाली है। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश के भारत के साथ संबंध तल्ख हुए हैं वहीं, चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों में गर्मजोशी बढ़ी है। बांग्लादेश को उम्मीद थी कि भारत के साथ खराब संबंधों उस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन अब उसे लगने लगा है कि पड़ोसी देश की मदद के बिना वह कुछ भी नहीं कर सकता। इस कारण अब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत के साथ बिगड़े संबंधों को सुधारने में जुटी है। यही कारण है कि गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने चीन और पाकिस्तान के साथ किसी भी नए गठबंधन की संभावना से इनकार किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह बांग्लादेश के पड़ोसी देश भारत को लक्ष्य करके नहीं किया गया है।
बांग्लादेश बोला- हम कोई गठबंधन नहीं बना रहे
विदेश मंत्रालय में एक सवाल के जवाब में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हम कोई गठबंधन नहीं बना रहे हैं। यह आधिकारिक स्तर पर बैठक थी, राजनीतिक स्तर पर नहीं… किसी भी गठबंधन के गठन का कोई तत्व नहीं था।” यह पूछे जाने पर कि क्या बैठक का उद्देश्य भारत को किनारे करना था, सलाहकार हुसैन ने कहा कि यह निश्चित रूप से किसी तीसरे पक्ष को लक्ष्य करके नहीं किया गया है। “मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं।
चीन-पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश ने की थी बैठक
ढाका ने कहा कि बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान ने 19 जून को कुनमिंग में 9वीं चीन-दक्षिण एशिया प्रदर्शनी और छठी चीन-दक्षिण एशिया सहयोग बैठक के दौरान एक ‘अनौपचारिक’ त्रिपक्षीय बैठक की। बीजिंग ने कहा कि बांग्लादेश, चीन और पाकिस्तान ने “त्रिपक्षीय सहयोग पर व्यापक चर्चा” की और अच्छे पड़ोसी, आपसी विश्वास, समानता, खुलेपन, समावेशिता और साझा विकास के सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ने पर सहमति व्यक्त की। दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बैठक को “बांग्लादेश-चीन-पाकिस्तान त्रिपक्षीय तंत्र की उद्घाटन बैठक” बताया।
बांग्लादेश बोला- बैठक करना बड़ी बात नहीं
यह पूछे जाने पर कि क्या ढाका इस बात से इनकार करता है कि बीजिंग और इस्लामाबाद ने बैठक का वर्णन कैसे किया। इस पर सलाहकार हुसैन ने कहा कि किसी भी बात से इनकार करने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह “कोई बड़ी बात नहीं थी और न ही कोई छिपी हुई बात थी।” उन्होंने कहा कि बैठक में मुख्य रूप से कनेक्टिविटी और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। “अगर कोई और प्रगति होती है, तो आपको पता चल जाएगा। अटकलें लगाने की बहुत गुंजाइश नहीं है।”
बांग्लादेश ने कहा- पहले जैसे नहीं हैं भारत के साथ रिश्ते
कनेक्टिविटी मोर्चों पर अन्य तंत्रों के बारे में पूछे जाने पर, विदेश सलाहकार ने कहा कि अगर कोई अन्य देश त्रिपक्षीय बैठक करना चाहता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि अगर भारत, बांग्लादेश और नेपाल के साथ ऐसी बैठक करना चाहता है, तो ढाका बैठक करने में रुचि रखेगा। एक सवाल के जवाब में विदेश सलाहकार हुसैन ने कहा कि भारत के साथ संबंध अब ‘पुनर्समायोजन’ के चरण में हैं और ढाका की ओर से इस दिशा में सद्भावना की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा, “देखिए, हमें सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए। भारत और पिछली सरकार के बीच जिस तरह के गहरे संबंध थे और जिस तरह के संबंध भारत ने स्थापित किए थे, हमारे साथ मौजूदा संबंध उस तरह के नहीं हैं।
अमेरिका, रूस, सऊदी अरब… 6-7 साल की बात, इस लिस्ट में भारत भी होगा शामिल”
भारत अगले छह-सात सालों में ऊर्जा का शुद्ध निर्यातक बन जाएगा। अभी हम ऊर्जा खरीदते हैं। लेकिन, जल्द ही हम इसे बेचेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह भरोसा जताया है। उनके मुताबिक, सरकार एथनॉल, बायोडीजल, इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दे रही है। इससे प्रदूषण कम होगा और सामान ढुलाई का खर्च भी घटेगा। नई सड़कें बनने और ईंधन बदलने से लॉजिस्टिक लागत कम होगी।
वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, खासकर कच्चे तेल (पेट्रोलियम) और गैस का। इससे देश पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता है। वह वैश्विक ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील रहता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (मुख्य रूप से कच्चे तेल) को पूरा करने के लिए कई देशों पर निर्भर है। इनमें रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका शामिल हैं।
हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन
नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में ऊर्जा के विषय में कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। सरकार वैकल्पिक ईंधन पर जोर दे रही है। इससे देश को फायदा होगा।
गडकरी ने कहा, ‘आज हम ऊर्जा के आयातक हैं। लेकिन, छह से सात साल के भीतर हम ऊर्जा के निर्यातक बन जाएंगे।’ इसका मतलब है कि अभी हम ऊर्जा खरीदते हैं, लेकिन जल्द ही हम ऊर्जा बेचेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ईंधन बदलने से प्रदूषण कम होगा। साथ ही, सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च भी कम होगा। नई सड़कें बनने और ईंधन में बदलाव होने से लॉजिस्टिक लागत कम हो जाएगी।
लॉजिस्टिक्स लागत में आएगी कमी
गडकरी ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि नई सड़कें बनाने और ईंधन में बदलाव से आपकी लॉजिस्टिक्स लागत सिंगल डिजिट में यानी नौ फीसदी पर आ जाएगी और यह इस साल के अंत तक होगा।’ इसका मतलब है कि सामान ढुलाई का खर्च 9 फीसदी तक कम हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक सर्वे में पता चला है कि भारत की लॉजिस्टिक लागत 6 फीसदी कम हुई है। पहले सामान ढुलाई का खर्च ज्यादा था, लेकिन अब कम हो गया है।
गडकरी ने कहा, ‘आज दुनिया में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में चीन में लॉजिस्टिक लागत आठ फसदी है, अमेरिका और यूरोपीय देशों में यह 12 फीसदी है और भारत में यह 16 फीसदी है, लेकिन अब चीजें तेजी से आगे बढ़ रही हैं।’ इसका मतलब है कि चीन, अमेरिका और यूरोप के मुकाबले भारत में सामान ढुलाई का खर्च ज्यादा है। लेकिन, अब इसमें सुधार हो रहा है।
मंत्री ने लोगों से वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह फायदेमंद है। इससे पैसे की बचत होगी।गडकरी ने कहा, ‘भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमें अपना निर्यात बढ़ाने की जरूरत है। इस कारण से हमें कच्चे माल की लागत को कम करना होगा।’
सरकार का लक्ष्य है कि भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके लिए वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे प्रदूषण भी कम होगा और देश का विकास भी होगा। सरकार चाहती है कि भारत दुनिया में एक मजबूत अर्थव्यवस्था बने। इसके लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।