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*28 जून की ताजा खबर:भारत की दो टूक पर नहीं मान रहे ट्रंप:नहीं रहीं ‘कांटा लगा गर्ल’,मानसून सत्र से पहले भाजपा को मिलेगा नया अध्यक्ष,ईरान पर दौलत की बौछार करेगा अमेरिका! जंग खत्म होते ही सोना धड़ाम, कौन बनेगा 3 राज्यों में BJP अध्यक्ष?,युद्ध खत्म होते ही धड़ाम हुआ सोना*

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आज के बड़े इवेंट

ईरान-इजरायल युद्ध खत्म होते ही धड़ाम हुआ सोना

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध बंद होते ही सोने की कीमत धड़ाम हो गई है। एमसीएक्स पर अगस्त के सोने के वायदा अनुबंध में प्रति 10 ग्राम 1300 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और वैश्विक शेयर बाजारों में सुधार के कारण सोने की मांग में कमी आई है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे MCX पर सोने का भाव 1345 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 95,742 रुपये पर था। 

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध बंद होते ही सोने की कीमत धड़ाम हो गई है। एमसीएक्स पर अगस्त के सोने के वायदा अनुबंध में प्रति 10 ग्राम 1300 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और वैश्विक शेयर बाजारों में सुधार के कारण सोने की मांग में कमी आई है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे MCX पर सोने का भाव 1345 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 95,742 रुपये पर था।

वहीं चांदी के जुलाई वायदा अनुबंध में भी प्रति किलो 2000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई। दोपहर 3 बजे चांदी का भाव 2080 रुपये की गिरावट के साथ 1,04,675 रुपये प्रति किलोग्राम था। सोने और चांदी की कीमतों में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतों में तेजी आई। डॉलर इंडेक्स साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर आ गया, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिला।

जारी रहेगा उतार-चढ़ाव

पृथ्वी फिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने और वैश्विक इक्विटी बाजारों में सुधार से कीमती धातुओं के लिए लाभ सीमित हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आज के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहेगा। डॉलर इंडेक्स और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऐसा होगा।’

दिल्ली में क्या है भाव?

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमत 98,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रही थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 98,050 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रही। चांदी की कीमत में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ। गुरुवार को चांदी की कीमतें 1,03,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहीं।

क्या सोना खरीदने का सही समय?

सोना खरीदने का यह सही समय है या नहीं, इस बारे में एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है। कुछ एक्सपर्ट के मुताबिक सोने और चांदी के दामों में अभी और उतार-चढ़ाव आ सकता है। अगर सोना खरीदना चाहते हैं, तो थोड़ा इंतजार कर सकते हैं। वहीं कुछ के मुताबिक आगे सोने के भाव बढ़ सकते हैं। क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है, खत्म नहीं।

बंगाल, महाराष्ट्र-उत्तराखंड में कौन बनेगा BJP अध्यक्ष?

भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी ने एक्स हैंडल पर एक लिस्ट डालकर इसकी घोषणा कर दी है। महाराष्ट्र के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, उत्तराखंड के लिए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और पश्चिम बंगाल के लिए सांसद रविशंकर प्रसाद को नियुक्त किया गया है।

महाराष्ट्र में रवींद्र चव्हाण का नाम चर्चा में
महाराष्ट्र में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए रवींद्र चव्हाण का नाम लगभग तय माना जा रहा है। वे ठाणे जिले की डोंबिवली सीट से एमएलए हैं। जनवरी 2025 में उन्हें प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन अब उनके नाम की चर्चा तेज है।

उत्तराखंड में इस नाम की चर्चा तेज
उत्तराखंड में प्रदेश संगठन की कमान राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के हाथों में है। प्रदेश अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक बार फिर उन्हें ही इस पद का सबसे मजबूत दावेदार माना गया। अगर परिस्थिति बदलती है तो दूसरा नाम भी सामने आ सकता है।

भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी ने एक्स हैंडल पर एक लिस्ट डालकर इसकी घोषणा कर दी है। महाराष्ट्र के लिए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, उत्तराखंड के लिए केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और पश्चिम बंगाल के लिए सांसद रविशंकर प्रसाद को नियुक्त किया गया है

बंगाल में बैठकों का दौर जारी, रविशंकर चुनेंगे नया प्रदेश अध्यक्ष
बता दें कि कुछ दिन पहले तक बंगाल में नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने के लिए बैठकों का दौर जारी रहा जिसमें कुछ नामों को केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया। अब सांसद रविशंकर प्रसाद को नए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चुनने की जिम्मेदारी दी गई है।

14 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष चुना जाना हैभाजपा को 14 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष चुनेगी। इसके बाद पार्टी एक नया राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुनेगी। जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में पूरा हो गया है। इसलिए भाजपा 21 जुलाई से पहले नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन सकती है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव होना बाकी है।

नहीं रहीं ‘कांटा लगा गर्ल’: 42 वर्ष की उम्र में अभिनेत्री-मॉडल शेफाली जरीवाला का निधन

इंडस्ट्री से एक दुखभरी खबर सामने आई है। मॉडल और अभिनेत्री शेफाली जरीवाला का निधन हो गया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में उनके निधन के बारे में दावा किया गया है। वायरल बयानी की इंस्टाग्राम पोस्ट में भी शेफाली के निधन की जानकारी साझा की है।  शेफाली मुंबई के अंधेरी लोखंडवाला इलाके में रहती थीं। अचानक रात 11 बजे के आस-पास उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। उनके पति पराग त्यागी उन्हें नजदीक के अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने से पहले ही उन्हें मृत घोषित कर दिया। हालांकि अभिनेत्री के निधन के बारे में अधिक जानकारी और परिवार की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। ‘कांटा लगा गर्ल’ के नाम से मशहूर रहीं शेफाली की उम्र 42 वर्ष थी। उन्होंने फिल्म ‘मुझसे शादी करोंगी’ में अक्षय कुमार और सलमान खान के साथ काम किया। 

तबियत खराब होने पर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे पति पराग 
वायरल बयानी ने विक्की ललवानी की पोस्ट का हवाला देते हुए बताया कि शेफाली को उनके पति और तीन अन्य लोग बेलेव्यू मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल लेकर गए। हॉस्पिटल के एक स्टॉफ ने इस खबर की पुष्टि की है कि शेफाली की मौत हॉस्पिटल आने से पहले ही हो चुकी थी। इस हाॅस्पिटल के डॉ. लूला ने इस खबर का खंडन नहीं किया, इतना इतना कहा कि वह किसी भी मरीज के बारे में कोई विवरण नहीं बता सकता हैं। फिर उसी हॉस्पिटल के डॉ. सुशांत ने बताया और खबर की पुष्टि की है, उन्होंने कहा, ‘हम शव को पोस्टमार्टम के लिए कूपर हॉस्पिटल भेज रहे हैं।’   

बिग बॉस 13 में आईं नजर
शेफाली जरीवाला के निधन की खबर से फैंस हैरान हैं। शेफाली ने चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 13 में भी हिस्सा लिया। वे अपने डांस को लेकर भी फैंस के बीच काबिग बॉस 13 में आईं नजर शेफाली जरीवाला के निधन की खबर से फैंस हैरान हैं। शेफाली ने चर्चित रियलिटी शो बिग बॉस 13 में भी हिस्सा लिया। वे अपने डांस को लेकर भी फैंस के बीच काफी लोकप्रिय रहीं।  

वायरल वीडियो में पति नजर आए दुखी

शेफाली के निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर उनके पति पराग का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक गाड़ी में बैठे नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में पराग काफी दुखी दिख रहे हैं। इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में यूजर्स भी शेफाली के निधन की खबर से हैरान हैं। यूजर्स ने एक्ट्रेस के निधन पर दुख जताया है। 

मानसून सत्र से पहले भाजपा को मिलेगा नया अध्यक्ष; 12 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की भी जल्द होगी नियुक्ति

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए करीब एक साल से जारी इंतजार 21 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले खत्म हो सकता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए पार्टी की योजना जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक सहित करीब एक दर्जन राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव कराने की है। इस कड़ी में, राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ के लक्ष्मण ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा, किरेन रिजिजू और सांसद रविशंकर प्रसाद को क्रमश: उत्तराखंड, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 37 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से कम से कम 19 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव अनिवार्य है। पार्टी अब तक 14 राज्यों में ही ऐसा कर पाई है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 37 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से कम से कम 19 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव अनिवार्य है। पार्टी अब तक 14 राज्यों में ही ऐसा कर पाई है। दूसरी बड़ी समस्या राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए बनने वाला निर्वाचक मंडल है।  इस मंडल का सदस्य राष्ट्रीय और राज्य परिषद में शामिल नेता ही होते हैं। इन परिषदों में यूपी, गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है। ऐसे में प्रदेश संगठन के चुनाव के बाद इन परिषदों का कोटा भरे बिना निर्वाचक मंडल नहीं बनाया जा सकता।  

सबसे ज्यादा माथापच्ची यूपी पर
लोकसभा चुनाव में लगे झटके के कारण उत्तर प्रदेश केंद्रीय नेतृत्व की बड़ी सिरदर्दी है। इस सूबे में बड़े बदलाव के लिए नए सिरे से मंथन शुरू हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व को चुनाव में छिटके ओबीसी वोट बैंक को वापस लाने के साथ बसपा के कमजोर होने के कारण उसके वोट बैंक का सपा-कांग्रेस के प्रति आकर्षित होने की काट भी ढूंढनी है। सूबे में नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ व्यापक रोडमैप तैयार होगा। 

दलित या दक्षिण पर मंथन
नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व सियासी कारणों से दलित या दक्षिण को महत्व देना चाहता है। चूंकि विपक्ष भाजपा और मोदी सरकार के संदर्भ में आरक्षण और संविधान को खत्म करने की धारणा बनाने की लगातार कोशिश कर रहा है। इसके अलावा भविष्य की राजनीति के लिए विस्तार को अहमियत देने के लिए भाजपा की निगाहें दक्षिण भारत के राज्यों पर हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि नया अध्यक्ष या तो दलित बिरादरी का होगा या फिर दक्षिण भारत से जुड़ा होगा। 

संगठन को नया रूप देने की तैयारी
राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के बाद पार्टी का जोर संगठन को नया रूप देने पर है। इस क्रम में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की टीम में 60 से 70 फीसदी चेहरे बदले जाएंगे। पार्टी की योजना इन बदलावों के जरिये युवाओं, महिलाओं और समाज के सभी वर्गों को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बड़े बदलाव से पार्टी की सर्वाधिक ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति भी अछूती नहीं रहेगी।

ट्रंप ने कनाडा के साथ खत्म की व्यापार वार्ता; बोले- वह व्यापार के लिए मुश्किल देश

ट्रंप ने कनाडा के साथ टैरिफ समझौते पर बातचीत शुक्रवार को एकतरफा रूप से रोकने की घोषणा की। उन्होंने कहा, कनाडा ने अमेरिकी तकनीकी फर्मों पर नए टैक्स लगाकर खुला हमला किया है। इसलिए उसके साथ व्यापार समझौते की सारी बातचीत रोकी जा रही है और अगले सप्ताह तक वह कनाडा पर नए टैरिफ की घोषणा करेंगे। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी तकनीकी फर्मों कनाडा के कर का विरोध करते हुए उसके साथ व्यापार वार्ता समाप्त कर दी है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हम कनाडा को अगले सात दिनों की अवधि के भीतर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार करने के लिए भुगतान किए जाने वाले टैरिफ के बारे में बताएंगे।

शोसल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ शोसल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कृषि निर्यात पर अत्यधिक टैरिफ का हवाला देते हुए दावा किया कि कनाडा लंबे समय से व्यापार करने के लिए बहुत कठिन देश रहा है। बीते कई वर्षों से उन्होंने डेयरी उत्पादों पर टैरिफ लगाया है, जिससे हमारे किसानों को 400% तक का नुकसान हुआ है।

इस दौरान ट्रंप ने कनाडा पर यूरोपीय संघ के पीछे-पीछे चलने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे (कनाडा) खुले तौर पर यूरोपीय संघ की नकल कर रहे हैं, जिसने भी यही काम किया है। कनाडा पर हमला करते हुए ट्रंप ने कहा कि कनाडा ने अमेरिका को सूचित किया है कि वह सोमवार से लागू होने वाले कर लगाने की अपनी योजना पर कायम है। ऐसे में इस उनकी इस कर योजना के आधार पर हम कनाडा के साथ व्यापार पर सभी चर्चाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका जल्द ही कनाडाई वस्तुओं पर टैरिफ लगाएगा। हम कनाडा को अगले सात दिनों के भीतर बता देंगे कि वे अमेरिका के साथ व्यापार करने के लिए कितना टैरिफ चुकाएंगे।

इससे पहले, कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांकोइस फिलिप कैंपेंग ने 19 जून को घोषणा की थी कि अमेरिका के साथ चल रही वार्ता के बावजूद उनका देश अमेरिकी तकनीकी कंपनियों पर 30 जून से नए टैक्स लगाने की अपनी योजना को टालने नहीं जा रहा है। जिन कंपनियों पर टैक्स लगाया गया है उनमें अमेजन, मेटा, गूगल, एपल शामिल हैं।

क्या है कनाडा का डिजिटल सेवा कर 
कनाडा के डिजिटल सेवा कर के तहत कनाडा में ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के साथ जुड़ने वाले कनाडाई और विदेशी व्यवसायों को कर का भुगतान करना आवश्यक है। डिजिटल सेवा कर से अमेजन, गूगल, मेटा, उबर और एयरबीएनबी जैसी कंपनियों पर असर पड़ेगा, क्योंकि इन कंपनियों को कनाडाई उपयोगकर्ताओं से होने वाले राजस्व पर तीन प्रतिशत का कर देना होगा। यह कर पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगा, जिससे अमेरिकी कंपनियों को महीने के अंत तक 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का बिल देना होगा। 

पीएम मोदी करेंगे जैन संत आचार्य विद्यानंद के शताब्दी समारोह का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को जैन धर्म के महान आध्यात्मिक गुरु व समाज सुधारक आचार्य विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह का उद्घाटन करेंगे। विज्ञान भवन में होने वाले इस आयोजन के मौके पर पीएम मोदी लोगों को संबोधित भी करेंगे।

भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम एक साल तक चलने वाले राष्ट्रीय श्रद्धांजलि समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। इसका उद्देश्य आचार्य विद्यानंद जी महाराज की 100वीं जयंती का सम्मान करना है। साल भर चलने वाले इस समारोह में देशभर में सांस्कृतिक, साहित्यिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक पहल की जाएंगी। समारोह का उद्देश्य आचार्य विद्यानंद जी महाराज के जीवन और परम्परा का जश्न मनाने के साथ-साथ उनके संदेश का प्रसार करना है।

आचार्य विद्यानंद जी महाराज ने जैन दर्शन और नैतिकता विषय पर 50 से अधिक पुस्तकों की रचना की है। उन्होंने विशेष रूप से प्राकृत, जैन दर्शन और शास्त्रीय भाषाओं में शिक्षा के लिए काम किया और देश भर में प्राचीन जैन मंदिरों के जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत की दो टूक पर नहीं मान रहे ट्रंप: अब बोले- परमाणु युद्ध का था खतरा

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव खत्म होने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से श्रेय लेने की होड़ खत्म नहीं हो रही है। जहां एक बार फिर ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रंप ने कहा कि यह टकराव इतना बड़ा हो सकता था कि परमाणु युद्ध में बदल जाता, लेकिन उन्होंने दोनों देशों को धमकी दी कि अगर वे युद्ध करेंगे तो अमेरिका उनके साथ कोई व्यापार नहीं करेगा।

भारत की दो टूक के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध रोकने का श्रेय लेने की होड़ खत्म नहीं हो रही है। जहां एक बार फिर उन्होंने दावा किया है कि मैंने भारत और पाकिस्तान दोनों को चेतावनी दी कि अगर युद्ध हुआ तो अमेरिका सभी व्यापारिक सौदे रद्द कर देगा। इसके बाद दोनों ने कदम पीछे खींचे और संघर्ष खत्म करने पर सहमति जताई। हालांकि भारत हमेशा से ट्रंप ने इन दावों को खारिज करते आया है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति बहुत गंभीर थी। हमने कहा कि सारे सौदे रद्द कर दो, कोई व्यापार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने हमसे संपर्क किया और पूछा अब क्या करें? मैंने कहा अगर व्यापार चाहिए तो युद्ध और परमाणु हमले भूल जाओ। और दोनों ने मान लिया। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के नेता अच्छे हैं और दोनों ने युद्ध न करने का फैसला किया।

भारत के साथ व्यापार के नए रास्ते चाहते है ट्रंप
इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ व्यापार के नए रास्ते खोलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भारत में व्यापार करना बहुत मुश्किल है। लेकिन हम एक ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जिसमें अमेरिका को भारत में व्यापार करने की पूरी छूट मिले। 

भारत ने शुरुआत से ही खारिज किया है दावा
हालांकि, भारत सरकार ने हमेशा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रं के इस तरह के किसी भी मध्यस्थता के दावे को खारिज किया है। भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान के साथ संघर्षविराम की बातचीत सीधे दोनों देशों की सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों डीजीएमओ के बीच हुई थी। साथ ही इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्रंप के साथ हुई हालिया बातचीत में साफ कर दिया कि भारत किसी भी प्रकार की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करता और सभी फैसले सीधे लिए जाते हैं।

 पुरी रथ यात्रा के बीच 600 भक्त अस्पताल में भर्ती

पुरी में रथ यात्रा के दौरान 600 से ज्यादा श्रद्धालु घायल होकर अस्पताल में भर्ती हुए। रथ खींचने में देरी और भारी भीड़ के कारण कई लोगों को चोटें आईं। भगवान बलभद्र के रथ को मोड़ने में कठिनाई हुई, जिससे जुलूस धीमा हो गया। उम्मीद से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने से भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया।

ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान कुछ लोग बेहोश हो गए। गर्मी और उमस के कारण ऐसा हुआ। ओडिशा सरकार में मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि भारी उमस के कारण एक या दो भक्त गिर गए। बचाव दल ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया। मंदिर क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। ग्लूकोज और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। उधर, ओडिशा टीवी डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी रथ यात्रा 2025 के दौरान शुक्रवार को 600 से ज़्यादा श्रद्धालु घायल हो गए या बीमार पड़ गए। रथ खींचने में देरी और भारी भीड़ के कारण यह स्थिति बनी। लोगों को पुरी मेडिकल में भर्ती कराया गया।

क्यों हुई दिक्कत?
दरअसल रथ यात्रा में बहुत ज़्यादा भीड़ थी। इस वजह से कई लोगों को मेडिकल मदद की जरूरत पड़ी। सूत्रों के अनुसार, रथ खींचने में देरी होने से श्रद्धालुओं को चोटें आईं और वे बीमार हुए। भगवान बलभद्र के रथ, तालध्वजा को एक मुश्किल मोड़ पर ले जाने में ज़्यादा समय लगा। इससे रथ यात्रा की गति धीमी हो गई। एक तय सीमा से ज़्यादा लोग अंदर आ गए थे। इससे रथों को चलाने में दिक्कत हुई और भीड़ बढ़ गई। इस साल पुरी में उम्मीद से ज़्यादा श्रद्धालु आए। इससे भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। अधिकारी स्थिति को संभालने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या बोले मंत्री?

मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि तेज उमस के कारण एक या दो भक्त गिर गए। बचाव दल उन्हें तुरंत अस्पताल ले गया। मंदिर क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए भी यहां हूं कि ग्लूकोज और पानी पर्याप्त मात्रा में दिया जा रहा है। मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल भी जाऊंगा कि जरूरतमंदों को उचित स्वास्थ्य सेवा प्रदान की जा रही है।

बांग्लादेश को भारत का एक और झटका, दे दिया क्लि‍यर मैसेज

भारत ने बांग्लादेश से जूट के कुछ उत्‍पादों पर रोक लगाई है। यह रोक सड़क के रास्ते आने वाले सामान पर है। अब ये उत्‍पाद न्हावा शेवा बंदरगाह से आ सकते हैं। पहले रेडीमेड कपड़ों पर भी कुछ रोक लगी थी। सरकार के कदम से भारतीय जूट मिलों को फायदा होगा। जूट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

भारत ने बांग्लादेश से आने वाले कुछ जूट उत्पादों और बुने हुए कपड़ों पर रोक लगा दी है। यह रोक जमीन के रास्ते से होने वाले आयात पर लगाई गई है। हालांकि, इन उत्पादों को न्हावा शेवा बंदरगाह के जरिये भारत में लाया जा सकता है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इस बारे में एक सूचना जारी की है। इससे पहले 17 मई को भारत ने बांग्लादेश से आने वाले रेडीमेड कपड़े और प्रोसेस्ड फूड जैसे कुछ सामानों पर भी बंदरगाह को लेकर कुछ पाबंदियां लगाई थीं। सरकार के ताजा कदम से भारतीय जूट मिलों और किसानों को फायदा मिल सकता है। कारण है कि उन्हें अपने उत्पादों के लिए अधिक बाजार और बेहतर कीमतें मिलेंगी। भारत में जूट का बड़ा उद्योग है।

डीजीएफटी की सूचना के अनुसार, अब कुछ खास जूट उत्पादों को जमीन के रास्ते से नहीं लाया जा सकेगा। लेकिन, अगर इन उत्पादों को न्हावा शेवा बंदरगाह से लाया जाता है तो कोई रोक नहीं होगी

क‍िन उत्‍पादों पर लगाई गई रोक?

जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है, उनमें जूट से बने सामान, सन का धागा, जूट का सिंगल धागा, मुड़ा हुआ धागा, बुने हुए कपड़े और बिना ब्लीच किए जूट के कपड़े शामिल हैं। 17 मई को भारत ने बांग्लादेश से आने वाले कुछ और सामानों पर भी पाबंदियां लगाई थीं। इनमें रेडीमेड कपड़े और प्रोसेस्ड फूड शामिल थे। इन सामानों को भी कुछ खास बंदरगाहों से ही लाने की अनुमति थी।

डीजीएफटी ने अपनी सूचना में कहा है कि जूट उत्पादों पर यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसका मतलब है कि अब इन उत्पादों को जमीन के रास्ते से भारत में नहीं लाया जा सकेगा। भारत सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन, माना जा रहा है कि यह फैसला घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए किया गया है।

डीजीएफटी ने अधिसूचना में कहा, ‘हालांकि, इसे केवल न्हावा शेवा बंदरगाह के माध्यम से अनुमति है।’ इसका मतलब है कि अगर जूट उत्पादों को न्हावा शेवा बंदरगाह से लाया जाता है तो उन पर कोई रोक नहीं होगी।

भारत ने बांग्लादेश को क्या दिया मैसेज?

भारत में भी जूट एक बड़ा उद्योग है। बांग्लादेश से सस्ते जूट उत्पादों की डंपिंग (कम कीमत पर बेचना) भारतीय जूट मिलों और किसानों के लिए समस्या पैदा कर सकती है। यह प्रतिबंध घरेलू जूट उद्योग को बढ़ावा देने और उसे प्रतिस्पर्धी बनाए रखने का एक प्रयास हो सकता है। इससे बांग्लादेश के जूट निर्यातकों को बड़ा झटका लगेगा, खासकर उन पर जो सड़क मार्ग से भारत को जूट उत्पाद भेजते थे। इससे उनके राजस्व और मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।

भारत का मैसेज साफ है कि वह अपने घरेलू जूट उद्योग की रक्षा और उसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत में लाखों किसान और श्रमिक जूट उद्योग से जुड़े हुए हैं। यह प्रतिबंध इस बात का भी संकेत हो सकता है कि भारत बांग्लादेश के साथ व्यापार में अधिक संतुलन और निष्पक्षता की उम्मीद करता है। अगर भारत को लगता है कि बांग्लादेश से आयात भारतीय बाजार को नुकसान पहुंचा रहा है या व्यापार असंतुलित हो रहा है तो ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। यह एक तरह का ‘दबाव’ हो सकता है ताकि बांग्लादेश अपनी व्यापार नीतियों पर पुनर्विचार करे।

हाल के दिनों में भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ राजनयिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव की खबरें आई हैं। भारत ने इससे पहले रेडीमेड गारमेंट और प्रोसेस्ड फूड आइटम जैसे कुछ अन्य बांग्लादेशी सामानों के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया था। इसके अलावा, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और चीन के साथ उसकी बढ़ती निकटता को लेकर भी कुछ चिंताएं जताई गई हैं। ऐसे में जूट आयात पर प्रतिबंध एक व्यापक राजनयिक संदेश का हिस्सा हो सकता है, जो बांग्लादेश को भारत की चिंताओं से अवगत करा रहा है।

 RSS का नकाब फिर से उतर गया… फिर क्यों भड़क गए राहुल गांधी?

आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के एक बयान से देश में नया विवाद शुरू हो गया है। उनके द्वारा संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की बात करने के बाद विपक्ष पूरी तरह से हमलावर हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बिना किसी का नाम लिए आरएसएस पर जोरदार हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरएसएस को संविधान विरोधी बता दिया।

 आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले के एक बयान से देश में नया विवाद शुरू हो गया है। उनके द्वारा संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने की बात करने के बाद विपक्ष पूरी तरह से हमलावर हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी बिना किसी का नाम लिए आरएसएस पर जोरदार हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरएसएस को संविधान विरोधी बता दिया।

क्या कहा राहुल गांधी ने?
लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आरएसएस का नकाब फिर से उतर गया। संविधान इन्हें चुभता है क्योंकि वो समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। आरएसएस-बीजेपी को संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए। ये बहुजनों और गरीबों से उनके अधिकार छीनकर उन्हें दोबारा गुलाम बनाना चाहते हैं। संविधान जैसा ताकतवर हथियार उनसे छीनना इनका असली एजेंडा है। आरएसएश ये सपना देखना बंद करे कि हम उन्हें कभी इस साजिश में सफल होने देंगे। हर देशभक्त भारतीय आखिरी दम तक संविधान की रक्षा करेगा।

क्या बोले थे दत्तात्रेय होसबाले जिसपर हो गया था विवाद
दरअसल, गुरुवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि 1976 में आपातकाल के दौरान ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे दो शब्दों को जबरन संविधान में जोड़ा गया और अब वक्त आ गया है कि इन्हें हटा दिया जाए। उन्होंने कहा था कि 42वें संशोधन के जरिए जोड़े गए ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द कृत्रिम हैं और उन्हें संविधान से अब हटा देना चाहिए।

4 जुलाई से दिल्ली में आरएसएस की महाबैठकराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक महाबैठक 4 से 6 जुलाई तक दिल्ली में होने जा रही है। इस बैठक में, देशभर से आए वरिष्ठ प्रचारक संगठन के प्रशिक्षण शिविरों की समीक्षा करेंगे। इस बैठक में मोहन भागवत और आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले भी भाग लेंगे।

फ्री, फ्री, फ्री…ऐसे तो दे चुके चीन को मात, क्यों डरा रहा है 6400000000000 का ये आंकड़ा?

राज्यों में सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च बढ़ने से बुनियादी ढांचे के विकास पर असर पड़ सकता है। क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2% इन योजनाओं पर खर्च करेंगे। मुफ्त योजनाओं के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका है। राज्‍यों के सामाज‍िक कल्‍याण योजना पर खर्च की यह राश‍ि 6.4 लाख करोड़ रुपये रहने के आसार हैं।

राज्यों का सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च बढ़ने वाला है। अनुमान है कि राज्य इस वित्तीय वर्ष में अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 2% या 6.4 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे। यह हाल के कुछ सालों की तुलना में बहुत ज्यादा है। राज्यों ने महिलाओं के लिए मासिक इनकम और राज्य संचालित बसों में मुफ्त यात्रा जैसी तमाम योजनाएं शुरू की हैं। इसलिए, सामाजिक कल्याण पर खर्च बढ़ा है। आने वाले समय में भी यह खर्च ज्यादा रहने की उम्मीद है। कारण है कि राज्यों ने विधानसभा और आम चुनावों से पहले कई वादे किए हैं। राज्यों का सामाजिक कल्याण योजनाओं पर अपनी कुल GSDP का लगभग 2% या 6.4 लाख करोड़ रुपये खर्च करना बहुत बड़ी रकम है। यह आंकड़ा कई कारणों से चिंता पैदा करता है। चीन को आर्थिक रूप से मात देने के लिए भारत को सिर्फ सामाजिक कल्याण पर खर्च करने से कहीं आगे बढ़कर ठोस और दूरदर्शी कदम उठाने होंगे।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट में कहा है कि कल्याण योजनाओं पर खर्च बढ़ने से राज्यों की बुनियादी ढांचे के विकास और अन्य विकास कार्यों पर खर्च करने की क्षमता कम हुई है। क्रिसिल ने टॉप 18 राज्यों के बजट का विश्लेषण करने के बाद यह बात कही। इन राज्यों का कुल GSDP में लगभग 90% हिस्सा है। केंद्र सरकार भी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), जल जीवन मिशन, पीएम किसान, पीएम आवास योजना और पीएम पोषण जैसी कई कल्याण योजनाओं पर बड़ा खर्च करती है। मनरेगा के लिए केंद्र सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 86,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

ये चेतावनी कैसी?

क्रिसिल ने चेतावनी दी है कि राज्यों के कल्याण योजनाओं पर खर्च से उनका राजस्व घाटा बढ़ेगा। इससे उनकी पूंजीगत व्यय करने की क्षमता कम हो जाएगी। क्रिसिल ने कहा कि GSDP के फीसदी के रूप में इन योजनाओं पर खर्च पिछले वित्तीय वर्ष में भी इसी स्तर पर था। वित्तीय वर्ष 2019 और 2024 के बीच यह 1.4-1.6% था। राज्यों ने आम और विधानसभा चुनावों से पहले महिलाओं, बच्चों, मजदूरों और पिछड़े वर्गों के लिए योजनाओं पर राजस्व व्यय बढ़ाया है। कई राज्यों ने महिलाओं के लिए आय हस्तांतरण योजनाएं शुरू की हैं। इसमें लक्षित समूह को प्रति माह 1,000-2,000 रुपये मिलते हैं। कुछ राज्यों ने राज्य परिवहन बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शुरू की है।

बेशक, सामाजिक कल्याण पर खर्च महत्वपूर्ण है। लेकिन, अत्यधिक और अनियंत्रित ‘मुफ्त’ योजनाएं देश की राजकोषीय स्थिति को कमजोर कर सकती हैं। ये दीर्घकालिक उत्पादक निवेश को बाधित करती हैं। चीन को मात देने के लिए भारत को न केवल सामाजिक समानता पर ध्यान देना होगा, बल्कि उससे भी अधिक, एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी, निर्यात-उन्मुख और नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना होगा।

चीन को मात देने के लिए क्या जरूरी है?

चीन को आर्थिक रूप से पीछे छोड़ने के लिए केवल सामाजिक कल्याण पर खर्च करने से कहीं ज्यादा ठोस और दूरदर्शी कदम उठाने होंगे।

1. उत्पादक निवेश पर ध्यान

बुनियादी ढांचा: सड़क, रेल, बंदरगाह, बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण, जो लॉजिस्टिक्स की लागत कम करता है और उद्योगों को बढ़ावा देता है।

मानव पूंजी विकास: शिक्षा (उच्च शिक्षा सहित), स्वास्थ्य सेवा और कौशल विकास में बड़े पैमाने पर निवेश ताकि एक कुशल और स्वस्थ कार्यबल तैयार हो सके।

अनुसंधान और विकास (R&D): इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और विकास में सरकारी और निजी निवेश को बढ़ाना। चीन ने इसमें भारी निवेश किया है।

2. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का विकास

चीन की आर्थिक सफलता का बड़ा हिस्सा उसके मजबूत विनिर्माण क्षेत्र के कारण है। भारत को ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को और मजबूत करना होगा, जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना को आसान बनाना, टैक्स प्रोत्साहन देना और ग्लोबल सप्लाई चेन में एकीकृत होना शामिल है।

रोजगार सृजन: विनिर्माण क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करता है, जो भारत की युवा आबादी के लिए महत्वपूर्ण है।

3. निर्यात पर जोर

चीन एक निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था है। भारत को अपने निर्यात आधार का विस्तार करना होगा, खासकर उच्च मूल्य वर्धित वस्तुओं और सेवाओं में। प्रतिस्पर्धी बनने के लिए निर्यातकों को समर्थन देना और व्यापार समझौतों पर फोकस करना महत्वपूर्ण है।

4. नीतिगत स्थिरता और व्यापार में आसानी

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए स्थिर और अनुमानित नीतिगत वातावरण जरूरी है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार करने में आसानी) में और सुधार करना, लालफीताशाही कम करना और प्रभावी विवाद समाधान तंत्र स्थापित करना अहम है।

5. वित्तीय अनुशासन और रेवेन्यू ग्रोथ

राज्यों और केंद्र दोनों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा। इसका मतलब है कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखना, कर्ज कम करना और टैक्स बेस को बढ़ाकर राजस्व बढ़ाना। अनावश्यक ‘मुफ्त’ योजनाओं पर लगाम लगाना या उन्हें लक्षित और सशर्त बनाना।

सब्सिडी का युक्तिकरण: कल्याणकारी योजनाओं को ‘मुफ्त’ से ‘सब्सिडी’ में बदलना, जहां जरूरतमंदों को सहायता मिले, लेकिन आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को नहीं।

6. तकनीकी प्रगति को अपनाना

कृषि, विनिर्माण और सेवाओं सहित सभी क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों को अपनाना और डिजिटल इंडिया पहल को मजबूत करना होगा।

5 दिन में 14% चढ़ चुका है गौतम अडानी का यह शेयर, क्या आपके पास है?

अडानी ग्रुप देश का तीसरा बड़ा औद्योगिक घराना है। गौतम अडानी की अगुवाई वाले इस ग्रुप की 10 लिस्टेड कंपनियां हैं। इसका बिजनस कई सेक्टर्स में फैला है। इसका एक शेयर इस हफ्ते 14 फीसदी चढ़ चुका है। जानिए पूरी डिटेल…

अडानी पावर के शेयरों में इस हफ्ते जबरदस्त उछाल आया है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर यह शेयर 14% बढ़कर 607.50 रुपये पर पहुंच गया। शेयरों में इतनी तेजी इसलिए है क्योंकि लोग इसे खूब खरीद रहे हैं। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को यह बीएसई पर इंट्राडे कारोबार में शेयर करीब 5% ऊपर चढ़ा। डेली चार्ट पर अडानी पावर के शेयरों ने इस हफ्ते हर दिन लंबी हरी कैंडल बनाई है। इसका मतलब है कि शेयर की कीमत हर दिन बढ़ रही है।

इस तेजी के साथ ही कंपनी का कुल मार्केट कैप 2.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। टेक्निकली देखें तो अडानी पावर के शेयर अपने डेली एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (DEMAs) से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। DEMAs एक तरह का एवरेज होता है जो शेयर की कीमत के ट्रेंड को दिखाता है। ट्रेंडलाइन के डेटा के अनुसार, स्टॉक का 5-दिन का EMA अभी 558.3 पर है, जबकि 10-दिन का EMA 555.7 पर है।

तकनीकी हाल

20-दिन का EMA 555.0 पर है, और 50-दिन का EMA 548.3 पर है। लंबे समय के मूविंग एवरेज की बात करें तो 100-दिन का EMA 543.3 पर है और 200-दिन का EMA 548.6 पर है। EMA जितना ऊपर होता है, शेयर के लिए उतना ही अच्छा माना जाता है। RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) पर स्टॉक 59 के आसपास है। RSI एक इंडिकेटर है जो बताता है कि शेयर ज्यादा खरीदा गया है या ज्यादा बेचा गया है। 30 से नीचे का RSI ओवरसोल्ड माना जाता है, मतलब शेयर बहुत ज्यादा गिर गया है और अब ऊपर जा सकता है। 70 से ऊपर का RSI ओवरबॉट माना जाता है, मतलब शेयर बहुत ज्यादा बढ़ गया है और अब गिर सकता है।

अडानी पावर के शेयर की कीमत का इतिहास देखें तो पिछले एक साल में यह 15.64% गिरा है। लेकिन कम समय में इसमें अच्छी रिकवरी हुई है। इस साल अब तक यह 14.50% ऊपर है। पिछले छह महीनों में स्टॉक 19.03% बढ़ा है, जबकि तीन महीने में 16.12% की बढ़त हुई है। पिछले एक महीने में स्टॉक 9.14% ऊपर गया है। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 752.15 रुपये है। कंपनी का शेयर पिछले साल पहली जुलाई को इस स्तर पर पहुंचा था।

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