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रूस और चीन के साथ बनेगी भारत की तिकड़ी!
रूस, भारत और चीन की तिकड़ी यानी आरआईसी त्रिपक्षीय फोरम फिर से सक्रिय हो सकता है। रूस के तीन दशक पुराने इस तंत्र को फिर से शुरू करने के आह्वान पर भारत ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि आपसी सहमति से इस पर फैसला लिया जा सकता है।

रूस, भारत और चीन की तिकड़ी यानी आरआईसी त्रिपक्षीय फोरम फिर से सक्रिय हो सकता है। रूस के तीन दशक पुराने इस तंत्र को फिर से शुरू करने के आह्वान पर भारत ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय का कहना है कि आपसी सहमति से इस पर फैसला लिया जा सकता है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पिछले महीने आरआईसी वार्ता फिर से शुरू करने की ख्वाहिश का इजहार किया था। इसके बाद चीन ने अपनी ओर से इसे फिर से शुरू करने पर अपनी सहमति दी है।
आरआईसी पर रूस की अपील और चीन के समर्थन के बाद भारत ने खुलेपन का संकेत दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि यह तीनों देशों को साझा चिंता के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साथ लाता है। उन्होंने बैठक के लिए किसी विशिष्ट समय-सीमा की पुष्टि किए बिना कहा कि तीनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तरीके से कार्यक्रम तय किया जाएगा।
रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने गुरुवार को कहा कि उनका देश त्रिपक्षीय प्रारूप को फिर से शुरू करने के लिए नई दिल्ली और बीजिंग दोनों के साथ सक्रिय वार्ता कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम इस प्रारूप में रुचि रखते हैं। चीन ने भी रूस के प्रस्ताव का समर्थन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि यह तीनों देशों के हितों की पूर्ति करने के साथ दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करता है।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए चीन का दौरा किया है। उनकी चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से द्विपक्षीय वार्ता हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि तीनों देश आरआईसी पर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसा होता है तो डोनाल्ड ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती होगी। इसकी वजह ये है कि रूस, चीन और भारत दुनिया की सबसे बड़ी पांच सैन्य और आर्थिक शक्तियों में शुमार हैं।
क्या है RIC
आरआईसी (रूस, भारत, चीन) की शुरुआत 1990 के दशक में हुई थी। इसे कई साल पहले येवगेनी प्रिमाकोव (पूर्व रूसी प्रधान मंत्री) की पहल पर स्थापित किया गया था। इस त्रिपक्षीय मंच का उद्देश्य प्रमुख गैर-पश्चिमी शक्तियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि बीते कुछ वर्षों से यह फोरम निष्क्रिय रहा है। बीते करीब एक दशक से इसकी कोई महत्वपूर्ण बैठक नहीं हुई है।
चर्च पर हमला कर ईसाई वर्ल्ड में घिरेगा इजरायल!
इजरायल ने गाजा के एकमात्र चर्च पर भीषण हमला किया है। इजरायल के उत्तरी गाजा में स्थित होली फैमिली गिरजाघर पर गुरुवार सुबह हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हुए हैं। गाजा के कैथोलिक चर्च के अधिकारियों ने बताया कि इजरायली हमले में इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इजरायली टैंकों ने चर्च पर हमला किया।
इजरायल ने गाजा के एकमात्र चर्च पर भीषण हमला किया है। इजरायल के उत्तरी गाजा में स्थित होली फैमिली गिरजाघर पर गुरुवार सुबह हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हुए हैं। गाजा के कैथोलिक चर्च के अधिकारियों ने बताया कि इजरायली हमले में इमारत का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इजरायली टैंकों ने चर्च पर हमला किया। इस चर्च की अरब खासतौर से गाजा और आसपास के ईसाईयों में काफी मान्यता है। यहां के पादरी फादर गेब्रियल रोमानेली दिवंगत पोप फ्रांसिस के करीबी रहे हैं।
अल-अहली अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक फदल नईम के अनुसार, गिरजाघर में ईसाई और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों को शरण दी गई थी, जिनमें कई विकलांग बच्चे भी शामिल थे। इस चर्च पर हमले से ईसाई जगत में गुस्सा देखा जा रहा है। इटली की प्रधानमंत्री ने इस हमले की सख्त शब्दों में निंदा की है। पोप लियो ने भी इस पर चिंता जताई है।
मेलोनी और पोप का आया बयान
इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने गिरजाघर पर हमले के लिए इजरायल की सरकार को घेरा है। मेलोनी ने एक्स पर लिखा, ‘गाजा पर इजरायली हमलों में होली फैमिली चर्च भी शामिल था। इजरायल के कई महीनों से नागरिक आबादी पर किए जा रहे हमले अस्वीकार्य हैं। कोई भी सैन्य कार्रवाई इजरायल के कार्यों को उचित नहीं ठहरा सकती। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने हमले को ईसाई पूजा स्थल के खिलाफ गंभीर कार्रवाई कहा है।
पोप लियो ने गाजा के एकमात्र कैथोलिक चर्च पर इजरायली हमले और इससे हुई मौतों पर दुख व्यक्त किया है। वेटिकन के राज्य सचिव कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन की ओर से हस्ताक्षरित पीड़ितों के नाम एक टेलीग्राम में पोप लियो ने कहा कि सैन्य हमले में हुई जानमाल की हानि के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ है।पोप ने गाजा में तत्काल युद्धविराम का आह्वान दोहराते हुए स्थायी शांति की उम्मीद जताई।
गाजा में अक्टूबर, 2023 से इजरायल हमले कर रहा है। 21 महीने से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने गाजा में बड़ा मानवीय संकट खड़ा किया है। इजरायल के हमलों में 58 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं और लाखों घायल हुए हैं। इजरायल ने युद्ध रोकने के दुनिया के आह्वानों को लगातार नजरअंदाज किया है। हालांकि चर्च पर हमले से पश्चिम से उसको मिलने वाले समर्थन में कमी आ सकती है। इससे इजरायल की बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर सीजफायर के लिए दबाव पड़ सकता है।
पहलगाम हमले के दोषी TRF को अमेरिका ने आतंकवादी संगठन घोषित किया
अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान में स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को यह जानकारी दी।यह वही संगठन है जिसने बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पाहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। रुबियो ने आगे कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पहलगाम आतंकी हमले के लिए न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता को दिखाती है।
क्या था पहलगाम आतंकी हमला, भारतीय सेना ने कैसे दिया मुंहतोड़ जवाब
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में TRF के आतंकियों ने निहत्थे पर्यटकों को निशाना बनाया था। 22 अप्रैल को हुए इस कायराना आतंकी हमले में 26 बेगुनाहों की मौत हुई थी। इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत छह-सात मई की दरम्यानी रात नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सेना की इस कार्रवाई को कई आतंकी घटनाओं का जवाब माना गया। पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) के मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान के मुरीदके में मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब, डेविड हेडली और उसके 9 साथियों को आतंकी प्रशिक्षण दिया गया था।
भारतीय सांसदों ने खोली पाकिस्तान की पोल
सेना की कार्रवाई के अलावा भारत के सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों ने 33 देशों की राजधानियों का दौरा कर पाकिस्तान की पोल खोली। अलग-अलग दलों में शामिल 51 सांसदों के अलावा कई राजनयिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौकरशाहों ने ‘टीम इंडिया’ की तरह पाकिस्तानी दुष्प्रचार को धराशायी किया।
शिष्टमंडलों में शामिल सभी लोगों ने दहशतगर्दों के पनाहगाह पाकिस्तान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों को अलग-अलग मंचों पर एक सुर में बेनकाब किया। सभी शिष्टमंडलों ने अल्जीरिया, डेनमार्क, ब्रिटेन, इथियोपिया, फ्रांस, इटली जैसे देशों में भारत का पक्ष मजबूती से रखा। ग्रीस, बहरीन, कतर, रूस, जापान और यूएई जैसे देशों में भी दहशतगर्दों के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति बताई गई।
पीएम आज बिहार और बंगाल को देंगे करोड़ों की सौगात; मोतिहारी और दुर्गापुर में जनसभा भी होगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे और दोनों राज्यों को हजारों करोड़ रुपये की सौगात देंगे। शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी बिहार के मोतिहारी जिले में 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे और दोनों राज्यों को हजारों करोड़ रुपये की सौगात देंगे। शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे प्रधानमंत्री मोदी बिहार के मोतिहारी जिले में 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। पीएम मोतिहारी में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
बिहार में पहला कार्यक्रम, बंगाल में दोपहर करीब तीन बजे…
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि बिहार के मोतिहारी के बाद पीएम मोदी पश्चिम बंगाल जाएंगे और दोपहर करीब 3 बजे दुर्गापुर में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत की रेल, सड़क, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन, इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से संबंधित विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करेंगे। पीएम दुर्गापुर में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।
अमृत भारत ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी
प्रधानमंत्री मोदी बिहार से लखनऊ और दिल्ली के बीच चलने वाली चार नई अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। इनमें पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल से दिल्ली, मोतिहारी के बापुधाम से दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल, दरभंगा से लखनऊ (गोमती नगर) और मालदा टाउन से भाभलगढ़ होते हुए लखनऊ (गोमती नगर) के बीच अमृत भारत ट्रेन शामिल हैं।
ना अगले 100 साल में होगा… दुनिया को हैरान करेगा पूर्ण सूर्यग्रहण, 6 मिनट तक दोपहर में हो जाएगी रात
खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए आसमान में कुछ खास होने जा रहा है। ये खास घटना सूर्य ग्रहण की वजह से होगी। साल 2027 में दुनिया को ऐतिहासिक पूर्ण सूर्यग्रहण देखने को मिलेगा। इस दौरान दोपहर के वक्त आसमान अंधेरे में डूब जाएगा। यह ऐसा सूर्य ग्रहण होगा, जैसा हालिया इतिहास में कभी नहीं देखा गया और अगले करीब 100 वर्ष तक भी नहीं देखने को मिलेगा। यह सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर से शुरू होकर जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, दक्षिणी स्पेन, उत्तरी अफ्रीका से अरब प्रायद्वीप तक जाएगा। हालांकि हिंद महासागर के ऊपर यह धुंधला जाएगा।
दुनिया के बड़े हिस्से को यह सूर्य ग्रहण 2 अगस्त, 2027 को देखने को मिलेगा। इस दौरान सूर्य आंखों से पूरी तरह ओझल हो जाएगा और दुनिया करीब छह मिनट के लिए अंधेरे में डूब जाएगी। यह सैकड़ों वर्षों के इतिहासर का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण होगा। अभी तक इतिहास का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण 743 ईसा पूर्व हुआ था, जब 7 मिनट 28 सेकंड के लिए अंधेरा छा गया था।
अगस्त, 2027 में होने वाला सूर्य ग्रहण का पूर्ण पथ 275 किलोमीटर चौड़ा है। ऐसे में यह कई महाद्वीपों को कवर करेगा। इसे महान उत्तरी अफ्रीकी ग्रहण भी कहा जा रहा है क्योंकि अफ्रीका के ज्यादातर देशों से दिखाई देगा।
2 अगस्त, 2027 के सूर्य ग्रहण अपनी अवधि की वजह से विशेष होगा। यह छह मिनट चलेगा और ऐसा अगले 100 वर्षों तक नहीं होने वाला है। एक्सपर्ट का कहना है कि 2027 के बाद इस तरह का सूर्य ग्रहण शायद 2114 में होगा।
पूर्ण सूर्य ग्रहण कहां-कहां दिखेगा
अगस्त, 2027 का सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर में शुरू होगा और जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के पास जमीन पर उतरेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे पहले दक्षिणी स्पेन, जिब्राल्टर और मोरक्को में दिखाई देगा। इसके बाद अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया और मिस्र में सूर्य ग्रहण तब होगा, जब वह आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होगा।
मिस्र के बाद सूर्य ग्रहण लाल सागर को पार करते हुए सऊदी अरब, यमन और सोमालिया में अंधेरा करेगा। स्पेन के काडिज और मलागा शहरों में चार मिनट से ज्यादा तक पूरी तरह से अंधेरा रहेगा। मोरक्को के टैंजियर और टेटुअन पूर्ण सूर्यग्रहण देखने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में होंगे क्योंकि ये केंद्रीय छाया पट्टी के ठीक नीचे होंगे।
भारत में दिखेगा ग्रहण?
लीबिया का बेंगाजी इस सूर्य ग्रहण को देखने के लिए एक अच्छा स्थान होगा। लीबिया के आसमान में पाच मिनट तक अंधेरा छाया रहेगा। मिस्र के ऐतिहासिक शहर लक्सर के पास छह मिनट तक घना अंधेरा रहेगा। इटली का लैम्पेडुसा द्वीप लगभग पूरी तरह से ढका रहेगा।
सऊदी अरब के जेद्दा और मक्का, यमन और सोमालिया के कुछ हिस्से ग्रहण देखने वाले अंतिम स्थान होंगे। खगोल विज्ञान के इतिहास की इस बड़ी घटना को भारतीय नहीं देख सकेंगे। अगस्त, 2027 का सूर्यग्रहण भारत और आसपास के देशों में दिखाई नहीं देगा।
ओडिशा की छात्रा के आत्मदाह मामले में आज कांग्रेस सहित 8 विपक्षी दलों ने प्रदेशव्यापी बंद बुलाया है। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का आज रायबरेली दौरा था, जिसे रद्द कर दिया गया है।
AAIB ने कहा- पहली रिपोर्ट सिर्फ जानकारी के लिए थी, इसे अंतिम निष्कर्ष न मानें;
अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान हादसे की प्राथमिक रिपोर्ट को लेकर लगाई जा रही तमाम अटकलों पर विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने कहा कि पहली रिपोर्ट सिर्फ जानकारी के लिए थी, इसे अंतिम निष्कर्ष न मानें। ब्यूरो ने आगे कहा कि हादसे की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट जांच पूरी होने के बाद ही साझा की जाएगी।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने गुरुवार को एअर इंडिया विमान पर चुनिंदा और असत्यापित रिपोर्टिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया की आलोचना की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई गैर-जिम्मेदाराना है। ब्यूरो ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों, चालक दल के सदस्यों और अन्य लोगों के परिवारों की…
एएआईबी की पहली रिपोर्ट में क्या?
12 जून को अहमदाबाद में एअर इंडिया के विमान हादसे की जांच कर रही एएआईबी ने अपने प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि हादसे वाले बोइंग ड्रीमलाइनर विमान के दोनों इंजन टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद बंद हो गए क्योंकि ईंधन की आपूर्ति रुक गई थी। एअर इंडिया विमान के ब्लैक बॉक्स की जांच में पता चला कि उड़ान के अंतिम क्षणों में, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से पता चला कि एक पायलट को दूसरे से यह पूछा कि उसने ईंधन स्विच को बंद क्यों किया? इस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया। जांच में पता चला कि उड़ान भरने के तुरंत बाद ईंधन स्विच कटऑफ में बदल गए थे, जिससे विमान के इंजनों में ईंधन की आपूर्ति रुक गई। जो हादसे के मुख्य वजहों में एक माना जा रहा है।
अहमदाबाद में एअर इंडिया विमान हादसा
एअर इंडिया की फ्लाइट एआई 171, जो अहमदाबाद से लंदन के गैटविक जा रही थी, अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के तुरंत बाद एक दुर्घटनाग्रस्त से टकरा गई। इसमें 260 लोगों की मौत हो गई, जबकि सिर्फ एक व्यक्ति जीवित बचा (मृतकों में जमीन और इमारत में मौजदू 19 अन्य नागरिक भी शामिल हैं)। मृतकों में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक (एक जीवित बच गया), सात पुर्तगाली और एक कनाडाई नागरिक भी शामिल है।
कौन हैं द्रुज?: जिन्हें बचाने के लिए सीरिया पर बम बरसा रहा इस्राइल, जानें उनका इतिहास और यहूदी देश से रिश्ता
ले से ही चार देशों से संघर्ष में घिरे इस्राइल ने सीरिया पर हमले क्यों तेज कर दिए हैं? यह द्रुज मुस्लिम कौन हैं, जिन्हें बचाने के लिए इस्राइल ने सीरिया की नई सरकार को निशाना बनाया है? द्रुजों को लेकर ताजा घटना क्या हुई है? इस पूरे घटनाक्रम में आगे क्या हो सकता है? आइये जानते हैं…
इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष शुरू हुए दो साल होने वाले हैं। यहूदी आबादी वाले इस देश ने अब सीरिया की राजधानी दमिश्क समेत उसके तीन प्रांतों को निशाना बनाया है। बताया गया है कि 13 जुलाई को सीरिया के सुवैदा में हुई एक घटना के बाद इस्राइल सीधे तौर पर सीरिया में जारी संघर्ष में कूद गया और वहां की नई कट्टरपंथी सरकार के खिलाफ हवाई हमलों को अंजाम दे रहा है।
द्रुज अरबी बोलने वाले मुस्लिमों का समुदाय है, जो कि मुख्यतः सीरिया में बसा है। इस समुदाय के लोग लेबनान, जॉर्डन और इस्राइल में भी मौजूद हैं। द्रुजों का मूल इस्लाम के इस्माइली शिया संप्रदाय से है, हालांकि 11वीं सदी में इस समुदाय ने कुछ और धर्मों की प्रथाओं को भी अपनाया। इनमें हिंदू धर्म से जुड़ी कुछ परंपराओं को अपनाना भी शामिल रहा। इस समुदाय के लोग ‘पुनर्जन्म’ और ‘आत्मा के एक शरीर से दूसरे शरीर में जाने’ की अवधारणा में यकीन करते हैं। साथ ही इस्लाम के अलावा, ईसाई धर्म और यहूदी धर्म के प्रमुख पारंपरिक शख्सियतों को भी मानते हैं।
इस्लामिक दुनिया में द्रुज अल्पसंख्यक हैं और इसी की वजह से यह समुदाय बाकी मुस्लिम समूहों से अलग रहता है। इस समुदाय में धर्मांतरण को मान्यता नहीं दी जाती। यानी धर्म बदलकर कोई व्यक्ति द्रुज नहीं बन सकता। साथ ही इस समुदाय के लोग संप्रदाय के बाहर विवाह को भी मान्यता नहीं देते।
सुन्नी बहुल सीरिया में कैसे हैं इस समुदाय के हालात?
आधुनिक सीरिया और लेबनान की स्थापना में द्रुज समुदाय का बड़ा हाथ माना जाता है। लेबनान में द्रुज समुदाय प्रोग्रेसिव सोशलिस्ट पार्टी के जरिए राजनीतिक गलियारों में प्रभावी है। वहीं, सीरिया में यह समुदाय अरब समाजवादी बाथ पार्टी का समर्थक रहा है। 1963 में द्रुज सैन्य अफसरों ने सीरिया में तख्तापलट की कोशिशों में भी सहायता की थी, जिसके बाद बाथ पार्टी सीरिया में पहली बार सत्ता में आई थी। यह वही पार्टी है जिसके जरिए सीरिया में अलवी शिया समुदाय से आने वाले हाफिज अल-असद सत्ता में आए थे। बाद में उनके बेटे बशर अल-असद ने भी सीरिया की लंबे समय तक सत्ता संभाली। इन दोनों के शासन में द्रुज समुदाय की स्थिति बेहतर रही।
बीते साल बशर अल-असद के सत्ता से हटने और सुन्नी कट्टरपंथी संगठन हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के प्रमुख अहमद अल-शरा के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही द्रुज मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा का खतरा जताया जाने लगा था। द्रुजों ने इस खतरे से निपटने के लिए दक्षिणी सीरिया के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बना लिया था, ताकि कट्टरपंथी लड़ाके किसी तरह की हिंसा को बढ़ावा न दें पाएं। द्रुजों ने सुवैदा में सीरियाई लड़ाकों की मौजूदगी का भी विरोध किया और अपनी ही छोटी सी सेना के जरिए क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर दिया।
इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की सेहत पर अपडेट साझा किया है। इसरो के अनुसार शुभांशु शुक्ला फिलहाल एक्सिओम स्पेस कंपनी में डॉक्टरों की देखरेख में हैं, जहां इसरो के भी डॉक्टर उनकी तबीयत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को बताया कि अंतरिक्ष से लौटे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की शुरुआती स्वास्थ्य जांच में उनकी तबीयत बिलकुल ठीक पाई गई है और फिलहाल कोई चिंता की बात नहीं है। शुभांशु शुक्ला 15 जून को पृथ्वी पर लौटे थे। वह अमेरिकी प्राइवेट मिशन एक्सिओम-4 के तहत 20 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पर गए थे। वह और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री (पेगी व्हिटसन, स्लावोश उजनांस्की-विस्निवस्की और टिबोर कापू) ‘ड्रैगन ग्रेस’ नाम के स्पेसक्रॉफ्ट में सवार थे, जो कैलिफोर्निया में समुद्र में सुरक्षित लैंड हुआ था।
अंतरिक्ष से वापसी के तुरंत बाद हुई थी जांच
स्पेसक्राफ्ट से बाहर निकलने के तुरंत बाद, सभी अंतरिक्ष यात्रियों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच एक जहाज पर की गई थी। इसके बाद हेलिकॉप्टर से उन्हें एक्सिओम स्पेस कंपनी में ले जाया गया, जहां और भी गहन जांच और बातचीत की गई। शुभांशु शुक्ला को फिर अमेरिका के ह्यूस्टन शहर ले जाया गया, जहां उन्हें एक सप्ताह के विशेष स्वास्थ्य पुनर्वास कार्यक्रम में शामिल किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरिक्ष में बिताए गए समय के कारण शरीर पर पड़े असर को कम करना है।
एक्सिओम कंपनी में डॉक्टर्स कर रहे देखरेख
इसरो ने बताया कि यह कार्यक्रम एक्सिओम कंपनी के डॉक्टरों की देखरेख में चल रहा है और इसरो के डॉक्टर भी इसमें भाग ले रहे हैं। इस पुनर्वास कार्यक्रम में खास तौर पर हृदय की जांच, मांसपेशियों और हड्डियों की ताकत की जांच और मानसिक स्थिति की समीक्षा की जाती है। इसके साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि वह सामान्य जीवन में फिर से सहजता से लौट सकें।
18 दिन तक ISS में शुभांशु ने किए कई प्रयोग
20 दिन की इस अंतरिक्ष यात्रा में शुभांशु शुक्ला ने 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर बिताए। इस दौरान उन्होंने इसरो और नासा की तरफ से तैयार किए गए कई अति-गुरुत्वाकर्षण रहित (माइक्रोग्रैविटी) प्रयोग किए। पूरे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री 320 बार पृथ्वी की परिक्रमा कर चुके थे और उन्होंने कुल मिलाकर 1.35 करोड़ किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की। इसरो ने बताया कि शुभांशु शुक्ला की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है और जल्द ही वह सामान्य जीवन में लौट आएंगे।
‘निमिषा प्रिया की मदद के लिए सरकार कर रही सभी प्रयास’, नाटो प्रमुख के बयान पर भी बोला विदेश मंत्रालय
MEA: विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को अपने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यमन में फांसी की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में अपडेट दिया है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर नाटो प्रमुख के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी है।
यमन में फांसी की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत सरकार उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया, ‘हमने कानूनी मदद उपलब्ध कराई है और उनके परिवार की सहायता के लिए एक वकील भी नियुक्त किया है। हम स्थानीय अधिकारियों और उनके परिवार के संपर्क में हैं ताकि इस मामले का कोई समाधान निकल सकें।’
उन्होंने आगे कहा कि बीते कुछ दिनों में यह कोशिश की गई है कि पीड़ित परिवार को ज्यादा समय मिले ताकि वे दूसरी पक्ष के साथ कोई आपसी सहमति बना सकें। भारत सरकार इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी हर संभव मदद करती रहेगी। इसके अलावा सरकार इस मामले में कुछ मित्र देशों के भी संपर्क में है।
रूसी तेल पर नाटो प्रमुख की टिप्पणी पर भारत की प्रतिक्रिया
वहीं, नाटो महासचिव मार्क रुटे की उस टिप्पणी पर भी विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो देश रूस से तेल खरीदते हैं, उन्हें सेकंडरी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस पर रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमने इस विषय पर आई खबरें देखी हैं और सभी प्रगति पर करीब से नजर रख रहे हैं। मैं साफ कर दूं कि भारत के लोगों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस दिशा में हम बाजार में उपलब्ध विकल्पों और वैश्विक हालात को देखते हुए निर्णय लेते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।
बता दें कि भारत रूस से तेल खरीदता रहा है, जो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद जारी है। अब नाटो प्रमुख के बयान से एक नई बहस छिड़ गई है। इस पर भारत ने साफ कहा है कि उसके अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतें हमेशा प्राथमिकता रहेंगी।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चर्चा जारी- MEA
इस दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘यह एक ऐसा मामला है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा चल रही है। जब कोई बात अंतिम रूप ले लेगी, तो हम जानकारी साझा करेंगे।’
‘पुलिस अधिकारियों ने आरसीबी के ‘नौकर’ की तरह काम किया’, कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में कहा
कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को आईपीएस अधिकारी विकाश कुमार को निलंबित करने के फैसले का समर्थन किया। हाईकोर्ट के समक्ष सरकार ने दलील पेश की है कि पुलिस अधिकारी और उनके सहयोगी आईपीएल के खिताबी जश्न की तैयारियों के दौरान आरसीबी के नौकर की तरह काम कर रहे थे। मालूम हो कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के जीत के जश्न में भगदड़ मच गई थी जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी और 33 लोग घायल हुए थे।
ज्य सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील पीएस राजगोपाल ने अदालत से कहा कि आईपीएल का फाइनल होने से पहले आरसीबी ने पुलिस अधिकारियों को जीत का जश्न मनाने के लिए प्रस्ताव सौंपा था।
राजगोपाल बोले- सीनियर अधिकारियों से परामर्श लिए बिना सुरक्षा व्यवस्था शुरू की
राज्य सरकार की ओर से पेश सीनियर वकील पीएस राजगोपाल ने अदालत से कहा कि आईपीएल का फाइनल होने से पहले आरसीबी ने पुलिस अधिकारियों को जीत का जश्न मनाने के लिए प्रस्ताव सौंपा था। इतने बड़े सार्वजनिक समारोह के लिए अनुमति लेने के बजाय, अधिकारियों ने अपने वरिष्ठों से परामर्श किए बिना या आवश्यक अनुमति की पुष्टि किए बिना ही सुरक्षा व्यवस्था शुरू कर दी।
राजगोपाल ने कहा, आईपीएस अधिकारी की ओर से सबसे स्पष्ट प्रतिक्रिया यह होनी चाहिए थी कि आपने अनुमति नहीं ली है। तब आरसीबी को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता और कानून अपना काम करता। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी से काम न करने की इस विफलता के कारण संचालन संबंधी खामियां और कर्तव्य की गंभीर अवहेलना हुई। यह दलील देते हुए कि 12 घंटे से कम समय में भारी भीड़ के लिए व्यवस्था करना अव्यावहारिक था, राजगोपाल ने सवाल किया कि निलंबित अधिकारी ने उस दौरान क्या कदम उठाए थे। उन्होंने कर्नाटक राज्य पुलिस अधिनियम की धारा 35 का हवाला दिया, जो पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार देती है तथा अधिकारियों द्वारा उस अधिकार का उपयोग न करने की आलोचना की। राजगोपाल ने कहा कि वरिष्ठ स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया था।
सुरक्षा व्यवस्था में कमी की बात कबूली
जब न्यायमूर्ति एसजी पंडित और न्यायमूर्ति टीएम नदाफ की खंडपीठ ने पूछा कि स्टेडियम के अंदर सुरक्षा की निगरानी कौन कर रहा था? इस पर राजगोपाल ने जवाब दिया कि यह राज्य पुलिस थे तथा उन्होंने माना कि सुरक्षा व्यवस्था स्पष्ट रूप से अपर्याप्त थी। उन्होंने निलंबन रद्द करने के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के तर्क, खासकर पुलिस की सीमाओं के प्रति सहानुभूति रखने वाली उसकी टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची में संशोधन पर उठाए सवाल, कहा- चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक नहीं
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक नहीं है। बिहार में मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर जानबूझकर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि 30 तारीख को मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर दिल्ली में एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें गठबंधन के सभी घटक शामिल होंगे। मैं वहां इस बात को सबके सामने रखूंगा।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि सूत्रों के हवाले से एक खबर आई है कि बिहार में मतदाता सूची में संशोधन के दौरान लगभग 35 लाख नाम हटाए जाएंगे। एक अंग्रेजी अखबार का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि सूत्रों के हवाले से एक खबर आई कि तीन दिन पहले इस अखबार में जो डाटा दिया गया था वही डाटा आज भी दिया गया है। तेजस्वी यादव ने दलील देते हुए कहा कि जब प्रक्रिया होती रहती है तो आंकड़ा घटता-बढ़ता भी है, लेकिन दो-तीन दिनों में यह आंकड़ा ना तो घटा है और ना तो बढ़ा है। हूबहू वही नंबर दिया गया है, इसलिए अब सवाल यह भी खड़ा होता है कि अभी भी एक सप्ताह बाकी है, यह 35 लाख की जानकारी कहां से आ गई। तेजस्वी यादव ने कहा कि अभी भी कई जगह बीएलओ मतदाता के घर तक नहीं पहुंचे हैं। एक मौखिक आदेश आया है कि खुद ही साइन करो खुद ही ठप्पा लगाओ और खुद ही अपलोड करो।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि बिहार में मतदाता सूची में संशोधन के मुद्दे पर चंद्र बाबू नायडू ने भी सवाल खड़े किए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप हैं, भाजपा चुप है। कोई जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा है? किसी खबर का पेज दिखाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि यादव बाहुल्य एरिया में नाम काटे जा रहे हैं। साथ ही लोग यह भी कह रहे हैं कि फोन करने पर भी बीएलओ नहीं आते हैं।
चीन के साथ श्रीलंका और इंडोनेशिया जाएंगे असीम मुनीर
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस महीने तीन देशों का दौरा करेंगे। मुनीर की यह यात्रा 20 जुलाई से शुरू होगी और 26 जुलाई तक चलेगी। एक हफ्ते तक मुनीर श्रीलंका, चीन और इंडोनेशिया में रहेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुखों के लिए इस तरह के दौरे कोई नई बात नहीं है लेकिन मुनीर की तीन देशों की यह यात्रा खास है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर इस महीने तीन देशों का दौरा करेंगे। मुनीर की यह यात्रा 20 जुलाई से शुरू होगी और 26 जुलाई तक चलेगी। एक हफ्ते तक मुनीर श्रीलंका, चीन और इंडोनेशिया में रहेंगे। पाकिस्तान के सेना प्रमुखों के लिए इस तरह के दौरे कोई नई बात नहीं है लेकिन मुनीर की तीन देशों की यह यात्रा खास है। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के तहत इंडियन आर्मी के हमले झेलने के बाद पाक की कोशिश भारत को कूटनीतिक स्तर पर घेरने की कोशिश है। इससे भी अहम बात ये है कि पाकिस्तान अपनी इस ख्वाहिश को पूरा करने में चीन का मोहरा बनकर रह गया है।
असीम मुनीर का तीन देशों का यह दौरा सामान्य सैन्य कूटनीति ना होकर सोची-समझी रणनीति है। वैश्विक दक्षिण में भारत के बढ़ते कद से पाकिस्तान और चीन दोनों ही परेशान हैं। ऐसे में मुनीर का यात्रा कार्यक्रम नई दिल्ली के बढ़ते प्रभाव को कम करने की एक कोशिश को दिखाता है, जिसे पर्दे के पीछे से चीन संचालित कर रहा है।
पर्दे के पीछे से चीन की चाल
असीम मुनीर का अपने दौरे पर श्रीलंका और इंडोनेशिया की यात्रा के बीच चीन में रुकना एक्सपर्ट का ध्यान खींच रहा है। यह दिखाता है कि चीन कैसे पाकिस्तान को एक प्रतिनिधि के रूप में इस्तेमाल करके उन क्षेत्रों में पैर जमानी की कोशिश कर रहा है, जहां भारत की मजबूत कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति है।
जी20, ब्रिक्स और आईएमईसी जैसे मंचों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका से निराश चीन, चुपचाप इस्लामाबाद पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए दबाव डाल रहा है। यह कोई रहस्य नहीं है कि भारतीय प्रभाव का मुकाबला करने के लिए चीन और पाकिस्तान अक्सर मिलकर काम करते हैं। मुनीर की यात्रा इसे और जाहिर करती है।
‘सत्यजीत रे से कोई संबंध नहीं’….बांग्लादेश से आया जवाब
बांग्लादेश ने कहा है कि उन्होंने पुराने रिकॉर्ड देखकर पता लगाया है कि मेमेन्सिंघ जिले में जो इमारत तोड़ी जा रही है, उसका सत्यजीत रे या उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है। यह बात तब सामने आई जब भारत सरकार ने इस तरह की घटना पर दुख जताया था। कुछ खबरों में कहा गया था कि बांग्लादेश के मेमेन्सिंघ शहर में मशहूर बाल साहित्यकार उपेंद्र किशोर राय चौधरी का पुश्तैनी घर तोड़ा जा रहा है।
बांग्लादेश ने कहा है कि उन्होंने पुराने रिकॉर्ड देखकर पता लगाया है कि मेमेन्सिंघ जिले में जो इमारत तोड़ी जा रही है, उसका सत्यजीत रे या उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है। यह बात तब सामने आई जब भारत सरकार ने इस तरह की घटना पर दुख जताया था। कुछ खबरों में कहा गया था कि बांग्लादेश के मेमेन्सिंघ शहर में मशहूर बाल साहित्यकार उपेंद्र किशोर राय चौधरी का पुश्तैनी घर तोड़ा जा रहा है। राय चौधरी 19वीं सदी के जाने-माने लेखक, चित्रकार और प्रकाशक थे। वे मशहूर कवि सुकुमार राय के पिता और चर्चित फिल्मकार सत्यजीत रे के दादा थे।
घर तोड़ने पर भारत ने दुख जताया है
इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कहा था, ‘हमें बहुत दुख है कि मेमेन्सिंघ, बांग्लादेश में सत्यजीत रे के दादा और जाने-माने साहित्यकार उपेंद्र किशोर राय चौधरी की पुश्तैनी संपत्ति को तोड़ा जा रहा है।’ MEA ने यह भी कहा कि भारत सरकार सत्यजीत रे की पुश्तैनी संपत्ति की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है।
‘स्थानीय जमींदार की इमारत थी’
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि यह घर एक स्थानीय जमींदार, शशिकान्त आचार्य चौधरी ने अपने बंगले ‘शशि लॉज’ के बगल में अपने कर्मचारियों के लिए बनवाया था। जमींदारी प्रथा खत्म होने के बाद यह सरकार के नियंत्रण में आ गया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस घर का इस्तेमाल जिला शिशु अकादमी के कार्यालय के रूप में किया जा रहा है; और यह जमीन सरकार की थी। इसे शिशु अकादमी को लंबे समय के लिए लीज पर दिया गया था।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से आगे कहा गया है, ‘जिला अधिकारियों ने घर से जुड़े जमीन के रिकॉर्ड की जांच की है। रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन सरकार की है और इसका राय परिवार से कोई संबंध नहीं है। स्थानीय बुजुर्गों और अलग-अलग समुदायों के सम्मानित लोगों ने भी कहा है कि राय परिवार और शिशु अकादमी को लीज पर दी गई जमीन के बीच कोई ऐतिहासिक संबंध नहीं है। यह घर पुरातात्विक स्मारक के रूप में भी दर्ज नहीं है।’ हालांकि, घर के सामने की सड़क, ‘हरिकिशोर राय रोड’, सत्यजीत रे के परदादा हरिकिशोर राय के नाम पर है। हरिकिशोर राय, सत्यजीत रे के दादा उपेंद्र किशोर राय चौधरी के दत्तक पिता थे। राय परिवार का हरिकिशोर राय रोड पर एक घर था, जिसे उन्होंने बहुत पहले बेच दिया था और अब वह मौजूद नहीं है। वहां अब एक नई इमारत बन गई है।
‘तोड़ी जा रही इमारत जर्जर हो चुकी है’
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिस इमारत को तोड़ा जा रहा है, वह जर्जर, खतरनाक और इस्तेमाल करने लायक नहीं थी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि लेखक कंगाल शाहीन ने बताया कि यह जर्जर इमारत हरि किशोर राय या सत्यजीत रे की नहीं है। मंत्रालय ने कुछ और लेखकों और कवियों के नाम भी बताए जिन्होंने कहा है कि जिस इमारत को तोड़ा जाना है, उसका सत्यजीत रे से कोई संबंध नहीं है।
पार्टी और संगठन में फेरबदल की चर्चा के बीच अमित शाह से मिले ब्रजेश पाठक, X पर डिप्टी सीएम ने किया पोस्ट
उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन और मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। इस मुलाकात में प्रदेश के विकास और संभावित परिवर्तनों पर चर्चा हुई।
भाजपा संगठन और योगी मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा तेज है। इसी बीच, गुरुवार को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा है कि यह मुलाकात प्रदेश में होने वाले संभावित फेरबदल को लेकर थी। इससे पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी अमित शाह से मिल चुके हैं। अटकलें हैं कि प्रदेश अध्यक्ष के तय होने के बाद मंत्रिमंडल में भी बदलाव हो सकता है।
ब्रजेश पाठक ने अमित शाह से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत, हमारे पथ प्रदर्शक देश के यशस्वी गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से आज दिल्ली में स्नेहिल भेंटकर प्रदेश की समृद्धि एवं विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर कुशल मार्गदर्शन प्राप्त किया। अपना बहुमूल्य समय एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए आपका हृदय की अनंत गहराइयों से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूं।’
इससे पहले आठ जुलाई को केशव प्रसाद मौर्य ने भी अमित शाह से मुलाकात की थी। ब्रजेश पाठक की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन और मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी बदलाव हो सकता है। अभी सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री हो सकते हैं। यानी अभी भी 6 पद खाली हैं। यह भी हो सकता है कि कुछ मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन में काम करने के लिए भेजा जाए। वहीं, कुछ मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है।
नए मंत्री बनाए जा सकते हैं
भाजपा सरकार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ नए मंत्री भी बनाए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि ब्रजेश पाठक और अमित शाह के बीच इन सभी मुद्दों पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इन बदलावों में नए चेहरों को मौका मिल सकता है और कुछ पुराने चेहरों को संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें भाजपा के अगले कदम पर टिकी हैं।
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