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कश्मीर में सरपंच मंजूर अहमद की हत्या के मायने समझने होंगे? क्या आतंकी ऐसा ही कश्मीर बनाना चाहते हैं?

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एस पी मित्तल, अजमेर

कश्मीर में जब किसी हिन्दू की हत्या होती है तो यह मान लिया जाता है कि कट्टरपंथी सोच वाले आतंकी, हिन्दुओं को पसंद नहीं करते हैं, इसलिए हत्या की गई है। लेकिन जब आतंकी किसी मुसलमान की हत्या करते हैं तो अनेक सवाल उठते हैं। 15 अप्रैल को ही बारामूला के पट्टन इलाके में आतंकियों ने सरपंच मंजूर अहमद की गोली मार कर हत्या कर दी। इससे पहले भी कई मुसलमानों की हत्या आतंकी कर चुके हैं। देश के आम मुसलमान को आतंकियों के इस मकसद को समझना होगा। आतंकी उसी मुसलमान को पसंद करते हैं जो उनकी सोच का हो। यदि कोई मुसलमान उनकी राय से सहमत नहीं है तो उसकी हत्या कर दी जाती है। जाहिर है कि यदि कश्मीर में आतंकियों का दबदबा होगा तो आम मुसलमान भी सुरक्षित नहीं होंगे। क्या ऐसे आतंकियों पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? अनुच्छेद 370 के हटने के बाद आतंकियों के खिलाफ बड़ी और कड़ी कार्यवाही हुई है। यही वजह है कि पिछले दो वर्षों में कश्मीर में आतंकी वारदातों में कमी हुई है, लेकिन अभी आतंकी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं, उससे कश्मीरियों को सबक लेना चाहिए। यदि आतंकियों का प्रभाव बढ़ेगा तो कश्मीर में आम मुसलमान भी मारा जाएगा। आतंकियों को कश्मीर में थोड़ा सा भी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। सुरक्षा बलों के सख्त इंतजामों के बाद भी आतंकी हत्याएं कर रहे हैं, इसके पीछे आतंकियों को स्थानीय मुसलमानों का संरक्षण मिलना है। कश्मीर के लोगों ने महसूस किया है कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन बढ़ा है। कश्मीर का जो प्राकृतिक वातावरण और सौंदर्य है, उसे देखने के लिए देश विदेश से पर्यटक आने लगे हैं। इससे कश्मीरियों को रोजगार मिलने लगा है। कश्मीर में जो बदलाव आया है, उसे भी कश्मीर के मुसलमानों को समझना होगा। कश्मीर में आतंकवाद के रहने से किसी को भी फायदा होने वाला नहीं है। यदि कश्मीर में चार लाख हिन्दू फिर से घर वापसी करते हैं तो आतंकवाद का भी सफाया हो जाएगा। कश्मीर के मुसलमानों को अपने हिन्दू भाईयों को फिर से साने में मदद करनी चाहिए। इतिहास गवाह है कि कोई हिन्दू अपने पड़ोसी मुसलमान की हत्या नहीं करता है। यही वजह है कि मुसलमान, हिन्दू बाहुल्य आवासीय कॉलोनियों में रहने पर अपने आम को सुरक्षित समझता है। जबकि मुस्लिम बहुल्य कश्मीर घाटी में मुसलमान सुरक्षित नहीं है।

पीएफआई की धमकी:
महाराष्ट्र में नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने अथवा आवाज को कम करने की जो मांग की है इसका पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने कड़ा विरोध किया है। 15 अप्रैल को शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद एक मस्जिद के बाहर हजारों लोगों को संबोधित करते हुए पीएफआई के अध्यक्ष मतीन शेखानी ने कहा कि किसी भी मस्जिद से लाउडस्पीकर नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें छेड़ोगे तो हम छोड़ेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि लाउड स्पीकर से अजान का संबोधन मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने महाराष्ट्र की सरकार को चेतावनी दी कि यदि किसी मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाया गया तो परिणाम गंभीर होंगे। यहां यह उल्लेखनीय है कि एमएनएस के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा है कि यदि तीन मई तक मस्जिदों के लाउडस्पीकर की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उनके कार्यकर्ता मस्जिदों के बाहर लाउडस्पीकर लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। एमएनएस और पीएफआई के आमने सामने होने से महाराष्ट्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

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