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आंदोलन दमन से समझौता नहीं करेगा….

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पिछले कुछ समय से नीमच पुलिस की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठे है। अनेको प्रकरणों में पुलिस कर्मी दोषी पाए गए। ऐसे मामले भी है जहाँ पुलिस द्वारा झूठे आरोपों में फ़साने के काम भी किये गए और वह मामले भोपाल तक भी पहुचे, जिन पर विभागीय कार्यवाही की खाना पूर्ति भी हुई। बावजूद इन सबके नीमच पुलिस की कार्य प्रणाली जस की तस है। हर दिन थानों पर लोगो की FIR लिखने से साफ़ मना कर देने की बात सामने आती है। तो कभी थानों पर शिकायत करने के लिए आये लोगो से बदतमीजी की जाती है। आए दिन हो रही इन घटनाओं व कदाचार के कारण पुलिस की छवि ऐसी बनती जा रही है की आम जनता थाने जाने से भी परहेज़ करने लगी है। पुलिस की यह कार्यशैली प्राकृतिक न्याय (Natural justice) के सिद्धान्त को पहले कदम पर ही रोकने का काम कर रही है जो की चिंता का विषय है। ऐसा प्रतीत होता है की कुछ अधिकारी संविधान तक भूल चुके है। इन सभी बातो को मद्देनज़र रखते हुए नीमच में सत्याग्रह व आमरण अनशन चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता कृपाल सिंह मंडलोई पिछले चार दिनों से अनशन पर है और जिले भर के आम नागरिक लगातार समर्थन कर रहे है। 
हमारी मांग है की पुलिस सुधार की दिशा में-• नीमच पुलिस की कार्यशैली में सुधार के लीेए उचित कदम उठाये जावे।• थानों में पुलिस कर्मियों की ओरिएंटेशन ट्रेनिंग करवाई जावे।• पुलिस कर्मियों द्वारा आम और खास से समान व्यव्हार किया जावे।• आम नागरिको से उचित व्यव्हार किया जावे।• दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों पर त्वरित कार्यवाही की जावे।• बिना जाच के एक तरफ़ा कार्यवाही बंद हो और झूठे प्रकरणों का सिलसिला भी बंद हो।
पूर्व DGP प्रकाश सिंह की जनहित याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने यह मना है की पुलीस सुधार (reforms) की जरूरत है,ताकि पुलिस राजनेतिक – रासुखदारो के दवाब के बिना काम कर सके। इसी दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने डायरेक्टिव दिए है। पिछले एक वर्ष में नीमच जिले में हुई कदाचार की घटनाओ की लिस्ट को दखते हुए यह साफ़ है की अब पुलिस सुधार की सख्त जरूरत है। यह घटनाये तो एक जिले भर की है अगर बाकि जगहों की फेहरिश्त बनाई जावे तो ऐसी अनगिनित बातें सामने आयेंगी जो “पुलीस’ शब्द के साथ ठीक नहीं लगते। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों को सरकार द्वारा अविलंभ लागू करवाने का कष्ट करें।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख गाइडलाइंस
• स्टेट सिक्योरिटी कमीशन का गठन किया जाए, ताकि पुलिस बिना दवाब के काम कर सके। • पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी बनाई जाए, जो पुलिस के खिलाफ आने वाली गंभीर शिकायतों की जाँच कर सके।• थाना प्रभारी से लेकर पुलिस प्रमुख तक की एक स्थान पर कार्यावधि 2 वर्ष सुनिश्चित की जाए।• नया पुलिस अधिनियम लागू किया जाए।• अपराध की विवेचना और कानून व्यवस्था के लिये अलग-अलग पुलिस की व्यवस्था की जाए।
आज आन्दोलनस्थल पर पुलिस टीम द्वारा जबरन घुसकर धमकाने की कोशिश की गयी . जिसमे बिना बैच के पुलिस कर्मी भी शामिल थे . आंदोलनकारियो के साथ गाली गलोच किया गया . जब फेसबुक लाइव पर पुछा गया की संविधान की किस धारा के तेहत गाली दी गई और बैच क्यू नहीं है तो पहले फ़ोन छीनने की कोशिश की गयी . जब सवाल लगातार जारी रहे तो पुलिस मौके चली गईआने वाले दिनों में इस तरह के और हमलो को सम्भावना देखते है और यह साफ़ कहते है की मेरे परिवार की किसी भी तरह की जान व माल की हानि होने ही ज़िम्मेदारी प्रशसन की है 
आन्दोलन के सम्रथन में छतरपुर मध्यप्रदेश में एक दिन का उपवास रखा गया . मेधा पाटकर , मग्सेसे अवार्ड प्राप्त समाज प्रोफेसर संदीप पाण्डेय और देश भर के एक्टिविस्टों ने पुलिस की इस हरकत की निंदा की .जितना दमन होगा आन्दोलन उतना तेज़ होगा 

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