भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लालघाटी और हलालपुर बस स्टैंड के नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है। नगर निगम परिषद ने इसे पारित भी कर दिया। नाम बदलने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। BJP विधायक रामेश्वर शर्मा भी खुलकर समर्थन में उतर आए हैं।
इससे पहले हबीबगंज (अब रानी कमलापति) रेलवे स्टेशन का नाम बदला जा चुका है। वहीं, इस्लामनगर, इकबाल मैदान, होशंगाबाद रोड के नाम बदलने की मांगें भी उठती रही हैं। सांसद ने दो नाम दिए हैं। ये बदले भी जा सकते हैं। जानिए, इन दोनों जगहों की क्या हिस्ट्री रही…।
पहले जानते हैं, क्या कहा था सांसद ने
‘गुलामी का हर प्रतीक हटाकर पुन: भारत का इतिहास बदलने का दम रखते हैं। हम भोपाल का भी इतिहास बदलने और पुन: निर्माण करने के लिए खड़े हैं। हलाल नाम अशुद्ध है। इसे हटाया जाना चाहिए। मेरा प्रस्ताव और अनुशंसा है कि हलालपुरा बस स्टैंड का नाम हनुमानगढ़ी बस स्टैंड रखा जाए। लालघाटी चौराहे पर कई हत्याएं हुई हैं। कई वीर-वीरांगनाएं शहीद हुए। उन्हें याद कर नमन करें और चौराहे का नाम श्री महेंद्रनारायण दास जी महाराज सर्वेश्वर चौराहा रखा जाए।’
सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ने 3 नवंबर को हुई नगर निगम परिषद की मीटिंग में नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। जिसे सर्व-सहमति से मंजूरी दी गई। सांसद ने लालघाटी और हलालपुर बस स्टैंड का नाम बदलने का प्रस्ताव दिया है।
…कांग्रेस में हिम्मत हो तो विरोध करें
सांसद ने निगम की मीटिंग में प्रस्ताव रखा। इस पर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने दोनों ही प्रस्ताव को पारित किए जाने की बात कही। इस पर सदन ने तालियां बजाकर स्वागत किया। वहीं, हुजूर विधायक शर्मा भी समर्थन में उतरे। उन्होंने कहा कि अच्छा फैसला है। कांग्रेस में हिम्मत हो तो विरोध करें। जनता जवाब देगी।
अब दोनों जगहों के बारे में जान लेते हैं
लालघाटी और हलालपुर बस स्टैंड के इतिहास के बारे में ‘चौथा पड़ाव’ किताब के लेखक और वरिष्ठ पत्रकार विजयदत्त श्रीधर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लालघाटी पर रानी कमलापति के बेटे का बलिदान हुआ था। अफगान दोस्त मोहम्मद खान के नापाक इरादे को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह 100 लड़ाकों के साथ लालघाटी में युद्ध करने चला गया। इस घमासान युद्ध में मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया। इस जगह पर इतना खून बहा कि यहां की जमीन लाल हो गई। इस कारण इसे लालघाटी कहा जाने लगा।
भोपाल का लालघाटी इलाका। कहा जाता है कि युद्ध में मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया था। लड़ाई के दौरान यहां की जमीन लाल हो गई। इसके बाद इसका लालघाटी नाम पड़ा।
हलालपुर का नाम ऐसे पड़ा
हलालपुर मूलत: इस्माइलनगर है, जिसका मूल नाम जगदीशपुर है। यह दांगी राजाओं का था। वहां के दांगी राजाओं से दोस्ती करने के बहाने सरदार दोस्त मोहम्मद ने उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया। नदी के किनारे पंडाल लगाया। फिर अचानक धोखे से पंडाल राजाओं के ऊपर गिरा कर मार दिया। उनका लहू हलाली नदी में गिरा दिया गया। पहले नदी का नाम कुछ और था, लेकिन इस घटना के बाद नदी का नाम हलाली नदी रखा और फिर बस स्टैंड का नाम हलालपुर बस स्टैंड हो गया।
लालघाटी के पास हलालपुर बस स्टैंड। इसे महंत श्री नरहरिदास बस स्टैंड के नाम से भी जाना जाता है। यहां राजाओं की हत्या की गई थी, इसलिए इसका नाम हलालपुरा पड़ गया।
भोपाल में पहले भी बदले जा चुके हैं नाम, या मांग की
ऐसा नहीं है कि भोपाल के विभिन्न इलाकों के नाम बदलने की मांग पहली बार हुई हो। पहले भी नाम बदले जा चुके हैं या फिर मांगें की गई है। इनके बारे में भी जानते हैं…।

