इंदौर
बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक 1.7 किमी की स्मार्ट सड़क पर नया विघ्न आ गया है। जिस कंपनी ने टेंडर लिया था, वह झूठी निकली है। इस वजह से टेंडर निरस्त कर निगम ने 19.75 लाख की अर्नेस्ट मनी जब्त कर ली है। हालांकि शहर का नुकसान कई गुना ज्यादा हुआ है। एक कंपनी पहले काम छोड़कर जा चुकी है। देरी से लागत 5 करोड़ बढ़ गई है।
निर्माण में अब 3 माह ज्यादा लगेंगे, जबकि अफसरों ने बारिश के दौरान ही लोगों से 90% निर्माण तुड़वा लिए हैं। रोड के लिए राजेंद्र सिंह बंबू इन्फ्रा को 34.90 करोड़ में ठेका मिला था। लॉकडाउन में काम नहीं हुआ तो कंपनी ने हाथ खींच लिए। दोबारा टेंडर लैंडमार्क को मिला, लेकिन उसने कर्नाटक सहित अन्य स्थानों पर चल रहे काम की जानकारी छुपा ली। आपत्ति आने पर शुक्रवार रात निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने टेंडर निरस्त कर दिया।
- 1.7 किमी की है यह स्मार्ट सड़क
- 34.90 करोड़ में दिया था पहला टेंडर
- 39.50 करोड़ तक पहुंची दूसरे टेंडर में लागत
- 90% निर्माण तोड़ चुके हैं लोग यहां।
नए टेंडर में 9 महीने का समय, दावा छह माह में बनाने का था
पहली कंपनी को रोड बनाने का टेंडर 34.90 करोड़ में मिला था। दूसरे और तीसरे टेंडर में रोड की लागत 39.50 करोड़ तक पहुंच गई है। इतना ही नहीं, शॉर्ट टेंडर में रोड बनाने के लिए कंपनी को 9 महीने का समय दिया गया है, जबकि लोगों के निर्माण तुड़वाते समय अधिकारियों ने 180 दिन यानी छह माह में सड़क बनाने का वादा किया था।
अफसरों का तर्क देर नहीं होगी, ड्रेनेज व स्टार्म लाइन डालना है
स्मार्ट सिटी के सीईओ ऋषव गुप्ता ने बताया 39.50 करोड़ का नया शॉर्ट टेंडर जारी कर दिया है। 18 अक्टूबर को खुल जाएगा। इसके बाद कंपनी काम शुरू कर सकती है। हालांकि बड़ा गणपति से कृष्णपुरा छत्री तक का काम इससे प्रभावित नहीं होगा। क्योंकि अभी हमें बाधाएं हटाने के साथ स्टॉर्म वॉटर और ड्रेनेज लाइन डालनी हैं। इसमें 45 दिन लगेंगे।

