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*28 वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन में मूलतापी घोषणा पत्र सर्वसम्मति से पारित*

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मुलतापी। मुल्तापी में 1998 में किसानों के शति पूर्ण आंदोलन पर गोली चालन में 24 किसानों की मौत के बाद हर वर्ष 12 जनवरी को मुल्तापी में शहीद किसान स्मृति सम्मेलन का आयोजन किया जाता रहा है। इस वर्ष भी आयोजन महात्मा गाधी के पोत्र तुषार गांधी और न्याय मूर्ति कोलसे पाटिल के आतिथ्य में आयोजित हुआ। जिसमें मूलतापी घोषणा पत्र पारित किया गया।

मुलतापी किसान आंदोलन पर गोलीचालन के बाद गत 28 वर्षों से किसान संघर्ष समिति द्वारा शहीद किसानों की स्मृति में सम्मेलन एवं किसान पंचायत का आयोजन किया जाता है। सम्मेलन में उपस्थित किसान, संघर्ष और रचना का संकल्प लेकर मुलतापी घोषणा पत्र जारी करते हैं।
28वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन और 337वीं किसान पंचायत में निम्न मूलतापी घोषणा पत्र सर्वसम्मति से पारित किया गया ।

  1. आजादी के आंदोलन के मूल्यों और समाजवादी आंदोलन के मूल्यों को लगातार धराशाई किया जा रहा है । लोकतंत्र और संविधान खतरे में है ।
  2. उग्र धर्मांधता तथा जातिवादी राजनीति के चलते बहुविधता पर आधारित सांस्कृतिक ताना – बाना ध्वस्त किया जाना। स्वतंत्रता आंदोलन में उभरी हुई जाति – धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक विविधता में एकता वाली भारत की संकल्पना (idea of India) पर आघात हो रहा है।
  3. दो-चार बड़े कॉरपोरेट्स के हाथ में पूरी आर्थिक, औद्योगिक व्यवस्था समेटी गई है जिसके चलते हमारे प्राकृतिक संसाधनों का अपरिमित दोहन, उन पर आधारित समाज समूहों का विस्थापन, पर्यावरण का विनाश और बढ़ती बेरोजगारी और विषमता यह कड़ी चुनौती है।
  4. लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को निष्प्रभ करते हुए, सच बरतने वाले कार्यकर्ता – पत्रकारों को जेल में बंद करते हुए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संकुचित करते हुए, राज्य /सत्ता के कदम तानाशाही की तरफ बढ़ते जा रहे हैं।
  5. हमारे पंचशील पर आधारित, सभी देशों से सौहार्द के संबंध रखने वाले, युद्धखोरी में मध्यस्थ की भूमिका अदा करने वाले परराष्ट्रीय संबंध आज दुर्बल हो गए हैं। हमारे देश की संप्रभुता और निष्पक्षता के कारण विश्वभर में भारत का जो सम्मानजनक स्थान था वह अब नहीं रहा। हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध दोस्ती के नहीं रहे। फिलिस्तीन में हो रहे मानव संहार पर भारतीय शासन चुप है। यह सब हमारे बुद्ध – गांधी के देश के लिए लज्जास्पद है। संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लंघन हो रहा है।
  6. जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकट दुनिया पर मंडराते हुए भी, अपने देश में और दुनिया में पृथ्वी और प्रकृति के साथ आजीविका और जीवन को बचाने के प्रयास की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने के बजाय, अपनी विकास नीति का पुनर्विचार करने के बजाय, उसी पूंजीवादी विनाशकारी विकास की दिशा मे आगे बढ़ना बड़ी आपदाएं, राज्य – राज्य में विध्वंस बढ़ा रही है।
    भावी कार्यक्रम
    हम संकल्प लेते हैं कि –
  7. 16 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आहूत अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस का समर्थन करते हुए भागीदारी करेंगे।
  8. 12 फरवरी की आम हड़ताल का समर्थन।
  9. बीज विधेयक और बिजली सुधार विधेयक को लेकर देशभर में चल रहे संकिमो के आंदोलन का समर्थन करते हैं।
  10. मनरेगा योजना की बहाली को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन में भागीदारी करेंगे।
  11. सोनम वांगचुक, सरजील इमाम, उमर खालिद की रिहाई की मांग करते हैं।
  12. अमरीका द्वारा वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी की निंदा करते हैं
    हम लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई को लेकर चलाए जा रहे आंदोलनों में भागीदारी करेंगे।
  13. देशभर के वंचित, पीड़ित, शोषितों को हर संवैधानिक अधिकार – शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका आदि – दिलाने के लिए हम दलित, आदिवासी, किसान, श्रमिकों की संगठित जनशक्ति द्वारा सत्याग्रही कार्य चलाएंगे।
  14. विविध धर्मों के त्यौहार सभी धर्मों के अनुयायियों के साथ एकजुटता से मनाएंगे।
  15. देशभर में ‘नशामुक्ती’ के लिए, नशाबंदी कानून लाने के लिए जनप्रतिनिधियों के लिए शराब व्यापार के खिलाफ सत्याग्रह, संवाद और निवेदन जैसे माध्यमों द्वारा जनशक्ति जगाएंगे। अवैध शराब बिक्री रोकेंगे / ग्रामसभा, बस्ती सभाओं में नशा मुक्ति के प्रस्ताव पारित करवाएंगे।
  16. समता, न्याय, शांति और मानवीय मूल्यों के लिए कला समूहों और कला चेतना सम्पन्न युवा पीढ़ी को तैयार करेंगे । यह कला चेतना सम्पन्न युवा पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण,सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास, पाखंड, असमानता , अपसंस्कृति के खिलाफ़ सामाजिक – राजनैतिक चेतना जगा एक प्रगतिशील जन संस्कृति का संवर्धन करेगी। हर राज्य / क्षेत्र में ‘कलापथक’ निर्माण करके, उसे जनजागरण का माध्यम बनाएंगे।
  17. जैविक खेती, सामूहिक / सहकारी संस्था द्वारा रोजगार निर्माण, ग्रामोद्योग, गृह उद्योग द्वारा स्थानीय संसाधनों से उत्पादन और वितरण के मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे।
  18. अंधश्रद्धा निर्मूलन के लिए ढोंगी, फर्जी प्रस्तुतियों का अहिंसक विरोध करेंगे।
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