समता संपर्क अभियान का राष्ट्रीय समागम पुरी उड़ीसा में संपन्न
रीवा 21 जून। समता संपर्क अभियान का राष्ट्रीय समागम पुरी उड़ीसा में 14 से 17 जून तक संचालित किया गया। पुरी से वापस आने पर संगठन के राष्ट्रीय संयोजक अजय खरे ने यहां चार दिवसीय कार्यक्रम का विस्तृत लेखा जोखा प्रस्तुत किया है। उड़ीसा शराब विरोधी आंदोलन की नेत्री एवं लोकतंत्र सेनानी समाजवादी चिंतक स्वर्गीय किशन पटनायक की धर्मपत्नी वाणी मंजरी दास के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश बंगाल और उड़ीसा के लगभग आधा सैकड़ा प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय समागम में हिस्सेदारी की।

कार्यक्रम का पहला दिन और अंतिम दिन प्रतिभागियों का आपसी परिचय एवं ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के रूप में संपन्न हुआ। 15 जून को रखे गए प्रथम सत्र को गांधी जयप्रकाश नारायण लोहिया और किशन पटनायक के विचारों को लेकर नया समाज बनाने का सपना देखने वाले लोकतंत्र सेनानियों को मंचासीन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन वाणी मंजरी दास पटनायक ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्षता पूर्व विधायक बिहार सूर्य देव त्यागी ने की। मंचासीन लोकतंत्र सेनानियों रघुपति पटना बिहार , कालिका सिंह कैमूर बिहार , बजरंग सिंह मिहीजाम झारखंड , कृष्ण वल्लभ सहाय धनबाद झारखंड, अजय खरे रीवा मध्यप्रदेश , रामायण पटेल रीवा मध्यप्रदेश ने लोकतंत्र , संविधान एवं देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन ममता शर्मा भोपाल मध्य प्रदेश ने किया। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा लोकसभा चुनाव परिणामों से तात्कालिक रूप से तानाशाही का खतरा कम हुआ पर खत्म नहीं हुआ है। चुनाव परिणाम देश के लोकतंत्र संविधान और राजनीतिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जनता ने मोदी सरकार पर अंकुश रखने के साथ विपक्ष को भी सबक सिखाया है। विपक्षी दलों की असफलता यह है कि वह तानाशाही के खिलाफ उपजे वातावरण के आधार पर मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल नहीं कर सके । फिर भी जनता ने मोदी सरकार मोदी गारंटी और 400 पार जैसे अहंकारी और जन विरोधी अलोकतांत्रिक मंसूबों पर पानी फेर दिया। अपने आप को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बताने वाली भाजपा 400 पार के दावे के बावजूद महज 240 के आंकड़े तक सिमट कर रह गई। विपक्षी दलों की रणनीति में कमी नहीं होती तो चुनाव परिणाम 1977 की तरह होते। यहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनाव हार जाते। वक्ताओं ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान पर खतरा भले कुछ समय के लिए टल गया हो लेकिन आने वाले समय में बड़ी लड़ाई लड़नी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता में तीसरी बार वापसी किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। रस्सी जल गई लेकिन ऐंठन नहीं गई की कहावत चरितार्थ हो रही है। मोदी सरकार के फिर से सत्तारूढ़ होने के बाद उसके नापाक मंसूबे दिखलाई देने लगे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी को रोका जा रहा है। 15 साल पुराने सरकार विरोधी वक्तव्यों को आधार बनाकर मोदी सरकार लोकतंत्र के सजग प्रहरियों को निशाना बना रही है। समागम में इस बात को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश बलिया के वरिष्ठ समाजवादी साथी डॉ जेपी सिंह ने की। इसमें मजदूरों एवं किसानों की वर्तमान दुर्दशा पर चर्चा की गई। मोदी सरकार को देश के बड़े पूंजीपति चला रहे हैं जिसके चलते किसान मजदूर एवं गरीब वर्ग के लोगों का जीना हराम हो गया है। उनकी स्थिति गुलामों जैसी बनती जा रही है। मंचासीन कौशल गणेश आजाद गया बिहार , अशोक मानव आरा भोजपुर बिहार, धरणीधर प्रसाद गिरिडीह झारखंड , बृजवासी तिवारी रीवा मध्य प्रदेश , रामजनम वाराणसी उत्तर प्रदेश के सारगर्भित उद्बोधन में किसानों एवं मजदूरों की लड़ाई लड़ने के लिए चल रहे जन आंदोलनों के साथ निरंतर भागीदारी बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन समता संपर्क अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक राजेश दुबे पटना बिहार ने किया।
16 जून को समता संपर्क अभियान के विशेष सत्र में देश के युवाओं के वर्तमान एवं भविष्य को लेकर सरस्वती दुबे की अध्यक्षता में विशेष चर्चा रखी गई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वाणी मंजरी दास पटनायक भुवनेश्वर उड़ीसा और मुख्य वक्ता समता संपर्क अभियान की राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ सुनीता त्यागी बिजनौर उत्तर प्रदेश को बनाया गया। मंच पर डॉ श्रद्धा सिंह रीवा मध्य प्रदेश , आशा राठौर मिहीजाम झारखंड, मालती उपाध्याय कोलकाता पश्चिम बंगाल ने भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का संचालन ममता शर्मा भोपाल ने किया। वक्ताओं ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी के साथ जबरदस्त खिलवाड़ हो रहा है। रोजगार मिलने की संभावनाएं काफी क्षीण हो गई है। नोटबंदी और कोरोना काल के दौरान करोड़ों की संख्या में लोगों के रोजगार छीने गए हैं। सरकारी नौकरियां काफी कम कर दी गई है और निजीकरण के चलते नौजवानों को काफी कम मेहनताने पर काम करना पड़ रहा है। उन्हें कब निकाल दिया जाए इस बात का कोई ठिकाना नहीं है। पहले लोग वेतन से अपने पूरा परिवार का खर्च चलाते थे लेकिन अब खुद का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। देश में बेरोजगारी इतने बड़े पैमाने पर है कि सरकार द्वारा आयोजित परीक्षाओं में कुछ हजार पदों के लिए करोड़ों लोग बैठते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हो रहे हैं। रोजगार की तलाश में युवक युवतियों की उम्र बढ़ती जा रही है। उनका निजी एवं पारिवारिक जीवन गहरे संकट मेंं है। पूंजीवादी व्यवस्था के चलते बेरोजगारी की समस्या विकराल होती जा रही है। आने वाला समय काफी विस्फोटक हो सकता है। इस बारे में सरकार को अपने मनमानी जन विरोधी तौर तरीके बदलने की जरूरत है।
चार दिवसीय कार्यक्रम में मंचासीन वक्ताओं के अलावा सतना से मनसंतोष , रीवा से जितेन्द्र सिंह , श्रवण प्रसाद नामदेव, पीके तिवारी , रमाशंकर शुक्ला , द्रौपदी तिवारी , मयंक तिवारी , निशा तिवारी, शैल तिवारी , मानवती पटेल , गिरिडीह झारखंड से विभा देवी , मानवेंद्र पाठक ,धनबाद झारखंड से रामनाथ श्रीवास्तव अंजना श्रीवास्तव , जयप्रकाश सिंह , मनेर पटना बिहार से अखिलेश यादव, सासाराम बिहार से धीरेंद्र पांडे , रेणु देवी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।