भोपाल(हिन्द न्यूज़ सर्विस) राजनीति में वैसे तमाम खेल खेले जाने की चर्चाएं लोग चटखारे लेकर करते नजर आते हैं, मध्यप्रदेश की सत्ता की कुर्सी पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के काबिज होने की शुरुआत भी भाजपा के नेताओं की एक सोची समझी रणनीति के सुश्री उमा भारती को बेदखल कर किस तरह से भाजपा के नेताओं ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने खबरें से इस मध्यप्रदेश की आमजनता ही नहीं बल्कि भाजपा के नेता भी भलिभांति परिचित हैं?
यह अलग बात है कि वह अनुशासन में बंधे होने के कारण कुछ भी खुलकर नहीं बोल पाते हैं? पर दबी चुवाव से वह यदाकदा इस घटना का स्मरण का खुलासा करते हुए.उस घटना को याद करके चटखारे लेकर यह कहने में नहीं हिचकते कि हमारे नेताओं ने जिस राजनीति के चलते उमश्री को मुख्यमंत्री के पद से बेदखल किया था? वह उस मध्यप्रदेश की हमारी पार्टी का भाजपा का हमारे अपने प्रदेश में नहीं बल्कि देशभर शक्तिशाली संगठन पितृपुरुष कुशाभाऊ ठाकरे जी कार्यशैली की बजह से जाना जाता था.भाजपा के यह बरिष्ठ नेताओं का कहना कि इस बात से हमारे देश की सत्ता की कमान जिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में है, वह भी जब 1998 के विधानसभा चुनाव के समय हमारे मध्यप्रदेश के संगठन मंत्री हुआ करते तब उन्होंने ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गुरु स्व. सुन्दर लाल पटवा की शासन की कार्यशैली के कारण हमारे प्रदेश में भाजपा के हाथों में प्रदेश की सत्ता आते आते किस तरह से दूर हुई थी वह सब इसी मध्यप्रदेश की भाजपा पार्टी के संगठन मंत्री के रहते देखा है?
इन भाजपाई नेताओं के अनुसार आज मध्यप्रदेश में सत्ता कमान स्व. पटवा के चेले की सरकार की कार्यशैली के कारण भी मध्यप्रदेश में भाजपा की यह स्थिति हो गई कि एक समय जिस हमारे प्रदेश की भाजपा के संगठन का पुरे देश में नाम था? उसे दमोह उप चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था? यह नेता का कहना है कि दमोह चुनाव में मिली करारी पराजय के बाद भी हमारे प्रदेश के नेताओं ने कोई सबक नहीं लिया ? लेकिन इन बरिष्ठ भाजपाई नेताओं का यह कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल की कार्यशैली के कारण ही 2018 के आम चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पडा था? वह इसे पार्टी का सौभाग्य मानते हैं कि कांग्रेस के उपर से मध्यप्रदेश के कांग्रेस के नेताओं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के पुत्र मोह के चलते ग्वालियर राज्य के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों की उपेक्षा से नाराज सिंधिया ने कांग्रेस से पल्ला झाड़ कर अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा का दामन थामकर भाजपा को प्रदेश में सरकार बनाने का अवसर दिया, लेकिन उस समय भी हमारे नेताओं ने प्रदेश की सत्ता की कमान शिवराज सिंह चौहान के हाथों देने भूल की उसके परिणाम भाजपा को दमोह में हुए उपचुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था? इन बरिष्ठ भाजपाई बरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान भले ही अपनी कार्यशैली के चलते अपने विरोधियों को निपटाने में महारथ हासिल हो मगर इससे भाजपा के नेता भी अछूते नहीं हैं? इन भाजपा के बरिष्ठ नेताओं का कहना यह भी है कि यदि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार की कार्यशैली पर लगाम नहीं लगया गया तो भाजपा की उनके गुरु स्व. सुन्दर लाल पटवा के शासन की कार्यशैली की तरह इस मध्यप्रदेश की एकबार पुना; होने बाली है? क्योंकि पार्टी में अब भाजपा के उन बरिष्ठ निष्ठाबान नेताओं की जगह सत्ता के दलालों और माफियाओं की भरमार तो हो गई है? तो वहीं उन नेताओं ने जो उमाश्री भारती के शासनकाल में अपनी सपत्ति ही नहीं कारोबार समेटकर ही नहीं बेचकर भोपाल में बसने का मन बना चुके थे? एसे नेताओं को शिवराज सिंह चौहान की सरकार में तबज्जो दिए जाने का जो सिलसिला चला उसके चलते आज उनकी संपत्ति इतना हुया उसे देखकर प्रदेश की विपक्षी दल के नेता ही नहीं आमजनता तक यह कहने लगी है कि भाजपा भ्रष्टाचार की जननी है? क्योंकि मुख्यमंत्री के शासनकाल में उपर से लेकर नीचे बही भ्रष्टाचार की गंगौत्री में डुबकी लगाकर भाजपा के उन नेताओं की माली हालत में इस कदर बदलाव आना भी इस तरह की चर्चाओं को बल देती हैं? शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल की कार्यशैली का ही नतीजा है कि इस राज्य की सत्ता की कमान शिवराज सिंह चौहान के संभालने के पहले जिन भाजपाई कार्यकर्ताओं और नेताओं की स्थिति टुटी साइकिल की नहीं थी? आज वह आलीशान भवनों ही नहीं लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते जनता पर धुंआ छोड़ते नजर आ रहे हैं? जबकि आदिवासी, दलित और गरीबों के हमदर्द होने का ढिंढोरा पीटने बाले शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में गरीबों की संख्या में इस तरह से इजाफा हुआ है कि मध्यप्रदेश की आबादी से आधी आबादी से ज्यादा गरीबों की संख्या हो गई जिनके नाम पर बांटे जाने बाले मुफ्त में अनाज वितरण के नाम पर करोड़ों का खेल भी धडल्ले से चल रहा है? तो वहीं दूसरी और मध्यप्रदेश सरकार की चलने बाली योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की रंगगौली सजाकर मुख्यमंत्री के चहते अधिकारी स्वंय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुमराह तो कर ही रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री से उन्हीं फर्जी आंकड़ों की बदौलत तारीफ कराकर वाहवाही लूटने लगे हैं? इन भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के चहते अधिकारियों के द्वारा केन्द्र सरकार को प्रेषित फर्जी आंकड़ों की मध्यप्रदेश के मैदानी स्थिति का जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी जांच कराले तो उन्हें भी इसबात का एहसास हो जाएगा कि जिस “मध्यप्रदेश को वह बीमारू राज्य से बाहर निकालने को लेकर शिवराज सिंह चौहान की तारिफों के पुल बांधते हैं, उसी मध्यप्रदेश में विकास के नाम पर खडे़ किए गए भौरूबाबाओं की स्थिति क्या है? तब हमारे प्रधानमंत्री को यह भी जानकारी नहीं होगी कि जो उनके चहते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी अपने चहते अधिकारियों को सूखा पर्यटन के नामपर प्रदेश की जमीनी हकीकत का जायजा ले चुके हैं? जिस सूखा पर्यटन के उनके अधिकारियों ने जो रिर्पोट अपने मुख्यमंत्री को सौपी थी, उसमें उन अधिकारियों ने लिखा था कि प्रदेश के आम नागरिकों सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी तक नहीं हैं यही नहीं इन अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में इसबात का उल्लेख किया था कि सरकारी योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है? मगर अपने चहते अधिकारियों के द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपी गई उस रिपोर्ट को गंभीरता से लेने का परिणाम 2018 के आमचुनाव में सत्ता से बेदखल भाजपा की सरकार को होना पडा था? फिर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया, जिसके परिणाम दमोह उपचुनाव में भाजपा को करारी पराजय का भुगताना पडा़ था? अब प्रदेश में हो रहे चुनावों में भी अपने पार्टी के निष्ठाबान नेताओं की जो उपेक्षा कर दुसरे दलों से आयातित नेताओं को लाकर चुनावी समर उतार यह साबित कर दिया कि पार्टी में चुनाव में खडे करने लायक भाजपा में नेता नहीं है? शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा की इस मिलीजुली साजिश की जुम्मेदारी पार्टी हाईकमान पर डाल कर उन्हें भी अपनी साजिश के लिए जुम्मेदार बना लिया? लेकिन इस चुनाव में जो खेल शिवराज सिंह चौहान और वीडी शर्मा ने खेला उससे 2023 में होने बाले चुनाव में पार्टी द्वारा अपनाई जाने बाली रणनीति के यह संकेत दे दिए हैं कि यह दोनों सत्ता और संगठन के नेताओं की चली तो उस समय भी पार्टी बाहरी नेताओं को चुनाव में खडा करने में नहीं हिचकेंगे? इससे यही संदेश जाता है कि उस भाजपा में अब उन कार्यकर्ताओं की कोई हैसियत नहीं बची जो यह दावा करती थी भाजपा में एक चाय बेचने बाला, या पोस्टर लगाने बाला कार्यकर्ता भी प्रधानमंत्री बन सकता है? मगर अब मध्यप्रदेश में भाजपा की खस्ता हालत को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और संगठन के मुखिया चुनाव में उतारने बाली नीति में बदलाव कर दिया है, अब नीति के अनुसार भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं को सरकारी नौकरशाहों से मिलकर अपने हैसियत सुधार की छूट देकर मौज करने के लिए छोड़ दिया है एसी चर्चीएं लोग चटखारे लेकर नजर आते हैं? यही बजह है कि जोबट में कांग्रेस पार्टी से सुलोचना को लेकर उन्हें चुनावी समर में उतारे की नीति अपनाई गई? अब देखना यह है कि जोबट के वर्षों से पार्टी में कार्य करने बाले अपनी उपेक्षा को किस तरह से लेते हैं? अलिराजपुर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं की पार्टी द्वारा की उपेक्षा को लेकर तरह तरह की चर्चाएं लोग चटखारे लेकर करते नजर आ रहे हैं?

