इंदौर
‘इंदौर को लोग स्वच्छता की राजधानी ही नहीं, स्वाद की राजधानी भी कहते हैं। छप्पन ही नहीं, यहां सराफा भी घूमकर आइएगा।’
ये शब्द हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के। जनवरी 2023 में हुए इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आए मेहमानों से उन्होंने यह बात कही थी।

तो जायके में आज सराफा का एक और जायका हम आपके बीच लाए हैं, वो है जोशीजी का फ्लाइंग दही बड़ा। कभी सिर्फ 50 पैसे से भी कम में मिलने वाला दही बड़ा आज 70 रुपए प्लेट (बड़े साइज का दोना) है। जितना इसका स्वाद लजीज है, इसे बनाने का तरीका उतना ही दिलचस्प।
चबूतरे से हुई दही बड़ा बनाने की शुरुआत
दही और कई तरह के मसालों के साथ मूंग की दाल के यह दही बड़े बनाने की शुरुआत जोशी परिवार ने सराफा में एक चबूतरे यानी ओटले पर की थी। जिस तरह से इसे उछाल कर बनाया जाने लगा, यह पूरे इंदौर में फेमस हो गया। मसाले मिलाने का तरीका भी अनूठा ही है। चाहने वाले इसे फ्लाइंग दही बड़ा कहने लग गए।
उन दिनों की बात याद करते हुए परिवार बताता है कि ‘नाथद्वारा से 70 किमी दूर बागाना गांव से करीब 80 साल पहले बुजुर्ग हिंदू राम जोशी (60) इंदौर आ आए। यहां आने की वजह अपने गांव और आसपास के लोगों के साथ इंदौर आकर कुछ करने और कमाने की इच्छा थी।
यहां कुछ वक्त तक मेहनत-मजदूरी की, फिर अपने कारोबार का सोचा। शुरुआत के लिए सराफा बाजार को चुना। हिंदूराम जोशी ने सबसे पहले कचोरी और पकौड़े बनाना शुरू किए। लोगों को पसंद आने लगे। दो कचोरियों की कीमत तब एक आना रखी थी।
हिंदूराम ने अपने बेटे रामचंद्र के नाम पर दुकान का नाम रखा ‘रामचंद्र जोशी कचोरीवाला’। रामचंद्र बड़े हुए तो उन्होंने ही सबसे पहले गर्मी में दही बड़े बनाने का प्रयोग किया। ये लोगों को कचोरी और पकौड़ी से भी ज्यादा पसंद आए।
जैसे ही यहां के दही बड़े लोगों की जुबान पर चढ़े दुकान का नाम ही बदलकर ‘जोशी दही बड़ा हाउस’ करना पड़ा। आज भी इंदौर आने वाले या ठेठ इंदौरी जोशी के दही बड़े खाने जरूर आते हैं। अब दुकान दो भाई ओमप्रकाश और हंसराज मिलकर संभालते हैं। दोनों रामचंद्र के बेटे हैं।
40 पैसे का दही बड़ा आज 70 रुपए का
हंसराज जोशी ने बताया कि सन् 1965 में दही बड़ा 40 पैसे का बिका करता था। समय के साथ बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए इसके दाम भी बढ़ाते गए। यहां आज 70 रुपए का एक दोना मिलता है। इसका आकार सामान्य दही बड़े से अधिक होता है।
दही बड़े के अलावा यहां भुट्टे का किस (40 रुपए 100 ग्राम), कचोरी (20 रुपए), पेटीस (25 रुपए), आलू बड़ा (20), मिर्ची बड़ा (25 रुपए), गुलाब जामुन (40 रुपए 100 ग्राम) भी मिलता है। 1955 में ही रामचंद्र जोशी ने भुट्टे के किस की शुरुआत की थी। भुट्टे के किस का ये स्वाद भी लोगों को काफी पसंद आया।
अब बात करते हैं यहां के फ्लाइंग दही बड़े की…
हंसराज के भाई ओमप्रकाश ने दही बड़े से भरे दोने को उछालने की प्रैक्टिस शुरू की। यह भी यहां की पहचान बन गई। 18 साल की उम्र से ही ओमप्रकाश दहीबड़े से भरा दोना उछालते आ रहे हैं। उनका दावा है कि वे 12 फीट ऊंचाई तक दोना उछाल लेते हैं। आज तक भरे दोने से एक बूंद भी दही नीचे नहीं छलका।
इसके कारण ही लोगों ने इसे ‘फ्लाइंग दही बड़ा’ कहना शुरू कर दिया। पहले वे कुछ ही ऊपर तक प्लेट को उछाल पाते थे। मगर तीन से चार सालों की प्रैक्ट्रिस के बाद वे दहीबड़े की भरी हुई प्लेट को हवा में 12 फीट ऊपर तक उछालने में परफेक्ट हो गए। ओमप्रकाश कहते हैं उनके अलावा दुकान में कोई और दही बड़े की प्लेट को हवा में नहीं उछाल पाता है।
गोल-गोल घूमते हुए हवा में नजर आती है प्लेट
जब ओमप्रकाश जोशी दही बड़े की प्लेट हवा में उछालते हैं तो उन्हें देखने वालों की भीड़ लग जाती है। दुकान पर आने वाला हर ग्राहक इसी उम्मीद में आता है कि जोशी दही बड़े की प्लेट को हवा में उछालते हुए दिख जाएं। हालांकि वे अपनी दुकान पर आने वाले छोटे बच्चे के कहने पर भी दही बड़े की प्लेट को हवा में उछालकर दिखा देते हैं। प्लेट भी गोल-गोल घूमते हुए ऊपर हवा में जाती है और वापस उनके हाथों में आती है।
जोशी से ही जानते हैं दही बड़ा बनाने की प्रोसेस
- खड़े मूंग की दाल गलाते हैं। दो घंटे बाद अपने हाथों से ही उसे घट्टी पर पीसते हैं। करीब आधे घंटे तक फेंटते हैं। बड़े को आकार देकर गर्म और गहरे तेल में तला जाता है। तलने के बाद इन बड़ों को नमक के पानी में छोड़ दिया जाता है।
- दही घर पर ही जमाते हैं। सियागंज से खड़े मसाले लाकर उन्हें साफ किया जाता है। इनकी सिकाई कर पीसते हैं। दही बड़े के ऊपर मसालों में नमक, लाल मिर्च, काली मिर्च, जीरा और अजवाइन डाला जाता है।
- दावा है कि हमारे यहां के दही बड़े का स्वाद जैसा सन् 1960 में था, वैसा ही आज भी है। हम क्वांटिटी की जगह क्वालिटी को प्राथमिकता देते हैं। एक बार हमारे यहां दही बड़े खत्म होने के बाद अगले ही दिन खाने को मिलते हैं।
- इसके लिए प्रोसेस सुबह 7 बजे शुरू हो जाती है। सुबह 11 बजे दुकान खुलती है, रात 11 बजे तक खुली रहती है। सुबह 7 बजे दोनों भाई पहुंच जाते हैं।
और अब जानिए कैसे तैयार होता है दही बड़े का दोना
ओमप्रकाश सबसे पहले बड़े को दही से भरे भगोने में डाल देते हैं। यह दही अच्छे से फेंटकर शकर डालकर तैयार किया जाता है। भगोने से चम्मच में लेकर बड़े को दोने में रखा जाता है। फिर बड़े को दोने में ही चूरकर उसमें और दही डालते हैं।
इसके बाद इमली की खट्टी-मीठी चटनी डालते हैं। और सबसे आखिरी में मसाले। इन मसालों में नमक, लाल व काली मिर्च, अजवाइन, जीरा पाउडर आदि शामिल रहते हैं। दही बड़े से भरे एक दोने का वजन करीब 400 ग्राम होता है। इसमें 150 ग्राम दही होता है।
ओमप्रकाश जोशी के दही बड़े की प्लेट हवा में उछालने के अलावा एक और खासियत है। ये अपने हाथ की एक उंगली में ही दही बड़े पर डलने वाले सभी मसाले, जिसमें नमक, लाल मिर्च, काली मिर्च, जीरा और अजवाइन छिपा लेते हैं। वे एक उंगली से ही एक-एक कर दही बड़े पर मसाला डालते हैं। ये सीखने के लिए भी उन्हें काफी प्रैक्टिस करना पड़ी। आज भी लोग इस बात से आश्चर्य में रहते हैं कि वे ऐसा कैसे कर लेते हैं।
जानते है यहां के ग्राहक क्या कहते हैं
इंदौर की सुमित्रा नागर कहती है कि पिछले 20 साल से वे जोशी जी के दही बड़े खाने आ रही हैं। जब उन्होंने यहां आने की शुरुआत की तब दही बड़ा 20 रुपए का मिलता था। इसका स्वाद उन्हें बहुत अच्छा लगता है और उन्हें काफी पसंद भी है। आज भी वो यहां पर दही बड़ा खाने आते हैं। दहीबड़ा का स्वाद आज भी वैसा ही है, जैसा पहले था। भानपुरा के रहने वाले सक्षम जैन कहते है कि वे पहले भी चार से पांच बार यहां पर दही बड़े खाने आ चुके है। बहुत अच्छा स्वाद है यहां के दही बड़े का। यहां का बेस्ट दही बड़ा है। दही बड़ा उछालते हुए तो नहीं देखा, लेकिन उसके बारे सुना बहुत है। यहां के कई ग्राहक ऐसे है जो दूर-दूर से यहां दही बड़ा खाने आते है।