इंदौर
खासगी ट्रस्ट की संपत्तियों को सरकारी खाते में डालने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी पर मंगलवार को सुनवाई हुई। ट्रस्ट के कामकाज की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में शिकायत करने वाले तथा सुप्रीम कोर्ट में इंटरविनर बने हरिद्वार के विजय पाल को शीर्ष अदालत ने बड़ा झटका दिया है। उनकी इंटरविनर बनने की अर्जी तो खारिज की ही, साथ ही 25 लाख रुपए की कॉस्ट भी लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पाल यह पैसा जमा नहीं कराएं तो अचल संपत्ति बेचकर वसूली की जाए।
जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस रवि कुमार की खंडपीठ इस मामले को अंतिम रूप से फरवरी के तीसरे सप्ताह में सुनेगी। ट्रस्ट की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी, अभिनव मल्होत्रा पैरवी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर लंबे समय से रोक लगा रखी है।
मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इंटरविनर को कड़ी फटकार भी लगाई। इंटरविनर की ओर से दायर अर्जी में कोर्ट पर ही सवालिया निशान लगा दिए गए थे। इस पर अदालत ने गहरी नाराजगी जाहिर की। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह की अर्जी से कोर्ट का समय भी खराब किया गया है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में ट्रस्ट के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी। डिविजन बेंच ने सरकार को आदेश दिए थे कि ट्रस्ट की संपत्तियों का सर्वे कर उसे सरकारी कब्जे में लिया जाए।

