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 मुख्यमंत्री को चाटुकारों ने दी महँगी बधाइयाँ.

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पार्टी विथ डिफरेंस के जुमले से तो भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आते ही पिंड छुड़ा चुकी है।पार्टी सत्ता की संस्कृति में पूरी तरह रच-बस कर पार्टी विथ सिमिलरिटी मे कांग्रेस को पीछे छोड़ती जा रही है.इसकी झलक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज के आज याने ५ मार्च को हैप्पी बर्थडे पर प्रमुख अख़बारों में छपे बधाइयों के विज्ञापनों मे देखी जा सकती है.चाटुकारिता की होड़ में आगे निकलने की धुन में छुटभैये नेताओं को आगे कर बड़े-बड़े विज्ञापन छपवा मुख्यमंत्री को बधाई दी गईं हैं.जाहिर है बड़े-बड़े विज्ञापनों का खर्च भी बड़ा ही होगा !
क्या सवाल है की इनका भुगतान वे ही करते हैं जिनके नाम से ये छपवाए जाते हैं..? मेरा अनुभव कहता है-हरगिज नहीं! मै जब जिलों में जनसंपर्क अधिकारी हुआ करता था तब मुख्यमंत्री के आगमन आदि पर ऐसे विज्ञापन जनप्रतिनिधियों की तरफ से छपवाए जाते थे और विज्ञापन के बिलों को भुगतान के लिए जिले के सिंचाई जैसे कमाऊ विभागों के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया करते थे.वे भी बिना हीला-हवाला ख़ुशी-ख़ुशी भुगतान कर देते थे, क्योंकि कौन उनकी जेब से रकम जानी थी !पैसा तो घूम फिर कर हमारा आपका खर्च होता है.
व्यापम घोटाले में दिग्विजयसिंह ने जब सीधे सीधे मुख्यमंत्री शिवराज पर हमला बोला तब उन्होने फ़रमाया की राजे-महाराजों को आम आदमी का मुख्यमंत्री बनना रास नहीं आ रहा है.पर मुख्यमंत्रीजी जन्मदिन की बधाई महंगे विज्ञापनों के मार्फ़त देना भी तो राजे-महाराजों जैसी शैली है ?राज ताज गया और रियासतें नहीं रहीं,राजे महाराजे भी लद गए.अब तो उमुख से यही निकलता है कि लोकतंत्र के राजा-महाराजा याने काले अंगरेज याने राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,गवर्नर,मुख्यमंत्री,मंत्री और सांसद-विधायक आदि चिरायु हों. श्री प्रकाश दीक्षित द्वारा

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