नई दिल्ली, दलित आदिवासी शक्ति अधिकार मंच (दशम) ने सफाई कर्मचारी संगठनों और यूनियन की बैठक की जिसमें सफाई कर्मचारियों के लिए मुवावजे एवं आजीविका के उपर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की | दसम विगत कुछ वर्षों से ठेके पर काम करने वाले सीवर सफाई कर्मचारियों के साथ काम कर रहा है | पिछले एक वर्ष में दशम ने दिल्ली सारकार के जिन संस्थानों के समक्ष सफाई कर्मियों के मुद्दों को रखा उनमें दिल्ली सफाई कर्मचारी आयोग, शहरी विकास विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, विधान सभा की संसदीय अनुसूचित जाति/जनजाति समिति और 10 जनप्रतिनिधियों (विधान सभा सदस्य) प्रमुख हैं |
दिल्ली सफाई कर्मचारी आयोग के इस पहल के लिए दशम आभार व्यक्त करता है और सीवर में काम करते हुए कर्मचारियों की मृत्यु पर मुवावजे की राशी रु० 10 लाख से बढ़ाकर रु० 25 लाख करने की शिफारिश की सराहना करता है |
सफाई कर्मचारी संगठनों को यह उम्मीद है कि सीवर / सेप्टिक टैंक के कर्मचारियों के अन्य प्रमुख मुद्दों जैसे उनकी स्थायी नियुक्ति, ठेकेदारी प्रथा का उन्मूलन, घायलों का इलाज एवं उनको मुवावजा, दुर्घटना में घायलों की आजीविका सुनिश्चित करना, स्थाई नियुक्ति होने तक ठेकेदारी के तहत काम करने वाले लोगों को सरकारी पेरोल पर रखना, सीवर या खुले नाले या सेप्टिक टैंक में काम करने वाले सभी मजदूरों को मानक के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था एवं उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी दिल्ली सरकार संज्ञान लेकर इनके हित में फैसला लेगी |
अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सरकार से जुड़ने के लिए सीवर/ सेप्टिक टैंक/खुले नालों के सफाई कर्मचारियों का यह प्रयास जारी रहेगा | देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से दिल्ली में ठेके पर काम करने वाले सीवर सफाई कर्मियों और उनके यूनियन के साथ दशम ने एक वर्ष में 50 से ज्यादा बैठकें की हैं | इन बैठकों में यह साफ़ निकलकर आया कि ठेकेदारों के शोषण और आजीविका के छीन जाने के भय की वजह से सीवर सफाई कर्मी अपनी आवाज को बुलंद नहीं कर पा रहे हैं | ऐसी स्थिति में उनके साथ खड़ा रहने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों, पार्टियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील कर रहे हैं जिससे कि दिल्ली सरकार को सफाई कर्मियों के हित में फैसला लेने के लिए सहूलियत हो |

