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29 जून की ताजा खबर:पाकिस्तान में तड़के कांपी धरती,चार जुलाई तक उत्तर से पूर्वोत्तर तक जमकर बरसेंगे मेघ,कोलकाता गैंगरेप केस में घमासान तेज,ट्रंप के धोखे का करारा जवाब देगा भारत!,बफेट ने छह अरब डॉलर के शेयर किए दान

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आज के बड़े इवेंट्स

अंतरिक्ष से कैसा दिखता है भारत? ISS से शुभांशु शुक्ला ने पीएम मोदी को बताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष में गए वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की। पीएम मोदी ने शुभांशु का हालचाल जाना और उनकी यात्रा को नए युग का शुभ आरंभ बताया। शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र जाने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष से कैसा दिखता है भारत।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अंतरिक्ष में गए भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से बात की है। इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने उनका हालचाल जाना और कहा कि उनकी यह यात्रा नए युग का शुभ आरंभ है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) पर जाने वाले पहले भारतीय ने देश के लिए इस उपलब्धि को गर्व का क्षण बताया। बातचीत के अंत में उन्होंने “अंतरिक्ष से भारत माता की जय” कहा।

आपके नाम में भी शुभ है

पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से कहा किआप भारतभूमि से दूर हैं, लेकिन भारतवासियों के दिलों के सबसे करीब हैं। आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभ आरंभ भी है। जब हम दोनों बात कर रहे हैं, लेकिन मेरे साथ 140 करोड़ भारतवासियों की भावनाएं भी हैं, मेरी आवाज में सभी भारतीयों का उत्साह और उमंग शामिल है।”

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराने के लिए मैं आपको हार्दिक बधाई देता और शुभकामना देता हूं। पीएम मोदी ने शुभांशु से पूछा कि वहां सब कुशल मंगल तो है? इस पर शुभांशु ने पीएम मोदी का धन्यवाद देते हुए कहा कि वहां सब ठीक है। उन्होंने कहा, “सभी के आशीर्वाद और प्यार पाकर बहुत अच्छा लग रहा है। मेरी यात्रा पृथ्वी से ऑर्बिट तक की 400 किमी की यात्रा बेहद अहम है। आज मैं गर्व महसूस कर रहा हूं कि मैं अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पा रहा हूं।”

कितने ‘डाउन टू अर्थ’ हैं शुक्ला

प्रधानमंत्री ने अपनी बातचीत में कहा कि हर भारतीय देख रहा है कि शुभांशु शुक्ला कितने ‘डाउन टू अर्थ’ हैं। पीएम ने पूछा कि उन्होंने अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों को भी गाजर का हलवा खिलाया या नहीं? उन्होंने शुभांशु से पूछा कि अंतरिक्ष की विशालता देखकर पहला ख्याल क्या आया? इसके जवाब में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि अंतरिक्ष से कोई सीमा दिखाई नहीं देती, हम भारत को मैप पर देखते हैं, भारत सच में बहुत भव्य दिखता है।

शुभांशु ने बताया कि उन्होंने अपने पैर बांध रखे हैं क्योंकि वहां जीरो गुरुत्वाकर्षण है। चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में सोना बहुत बड़ी चुनौती है। पीएम मोदी ने कहा कि चंद्रयान की सफलता के बाद देशभर के बच्चों में अंतरिक्ष को एक्सप्लोर करने का जज्बा बढ़ा है और शुभांशु की यात्रा बच्चों को जज्बा देती है।

हमने बड़े सपने देखे हैं… युवा पीढ़ी को संदेश

प्रधानमंत्री के आग्रह पर देश की युवा पीढ़ी के लिए संदेश में शुभांशु ने कहा कि हमने बड़े सपने देखे हैं, उन्हें पूरा करने के लिए कहूंगा कि सफलता का कोई एक रास्ता नहीं होता। इसलिए, कभी प्रयास करना मत छोड़िए, सफलता जरूर मिलेगी। अंतरिक्ष के क्षेत्र में देश के सपने के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने शुभांशु से कहा कि हमें अपना स्टेशन बनाना है और चंद्रमा पर एस्ट्रोनॉट की लैंडिंग करानी है, इसके लिए आपका यह अनुभव काफी काम आएगा। जवाब में शुभांशु ने कहा कि हर बात का वह बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।

विकसित भारत यात्रा को नई गति

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह यात्रा विकसित भारत यात्रा को नई गति देगी। इस पर शुभांशु ने कहा कि यह यात्रा अद्भुत रही। यहां पहुंचने के बाद उन्हें लगता है कि यह देश के लिए बड़ा अचीवमेंट है। उन्होंने कहा, “मैं देश के बच्चों से कहूंगा कि आप अपना भविष्य बेहतर बनाइए क्योंकि इससे देश का भविष्य भी उज्ज्वल होगा। हमेशा एक बात मन में रखें कि ‘स्काई इज नेवर द लिमिटि’।”

शुभांशु ने कहा कि मेरे पीछे जो आप तिरंगा देख रहे हैं, यह पहले नहीं था। मैंने कल (शुक्रवार को) ही इसे यहां लगाया है। यह मुझे बहुत भावुक करता है। पीएम मोदी ने अंत में शुभांशु शुक्ला से अपना ध्यान रखने, मां भारती का मान बढ़ाने के लिए कहा। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी। इस पर शुभांशु ने कहा, “अंतरिक्ष से भारत माता की जय।”

ईरान का 400 kg यूरेनियम कहां गया, टेंशन में इजरायल-अमेरिका
इजरायल और अमेरिका 60% तक संवर्धित 400 किलो ईरानी यूरेनियम के गायब होने से चिंतित हैं, जिससे 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। ईरान का 400 kg यूरेनियम कहां गया, टेंशन में इजरायल और अमेरिका हैं।

इजरायल से सीजफायर के बीच 60 फीसदी तक संवर्द्धित 400 किलो ईरानी यूरेनियम गायब हो गया है, इसको लेकर इजरायल और अमेरिका टेंशन में हैं। इस 400 किलो के यूरेनियम से 10 परमाणु बम बनाया जा सकता है। अमेरिका के बंकर बस्‍टर बम से हमले से पहले ईरान ने 400 किलो यूरेनियम को फोर्डो न्‍यूक्लियर संयंत्र से हटा लिया और उसे किसी सीक्रेट जगह पर पहुंचा दिया गया है। यह गायब हुआ यूरेनियम अब ईरान के लिए फायदेमंद हो सकता है। ईरान इसकी मदद से मोलभाव कर सकता है। यह यूरेनियम अगर 90 फीसदी तक संवर्द्धित कर लिया जाता है तो उससे परमाणु बम बनाया जा सकता है।

यह गायब यूरोनियम इजरायल और अमेरिका के लिए टेंशन बना रहेगा। लेकिन हम जानते हैं कि यूरेनियम कैसे निकालते हैं और इसका क्या क्या इस्तेमाल होता है। असल में, यूरेनियम ऊर्जा का भंडार होता है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक मुर्गी के अंडे के बराबर का यूरेनियम 88 टन कोयले जितनी बिजली पैदा कर सकता है। भारत ने पिछले पांच साल में 93,000 टन से अधिक इन-सीटू यूरेनियम संसाधनों की पहचान की है, जिसमें आंध्र प्रदेश और झारखंड में हुई प्रमुख खोज शामिल हैं। भारत में बड़ी मात्रा में यूरेनियम पाए जाने से बिजली उत्पादन क्षेत्र में भारी फायदा मिलेगा और अर्थव्यवस्था भी रॉकेट ऊपर भागेगी।

यूरेनियम एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी तत्व है जो पृथ्वी की परतों में खनिज के रूप में पाया जाता है। यह तत्व ऊर्जा उत्पादन, परमाणु हथियारों और अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन इसे धरती से सीधे उपयोग योग्य रूप में नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए एक जटिल वैज्ञानिक और औद्योगिक प्रक्रिया अपनाई जाती है। यूरेनियम आमतौर पर चट्टानों और मिट्टी में ‘ यूरेनियम अयस्क ‘ के रूप में मिलता है। ये अयस्क प्राकृतिक खनिजों का एक मिश्रण होते हैं जिनमें यूरेनियम की मात्रा बहुत कम होती है। भारत में यूरेनियम के प्रमुख भंडार झारखंड के जादूगुड़ा और तुरा क्षेत्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और मेघालय में पाए जाते हैं।

यूरेनियम का खनन दो तरह से किया जाता है

यूरेनियम को प्राप्त करने की प्रक्रिया खनन से शुरू होती है। खनन दो प्रकार का होता है-खुली खदान (open-pit) और भूमिगत खनन (underground mining)। यदि यूरेनियम की चट्टानें सतह के करीब होती हैं तो खुली खदान विधि अपनाई जाती है, और यदि वे गहराई में होती हैं तो भूमिगत खनन किया जाता है। खनन के बाद यूरेनियम अयस्क को क्रशिंग और ग्राइंडिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें अयस्क को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है और फिर पीसकर महीन पाउडर बनाया जाता है।

परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम को कैसे बनाते हैं

इसके बाद आता है ‘लीचिंग’ नामक रासायनिक चरण, जिसमें अयस्क पाउडर को एसिड या क्षारीय घोल के साथ मिलाया जाता है ताकि यूरेनियम अयस्क से अलग होकर घोल में घुल जाए। यह घोल फिर ‘सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन’ प्रक्रिया से गुजरता है जिसमें खास रसायनों का उपयोग कर यूरेनियम को बाकी तत्वों से अलग किया जाता है।इसके बाद उसे ‘प्रेसिपिटेशन’ की प्रक्रिया से ठोस रूप में बदला जाता है। इस ठोस उत्पाद को ‘येलोकेक’ कहा जाता है, जो यूरेनियम ऑक्साइड (U₃O₈) होता है। यह येलोकेक आगे चलकर रिफाइनिंग और एनरिचमेंट प्रक्रिया में जाता है जहां उसे ऊर्जा उत्पादन या अन्य परमाणु उद्देश्यों के लिए उपयुक्त बनाया जाता है।

यूरेनियम के साथ कार्य करते समय कई सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है क्योंकि यह एक रेडियोधर्मी पदार्थ है। इससे निकलने वाला कचरा कई वर्षों तक खतरनाक बना रह सकता है। इसलिए इसके निष्पादन के लिए विशेष भंडारण और निपटान प्रणाली अपनाई जाती है। यूरेनियम निकालने की यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील और नियामक ढांचे के अंतर्गत संचालित होती है। यही वजह है कि यह किसी भी देश की ऊर्जा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व बन चुका है।

बफेट ने छह अरब डॉलर के शेयर किए दान; शीर्ष अमीरों की सूची में एक स्थान पिछड़े दिग्गज निवेशक

अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट ने शुक्रवार को अब तक का सबसे बड़ा सालाना दान दिया। इसके तहत उन्होंने छह अरब डॉल ( लगभग 51,300 करोड़ रुपये) मूल्य के बर्कशायर हैथवे शेयर पांच चैरिटी संस्थाओं को दान किए। इनमें सबसे अधिक दान पाने वालों में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और उनके परिवार के चलाए जाने वाले चार फाउंडेशन भी शामिल हैं। हालांकि,बफेट ने पहले ही साफ कर दिया है कि उनकी मौत के बाद गेट्स फाउंडेशन को दान समाप्त हो जाएगा।बफेट ने इस साल कुल 12.36 मिलियन क्लास बी बर्कशायर हैथवे शेयर दान किए। इससे 2006 से अब तक उनका कुल दान 60 अरब डॉलर (करीब 5.13 लाख करोड़ रुपये) के पार हो पहुंच गया है।

बफेट ने इस साल कुल 12.36 मिलियन क्लास बी बर्कशायर हैथवे शेयर दान किए। इससे 2006 से अब तक उनका कुल दान 60 अरब डॉलर (करीब 5.13 लाख करोड़ रुपये) के पार हो पहुंच गया है। इस साल उन्होंने गेट्स फाउंडेशन को 94.3 लाख शेयर, सुसान थॉम्पसन बफेट फाउंडेशन को 943,384 शेयर के साथ अपने तीन बच्चों हॉवर्ड, सूसी और पीटर की चलाई जा रही हॉवर्ड जी बफेट फाउंडेशन, शेरवुड फाउंडेशन और नोवो फाउंडेशन को 6,60,366 शेयर दान किए। इस दान के बाद भी बफेट के पास बर्कशायर हैथवे के 13.8 फीसदी शेयर बने हुए हैं।  

दान के बाद शीर्ष अमीरों की सूची में एक स्थान खिसक गए बफेट
फोर्ब्स पत्रिका के मुताबिक, शुक्रवार के दान से पहले उनकी कुल संपत्ति 152 अरब डॉलर थी। इस संपत्ति के साथ वे दुनिया के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति थे, लेकिन दान के बाद वे अमीरों की सूची में छठे नंबर पर आ गए। यह दान बीते साल के 5.3 अरब डॉलर और नवंबर में पारिवारिक चैरिटी को किए गए 1.14 डॉलर बिलियन के दान के पार पहुंच गया।


बर्कशायर के शेयर कभी नहीं बेचें
बफेट ने फिर दोहराया कि वे बर्कशायर के शेयर कभी नहीं बेचेंगे। अब 94 साल के बफेट ने अपनी 2006 से अपनी संपत्ति दान करना शुरू कर दिया था। बीते साल ही उन्होंने अपनी वसीयत में बदलाव किया। इसके तहत उनकी मौत के बाद उनकी 99.5 फीसदी संपत्ति एक ट्रस्ट को दी जाएगी।

भारत ने पाकिस्तान के आरोप किए खारिज; वजीरिस्तान में हुए हमले को लेकर पाकिस्तानी सेना ने दिया था बयान

भारत ने वजीरिस्तान में हुए हमले के लिए उसे दोषी ठहराने की पाकिस्तान की कोशिश को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह पाकिस्तानी सेना के उस बयान को खारिज करता है, जिसमें वजीरिस्तान में शनिवार को हुए हमले के लिए भारत को दोषी ठहराने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि इस हमले में कम से कम 13 सुरक्षाकर्मी मारे गये और 24 घायल हो गये थे।भारत ने बीती रात खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के वजीरिस्तान इलाके में हुए आत्मघाती हमले के लिए उसे दोषी ठहराने के प्रयास पर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने पाकिस्तानी सेना का आधिकारिक बयान देखा है, जिसमें 28 जून को वजीरिस्तान में हुए हमले के लिए भारत को दोषी ठहराया गया है। पाकिस्तानी सेना का यह बयान निंदनीय है। हम इस बयान को पूरी अवमानना के साथ अस्वीकार करते हैं। 

बता दें कि शनिवार को उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में एक सैन्य काफिले को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती बम विस्फोट में 13 सैनिक मारे गए थे। हमले में दर्जनों लोग घायल भी हो गए थे। सूत्रों के मुताबिक, उत्तरी वजीरिस्तान जिले के खड्डी इलाके में आज सुबह एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन को बम निरोधक इकाई के माइन-रेसिस्टेंट एम्बुश प्रोटेक्टेड (एमआरएपी) वाहन से भिड़ा दिया।

विस्फोटकों से लदे वाहन की सैन्य काफिले से टक्कर
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में एक स्थानीय सरकारी अधिकारी ने कहा कि एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन की सैन्य काफिले से टक्कर करवा दी। विस्फोट में 13 सैनिक मारे गए। इसके अलावा 10 सैन्यकर्मी और 19 नागरिक घायल हो गए। यह क्षेत्र तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के निशाने पर रहता है। घटना की जिम्मेदारी हाफिज गुल बहादुर समूह के एक उप-गुट उसुद अल-हरब ने ली है। बावजूद इसके पाकिस्तान ने इस हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया है। हाल के महीनों में यह उत्तरी वजीरिस्तान में सबसे घातक घटनाओं में से एक है, जिसमें गंभीर सुरक्षा चिंताएं खड़ी की हैं।

पाकिस्तान में तड़के कांपी धरती

पाकिस्तान दुनिया के सबसे ज़्यादा भूकंपीय रूप से सक्रिय देशों में से एक है। यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। बीते माह 10 मई को भारत से जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था।पाकिस्तान में रविवार तड़के भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग दहशत में आए गए और अपने घरों से बाहर आ गए। सड़कों पर लोगों के बीच अफरातफरी देखी गई। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की सुबह 3:54 बजे पाकिस्तान में 5.2 तीव्रता का भूकंप आया।

150 किलोमीटर की गहराई में था केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार रविवार तड़के आए भूकंप का केंद्र पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में 150 किलोमीटर की गहराई में था। साथ ही इसका स्थान 30.25 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 69.82 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। हालांकि इस भूकंप से किसी जनहानि की खबर अभी नहीं आई है, लेकिन लोगों में दहशत का माहौल है। 

गौरतलब है कि पाकिस्तान दुनिया के सबसे ज़्यादा भूकंपीय रूप से सक्रिय देशों में से एक है। यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। बीते माह 10 मई को भारत से जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तान में 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था। भूकंप का केंद्र 10 किलोमीटर की गहराई में था, और इसका स्थान 29.67 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 66.10 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया था।  

यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटों को ओवरलैप करता है पाकिस्तान
पाकिस्तान भूगर्भीय रूप से यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेटों को ओवरलैप करता है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत ईरानी पठार पर यूरेशियन प्लेट के दक्षिणी किनारे पर स्थित हैं। सिंध, पंजाब और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर प्रांत दक्षिण एशिया में भारतीय प्लेट के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर स्थित हैं। ऐसे में यहां ये दोनों टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं इस वजह से भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। 

जानें क्यों आता है भूकंप?
धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती हैं। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है जिसे टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टेक्टोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर  कंपन करती रहती हैं और जब इस प्लेट में बहुत ज्यादा कंपन हो जाती हैं, तो भूकंप महसूस होता है।

जानिए भूकंप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?
भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से धरती हिलने लगती है। इस स्थान पर या इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का असर ज्यादा होता है। अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।

पूरे देश में पहुंचा मानसून: चार जुलाई तक उत्तर से पूर्वोत्तर तक जमकर बरसेंगे मेघ

दिल्ली एनसीआर सहित देश के बाकी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है और हिमाचल से लेकर केरल और उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक झमाझम बरसात हो रही है। 4 जुलाई तक उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है। शनिवार को दोपहर बाद जमकर बारिश हुई और दिल्ली समेत पूरा एनसीआर तरबतर हो गया। इससे लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन जगह-जगह जलभराव से मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा।  आईएमडी ने 4 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी बारिश होगी। ओडिशा, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अत्यधिक बारिश की संभावना है।

अभी जारी रहेगी मूसलाधार बारिश
आईएमडी ने बताया कि बीते दिन उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हुई। अंडमान निकोबार द्वीप समूह, तटीय कर्नाटक, सौराष्ट्र और कच्छ, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और नगालैंड समेत पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी तेज हवाओं के साथ जमकर बौछारें पड़ीं। 

आईएमडी ने 4 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी बारिश होगी। ओडिशा, कर्नाटक, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अत्यधिक बारिश की संभावना है। तमिलनाडु, केरल, और तटीय कर्नाटक में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चल सकती हैं।

केरल में ऑरेंज अलर्ट की बीच भारी बारिश
केरल में लगातार बारिश हो रही है। शनिवार को भी पांच जिलों- पथानामथिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की, मलप्पुरम और वायनाड में जमकर बारिश हुई, जिसके लिए आईएमडी ने पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। पिछले कुछ दिनों में राज्य में हुई बारिश के कारण विभिन्न नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है और सैकड़ों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

ओडिशा में रात से ही बारिश जारी
ओडिशा में रात से ही लगातार बारिश जारी है। आलम यह है कि मयूरभंज में लगातार भारी बारिश के बाद जगह-जगह जलभराव की समस्या पैदा हो गई है।

झमाझम बारिश

पहाड़ी राज्यों में लोग हलकान
बारिश से जहां दिल्ली-एनसीआर वालों के चेहरे खिल गए, वहीं देश के अन्य हिस्सों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उत्तराखंड में बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन हुआ और चारधाम यात्रा बाधित हुई। चमोली जिले में नंदप्रयाग और भनेरपाणी के पास भूस्खलन के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करना पड़ा। राजमार्ग पर्थाडीप, क्षेत्रपाल और भनेरपाणी में करीब सात घंटे तक बंद रहा और लगभग 3,000 श्रद्धालु फंसे रहे। जिला प्रशासन राजमार्ग को खोलने में जुटा है। गंगोत्री हाईवे करीब आठ घंटे और यमुनोत्री हाईवे पांच घंटे बंद रहा। दो दिन से बंद केदारनाथ यात्रा बहाल कर दी गई है।

दिल्ली वालों को मिली राहत
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश और आंधी-तूफान को लेकर पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। दोपहर तक लोग उमसभरी गर्मी से परेशान होते रहे, लेकिन उसके बाद अचानक मौसम बदला और आसमान में काली घटाएं छा गईं और दिन में ही रात जैसा अंधेरा हो गया। कुछ क्षेत्रों में तेज हवाएं भी चलीं और उसके बाद घनघोर बारिश शुरू हो गई। आसमान से पड़ती बौछारें लगभग दो घंटे तक दिल्ली-एनसीआर को सराबोर करती रहीं। लोगों ने भी सड़कों पर उतरकर मानसून की पहली बारिश का खुले से स्वागत किया।

अलकनंदा में लापता लोगों की तलाश
रुद्रप्रयाग में अलकनंदा नदी में लापता लोगों की तलाश जारी है। भारी बारिश के बीच बृहस्पतिवार को एक वाहन के सड़क से फिसलकर नदी में गिर जाने से 12 लोग लापता हो गए थे, जिनमें से अब तक चार लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें शेष लोगों की तलाश में जुटी हैं।

हिमाचल के सैंज में एक का शव मिला
हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला और कुल्लू जिले में बुधवार को भारी बारिश और बादल फटने से अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 7 हो गई है। सैंज घाटी में पहाड़ी नाले में बहे तीन लोगों में से एक का शव शनिवार को बरामद कर लिया गया है। यह एक छोटी बच्ची और इसके पिता और बुआ का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। धर्मशाला जिले में मनूणी खड्डे क्षेत्र में एक बिजली परियोजना पर काम करने वाले आठ लोग नदी में बह गए थे, जिनमें से छह लोगों के शव मिल गए हैं, जबकि दो की तलाश अभी जारी है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया एक हफ्ते में मानसूनी बारिश और उससे जुड़ी अन्य घटनाओं में 17 लोगों की जान गई है और 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। राज्य में शनिवार को भी शिमला समेत कई जिलों में भारी बारिश हुई और 38 सड़कें, 22 बिजली ट्रांसफार्मर और छह पेयजल योजनाएं ठप रहीं।

कल्याण बनर्जी के बाद अब मदन मित्रा के बिगड़े बोल, पूछा- छात्रा घटनास्थल पर गई ही क्यों?

कोलकाता के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में एक छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर सियासी पारा हाई हो गया है। जहां विपक्षी भाजपा इस मुद्दे पर टीएमसी को घेरने में लगी है, वहीं सत्ताधारी पार्टी के नेता एक के बाद एक विवादित बयान देकर भाजपा को और मौके दे रहे हैं। अब कल्याण बनर्जी के बाद टीएमसी के एक और नेता ने विवादित बयान देकर आग में घी डालने का काम किया है। में टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने मामले में संवेदनहीन बयान देते हुए सामूहिक दुष्कर्म के लिए लिए छात्रा को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। मित्रा ने कहा कि विधि छात्रा घटनास्थल पर गई क्यों। 

और क्या बोले टीएमसी विधायक मदन मित्रा 
इस मामले में टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने बेहद संवेदनहीन बयान दिया है। उन्होंने सामूहिक दुष्कर्म के लिए लिए छात्रा को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह घटनास्थल पर गई क्यों। यदि वह घटनास्थल पर नहीं जाती तो यह घटना कभी नहीं होती। मित्रा ने इस वारदात पर शनिवार को कहा कि छात्रा ने यदि किसी को बताया होता कि वह कहां जा रही है, अपने साथ कुछ दोस्तों को ले गई होती, तो यह घटना नहीं होती। अपराध करने वाले लोगों ने स्थिति का फायदा उठाया।

आलोचना हुई तो सफाई देने लगे
अब टीएमसी विधायक मदन मित्रा के इस बयान की चहुंओर आलोचना हो रही है। भाजपा ने उनके बयान को लेकर उनपर और टीएमसी पर चारों ओर से हल्ला बोल दिया है। जिसके बाद मदन मित्रा ने अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है। उनके कहने का मतलब ये नहीं था। 

मदन मित्रा से पहले कल्याण बनर्जी ने बयान से खड़ा किया विवाद
साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी के बयान पर बवाल मच गया है। कोलकाता दुष्कर्म मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि अगर कोई दोस्त अपने दोस्त के साथ दुष्कर्म करता है तो क्या किया जा सकता है। क्या स्कूलों में पुलिस होगी? यह छात्रों द्वारा एक अन्य छात्रा के साथ किया गया। पीड़िता की सुरक्षा कौन करेगा? सारा अपराध और छेड़छाड़ कौन करता है? कुछ पुरुष ऐसा करते हैं। महिलाओं को किसके खिलाफ लड़ना चाहिए? महिलाओं को इन विकृत पुरुषों के खिलाफ लड़ना चाहिए। उन्होंने मुख्य आरोपी के तृणमूल कांग्रेस से संबंध पर बात करने से इनकार कर दिया।  सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि जिसने भी ऐसा किया है, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। सुरक्षा और संरक्षा की स्थिति हर जगह एक जैसी है। जब तक पुरुषों की मानसिकता ऐसी ही रहेगी, ये घटनाएं होती रहेंगी। 

पार्टी ने बयान से किया किनारा
टीएमसी ने दोनों नेताओं की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया और इसे उनका निजी बयान करार दिया है। पार्टी ने एक्स पर पोस्ट किया कि सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा द्वारा दक्षिण कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुए जघन्य अपराध के संबंध में की गई टिप्पणियां उनकी व्यक्तिगत हैसियत में की गई थीं। पार्टी स्पष्ट रूप से उनके बयानों से खुद को अलग करती है और इसकी कड़ी निंदा करती है। ये विचार किसी भी तरह से पार्टी की स्थिति को नहीं दर्शाते हैं।

पार्टी के रुख से ही नहीं सहमत उसके नेता
वहीं, दूसरी ओर सेरामपुर सांसद बनर्जी ने अपनी ही पार्टी के रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी उन नेताओं का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन कर रही है जो अपराधियों को बचा रहे हैं। बनर्जी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में  कहा कि मैं एआईटीसीऑफिशियल द्वारा एक्स पर की गई पोस्ट से पूरी तरह असहमत हूं। क्या वे अप्रत्यक्ष रूप से उन नेताओं का समर्थन कर रहे हैं जो इन अपराधियों को बचा रहे हैं? केवल अकादमिक बयानों से कोई वास्तविक बदलाव नहीं आएगा, जब तक कि सीधे तौर पर जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की जाती। मैं उन लोगों से भी खुद को स्पष्ट रूप से दूर रखना चाहता हूं जो इन अपराधियों को प्रोत्साहित या संरक्षित कर रहे हैं।

दुनिया में पहली बार हो रहा है अयोध्या के राममंदिर में टाइटेनियम का प्रयोग

रामलला का भव्य मंदिर न केवल आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और सनातन आस्था के विलक्षण संगम का भी प्रतीक बन रहा है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब दुनिया का पहला ऐसा मंदिर बन गया है जिसमें संरचना की मजबूती के लिए टाइटेनियम जैसी उच्च धातु का उपयोग किया गया है। मंदिर में टाइटेनियम से बनी 32 जालियां लगाई जा रही हैं। प्रयोग के तौर पर शनिवार को एक जाली लगाई गई, जिसे ट्रस्ट ने हरी झंडी प्रदान कर दी है।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि पूरे देश में राम मंदिर पहला ऐसी मंदिर है जहां टाइटेनियम धातु का प्रयोग हो रहा है। मंदिर के भूतल, प्रथम व द्वितीय तल पर टाइटेनियम से निर्मित जालियां लगाई जा रही हैं। टाइटेनियम का जीवन एक हजार वर्ष से भी ज्यादा होता है। भारत सरकार की एक संस्था ने इन जालियों का निर्माण किया है। तीनों तल पर 32 जाली लगनी है। जाली लगाने का काम 15 अगस्त तक पूरा हो जाएगा। बताया कि मंदिर निर्माण की गति संतोषजनक है। हम आश्वस्त हैं कि जुलाई के अंत तक प्लिंथ व परकोटा पर रामकथा का काम पूरा हो जाएगा।

नृपेंद्र ने बताया कि मंदिर और परकोटा, जिसमें लगभग 14 लाख क्यूबिक फीट वंशी पहाड़पुर का पत्थर लगना था, अब केवल एक लाख क्यूबिक फीट पत्थर लगना रह गया है। बताया कि अभी तक जो अस्थायी मंदिर था, उसी आकार का एक मंदिर बनाया जाएगा। सागौन की लकड़ी से यह मंदिर निर्मित होगा। मंदिर के संरक्षण के लिए एक शीशे का कवर लगाया जाएगा। जो सभी मौसमों में सुरक्षित रहेगा। इससे पहले नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे।

500 फीट तक उकेरी जा चुकी रामकथा
निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि मंदिर में लोअर प्लिंथ पर 800 फीट की लंबाई में रामकथा उकेरी जा रही है। इसमें 500 फीट पर राम कथा के म्यूरल लगाए जा चुके हैं। इसमें राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक की पूरी कथा जीवंत होगा। विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रीराम की मर्यादा व आदर्श को दर्शाया जा रहा है। इसी तरह परकोटा में कांस्य के कुल 80 म्यूरल लगने हैं। अब तक करीब 45 म्यूरल लग चुके हें। ये म्यूरल अयोध्या के इतिहास व रामकथा पर आधारित हैं।

कौन हैं RAW के नए चीफ पराग जैन, जानें ‘सुपर जासूस’ से जुड़ी बड़ी बातें
केंद्र सरकार ने पराग जैन को ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) का नया प्रमुख बनाया है। वह रवि सिन्हा की जगह लेंगे। जैन 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभाई थी।

केंद्र सरकार ने शनिवार को पंजाब कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी पराग जैन को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का नया प्रमुख नियुक्त किया। वे रवि सिन्हा की जगह लेंगे। सिन्हा का मौजूदा कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार जैन 1 जुलाई, 2025 को दो साल के निश्चित कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करेंगे। जानतें हैं कौन है रॉ के नए चीफ और सुपर जासूस पराग जैन।

पराग जैन से जुड़ी खास बातें

  1. पराग जैन वर्तमान में एविएशन रिसर्च सेंटर के चीफ हैं। इन्होंने पाकिस्तानी सशस्त्र बलों पर खुफिया जानकारी एकत्र करके ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  2. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रहा उनके नेतृत्व में खुफिया सूचनाओं के आधार पर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे पर सटीक मिसाइल हमले संभव हो सके।
  3. रॉ में पराग जैन ने पाकिस्तान डेस्क को बड़े पैमाने पर संभाला है।
  4. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार जैन को खुफिया हलकों में ‘सुपर जासूस’ के रूप में जाना जाता है। उन्हें ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT) को तकनीकी खुफिया (TECHINT) के साथ प्रभावी ढंग से संयोजित करने के लिए जाना जाता है। एक ऐसा मिक्स जिसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि यह कई हाई-रिस्क वाले ऑपरेशनों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
  5. पराग जैन ने कनाडा में अपनी तैनाती के दौरान वहां खालिस्तानी इकोसिस्टम को लेकर जबरदस्त काम किया था। उन्होंने नई दिल्ली को खालिस्तानी खतरे को लेकर अहम जानकारियां दी थीं।
  6. जैन जम्मू-कश्मीर में भी तैनात रहे हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में केंद्र की आतंकवाद विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  7. पराग जैन अनुच्छेद 370 हटाए जाने और ऑपरेशन बालाकोट के दौरान जम्मू-कश्मीर में तैनात थे।
  8. एचटी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जैन ने पंजाब में आतंकवाद के दिनों में बठिंडा, मनसा और होशियारपुर में सर्विस करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  9. जैन इससे पहले चंडीगढ़ के एसएसपी और लुधियाना के डीआईजी के पद पर काम कर चुके हैं। 1 जनवरी, 2021 को पंजाब में पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर प्रोमोट किया गया था। हालांकि, वे तब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सेवारत थे।
  10. पराग जैन ने कनाडा के अलावा श्रीलंका में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

पीड़िता की मेडिकल जांच में गैंगरेप की पुष्टि, अब तक 4 अरेस्ट, जानिए ताजा अपडेट
कोलकाता के कस्बा लॉ कॉलेज में गैंगरेप मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पुलिस ने शनिवार को कॉलेज के एक सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही कॉलेज परिसर के सुरक्षा गार्ड कक्ष में हुई इस वारदात के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए सुरक्षा गार्ड को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि हमने आज सुबह सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार कर लिया। क्योंकि उसके जवाब अस्पष्ट थे। सीसीटीवी फुटेज से कॉलेज में उसकी मौजूदगी का पता चला था। अधिकारी ने कहा कि गार्ड अपनी ड्यूटी निभाने में विफल रहा और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उस समय वह ड्यूटी पर अकेला था। उधर, पीड़िता की मेडिकल जांच में सामूहिक बलात्कार की पुष्टि हुई है।

घटना 25 जून की शाम को साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुई थी। पुलिस ने कहा कि गार्ड ने इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि उसने उचित कार्रवाई क्यों नहीं की और तीनों आरोपियों को अपराध करने से क्यों नहीं रोका। साथ ही, उसे यह भी बताना होगा कि वह क्यों और किसके निर्देश पर अपना कमरा छोड़कर गया। यह भी अपराध में एक तरह की संलिप्तता है।

पीड़िता की मेडिकल जांच में गैंगरेप की पुष्टि
इससे पहले तीन अन्य आरोपियों को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया था। कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीड़िता की मेडिकल जांच में सामूहिक बलात्कार की पुष्टि हुई है। पीड़िता ने पुलिस को दी लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि सुरक्षा गार्ड ने उसकी मदद नहीं की। चौबीस वर्षीय छात्रा एक परीक्षा के लिए फॉर्म भरने कॉलेज गई थी और काम पूरा होने के बाद भी उसे यूनियन रूम में ही रहने के लिए मजबूर किया गया।

दो छात्रों ने बनाया वीडियो
आरोप है कि पूर्व छात्र और आपराधिक मामलों के वकील ने विवाह का प्रस्ताव ठुकराने के बाद छात्रा से बलात्कार किया। वहीं, कॉलेज के दो मौजूदा छात्र अपने मोबाइल फोन पर इस कृत्य की वीडियो बना रहे थे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि रात करीब 7:30 बजे से लेकर 10:30 बजे तक उसके साथ यह सब हुआ।

टीएमसी के छात्र संगठन का सदस्य है आरोपी
मुख्य आरोपी के सोशल मीडिया प्रोफाइल पर दावा किया गया है कि वह कॉलेज की तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद इकाई का पूर्व अध्यक्ष और टीएमसी के छात्र संगठन की दक्षिण कोलकाता प्रकोष्ठ का संगठन सचिव है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों में भी वह राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के कई नेताओं के साथ दिखा है। हालांकि, टीएमसी ने आरोपी के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है और अगर वह दोषी पाया जाता है तो उसे कड़ी सजा देने की मांग की है।

आरजी कर मेडिकल कॉलेज की भयावह यादें ताजा
इस घटना से पिछले साल अगस्त में उत्तरी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अंदर एक लेडी डॉक्टर से बलात्कार और हत्या मामले की भयवाह यादें ताजा हो गईं। दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित कॉलेज परिसर में पुलिस का कड़ा पहरा है और परिसर के अंदर व आसपास अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात हैं। पुलिस ने अपराध से जुड़े गार्ड रूम और यूनियन रूम को सील कर दिया है।

बंगाल सरकार पर विपक्ष हमलावर

शुक्रवार को विपक्षी वाम मोर्चा, कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों ने प्रदर्शन कर तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार पर कार्यस्थलों व शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाया था।

 इजरायली हमलों में मारे गए ईरानी सैन्य कमांडरों और वैज्ञानिकों का अंतिम संस्कार
इजरायल के साथ 12 दिनों के युद्ध के दौरान मारे गए रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ सैन्य कमांडरों तथा परमाणु वैज्ञानिकों की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए शनिवार को तेहरान की सड़कों पर लाखों लोग उमड़ पड़े। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल हुसैन सलामी, इसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख जनरल आमिर अली हाजीजादेह और अन्य के ताबूतों को ट्रकों पर रखकर राजधानी की आजादी स्ट्रीट से ले जाया गया। इस दौरान सड़क किनारे खड़े लोगों ने ”अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।

जनरल सलामी और हाजीजादेह दोनों 13 जून, यानी युद्ध के पहले दिन ही मारे गए थे, जब इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने के उद्देश्य से व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। इस अभियान में सैन्य कमांडरों, वैज्ञानिकों और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। सरकारी मीडिया ने बताया कि शव यात्रा में 10 लाख से अधिक लोग शामिल हुए, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन तेहरान के मुख्य मार्ग और पूरा 4.5 किलोमीटर लंबा मार्ग लोगों से भरे हुए थे।

खामेनेई नहीं आए नजर

शव यात्रा के टेलीविजन प्रसारण में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई नजर नहीं आए। युद्ध शुरू होने से पहले से वह सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं।ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इस शव यात्रा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची, रिवोल्यूशनरी गार्ड की विदेशी शाखा कुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल इस्माइल कानी और खामेनेई के सलाहकार जनरल अली शामखानी भी शामिल हुए। शामखानी इजरायल के पहले हमले में घायल होने पर अस्पताल में भर्ती हुए थे। सरकारी टेलीविजन के टेलीग्राम चैनल पर प्रसारित एक वीडियो में शामखानी को छड़ी के सहारे चलते देखा गया।

रिवोल्यूशनरी गार्ड क्या है

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद हुआ था। अपनी स्थापना के बाद से यह एक अर्द्धसैनिक, घरेलू सुरक्षा बल से एक अंतरराष्ट्रीय बल के रूप में विकसित हुआ है जो सीरिया और लेबनान से लेकर इराक तक, तेहरान के सहयोगियों की सहायता के लिए पहुंचा है। यह देश की मौजूदा सशस्त्र सेनाओं के समानांतर काम करता है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलों के शस्त्रागार को नियंत्रित करता है, जिसका इस्तेमाल उसने गाजा पट्टी में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान दो बार इजरायल पर हमला करने के लिए किया था।

इजरायल ने क्या किया था दावा

मंगलवार को युद्ध विराम की घोषणा से 12 दिन पहले, इजरायल ने दावा किया था कि उसने लगभग 30 ईरानी कमांडरों और 11 परमाणु वैज्ञानिकों को मार डाला, जबकि आठ परमाणु संबंधित प्रतिष्ठानों और 720 से अधिक सैन्य बुनियादी ढांचे के स्थलों को निशाना बनाया। वाशिंगटन स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समूह के अनुसार, कम से कम 417 नागरिकों सहित 1,000 से अधिक लोग मारे गए।

60 लोगों का किया गया अंतिम संस्कार

युद्ध विराम के बाद, शनिवार को शीर्ष कमांडरों का यह पहला सार्वजनिक अंतिम संस्कार था और ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया कि यह कुल 60 लोगों के लिए था, जिनमें चार महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे। भीड़ में शामिल कई लोगों ने रोष व्यक्त किया। सरकारी मीडिया ने तेहरान के विशाल बहेश्त-ए-ज़हरा कब्रिस्तान की एक खुली कब्र की तस्वीरें प्रकाशित कीं, जहां सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद बाघेरी, जो युद्ध के पहले दिन मारे गए थे, को उनके भाई के बगल में दफनाया जाना था। उनके भाई 1980 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान मारे गए थे और वह एक कमांडर थे।

कई लोगों को उनके गृहनगर में दफनाया गया

अन्य लोगों में से कई को उनके गृहनगर में दफनाया जाना है। ईरानी न्यायपालिका की मिज़ान समाचार एजेंसी ने पुष्टि की है कि कुख्यात एविन जेल के शीर्ष अभियोजक की सोमवार को इजराली हमले में मौत हो गई। शनिवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, अरागची ने संकेत दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने लिखा, ”अगर (अमेरिका के) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाकई समझौता करना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला खामेनेई के प्रति अपमानजनक और अस्वीकार्य लहजे को छोड़ देना चाहिए और उनके लाखों सच्चे अनुयायियों को चोट पहुंचाना बंद कर देना चाहिए।”

अमेरिका का डर नहीं… रूस से S-400, R-37M, Su-30MKI जेट पर बड़ी डील की तैयारी, ट्रंप के धोखे का करारा जवाब देगा भारत!

 भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर रूस रक्षा मंत्री आंद्रे बेलोउसव के साथ बेहद अहम मुलाकात की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बैठक को काफी अहम द्विपक्षीय मुलाकात माना जा रहा है। भारत की आधिकारिक प्रेस रिलीज में जिस स्पष्टता और बेबाक भाषा में भारत की रक्षा जरूरतों और रूस के साथ तकनीकी सहयोग की बात कही गई है, वह इस बात का संकेत है कि भारत अब अपने एयर डिफेंस और एयर-टू-एयर मिसाइल क्षमताओं को तेजी से अपग्रेड करने के लिए रूस के साथ बहुत जरूरी डिफेंस समझौता करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी हफ्ते आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत रूस से एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की दिशा में बातचीत को गंभीरता से आगे बढ़ा चुका है।

राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री की बैठक के बाद जो आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी किया गया, उसमें खास तौर पर एयर डिफेंस सिस्टम, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, आधुनिक क्षमताओं और हवाई प्लेटफार्मों की बात कही गई है। ये प्रेस रिलीज इसलिए काफी ज्यादा हैरान करने वाला है, क्योंकि इस तरह खुलकर डिफेंस सौदों की बात नहीं की जाती है। लेकिन भारत ने ऐसा किया है, लिहाजा इसे अमेरिका के लिए एक संदेश माना जा सकता है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को ‘धोखा’ दिया है। डिफेंस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स पहले से ही इस बात को लेकर संकेत देते रहे हैं कि भारत हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के स्वदेशी निर्माण और उनके Su-30MKI लड़ाकू विमानों में इंटीग्रेशन के लिए रूस से सहयोग चाहता है।

एयर टू एयर मिसाइल का भारत में लोकल प्रोडक्शन
एयरो इंडिया 2025 में रूस ने आधिकारिक तौर पर भारत को अपनी लंबी दूरी की R-37M हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, जिसे RVV-BD के रूप में निर्यात किया जाता है, उसकी बिक्री का प्रस्ताव रखा था। रूसी प्रस्ताव में इस मिसाइल को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में स्थानीय प्रोडक्शन का प्रस्ताव रखा गया था। इसी साल मार्च महीने में रूसी सरकारी हथियार कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (ROE) ने पुष्टि की थी कि रूस और भारत आधुनिक गाइडेड विमान मिसाइलों के ज्वाइंट डेवलपमेंट और प्रोडक्शन पर चर्चा कर रहे हैं। इस साझेदारी का मकसद सिर्फ भारत की सैन्य जरूरतों को पूरा करना ही नहीं, बल्कि तीसरे मित्र देशों को भी निर्यात करना है। यानि अगर भारत और रूस के बीच ये समझौता होता है कि भारत मेक इन इंडिया के तहत एयर टू एयर मिसाइल बनाकर किसी तीसरे देश को भी बेच सकता है, जिस तरह से ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री भारत करता है।

Su-30 MKI की मारक क्षमता में और इजाफा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने Su-30 MKI लड़ाकू विमानों से ही पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलें दागी थीं। भारतीय वायुसेना के Su-30MKI फाइटर विमानों के लिए ब्लॉक-अपग्रेड योजना पहले से चल रही थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसमें अब काफी तेजी आ गई है। रूस ने साफ कर दिया है कि वह इस अपग्रेडेशन में भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगा। HAL की अगुवाई में इस अपग्रेड को भारत में ही अंजाम दिया जाएगा। Su-30MKI के लिए प्रस्तावित अपग्रेडेशन में नया AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, इन्फ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) और आधुनिक कॉकपिट इंटरफेस शामिल हैं। यह अपग्रेड विमान को 5वीं पीढ़ी की लड़ाई की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाएगा। पाकिस्तान, चीन से J-35A लड़ाकू विमान खरीदने वाला है और माना जा रहा है कि भारत, पाकिस्तानी खतरों का मुकाबला करने के लिए काफी ज्यादा आक्रामक तैयारियां कर रहा है और इसी के तहत Su-30 MKI को अपग्रेड किया जाएगा।

विरूपाक्ष रडार… स्वदेशी टेक्नोलॉजी पर भारत का दांव
यूरेशियन टाइम्स में लिखते हुए भारत के पूर्व फायटर जेट पायलट और एयरफोर्स के बड़े अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर ने लिखा है कि पीआईबी की प्रेस रिलीज में न सिर्फ भारत के हवाई प्लेटफार्मों को एडवांस करने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है, बल्कि स्पष्ट रूप से कहा गया है, कि “S-400 प्रणालियों की आपूर्ति, एसयू-30एमकेआई का अपग्रेडेशन और बहुत जल्द महत्वपूर्ण सैन्य हार्डवेयर की खरीद, इस बैठक में बातचीत के केन्द्र मे थे।” उन्होंने लिखा है कि पाकिस्तान वायुसेना ने भारत के खिलाफ चीनी PL-15 मिसाइल का इस्तेमाल किया था, जो भारत के लिए एक रणनीतिक झटका था। इसकी रेंज और किल-प्रोफाइल ने इंडियन एयरफोर्स को लंबी दूरी की मारक क्षमता होने की नई जरूरत महसूस कराई है। RVV-BD, जिसकी रेंज 300 किलोमीटर से ज्यादा है, वो इस खतरे का जवाब हो सकता है, बशर्ते कि Su-30MKI के सेंसर और फायर कंट्रोल सिस्टम को अपग्रेड किया जाए। इसके बिना, इतनी लंबी दूरी की मिसाइल सिर्फ नाम की रह जाएगी।

इसलिए Su-30MKI लड़ाकू विमान अपग्रेडेशन का सबसे अहम हिस्सा होगा DRDO द्वारा विकसित Virupaksha AESA रडार। इसमें लगभग 2400 गैलियम नाइट्राइड आधारित मॉड्यूल होंगे और यह 1 वर्ग मीटर के टारगेट को 600 किमी दूर से ट्रैक कर सकेगा। यह रडार मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मॉड्यूल प्रतिरोध में भी एडवांस है। लेकिन एक चुनौती यह है कि इस ए़डवांस रडार को Su-30MKI जैसे पुराने प्लेटफॉर्म पर बिना मूल उपकरण निर्माता (OEM) की तकनीकी सहायता के इंटीग्रेट करना जटिल और जोखिमपूर्ण है। इसीलिए भारत को रूस की मदद की जरूरत है।

OEM टेक्नोलॉजी और रूस पर भारत की निर्भरता
दुनिया के ज्यादातर फाइटर जेट बनाने वाली कंपनियां, जैसे फ्रांसीसी डसॉल्ट, जिसने राफेल लड़ाकू विमान बनाया है, वो अपना सोर्स कोड शेयर नहीं करते हैं। डसॉल्ट, भारत को राफेल का सोर्स कोड नहीं देना चाहता है। यही वजह है कि भारत अपने स्वदेशी रडार सिस्टम या ब्रह्मोस मिसाइल को राफेल लड़ाकू विमान में नहीं लगा पा रहा है। Su-30MKI में विरूपाक्ष रडार और RVV-BD मिसाइल को सफलतापूर्वक जोड़ने के लिए रूस की तकनीकी सहायता बेहद जरूरी है। रूस की सहायता से भारतीय वायुसेना इन मिसाइलों को मौजूदा N011M Bars रडार के साथ भी आंशिक रूप से इस्तेमाल कर सकती है। साथ ही, नेटवर्क आधारित वॉरफेयर सिस्टम का विस्तार करते हुए Su-30MKI को S-400 और AEW&CS प्लेटफॉर्म से जोड़ना, इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है। ऐसे में भारत एक जबरदस्त किल चेन तैयार कर लेगा और दुश्मनों के विमानों को बहुत ही आसानी से मार गिराया जा सकेगा।
यानि Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने की योजना और उसे RVV-BD जैसी मिसाइलों से लैस करने का मतलब भारतीय एयरफोर्स की ताकत को नेक्स्ट लेवल पर ले जाना होगा। यदि विरूपाक्ष रडार और RVV-BD मिसाइल का इंटीग्रेशन संभव हो पाया, तो इसका मतलब ये होगा कि भारत अपने हर एक Su-30MKI लड़ाकू विमान को 300 किलोमीटर के एयर टू एयर मिसाइल से लैस कर पाएगा। भारत में ही प्रोडक्शन होने की वजह से लॉजिस्टिक सपोर्ट काफी आसान होगा, ट्रेनिंग बेहतर होगी और पूरे वायुसेना में इंटीग्रेशन समय से हो पाएगा। रूस के साथ मिलकर किया गया यह सामरिक सहयोग भारत को सिर्फ एक खरीददार नहीं, बल्कि एक भागीदार के रूप में स्थापित करता है, और यही भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की असली उड़ान है।

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