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अंदर की आहट…कही अधिकारी वर्ग तो नही चाहते सत्ता परिवर्तन 

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बीपी गोस्वामी

सत्ता परिवर्तन में आम लोगो की अहम भूमिका रहती है।प्रदेश सरकार एक और जहा हर व्यक्ति का जीवन स्तर सुधारने के लिए प्रयासरत हैं तो वही राजगढ़ जिले में सिर्फ नेताओ के इशारों पर क्यों चल रहे आमजन की परेशानी का निराकरण करने में क्या हर्ज है।

ऐसे एक नही कही मामले में देखा जा सकता है।जहा अधिकारी आम जन को उनके हालात पर छोड़ते नजर आ रहे हैं।ऐसे में वह लोग मौजूदा सरकार से पीड़ित होकर अन्य विकल्प को समर्थन करने में अपना रुख करते हैं।

ऐसे में कही अधिकारी वर्ग कही भाजपा सरकार से खुश न होकर कही सत्ता परिवर्तन में योगदान निभाने में कार्य कर रहे हैं यह तो एक सवाल मन में उठता है।कुछ मामलो में विपक्ष पार्टी के लोग गलत कार्यों में सारा श्रेय मौजूदा सरकार को देते नजर आ रहे हैं पहले तो वह भी जन समस्या पर गंभीर थे लेकिन कुछ मामलो में देखा जाए तो कही न कही वह भी यह सारा खेल चुपके से देखने  में अंदर से मुस्कुरुहाट दिखाई देती है।

कर्नाटक चुनाव से भाजपा की हार के बाद भाजपा नेताओं को अधिकारियो से मोह भंग कर जिस जनता ने उन्हें सत्ता पर काबिज किया उनकी परेशानी को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए।

हालाकि इसमें सभी की अपनी अपनी कार्यशैली का रुतबा है।

कुछ भाजपा के वह नेता अपनी पार्टी पर सब कुछ जनभूजकर चुप बैठे हुए आखिर पार्टी की बदनामी न हो जाए।लेकिन चुनाव नजदीक हैं।पब्लिक हैं सब जानती है।उनकी समस्या को लेकर प्रदेश के मुखिया जी जहा दिन रात एक करते हुए नई नई विचारधारा से प्रदेश के लिए अलग करके जनता की बीच अपना भरोसा बनाने में लगे हुए हैं वही इसके विपरित परिस्थितियों का निर्माण देखा जा रहा है।

अब कर्नाटक में हार जीत के बाद गलियों में यही चर्चा है कि कही एमपी में भी इसका असर न हो जाए।वही पब्लिक के रुझान भी अब कर्नाटक चुनाव के बाद मोदी जी के नाम पर सहमति तो देखते हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर झांकने पर उनका मानो दम घुटता नजर आता है।

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