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सर्वोच्च अदालत द्वारा केंद्र सरकार को दी गई चेतावनी को अन्यथा नहीं लेना चाहिए  

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सर्वोच्च अदालत में कुल 34 न्यायाधीश हो सकते हैं ‌‌। वर्तमान में 5 नए न्यायाधीशों को नियुक्त किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अब पदस्थ न्यायाधीशों की कुल संख्या 32 हो गई है। पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सर्वोच्च अदालत और केंद्र सरकार के बीच टकराव को देखने को मिला जिसके चलते नियुक्ति में कुछ माह का विलंब हुआ। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को नियुक्ति में हो रहे विलंब को लेकर चेतावनी दी थी आखिरकार उस पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत के कॉलेजियम के द्वारा 5 न्यायाधीशों के सुझाए गए नामों पर मुहर लगा दी लेकिन केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिज्जू , सर्वोच्च अदालत की चेतावनी पर अपनी भड़ास निकालते हुए संविधान का पाठ पढ़ाते नजर आ रहे हैं। किरण रिज्जू फरमाते हैं कि जनता इस देश की मालिक है और हम सेवक हैं । हम सब यहां सेवा के लिए हैं । हमारा मार्गदर्शक संविधान है । संविधान के मार्गदर्शन और जनता की इच्छा के अनुसार देश का शासन चलेगा । कोई भी किसी को चेतावनी नहीं दे सकता।

यह सच है कि देश की मालिक जनता और मार्गदर्शक संविधान है लेकिन देश की व्यवस्था में संतुलन बनाने के लिए समय-समय पर जिस संवैधानिक व्यवस्था और मार्गदर्शन की जरूरत होती है उसमें सर्वोच्च अदालत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यदि सरकार सर्वोच्च अदालत पर भारी पड़ना चाहती है तो फिर अदालत की स्वतंत्र न्यायिक भूमिका पर सरकार का नियंत्रण खतरनाक साबित हो सकता है।

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