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इंदौर के राजवाड़ा की खोखली हो गईं लकड़ियां, कई राज्यों से बुलाए मजदूर

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इंदौर के दिल राजवाड़ा के रिनोवेशन का काम चार सालों से चल रहा है। इसके आगे के हिस्से का काम पूरा हो चुका है, जिसके बाद यहां सपोर्ट के लिए लगे लोहे के पाइप अब हटा लिए गए हैं। लोगों को राजवाड़ा अपने पुराने भव्य स्वरूप में दिखाई दे रहा है। फिलहाल अंदर वाले हिस्से में प्रोटेक्टिव कोटिंग का काम जारी है।

4 नवंबर तक इसे भी पूरा करने की बात अफसरों ने कही है। कोटिंग इसलिए की जा रही है ताकि पानी, दीमक, काई आदि से बचाव हो सके। सपोर्ट के लिए अभी भी पीछे के हिस्से में लोहे के पाइप लगे हैं, जिन्हें जल्द ही हटा लिया जाएगा।

अलग-अलग राज्यों से बुलाए मजदूर
रिनोवेशन के काम के लिए अलग-अलग राज्यों से लेबर बुलाए गए। लकड़ी के स्ट्रक्चर वाले हिस्से का काम पंजाब से आई टीम ने किया। बंगाल से कारपेंटर बुलाए गए। झारखंड और बिहार के लेबर भी रहे। काम जल्द खत्म करने के लिए दिन और रात के समय अलग-अलग टीमें लगाई गईं थीं। एक समय पर 100 लेबर तक ने काम किया। बाहर से लेबर लाने के पीछे का कारण विशेषज्ञता के साथ ही ज्यादा समय तक काम कराना भी था। स्थानीय लेबर देर शाम काम करने से मना कर देते हैं। पूरी इमारत भूकंप रोधी और वाटर प्रूफ बनाई गई है।

सागौन के गेट पर होगी पॉलिश
अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी ने बताया कि पहले सागौन की लकड़ी से बने मेन गेट पर पेंट कर रखा था। अब उसकी पॉलिशिंग होगी। इससे गेट पर बारिश का असर कम होगा और नेचुरल लुक में नजर आएगा।

होलकर शासकों की भव्यता का प्रमाण राजवाड़ा
राजवाड़ा महल पर्यटन के लिहाज से इंदौर के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यह होलकर राजवंश के शासकों का ऐतिहासिक महल है। इसका निर्माण 200 साल पहले हुआ था और आज तक यह महल पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण रखता है। महल की वास्तुकला, फ्रेंच, मराठा और मुगल शैली के कई रूपों व वास्तु शैलियों का मिश्रण है। महल का प्रवेश बेहद सुंदर और भव्य है। बड़ी-बड़ी खिड़कियां, बालकनी और गलियारे, होलकर शासकों और उनकी भव्यता का प्रमाण है।

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