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*चाय पर ही टिकी है फैक्ट्री मजदूरों और युवाओं की थकान मिटाने की दुनिया*

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प्रतिदिन 70 हजार कप चाय पी जाता है पीथमपुर

पीथमपुर   प्रदेश की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी पीथमपुर में चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि काम की शुरुआत, ब्रेक का बहाना और दोस्ती का जरिया है। सुबह 6 बजे की शिफ्ट से लेकर रात 10 बजे तक शहर की हर गली, हर सेक्टर में चाय की महक फैली होती है। यहां अनुमानत रोजाना 70,000 से ज्यादा कप चाय की खपत होती है। सबसे बड़े उपभोक्ता फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूर, स्टाफ और अधिकारी हैं। सेक्टर-1 से लेकर इंडोरमा गेट तक सैकड़ों चाय ठेले प्रतिदिन गुलजार रहते हैं।

मजदूरों और अधिकारियों का साथी, एक कप चायः

फैक्ट्रियों में काम करने वाले बताते हैं कि चाय उनकी थकान की सबसे सस्ती दवा है। कई फैक्ट्रियों ने कैंटीन में चाय के लिए विशेष बजट तक तय किया है। वहीं प्रोडक्शन से लेकर मीटिंग रूम तक चाय

युवाओं में बढ़ा कैफे कल्चर

अब पीथमपुर में तेजी से युवा पीढ़ी के बीच कैफे कल्चर भी उभर रहा है। कॉलेज स्टूडेंट्स, स्टार्टअप करने वाले युवाओं और सोशल मीडिया क्रिएटर्स के बीच चाय वाली बात, मिट्टी की चाय जैसे कैफे आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इन जगहों पर सादी चाय से लेकर तंदूरी, इलायची, तुलसी-टी और आइस-टी जैसे नए फ्लेवर भी मिल रहे हैं।

700 कप बिक्री

सोशल मीडिया पर स्टोरीज और रील्स के चलते युवा अब चाय को सिर्फ पीने का नहीं, दिखाने का माध्यम भी बना रहे हैं। कैफे मालिकों ने अपने अड्डों को एस्थेटिक लुक देकर युवाओं को जोड़ने में सफलता पाई है। कमल गोस्वामीए 25 वर्षों से चाय बेच रहे हैं। वे कहते हैं, यहां की फैक्ट्रियां चलें या बंद हों, चाय का दौर कभी नहीं रुकता। एक दिन में 600-700 कप चाय बिक जाती है। मजदूर हों या मैनेजर, सभी मेरे ग्राहक हैं।

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