क्या आपने कभी नीला फल देखा है, यदि आप ब्लू बेरी का नाम लेंगे तो बता दें कि ये इसका असली रंग गहरा बैंगनी है. दुनिया का अकेला नीला फल सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में उगता है. इसकी खासियत इसका रंग है, जो नेचर में बहुत कम देखने के लिए मिलता है.
ज्यादातर फल लाल, नारंगी, बैंगनी या लगभग काले रंग के होते हैं. नीले रंग के फल बहुत कम दिखाई देते हैं. दरअसल, ब्लू बेरी भी नीला नहीं होता है. वैज्ञानिक बताते हैं कि इसका असली रंग गहरा बैंगनी या इंडिगो के करीब होता है. यही वजह है कि असली नीला रंग पौधों में बहुत दुर्लभ माना जाता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ वर्षावनों में एक पेड़ इस नियम को तोड़ता हुआ दिखाई देता है. इसका नाम एलायोकार्पस एंगुस्टिफोलियस है, जिसे ब्लू क्वांडोंग, ब्लू फिग या ब्लू मार्बल ट्री भी कहा जाता है.
अनोखा नीला फल
यह पेड़ उत्तरी ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है.जब इस पर फल लगते हैं, तो उनका रंग तुरंत ध्यान खींच लेता है. फल छोटे और गोल होते हैं, आमतौर पर 1–2 सेंटीमीटर के. उनकी सतह चिकनी और सख्त होती है और रंग गहरा कोबाल्ट नीला दिखाई देता है. धूप में ये फल ऐसे चमकते हैं जैसे किसी ने जंगल में छोटे-छोटे नीले कांच के मोती बिखेर दिए हों.
क्या इसमें नीला पिगमेंट होता है?
शुरुआत में वैज्ञानिकों ने सोचा कि इस फल में कोई खास नीला पिगमेंट (रंग देने वाला रसायन) होगा. आमतौर पर पौधों के रंग इसी तरह बनते हैं, कुछ प्रकाश तरंगों को सोखकर और कुछ को परावर्तित करके. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने फल को कुचलकर उसका रंग निकालने की कोशिश की, तो एक अजीब बात हुई. फल टूटते ही उसका चमकीला नीला रंग गायब हो गया. इससे पता चला कि यह रंग किसी पिगमेंट से नहीं बन रहा.
असली रहस्य
बाद में माइक्रोस्कोप से जांच करने पर पता चला कि फल की बाहरी त्वचा में बहुत छोटी-छोटी परतें बनी होती हैं. ये परतें सेलूलोज नामक पदार्थ से बनी होती हैं, जो पौधों की कोशिकाओं की दीवारों में पाया जाता है. इन परतों की खास व्यवस्था सफेद रोशनी को इस तरह परावर्तित करती है कि हमें मुख्य रूप से नीली रोशनी दिखाई देती है. इसे स्ट्रक्चरल कलर कहा जाता है. ऐसी ही रंग बनाने की तकनीक तितलियों के पंखों, मोर के पंखों में देखने के लिए मिलती है.
इतना दुर्लभ क्यों है यह रंग?
दुनिया में बहुत कम फलों में स्ट्रक्चरल कलर पाया जाता है. ब्लू क्वांडोंग इसका सबसे शानदार उदाहरण माना जाता है. इसका नीला रंग केवल उसकी सूक्ष्म परतों की संरचना से बनता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि यह चमकीला नीला रंग पक्षियों को आकर्षित करने के लिए हो सकता है. पक्षियों की रंग देखने की क्षमता बहुत अच्छी होती है. हरे जंगल में चमकता हुआ नीला फल उन्हें आसानी से दिख जाता है.

