Site icon अग्नि आलोक

फिर शुरू हुआ यूपी, बिहार और झारखंड का सफर; इंदौर बायपास पर लग रही वाहनों की कतार

Share

महाराष्ट्र में कोरोना पर सख्ती बढ़ने के बाद पलायन 2.0 नजर आने लगा है। महाराष्ट्र में नागपुर-बैतूल, सेंधवा-बड़वानी की ओर से लोगों ने मध्यप्रदेश में प्रवेश करना शुरू कर दिया है। आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर इंदौर से लेकर तमाम जिलों के बाइपास पर कोई बाइक से जाते हुए मिल रहा है तो कोई ऑटो से यूपी, बिहार, झारखंड के लिए निकल रहा है।

इंदौर में एबी रोड बायपास पर खड़े हो जाइए। आपको 15 मिनट के ही इंतजार में एक के पीछे एक 20 से 25 ऑटो रिक्शा निकलते दिख जाएंगे। ये ऑटो रिक्शे इंदौर शहर के नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के मुंबई, वसई, पुणे, नवी मुंबई, ठाणे और विरार से हैं। वहां काम-धंधा नहीं होने और लंबे लॉकडाउन के डर से इन्होंने एक बार फिर अपने घर का रुख कर लिया है। हजारों की संख्या में 200 सीसी की क्षमता वाले छोटे से ऑटो पर लोग अपने घरों 1600 से 2000 किलोमीटर के सफर पर निकल चुके हैं। हर ऑटो में कम से कम चार सवारी है। तीन दिन पहले इस तीन पहिया वाहन पर शुरू हुई इनकी जिंदगी अभी अगले तीन दिन तक ऑटो रिक्शा पर ही गुजारनी है। इनका इंदौर के आसपास पहुंचना शुरू हो गया है। अब वे आगे की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले साल की तरह इस साल भी लॉकडाउन में भूखे मरने की नौबत न आ जाए, इसलिए रिक्शा चालक परिवार लेकर यूपी, झारखंड, बिहार के गांवों के लिए निकल पड़े हैं।

लोगों को डर सताने लगा है कि कभी भी लंबा लॉकडाउन लग सकता है। इससे डरे-सहमे लोग अपने गांवों की ओर पलायन करने लगे हैं। मुंबई (महाराष्ट्र) से जा रहे ऑटो में सवार प्रमोद भारती ने बताया मेरे साथ आगे पीछे 5 ऑटो चल रहे हैं।

मुंबई से गुरुवार को चले हमारे साथ राकेश सिंह, कृष्णा ठाकुर, संजय सिंह ठाकुर सहित हम 15 लोग हैं, जो मुंबई में रहते हैं और ऑटो चलाते हैं पर वहां पर लॉकडाउन लग गया और अब फिर से कोरोना महामारी पहले से ज्यादा बीमार कर रही है, इसलिए गोरखपुर प्रयागराज इलाहाबाद अलग-अलग वापस अपने अपने गांव जा रहे हैं, क्योंकि अगर कोई बीमार हो गया तो हम उपचार नहीं करा सकते अगर बीमारी आएगी तो हम तो घर पर ही ठीक हैं। सब साथ में रहेंगे इसलिए घर जा रहे हैं।

सुरेश सिसोदिया जो पिपलिया सड़क देवास निवासी इंदौर में एक कंपनी में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर किराए के मकान में रहता था। शनिवार को सुबह मकान खाली कर सामान व दो बेटियां पत्नी सहित किसी लोडिंग वाहन चालक का सहयोग लेकर भोपाल चौराहे तक आ गए। यहां दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक भोपाल चौराहे पर धूप में खड़े रहे। भोपाल चौराहे पर ड्यूटी दे रहे पुलिसकर्मियों ने पानी पिलाया और मक्सी बायपास भेजा।

मुंबई से अलग-अलग क्षेत्र से चंद्रभान सिंह, रोहित कुमार, विपिन भोसले, केदारसिंह सहित 9 लोग इलाहाबाद जिले के भटपुरा क्षेत्र के 9 लोग अलग-अलग वाहनों में बैठकर देवास भोपाल बायपास पहुंचे, वहां से फिर साधन नहीं मिला तो लोडिंग वाहन से भोपाल के लिए बैठे। चंद्रभान ने बताया हम लोग घर जा रहे हैं बीमारी से डर लग रहा है।

इंदौर बायपास रोड से गुजर रहे ऑटो रिक्शा में कई परिवार भी दिखाई देते हैं। कई ऑटो रिक्शा चालक किराया लेकर खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को उनके मूल निवास स्थानों तक छोड़ने जा रहे हैं। मुंबई से आ रहे सीएनजी चालित ऑटो रिक्शा की इंदौर बायपास रोड के ईंधन पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं, क्योंकि इस रूट पर सीएनजी पंपों की कमी है। यहां सीएनजी पंप सुबह छह बजे से रात 10 बजे के बीच खुलते हैं।

बायपास से गुजर रहे लोगों के चेहरों पर चिंता, परेशानी, हताशा और बेबसी है। चिंता, परिवार को सही-सलामत घर पहुंचाने की है। धूप में बगैर भोजन-पानी की व्यवस्था के सफर करना परेशानी से कम नहीं, हताशा इसलिए कि कुछ महीनों पहले ही बड़ी उम्मीदों से वापस लौटे थे ताकि पैसे कमाकर परिवार पाल सकें। ये चेहरे बेबस भी हैं क्योंकि जाना तो नहीं चाहते लेकिन महाराष्ट्र में कमाई कुछ बची नहीं, लंबा लॉकडाउन लग गया तो बचत भी खत्म हो जाएगी।

कई परिवार ढाई सौ किलोमीटर से ज्यादा सफर रिक्शा से पूरा कर चुके हैं।

झांसी जाना है, ट्रक में किया सेंधवा से राऊ का सफर
राऊ सर्कल पर दोपहर 2 बजे ट्रक से अपनी पत्नी के साथ उतरे उपेंद्र कुमार ने बताया, तलेगांव से कल शाम को पत्नी को लेकर निकला हूं। झांसी जाना है। कार, बस, टेम्पो जो भी मिला, उससे सुबह तक सेंधवा पहुंचा। वहां से ट्रक से यहां तक पहुंचे। आगे का सफर पता नहीं कैसे पूरा होगा। फैक्टरी में गाड़ी चलाते हैं। लॉकडाउन बढ़ गया तो शायद नौकरी भी चली जाए, इसलिए घर लौट रहा हूं। इसी ट्रक से उतरे एक और शख्स ने बताया, पुणे से कोई साधन नहीं मिल रहा था। पांच गाड़ियां बदलकर सेंधवा तक पहुंचे। वहां से ट्रक में बैैठकर यहां तक आए। पता नहीं घर कब पहुंच सकूंगा। वो तो अच्छा है इंदौर में आकर भोजन-पानी मिल गया।

दो सौ से ज्यादा लोग पैदल रहे
गुजरात के वाघई से अपनी बाइक पर कानपुर जा रहे जितेंद्र सिंह ने बताया, कपड़े का व्यापार करता हूं। लॉकडाउन में व्यापार तो बचा नहीं इसलिए बाइक से ही निकल पड़ा। सेंधवा बॉर्डर पर मुझे करीब दो सौ लोग दिखे जो पैदल ही अपने घरों को जा रहे हैं। वे इंदौर की तरफ ही बढ़ रहे हैं।

कमाई नहीं रही, रहना मुश्किल हुआ
ऑटो में परिवार सहित मुंबई से इलाहाबाद जा रहे संजय पटेल ने बताया, मुंबई में ऑटो चलाकर परिवार पालता हूं। कोरोना बढ़ने के कारण खतरा तो बढ़ा ही है लेकिन लॉकडाउन की वजह से कमाई भी प्रभावित हुई है। कमाई कम हो जाने से वहां रहना भी मुश्किल हो रहा था, इसलिए वापस इलाहाबाद जा रहा हूं।

Exit mobile version