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तो फिर पुलिस की महिला थानेदार ने हाईकोर्ट में उपस्थित होकर भंवर सिंह पलाड़ा को निर्दोष क्यों बताया?

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एस पी मित्तल,अजमेर

राजस्थान में राजपूत समाज के प्रतिष्ठित नेता और अजमेर के प्रमुख समाजसेवी भंवर सिंह पलाड़ा पर पूर्व में दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली राजस्थान पुलिस की महिला थानेदार ने 7 अगस्त की रात को पलाड़ा के अजमेर के जवाहर नगर क्षेत्र के आवास पर जोरदार हंगामा किया। महिला थानेदार को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भी मौके पर बुलाना पड़ा। हंगामे के समय पलाड़ा घर पर नहीं थे, लेकिन पलाड़ा की पत्नी और अजमेर की जिला प्रमुख श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा घर में ही थीं। पलाड़ा के पुत्र शिवप्रताप पलाड़ा द्वारा पुलिस में की गई शिकायत में आरोप लगाया कि महिला थानेदार ने सुशील कंवर के साथ भी बदसलूकी की। रिपोर्ट में महिला थानेदार पर तीन करोड़ रुपए मांगने का भी आरोप लगाया है। पलाड़ा की शिकायत पर अजमेर पुलिस ने भीलवाड़ा पुलिस की महिला थानेदार को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। मजिस्ट्रेट ने महिला थानेदार को जमानत पर रिहा कर दिया। सवाल उठता है कि जब महिला थानेदार को हंगामा ही करना था तो फिर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में भंवर सिंह पलाड़ा को निर्दोष क्यों बताया? भीलवाड़ा पुलिस ने पलाड़ा के विरुद्ध जो दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज की थी उसे निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर न्यायाधीश दिनेश मेहता ने पीड़ित महिला थानेदार को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए। 24 मई 2022 को महिला थानेदार ने हाईकोर्ट में उपस्थित होकर आग्रह किया की दुष्कर्म की एफआईआर को निरस्त कर दिया जाए, क्योंकि भंवर सिंह पलाड़ा निर्दोष हैं। महिला थानेदार ने हाईकोर्ट में जो बात कही उसी के आधार पर गत 28 जुलाई को न्यायाधीश दिनेश मेहता ने पलाड़ा के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को निरस्त करने के आदेश दिए।  न्यायाधीश मेहता ने अपने आदेश में लिखा कि आमतौर पर दुष्कर्म की एफआईआर निरस्त नहीं होती है। लेकिन इस मामले में आरोप लगाने वाली महिला कानून की समझदार है और अपना बुरा भला समझती है। महिला थानेदार समझदार है, इसलिए माफी भी दे सकती है। ऐसा नहीं कि महिला थानेदार को पलाड़ा को निर्दोष बताने का अवसर 24 मई को ही मिला, इससे पहले 31 जनवरी 22 को भी मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयानों में भी पलाड़ा को निर्दोष बताया गया। उल्टे यह आरोप लगाया कि महिला थानेदार पर दबाव डाल कर पलाड़ा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाई गई है। पलाड़ा पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि एफआईआर दर्ज होने के पीछे भी उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की साजिश है। यह बात अपने आप में महत्वपूर्ण है कि हाईकोर्ट से एफआईआर निरस्त होने के 10 दिन बाद भी हंगामा शुरू हो गया है। पलाड़ा के पुत्र का यह आरोप भी गंभीर है कि अब हंगामा करने वाली महिला थानेदार तीन करोड़ रुपए की मांग कर रही है। राशि नहीं देने पर पलाड़ा को बर्बाद करने की धमकी भी दी गई है। सब जानते हैं कि भंवर सिंह पलाड़ा राजपूत समाज के प्रतिष्ठित नेता हैं। मौजूदा समय में भी श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा अजमेर की जिला प्रमुख हैं। पलाड़ा के समर्थक आरोप लगा रहे हैं कि कुछ लोग पलाड़ा की छवि खराब कर रहे हैं। 

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