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*किन्नरों में 150 करोड़ की संपत्ति का है विवाद…*

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कभी लोगों के रहमों करम पर जीने वाले नंदलाल पुरा के किन्नर आज लगभग 150 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। यही  इनके बीच विवाद का मुख्य कारण है। महाराजा यशवंत राव होल्कर ने कभी इन्हें यहां बुलाकर बसाया था और नंदलालपुरा में जवाहर मार्ग पर दो बड़े-बड़े मकान रहने के लिए दिए थे और पीछे मस्जिद बनाने के लिए स्थान दिया था। आज यही तीनों स्थान लगभग 100 करोड़ की कीमत के हैं। वही नंदलालपुरा के दोनों किन्नर डेरों में रहने वालों किन्नरों के पास लगभग 50 करोड़ की अन्य संपत्ति है।

इन दोनों डेरों में लगभग 100 किन्नर रहते हैं। जो विभिन्न राज्यों से आए हुए हैं। आज उनके पास शानो शौकत और विलासिता की सारी चीजें मौजूद हैं। महंगी गाड़ियां, ज्वेलरी,एसी, मंहगी घड़ियां,ब्रांडेड कपड़े सभी चीजें इनके डेरों में मौजूद हैं। यहां तक की किन्नरों ने अपने डेरों की रक्षा के लिए प्राइवेट एजेंसियों के 5 से 10 बाउंसर तैनात कर रखे हैं।

जिला कलेक्टर मनीष सिंह ने शहर में इनके द्वारा की जाने वाली जोर जबरदस्ती पर लगाम लगाई थी। सभी किन्नरों को बुलाकर उन्होंने हिदायत दी थी कि सभी सुविधाएं उन्हें दी जाएंगी लेकिन शहर में किसी भी कीमत पर जोर जबरदस्ती से की जाने वाली वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मनीष सिंह के जाने के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग ने इनके द्वारा नेग के नाम पर की जाने वाली वसूली पर लगाम नहीं लगाई यही कारण है कि इनका हौसला बढ़ता चला गया। आज इंदौर किन्नरों के द्वारा की जाने वाली वसूली से लोग परेशान हैं। शादी ब्याह के 51 हजार, मकान दुकान बने तो 1 लाख मांगते हैं नहीं देने पर परिवार को जो अपमान और पीड़ा भोगना पड़ती है वह पीड़ित परिवार ही जानता है। आज इंदौर किन्नरों की वसूली का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है

। यही कारण है कि पहले जहां मालवा क्षेत्र के ही किन्नर इन डेरों में आते थे वहीं अब पड़ोसी राज्यों बिहार उड़ीसा उत्तर प्रदेश यहां तक की बंगाल के भी किन्नर यहां आने लगे हैं। यहां उन्हें विलासिता का जीवन मिलता है। एक समय था जब इन किन्नरों के हिंदू नागरिक बैंक में खाते होते थे और यह ब्याज नहीं लेते थे। आज उनके द्वारा उगाई जाने वाली राशि कई लोग ब्याज पर चलाते हैं। नंदलालपुरा में किन्नरों के दो डेरों में एक डेरा नए किन्नरों का होता था और दूसरा डेरा बूढ़े किन्नरों का होता था इन दोनों डेरों के बीच विवाद की शुरुआत साउथ तोड़ा के रहने वाले किन्नर मतीन के डेरे के गुरु बन जाने के बाद से प्रारंभ हुई।

बाद में मतीन गुरु की हत्या हो गई जिसमें दुर्गा गुरु और अन्य कई किन्नरों को कोर्ट से सजा भी मिली थी। विवाद इतना बढ़ता गया कि यहां के कई किन्नरों ने शहर के अन्य कई स्थानों पर अपने डेरे बना लिए। पिछले दिनों किन्नरों के बीच एक नया विवाद बढ़ा सनातनी और गैर सनातनी का। जबकि किन्नरों का कोई एक धर्म नहीं होता है वह सभी धर्मों का आदर करते हैं और सभी धर्मों का पालन करते हैं। वह भुजरिया भी मनाते हैं और ताजिए भी बनाते हैं। अगर शहर में उनके द्वारा की जाने वाली खुलेआम वसूली और गुंडागर्दी को नहीं रोका गया तो आने वाले समय में यह विवाद और बढ़ सकता है।

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