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इंदौर, भोपाल जैसे शहरों में मेट्रो की जरूरत नहीं, बीआरटीएस हटाना भी गलत-विशेषज्ञ आशीष वर्मा

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इंदौर। बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने कहा है ट्रैफिक के मामले में वियना गोल्ड स्टैंडर्ड है। इंदौर को वियना जैसा बनाना है तो यहां मेट्रो से ज्यादा जरूरी लोक परिवहन के साधन-खास कर यात्री बसों की संख्या बढ़ाना चाहिए। इंदौर, उज्जैन, भोपाल आदि शहरों में मेट्रो की उतनी जरूरत नहीं है जितनी जरूरी यात्री बसों की है।इंदौर, भोपाल में बीआरटीएस क्यों हटाया गया, समझ से परे हैं।होना यह चाहिए था कि बीआरटीएस में वाहनों के लिये लाइनें बढ़ाना थी।‘शहर का यातायात, परिदृश्य और समाधान’ विषय पर परिचर्चा में वर्मा ने कहा पहले भी दो बार इसी मुद्दे पर प्रेस क्लब में चर्चा कर चुका हूं। तब भी कहा था मेट्रो के लिये उतनी सवारियां मिलना संभव नहीं। इससे बेहतर ऑप्शन पब्लिक बसें हो सकती हैं, कार का उपयोग कम करने में भी बसें मददगार हो सकती है।विदेशों में इतने फ्लाय ओवर नहीं हैं जितने इंदौर में बन रहे हैं। जब जीवन में शुद्ध हवा और शुद्ध पानी ही नहीं होंगे तो स्टैण्डर्ड ऑफ़ लिविंग का क्या मतलब। आज सिंगापुर के हर आदमी की इनकम हमारे देश के किसी सीईओ से ज्यादा है। इसके बाद भी वहां के लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग भी करते हैं और यातायात नियमों का पालन भी करते हैं। कभी इंदौर में साइकिलें खूब दिखती थीं, अब हर घर में कार, टू वीलर एक से अधिक हैं। हर जगह सड़कें खुदी पड़ी हुई हैं। कहीं जाने के लिए घंटों ट्रैफिक में फंसे या खड़े रहना पड़ता है। इन तमाम व्यस्थाओं को हमें समझना और बदलना होगा। हमें समझना होगा कि हमें क्वालिटी ऑफ़ लाइफ चाहिए या स्टैण्डर्ड ऑफ़ लाइफ? आज हमारे परिवारों की स्थिति यह है कि हर फैमिली मेम्बर के पास अपनी अलग गाड़ी है पर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ किसी के पास नहीं है। इन गाड़ियों की वजह से हम हर दिन इतना प्रदूषण अंदर खींच रहे हैं, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।स्वच्छता में आठ बार नंबर वन का ख़िताब पाने वाले इंदौर शहर में आज भी सबसे बड़ी और ज्वलंत समस्या यातायात को लेकर बनी हुई है। विडम्बना यह है कि यहाँ आने वाले सभी शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी यातायात व्यवस्था सुधारने को अपनी पहली चुनौती मानते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद आज तक यातायात का ढर्रा जस का तस बना हुआ है। 45 आदमी एक बस में जा सकते हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सब जगह अवेलेबल होगा तो ट्रैफिक में राहत मिल सकती है।संस्था सेवा सुरभि द्वारा जिला प्रशासन, इंदौर पुलिस, नगर निगम एवं विकास प्राधिकरण की सहभागिता में चलाए जा रहे ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ अभियान के तहत शनिवार को प्रेस क्लब में हुई हुई इस परिचर्चा में प्रो (डॉ) आशीष वर्मा ने कहा कि यातायात व्यवस्था सुधारने में हमें ही चिंता करना पड़ेगी। इसमें पुलिस का कोई रोल नहीं है फिर भी हम उन्हीं पर निर्भर रहते हैं और उन्हीं को कोसते हैं। ट्रैफिक मैनेज करना बहुत काम्प्लेक्स और टफ काम है। इसके लिए हमें ही अवेयर रहना होगा कि हम अट्रेकटिव ट्रासपोर्ट बनाएं और उनका उपयोग भी करें। फुटपाथ व्यवस्था भी ऐसी होना चाहिए कि जिसमें साइकिल और पैदल चलने वाले आसानी से चल सकें। वर्मा ने अपनी बात का निष्कर्ष देते हुए जो सुझाव दिए उनका सार यही है कि हम लोक परिवहन को बढ़ावा दें, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत बनाएं, निजी गाड़ियों के उपयोग को कम करें और पैदल तथा साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित और क्रासिंग बनाएं।वरिष्ठ पत्रकार अमित मंडलोई ने आम नागरिक का नजरिया रखा। उन्होंने कहा इंजीनियरिंग, इंफोर्समेंट, एजुकेशन तीन के आसपास घूमती है ट्रैफिक की समस्या। ट्रैफिक समस्या का मूल कारण स्वच्छता मामले जैसी सामूहिक जिम्मेदारी का अभाव होना है।

🔹ट्रैफिक को लेकर महापौर, सांसद बोले
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने माना ट्रैफिक प्रॉब्लम चैलेंज तो है लेकिन यह भी याद रखना होगा कि इंदौर की पापुलेशन वियना से अधिक है। असंभव कुछ नहीं है। इंफ्रास्ट्रकचर, ट्रैफिंग इंजीनियर इन सबसे पहले अवेयरनेस जरूरी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट जब तक फायदे का सौदा नहीं बनेगा, तब तक इस दिशा में सारे प्रयास बेकार साबित होंगे।इस पर वर्मा ने कहा आर्थिक लाभ की अपेक्षा ऐसे देखें कि पर्यावरण सुधरेगा, लोगों की हेल्थ कॉस्ट कम होगी। मैं डबल डेकर सिस्टम नीचे बस, ऊपर मेट्रो) के पक्ष में भी नहीं हूं। सांसद शंकर लालवानी ने वर्मा से अनुरोध किया कि आप इंदौर के परिप्रेक्ष्य में शॉर्ट, मिडियम और लॉंग टर्म प्लॉन बना कर दें।
अतुल शेठ का कहना था राज्य सरकार, केंद्र सरकार, नगर सरकार ऐसा फार्मूला बनाएं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के घाटे की भरपाई कैसे हो। जैन इंजीनियरिंग सोसायटी से अरविंद जैन, बीके गुप्ता का कहना था पैदल चलने के लिए साइकिल चलाना तो दूर की बात है पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नही। दिलीप का कहना था वियना में टू वीलर की बेहतर रोड व्यवस्था है। यहां तो सबसे बड़ी समस्या टू वीलर की है।
जीएसआईटीएस के डायरेक्टर नीतेश पुरोहित का कहना था पहले जहां बंगले हुआ करते थे वहां मल्टी स्टोरीज बन गई। रोड है ही नहीं, पानी की समस्या बढ़ गई। इंडस्ट्री लग जाती है लेकिन बाकी जरूरतों को अनदेखा किया जाता है। लैंड यूज चेंज करते हैं तो इंटीग्रेटेड प्लॉन भी होना चाहिए।

🔹अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित किया
प्रारंभ में सांसद शंकर लालवानी, वरिष्ठ पत्रकार अमित मंडलोई, संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा, अतुल सेठ, एसजीएसआईटीएस के डायरेक्टर नितेश पुरोहित और प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने दीप प्रज्वलन कर परिचर्चा का शुभारंभ किया। अतिथियों का स्वागत प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी, कीर्ति राणा, गौतम कोठारी, मोहन अग्रवाल, डॉ. सचिन नारोलकर, संजय त्रिपाठी, निकेतन सेठी, रमेश गुप्ता पीठेवाले एवं अन्य सदस्यों ने किया। अतुल सेठ ने आशीष वर्मा का परिचय दिया। संस्था की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए। संचालन किया प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने।

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