अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की नई डिप्टी सीएम बनकर सियासी विरासत संभालेंगी. उनके शपथ लेते ही एनसीपी में बड़े सवाल खड़े हो जाएंगे. सबसे बड़ी चुनौती राज्यसभा सीट पर उत्तराधिकारी चुनने और बारामती उपचुनाव में जनता की सहानुभूति बटोरने की है. वित्त जैसे भारी-भरकम मंत्रालयों के बंटवारे और शरद पवार के साथ भविष्य में संभावित विलय पर सबकी नजरें टिकी हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है. सूत्रों के मुताबिक अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद खाली हुई राजनीतिक और प्रशासनिक जगह को भरने के लिए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को प्रदेश का नया उपमुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया है. यह फैसला न केवल पवार परिवार के लिए बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित होने वाला है. सुनेत्रा पवार अब तक पर्दे के पीछे से संगठन और बारामती की कमान संभालती थीं. अब वो सीधे सत्ता के शीर्ष पर होंगी. हालांकि, उनके शपथ लेते ही पार्टी और गठबंधन के भीतर कई ऐसे सवाल खड़े हो जाएंगे जिनका जवाब महाराष्ट्र की भावी राजनीति तय करेगा.
NCP के सामने खड़े 5 बड़े सवाल
सवाल-1: सुनेत्रा की खाली हुई राज्यसभा सीट पर कौन जाएगा?
सुनेत्रा पवार वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं. डिप्टी सीएम पद की शपथ लेने के बाद उन्हें 6 महीने के भीतर राज्य विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य बनना होगा, जिसके लिए उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना पड़ेगा. अब सवाल यह है कि उनकी जगह दिल्ली कौन जाएगा? पार्टी के भीतर चर्चा है कि अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राज्यसभा भेजा जा सकता है ताकि परिवार का प्रतिनिधित्व केंद्र में बना रहे. हालांकि पार्टी के पुराने वफादार नेता भी इस रेस में हैं. यदि पार्टी परिवारवाद के आरोपों से बचना चाहती है तो किसी वरिष्ठ ओबीसी या मराठा चेहरे को मौका मिल सकता है लेकिन अंतिम फैसला परिवार की सहमति पर ही टिकेगा.
सवाल-2: सुनेत्रा MLC बनेंगी या सीधे चुनाव लड़कर विधायक?
सुनेत्रा पवार के पास सदन का सदस्य बनने के दो रास्ते हैं. पहला- वे सुरक्षित रास्ता चुनते हुए विधान परिषद (MLC) के जरिए सदन में प्रवेश करें जिसमें हार का कोई जोखिम नहीं है. दूसरा- वे विधायक (MLA) के तौर पर जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ें. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपनी राजनीतिक साख और अजित दादा की विरासत पर दावेदारी मजबूत करने के लिए वे विधानसभा उपचुनाव लड़ना पसंद कर सकती हैं. हालांकि पार्टी उन्हें MLC बनाकर सीधे मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपने का विकल्प भी चुन सकती है ताकि वे प्रशासन पर ध्यान केंद्रित कर सकें.
सवाल-3:सुनेत्रा अगर चुनाव लड़ती हैं तो सहानुभूति की लहर के बीच पिछले किस रिकॉर्ड को तोड़ने का दबाव होगा?
अगर सुनेत्रा बारामती से विधानसभा उपचुनाव लड़ती हैं तो उनके पक्ष में सहानुभूति लहर (Sympathy Wave) होना तय है. बारामती अजित पवार का अभेद्य किला रहा है. साल 2019 के विधानसभा चुनाव में अजित पवार ने यहां से 1.65 लाख से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में सुनेत्रा को इसी क्षेत्र में सुप्रिया सुले से हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और अजित पवार के विकास कार्यों का भावनात्मक जुड़ाव सुनेत्रा को बढ़त दिला सकता है. बारामती की जनता अक्सर पवार बनाम पवार की लड़ाई में भावुक होकर फैसला लेती रही है.
सवाल-4: क्या अजित पवार के सभी मंत्रालय सुनेत्रा को मिलेंगे?
अजित पवार के पास वित्त और नियोजन जैसे बेहद शक्तिशाली मंत्रालय थे. सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ये सभी विभाग सुनेत्रा को सौंपेंगे? वित्त मंत्रालय जैसा अहम विभाग अनुभव की कमी के कारण सुनेत्रा को देने में भाजपा हिचकिचा सकती है. संभावना है कि अजित पवार के मंत्रालयों का बंटवारा हो जाए. कुछ अहम विभाग भाजपा या शिंदे गुट के पास जा सकते हैं जबकि सुनेत्रा को सामाजिक न्याय या महिला बाल विकास जैसे विभाग मिल सकते हैं. हालांकि गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के लिए NCP (अजित गुट) इन विभागों को अपने पास ही रखने का दबाव बनाएगा.
सवाल-5: क्या सुनेत्रा पवार NCP का शरद पवार की पार्टी में विलय करेंगी?
अजित पवार के जाने के बाद पार्टी में यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अब ‘चाचा-भतीजे’ की सियासी जंग खत्म होगी? सुनेत्रा पवार के निजी संबंध शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ हमेशा मधुर रहे हैं. राजनीति में चर्चा है कि भावनात्मक आधार पर अजित गुट का शरद पवार की NCP (SP) में विलय हो सकता है. औपचारिक तौर पर पार्टी का नाम और सिंबल सुनेत्रा गुट के पास है. अब देखना होगा कि शरद गुट विपक्ष में कांग्रेस और शिवसेना उद्धव गुट को छोड़कर एनसीपी में सत्ता पक्ष के साथ आता है या फिर कुछ और समीकरण आने वाले वक्त में देखने को मिलते हैं.

