Site icon अग्नि आलोक

इन महिलाओं ने दिग्गजों का ढहाया किला:पल्लवी ने डिप्टी CM, ऊषा ने खाद्य मंत्री तो केतकी ने 8 बार के विधायक को हराया

Share

नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में अहम रहा। जहां भाजपा ने 37 साल बाद लगातार दूसरी बार बहुमत से सत्ता हासिल की है। वहीं सपा ने पिछला प्रदर्शन सुधारते हुए दोगुनी से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस व बसपा का पत्ता साफ हो गया। इसके इतर राज्य की मर्दानी महिलाएं न सिर्फ लड़ीं, ​बल्कि उन्होंने दिग्गजों को हराकर जीत हासिल की और ​जमकर ​सुर्खियां बटोरीं। भास्कर वुमन की रिपोर्ट में पढ़िए, उत्तर प्रदेश की वे पांच महिलाएं, जिन्होंने दिग्गजों के गढ़ में उन्हीं को हराकर जीत हासिल की…

1. सिराथू: पल्लवी पहली बार लड़ीं और डिप्टी सीएम को दी शिकस्त
इस बार सिराथू विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा। इस सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट से चुनावी मैदान में उतरने वाली पल्लवी पटेल ने भाजपा के दिग्गज नेता और यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को 7337 वोटों से हरा दिया। जानकारी के मुताबिक, पल्लवी पटेल बायो-टेक्नोलॉजी में स्नातक हैं। अपना दल पार्टी के संस्थापक सोनेलाल पटेल की बेटी और केंद्र में मंत्री अनुप्रिया पटेल की बहन हैं।

चुनाव जीतने के बाद पल्लवी पटेल। पल्लवी पटेल और अनुप्रिया पटेल के पिता सोनेलाल पटेल ने अपना दल की स्थापना की थी। साल 2009 में सोनेलाल पटेल के निधन के बाद उनकी पत्नी कृष्णा पटेल ने पार्टी की कमान संभाली।

पल्लवी पटेल ने केवल 14 दिन चुनाव प्रचार किया। उन्होंने प्रचार में लोगों से उनकी समस्याओं पर बात की, जबकि पूर्व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य जनसभा में बड़े-बड़े वादे करके चले जाते थे। सिराथू में खेती-बाड़ी, रोजगार और महंगाई जैसे मुद्दे किसी भी भाजपा दिग्गज ने नहीं उठाए। भाजपा नेताओं ने हाईवे बनाने और वहां प्लेन उतारने और ब्रिज बनाने जैसे मुद्दों का जिक्र किया, जिनसे आम लोगों ने खास जुड़ाव महसूस नहीं किया।

2. अमेठी: महराजी प्रजापति ने भाजपा के ‘राजा’ को हराया
अमेठी विधानसभा सीट पर दुष्कर्म मामले में जेल में बंद कद्दावर नेता गायत्री प्रजापति की पत्नी और सपा प्रत्याशी महराजी प्रजापति ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजय सिंह को 18,096 वोटों से हराया है। गायत्री प्रजापति सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और कांग्रेस के पुराने गढ़ में सबको मात दे दी। महराजी प्रजापति एक गृहिणी हैं। वह ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं और जनसभाओं में भाषण देने का उनका अनुभव भी कम था। उनकी जीत के पीछे की वजह सहानुभूति बताई जा रही है।

अमेठी से भाजपा के प्रत्याशी संजय सिंह को मात देने वाली महराजी प्रजापति जनसभाओं में अपनी दोनों बेटियों के साथ नजर आती थीं। बोलते-बोलते रो पड़ती थीं और फिर दोनों बेटियां भी रोकर लिपट जाती थीं, जिसके चलते वहां मौजूद लोग भी भावुक हो जाते थे।

3. हुसैनगंज विधानसभा सीट: ऊषा ने ​मंत्री जी से लिया पिछली हार का बदला
हुसैनगंज विधानसभा सीट पर सपा प्रत्याशी ऊषा मौर्य ने योगी के खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह धुन्नी को 25,181 वोटों से हरा दिया। कांग्रेस का हाथ छोड़कर सपा में शामिल हुईं ऊषा मौर्य 12वीं पास हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उषा मौर्य भाजपा के रणवेंद्र प्रताप सिंह से 18,593 वोटों से हार गईं थीं।

कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुईं ऊषा मौर्य को 91 हजार 497 वोट मिले। वहीं इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी और योगी के मंत्री रहे रणवेंद्र प्रताप सिंह धुन्नी 66 हजार 602 वोट मिले। दोनों के बीच जीत और हार का अंतर 25 हजार से अधिक है।

4.बांसडीह: केतकी सिंह ने सपा उम्मीदवार को दी पटखनी
बांसडीह विधानसभा सीट से भाजपा गठबंधन की निषाद पार्टी प्रत्याशी केतकी सिंह ने 8 बार के विधायक और नेता विपक्ष रामगोविंद चौधरी को पटखनी दी। केतकी सिंह 3000 हजार से अधिक वोटों से जीती हैं। केतकी सिंह छत्तीसगढ़ के दुर्ग की रहने वाली हैं और यूपी की बहू हैं। उनका परिवार राजनीतिक पृष्ठभूमि का है। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता को हराने के बाद केतकी सिंह को योगी सरकार में मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। बांसडीह विधानसभा सीट से साल 2017 में केतकी सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ा था। बांसडीह विधानसभा बलिया जिले की हाई प्रोफाइल सीट है।

बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाली भाजपा प्रत्याशी केतकी सिंह ने साल 2017 में भी यहीं से चुनाव लड़ा था। उस वक्त उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो में वह किसी को दस जूते मारने और एक गिनने की बात कह रही थी।

5. आगरा ग्रामीण: बेबी रानी मौर्य के आगे नहीं टिकीं बसपा की ‘किरण’
आगरा ग्रामीण विधानसभा सीट से भाजपा की दिग्गज नेता बेबी रानी मौर्य ने 76,608 से ज्यादा वोटों से बसपा प्रत्याशी किरण प्रभा केसरी को हरा दिया। भाजपा ने उन्हें दलित चेहरे के तौर पर उतारा था क्योंकि यह आरक्षित सीट है। भाजपा की विधायक हेमलता दिवाकर कुशवाह से लोग खासे नाराज थे, ऐसे में भाजपा ने चुनावी मैदान में बेबी रानी मौर्य को उतारा। चुनावी मैदान में बेबी काफी आत्मविश्वास से भरी नजर आती।

बेबी रानी मौर्य ने 15 साल बाद विधानसभा चुनाव लड़ा है। इससे पहले बेबी रानी मौर्या ने भाजपा की टिकट पर वर्ष 2007 में एत्मादपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

आगरा की पहली महिला मेयर रहीं बेबी रानी
बेबी रानी मौर्य राज्यपाल बनने से पहले भी सक्रिय राजनीति में रह चुकी हैं। वह 1995 में भाजपा में शामिल हुई थीं। उसी वर्ष उन्हें भाजपा से मेयर पद का प्रत्याशी बनाया गया था। चुनाव जीतकर वह आगरा की पहली महिला मेयर बनीं थीं। इसके अलावा भाजपा में वह 1997 में राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। 2002 से 2005 तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रहीं। 2018 में उन्हें बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सदस्य बनाया गया था। इसके बाद उत्तराखंड की राज्यपाल बनाया गया।

Exit mobile version