रांची: वो घोटाला जिसने तत्कालीन एकीकृत बिहार-झारखंड में सनसनी फैला दी थी, वो घोटाला जिसमें सबसे ज्यादा पैसों का घपला रांची की डोरंडा ट्रेजरी से किया गया, वो घोटाला जिसमें दो पूर्व सीएम यानि लालू प्रसाद यादव से लेकर जगन्नाथ मिश्रा तक शामिल थे। इस घोटाले की जब परतें खुलनी शुरू हुईं तो जांच करने वाले अफसर भी हैरान रह गए। घोटाला इतना बड़ा कि उसमें 26 सालों तक लंबी सुनवाई चली। झारखंड में चारा घोटाले के दर्ज 53 मामलों में यह 52वां केस है। इसमें से पांच मामले में लालू प्रसाद समेत अन्य राजनीतिज्ञ और अधिकारी-कर्मी तथा आपूर्तिकर्त्ता दोषी बनाये गये थे। जिसमें 4 केस में लालू प्रसाद को दोषी करार देते हुए सजा सुनायी जा चुकी है।
229 प्रतिशत अधिक निकासी डोरंडा ट्रेजरी से हुई
चारा घोटाले के जांच में यह पाया गया कि पशुपालन विभाग का बजट से 229 प्रतिशत अधिक की अवैध निकासी डोरंडा कोषागार से हुई। इसके लिए फर्जी मांग पत्र आवंटन पत्र और इसके आधार पर फर्जी आपूर्ति आदेश निर्गत किये गये। 1990 में डोरंडा ट्रेजरी से अधिक 50 हजार रुपये तक का बिल ही पास करने का प्रावधान था, लेकिन फर्जीवाड़े के इस खेल में घोटालेबाज बिल को 50 हजार से थोड़ा कम दिखाकर अलग-अलग भागों में बांट कर फर्जी बिल से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी कर ली।
सांढ समेत कई पशुओं और सैंकड़ो टन चारा को स्कूटर से ढोने की कहानी
करीब 950 करोड़ रुपये की इस अनियमितता मामले में फिल्मी अंदाज में कई ऐसी अनियमितता बरती गयी कि जब महाघोटाले की बात सामने आयी, तो सभी चौंक गये। इस पूरे घोटाले में पशुओं साढ़ , बछिया समेत कई पशुओं को स्कूटर से हरियाणा से रांची लाने की बात सामने आयी, जबकि सैकड़ों टन पशु अनाज भी स्कूटर और मोपेड पर ढोये गये। दरअसल घोटालेबाजों की ओर से जो डोरंडा ट्रेजरी में अवैध निकासी मामले में 400 सांड हरियाणा और दिल्ली से रांची लाने का लाने का जो बिल दिया था, उस बिल की जांच की गयी, तो स्कूटर और मोटरसाईकिल का निकला।
प्रारंभ में लालू प्रसाद ने गंभीरता से नहीं लिया
1996 में जब चारा घोटाला सुर्खियों में आया, तो लालू प्रसाद ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बिहार विधानसभा में कई सदस्यों ने इसकी जांच का मुद्दा उठाया था, उस वक्त लालू प्रसाद का जवाब था- सीबीआई क्या चीज है, हम तो इसका यूएनओ से जांच करा देंगे, ..फिलहाल इसकी जांच लोक लेखा समिति को करने दें।
चारा घोटाला में खुलासा : ‘लालू यादव पॉलिथीन में भरकर ले जा रहे थे नोट, पैकेट फटा और जमीन पर बिखर गए रुपये ही रुपये
बहस के दौरान गवाह आरके दास ने अपने बयान में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव जब पूर्व पशुपालन निदेशक एसबी सिन्हा के आवास से निकल रहे थे तब उनके हाथ में एक पॉलिथीन का था। वहां से निकलते वक्त पॉलिथीन फट गया था और उससे नोटों के बंडल गिरकर जमीन पर बिखर गए थे। यहां बता दें कि एसबी सिन्हा का अब देहांत हो चुका है। अब इस केस की सुनवाई 26 मार्च हो होगी। गवाह आरके दास पटना के पशुपालन विभाग के सेवानिवृत्त प्रशासनिक पदाधिकारी हैं। चारा घोटाले में उनके 80 पेज के बयान को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। जज के सामने आरके दास ने कहा कि वह एक बार पशुपालन विभाग के तत्कालीन निदेशक एसबी सिन्हा (अब मृत) के पटना स्थित आवास पर ऑफिस के काम के सिलसिले में मिलने गये थे। वहां पहुंचकर पता चला कि एसबी सिन्हा की कुछ महत्वपूर्ण लोगों के साथ मीटिंग चल रही है। तब वह बाहर बैठकर ही इंतजार करने लगे।- आरके दास जब वहां बैठे थे तभी उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और विधायक आरके राणा को एसबी सिन्हा के कमरे से निकलते हुए देखा। वहां से निकलते वक्त लालू यादव के हाथ में काले रंग की पॉलिथीन पैकेट था। लालू यादव जैसे ही कमरे से बाहर निकले वैसे ही उनके हाथ में लटका पॉलिथीन का पैकेट फट गया और उसमें रखा नोटों का बंडल जमीन पर फैल गया। तभी विधायक आरके राणा ने झटपट नोटों को दोबारा से पॉलिथीन में समेटा और दोनों नेता वहां से चले गए।
- सीबीआई की विशेष अदालत में सीबीआई की ओर से अधिवक्ता बीएमपी सिंह पैरवी कर रहे हैं। बीएमपी सिंह की ओर से पूछे गए सवालों पर ही गवाह आरके दास ने लालू यादव के हाथ से नोटों का बंडल गिरने की बात बताई। आरके दास ने कोर्ट को बताया लालू यादव के हाथ में पॉलिथीन देखकर ही उन्हें अंदेशा हो गया था कि इसमें नोटों के बंडल हैं, लेकिन जब वह फटकर जमीन पर बिखर गया तो उनका अंदेशा स्पष्ट हो गया। लालू प्रसाद यादव फिलहाल जेल में ही हैं। वह चारा घोटाला के अलग-अलग मामले में सजा काट रहे हैं। लालू अपनी आधी सजा काट चुके हैं, जिसके आधार पर वह कोर्ट से जमानत की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक बाहर आने का मौका नहीं मिला है।
देवगोड़ा सरकार पर भी दबाव बनाने की कोशिश
वहीं 1997 में जब चारा घोटाले का मामला तूल पकड़ा और अदालत से वारंट जारी होने के बाद लालू प्रसाद को जमानत नहीं मिली, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा। तब लालू प्रसाद ने आरजेडी के समर्थन से केंद्र में बनी देवगोड़ा सरकार पर भी दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके और हाईकोर्ट की निगरानी में हुई जांच के क्रम में एक के बाद एक मामले में वे दोषी ठहराते गये।

