एस पी मित्तल,अजमेर
हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई झील संरक्षण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. समित शर्मा (आईएएस) की ईमानदार सक्रियता और सख्त निर्देशों से अजमेर में आनासागर के भराव क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों में खलबली मची हुई है। अवैध निर्माण करने वाले अधिकांश लोग जमीनों का कारोबार करते हैं। ऐसे कारोबारियों को वो सब तरीके आते हैं, जिससे ईमानदार प्रयासों को विफल किया जा सके। ऐसे धंधेबाज लोगों की प्रशासन में भी पकड़ होती है। अजमेर विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों के संरक्षण के कारण ही आनासागर के भराव क्षेत्र में अवैध निर्माण हुए। झील संरक्षण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. समित शर्मा ने निर्देश दिए थे कि 2014 में घोषित नो कंस्ट्रक्शन जोन में जो निर्माण हुए हैं, उन पर कार्यवाही की जाए। कायदे से निगम और प्राधिकरण के अधिकारियों को सैटेलाइट इमेज से 2014 से 2022 तक के बीच हुए अवैध निर्माणों को चिह्नित करना था, लेकिन निगम के अधिकारियों ने असली अवैध निर्माणकर्ताओं को बचाने के लिए सबसे पहले 42 वर्ष पहले बनी महावीर कॉलोनी को ही आनासागर के भराव क्षेत्र में मान लिया। इसी कॉलोनी में नगर सुधार न्यास के पूर्व अध्यक्ष धर्मेश जैन का बंगला भी है। जैन के बंगले पर भी अवैध निर्माण का लाल निशान लगा दिया है। ये वही धर्मेश जैन है जो पिछले कई माह से आनासागर को भू माफियाओं से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. समित शर्मा ने भी धर्मेश जैन से सहयोग मांगा है। लेकिन अब धर्मेश जैन ही उलझ गए हैं। उन्हें स्वयं को सफाई देनी पड़ रही है। आनासागर को कब्जाने वाले शातिर लोगों ने धर्मेश जैन और महावीर कॉलोनी पर लाल निशान लगवा कर स्वयं को बचाने का प्रयास किया है। लेकिन धर्मेश जैन को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। जैन ने आनासागर को कब्जा मुक्त करने का जो अभियान चलाया है, वह जारी रखना चाहिए। इसी प्रकार नगर निगम और प्राधिकरण को 1970 में बनी महावीर कॉलोनी पर कार्यवाही करने से पहले आनासागर में 2014 से नो कंस्ट्रक्शन जोन में हुए अवैध निर्माणों को हटाना चाहिए। हाईकोर्ट की मंशा भी नो कंस्ट्रक्शन जोन में हुए अवैध निर्माणों की है। यदि 1970 में बनी महावीर कॉलोनी भी आनासागर के भराव क्षेत्र में आती है तो उस पर भी नियमानुसार बुलडोजर चलना चाहिए। ऐसा न हो कि प्रभावशाली लोगों वाली महावीर कॉलोनी को आगे रख कर असली कब्जाधारियों को बचा लिया जाए। यदि महावीर कॉलोनी भी भराव क्षेत्र की जद में है तो फिर स्मार्ट सिटी के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए, जिन्होंने आना सागर के किनारे से आधा किलोमीटर अंदर तक पाथवे का निर्माण किया है। सेवन वंडर भी बिना पार्किंग के आनासागर के भराव क्षेत्र में बनाया गया है।
10 अवैध दुकानों पर कार्यवाही नहीं:
आना सागर पर कब्जा करने वालों को बचाने के लिए 1970 में बनी महावीर कॉलोनी पर तो अवैध निर्माण का निशान लगा दिया गया है, लेकिन नगर निगम उन दस अवैध दुकानों पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा जो हाल ही में बनी है। अजय नगर के सोमलपुर रोड पर मंदिर परिसर में बनी 10 अवैध दुकानों की शिकायत कांग्रेस के पार्षद नरेश सत्यावना, सैय्यद फैजल, कपिल सारस्वत आदि ने की थी। इन दुकानों का निर्माण शुरू हुआ तब भी निगम प्रशासन को पार्षदों ने अवगत कराया। निगम को यह भी बताया गया कि इस भूमि के स्वामित्व को लेकर भी न्यायालय में विवाद चल रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्षदों के मुकाबले में अवैध निर्माणकर्ता इतने ताकतवर थे निगम ने कोई कार्यवाही नहीं की। यहां तक कि डिप्टी मेयर नीरज जैन ने भी माना कि मंदिर परिसर में जो दुकानें बनी है, वे अवैध है। इन दुकानों के लिए निगम से किसी भी स्तर पर कोई स्वीकृति नहीं ली गई है। लेकिन डिप्टी मेयर के इस बयान को भी खारिज कर दिया गया। गंभीर बात तो यह है कि अब भूमाफिया प्रवृत्ति के लोग इन दुकानों को ऊंचे दामों में बेच रहे हैं। भू-माफिया तो दुकानों को बेच देंगे, लेकिन जो व्यक्ति इन दुकानों को खरीदेंगे वे जिंदगी भर मुसीबत में पड़े रहेंगे। भूमाफिया भी यही चाहते हैं कि दुकान बिकने तक निगम प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं करे। जो लोग निगम को चला रहे हैं उन्हें यह बताना चाहिए की आखिर किस नेता और बड़े अधिकारी के दबाव में इन अवैध दुकानों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है।




