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जिन लोगों ने मुनि अनुभव सागर महाराज की पिटाई कर पिच्छी और कमंडल छीना , उन्हें अब पछताना पड़ेगा

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एस पी मित्तल, अजमेर

16 अप्रैल को अजमेर में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इस कॉन्फ्रेंस में समाज के प्रतिनिधि विजय जैन और नीरज जैन ने बताया कि गत 10 अप्रैल को नाका मदार स्थित जैन धार्मिक स्थल पर मुनि अनुभव सागर महाराज द्वारा कोई गलत कार्य करने की घटना नहीं हुई। समाज के किसी भी व्यक्ति के पास गलत कार्य का कोई सबूत नहीं है। लेकिन इसके बाद भी समाज के कुछ लोगों ने मुनि महाराज की पिटाई की और उनकी पिच्छी व कमंडल छीन लिया। महाराज को कपड़े पहनकर मजबूरी में अजमेर से जाना पड़ा। इस घटना से संपूर्ण समाज की बदनामी हुई है। जो घटना हुई ही नहीं उसके लिए इतना बवंडर किया गया। स्वार्थी लोगों ने मीडिया में खबरें भी छपवा दी। दोनों प्रतिनिधियों ने बताया कि 12 अप्रैल को प्रमोद सोनी के निवास स्थान पर समाज के कुछ व्यक्तियों की बैठक हुई। इस बैठक में ही मुनि महाराज पर हमला करने की योजना बनाई गई और उसी के मुताबिक काम भी हुआ। आज संपूर्ण दिगंबर समाज यह मानता है कि मुनि अनुभव सागर के साथ अजमेर अच्छा व्यवहार नहीं हुआ, जबकि पिछले 45 दिनों से मुनि महाराज अजमेर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर अध्यात्म और धर्म की गंगा बहा रहे थे। कुछ लोगों के कृत्य के कारण संपूर्ण समाज को शर्मसार होना पड़ा है।

22 वर्ष के तप पर पानी:
दिगंबर जैन समाज में मुनि आसानी से नहीं बना जाता। वरिष्ठ आचार्यों की देखरेख में मुनि बनने वाले व्यक्ति को कठिन तपस्याओं के दौर से गुजरना पड़ता है। मुनि अनुभव सागर ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद मुनि बनने का निर्णय लिया। पिछले 22 वर्ष से जैन मुनि के रूप में अनुभव सागर देशभर में भ्रमण कर रहे थे, उनके तप पर नाखून जितना शक भी किसी ने नहीं किया। अनुभव सागर के अध्यात्म के तप का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सुविख्यात आचार्य अभिनंदन सागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की थी। लेकिन समाज के कुछ नासमझ लोगों की वजह से एक मुनि के 22 वर्ष के तप पर पानी फिर गया है। यदि किसी मुनि को 22 वर्ष के बाद कपड़े पहनाए जाए तो यह कृत्य उसकी हत्या करने के बराबर है। जिन लोगों ने यह कृत्य किया है अब समाज में उनके विरुद्ध नाराजगी है। हो सकता है कि ऐसे लोगों को अब पछतावा हो रहा हो। समाज के कुछ लोग चाहते हैं कि मुनि का तप भंग करने वाले लोगों के विरुद्ध कार्यवाही हो, लेकिन समाज को कानूनी पचड़ों में नहीं पड़ना चाहिए। जिन लोगों ने एक मुनि का तप भंग किया है, उनको सजा देने का काम भगवान महावीर स्वामी पर छोड़ देना चाहिए।

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