संपूर्ण देश के गाँवों को आदर्श बनाने के लिए 4 लाख गाँधीवादी कार्यकर्ता आगे आये….डॉ. पालीवाल
राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचार आज भी प्रासंगिक….कार्यवाहक कुलपति डॉ. अशोक शर्मा
गाँधीवादी संस्थायें अपना आत्म मूल्यांकन करने में पीछे नहीं रहे….रविन्द्र रूकमणी
इंदौर। देश को आज ऐसे 4 लाख पूर्णतः गाँधीवादी कार्यकर्ताओं की जरुरत है, जो कम से कम एक-एक गाँव को गोद लेकर वहां पर गाँधी दर्शन का न केवल प्रचार-प्रसार करें वरन प्रत्येक गाँव को आदर्श गाँव बनाने के लिए एकजुटता दिखाये। तभी हम राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के ग्रामीण भारत के सपने को कुछ हद तक पूरा कर पायेंगे। खादी पहनना उस व्यक्ति के लिए अधिक गौरवपूर्ण है, जो स्वयं कपास का उत्पादन करता हो अथवा स्वयं चरखा चलाकर कपास से कपड़ा बनाता हो। आज ऐसे समर्पित गाँधीवादियों का अभाव है।
ये विचार गाँधीवादी विचारक डॉ. आर.के. पालीवाल (गुजरात) के है, जो उन्होंने शुक्रवार शाम को श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति सभागृह में ‘‘शांति और विकास’’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय गाँधी दर्शन कार्यशाला के पहले दिन मुख्य वक्ता बतौर व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन यूनिवर्सल पीस एंड सोशल डेवलपमेंट सोसाइटी सहित विभिन्न गाँधीवादी संस्थाओं की ओर से किया जा रहा है। यह जानकारी कार्यक्रम संयोजक आलोक खरे और मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने दी।
डॉ. पालीवाल ने आगे कहा कि गाँधी उस व्यक्तित्व का नाम है जो अपनी गलतियों को माइक्रोस्कोप से देखते थे और दूसरे की गलतियों को टेलीस्कोप से। इसका मतलब यह है कि वे अपनी गलतियों पर कभी भी पर्दा डालने की कोशिश नहीं करते थे। इसलिए वे अपनी छोटी गलतियों को भी हिमालयीन गलती बताते थे।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए दे.अ.वि.वि. इंदौर के कार्यवाहक कुलपति श्री अशोक शर्मा ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचार हमेशा प्रासंगिक रहे है। वे सकारात्मक विचारों के हामी थे। उन्होंने 100 वर्ष पूर्व जिस स्वच्छता, शुचिता, सत्याग्रह की बात की थी, आज भी वह सही साबित हो रही है। गाँधीजी का जीवन दूसरों के लिए एक संदेश था, वे ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। स्वागत उद्बोधन देते हुए मुकुन्द कुलकर्णी ने कहा कि महात्मा गाँधी के विचार विश्व मान्य है, उनसे प्रेरणा लेकर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला या अमेरिका के मार्टिन लूथर किंग से लेकर ओबामा तक हो, सभी के जीवन में एक बड़ा परिवर्तन आया। सही मायने में गाँधी विश्व मानव थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर कई देश आगे बढ़े। इंदौर में भी गाँधी दर्शन को लेकर भी कई कार्यक्रम किए गए, जिसमें सबसे बड़ा आंदोलन नर्मदा आंदोलन था। 80 के दशक में इंदौर के नागरिकों ने अहिंसापूर्ण आंदोलन कर 70 किलोमीटर दूर से नर्मदा का पानी इंदौर लेकर आये।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में गाँधीवादी विचारक रविन्द्र रूकमणी (महाराष्ट्र) ने कहा कि व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी द्वारा हमारे युवकों में गाँधीजी के खिलाफ जो जहर भरा जा रहा है, उसे निकाले बगैर हम युवाओं को गाँधी मार्ग से नहीं जोड़ सकते। असली गाँधी को हमने फोटो में बंद कर दिया या चौराहे पर मूर्ति के रुप में बैठा दिया अथवा उसे भूल गए। आजकल लोग झाडू हाथ में लेकर सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया में वायरल करते है, ताकि समाज को लगे कि हम ही असली गाँधी है, ऐसे गाँधीवादियों से देश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने आगे कहा कि गाँधी समता में विश्वास रखते थे यानी दोनों व्यक्तियों में बराबर की समानता, दोनों में कोई छोटा बड़ा नहीं। आज ऐसी समता की आवश्यकता है। दूसरी तरफ गाँधीवादी संस्थाओं में अपना आत्म मूल्यांकन करना छोड़ दिया है, जिसके कारण भी गाँधी दर्शन समाज तक नहीं पहुँच पा रहा है। कार्यक्रम का शुभारंभ हरेराम वाजपेयी, डॉ. आर.के. पालीवाल, मुकुन्द कुलकर्णी, रवीन्द्र रूकमणी, रामेश्वर गुप्ता ने दीप प्रज्वलन कर किया। प्रारंभ में कस्तूरबाग्राम की छात्राओं ने संगीतमय सर्वधर्म प्रार्थना की। गाँधीजी का प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए को लिली डावर ने गाया।
अतिथि परिचय गाँधीवादी कार्यकर्ता सुगंध बरंत ने दिया। अतिथि स्वागत फादर पायस, इंजी. रहमान, रेखा आचार्य, तरणजीत कौर, रामेश्वर गुप्ता, आरवा साकिर, अशोक मित्तल, राजेन्द्र जैन, अनिल भंडारी आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन शफी शेख ने किया तथा आभार माना आलोक खरे ने। शफी शेख ने बताया कि कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत सुबह 10ः30 बजे गाँधी प्रार्थना से होगी। पहले सत्र में धार्मिक सद्भाव पर फादर वर्गीस, श्री विजय तांबे (मुंबई) और प्रोफेसर असद बातचीत करेंगे। दूसरे सत्र में गाँधीवादी कार्यकर्ताओं के साथ समूह चर्चा डॉ. अनिल भंडारी करेंगे। साथ ही गुजरात के गाँधीवादी कार्यकर्ता श्री हर्षद रावल, डॉ. खुशहाल सिंह पुरोहित (रतलाम), डॉ. पुष्पेन्द्र दुबे, श्री निलेश देसाई (गुजरात), श्री आलोक खरे बातचीत करेंगे। दूसरा सत्र शाम 5 बजे तक चलेगा।
कार्यक्रम में श्यामसुंदर यादव, डॉ. ओ.पी. जोशी, सुरेश उपाध्याय, रवीन्द्र शुक्ला, प्रताप सिंह दांगी, अतुल कर्णिक, कानूनगो, राजू सैनी, कीर्ति यादव सहित बड़ी संख्या में कस्तूरबा ट्रस्ट, स्कूल ऑफ सोशल वर्क की छात्राएँ और शोधार्थी छात्र उपस्थित थे
इंदौर में तीन दिवसीय गाँधी दर्शन कार्यशाला का शुभारंभ

