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TMC ने सुवेंदु के करीबी पबित्र कर पर ही खेला बड़ा दांव

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पबित्र कर का नंदीग्राम में प्रभाव बड़ा माना जाता है और उनका राजनीतिक सफर मुखिया से शुरू हुआ था

तृणमूल कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने सभी 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. इस लिस्ट में कई नए नामों को भी शामिल किया गया है. साथ ही कई पुराने उम्मीदवारों की सीट भी बदली गई है. सूबे की मौजूदा मुख्यमंत्री ने भी इस बार के चुनाव में अपनी सीट बदलने का फैसला किया है. वो नंदीग्राम की जगह अब भवानीपुर से चुनाव लड़ेंगी. टीएमसी ने नंदीग्राम से उनकी जगह पबित्र कर को मैदान में उतारने के फैसला किया है. सूत्रों के अनुसार बीजेपी इस सीट से भी सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा हुआ तो नंदीग्राम सीट पर इस बार का मुकाबला बेहद रोचक हो सकता है. पबित्र कर शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी मानें जाते रहे हैं. वो आज ही बीजेपी का साथ छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए हैं. 

पबित्र कर को कहा जाता है नंदीग्राम का बेटा

पबित्र कर नंदीग्राम में एक चर्चित नाम हैं. उन्हें नंदीग्राम का बेटा भी कहा जाता है. पबित्र कर 2021 में सुवेंदु अधिकारी के बाद टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. आज पबित्र कर ने एक बार फिर टीएमसी का दामन थाम लिया है. 

पबित्र कर 2018 में बने थे मुखिया

पबित्र कर का राजनीतिक सफर कोई नया नहीं है. वो पहले भी टीएमसी में रहे थे. 2018 में वह बायोल के दो गांवों के मुखिया थे. हालांकि बाद में उन्होंने सुवेंदु अधिकारी का हाथ थाम लिया था. और फिर वो भाजपा में शामिल हो गए थे. पबित्र कर के बाद उनकी पत्नी भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थी. 2023 में उनकी पत्नी को ये जीत हासिल की. 

पवित्र कर का जाना सुवेंदु के लिए बड़ा नुकसान

पबित्र कर का चुनाव से ठीक पहले टीएमसी में शामिल होना सुवेंदु अधिकारी के लिए एक बड़े झटके की तरह माना जा रहा है. पबित्र कर हमेशा से ही दिखने ज्यादा काम करने पर भरोसा करते हैं. वे कभी भी सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा समय नहीं बिताते हैं. उनका हमेशा से फोकस सिर्फ ग्राउंड स्तर पर काम करने पर रहता है. यही वजह है कि पार्टी लाइन में उनकी पहचान एक अलग तरह के नेता के रूप में रही है. कहा जाता है कि सुवेंदु अधिकारी भी उनकी इस कार्यशैली की वजह से ही उन्हें खासा महत्तव देते थे.

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