*प्रस्तुति : विजय अड़ीचवाल*
_*ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ*_
_*यह पुराणों व धर्मग्रन्थों में उल्लिखित जानकारियों का ‘तत्त्व ज्ञान ‘है।*_ (यह वाट्सअप ज्ञान नहीं है)
*आज रविवार, आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि है।*
*आज अश्लेषा/मघा नक्षत्र, ‘कालयुक्त’ नाम संवत् 2082 है।*
_( उक्त जानकारी उज्जैन और काशी के पञ्चाङ्गों के अनुसार है)_
*”रजनी बहुत गयी मेरे प्यारे…”* इस विशिष्ट भजन का गायन *जगन्नाथ मन्दिर* में ही होता है। इस भजन का गायन अन्य किसी स्थान पर निषिद्ध है।
श्मशान में मृत देह के अलावा *किसी भी अन्य* व्यक्ति के *चरण स्पर्श* नहीं करना चाहिए। मात्र अभिवादन करना चाहिए।
*रविवार* को पीपल और तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
रविवार को पीपल में *दरिद्र* का निवास होता है।
राजा भरत के प्रपौत्र *हस्ती* ने ही *हस्तिनापुर* बसाया, जो कौरवों की राजधानी रहा।
भीम और दुर्योधन का जन्म *एक ही दिन* हुआ था।
महाबली *कर्ण* का असली नाम *वशुषेण* था।
यज्ञ कुण्ड से द्रौपदी के रूप में *इन्द्राणी* उत्पन्न हुई थीं।
पॉंचों पाण्डव भी पूर्व जन्म में *इन्द्र* थे। _(महाभारत)_
*कर्ण* पूर्व जन्म में सहस्रकवची दैत्य था।
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*कल सोमवार 30 जून 2025*
*के व्रत – पर्व – उत्सव*
*पञ्चमी तिथि*
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*आज का विप्र जगत् पञ्चाङ्ग* 
(उज्जैन के पञ्चाङ्गों से साभार)
*दिनांक 29 जून 2025 रविवार*
*इन्दौर का सूर्योदय : प्रातः 5:48*
*इन्दौर का सूर्यास्त : सायं 7:11 बजे*
*आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी तिथि मध्याह्न 11:58 बजे तक, पश्चात् पञ्चमी तिथि*
*नक्षत्र : आश्लेषा नक्षत्र प्रातः 9:42 बजे तक, पश्चात् मघा नक्षत्र*
*योग : वज्र योग रात्रि 9:16 बजे तक, पश्चात् सिद्धि योग*
*करण: भद्रा मध्याह्न 11:58 बजे तक, पश्चात् बव करण*
*दिशाशूल – पश्चिम दिशा में*
*अयन : दक्षिणायण*
*ऋतु : वर्षा ऋतु*
*आज राष्ट्रीय सौर आषाढ़ तिथि 8 ज्येष्ठ (शुचि मास) 1947, युगाब्द 5127 है।*