इंदौर
ट्रैफिक सुधारने के लिए 11 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन एडीजी वरुण कपूर ने रीगल से पलासिया तक एमजी रोड और पलासिया टी से साकेत कॉर्नर तक ग्रेटर कैलाश रोड को आदर्श मार्ग घोषित किया था। दोनों मार्गों पर 1500 वॉलेंटियर को ट्रैफिक रूल्स पालन करवाना था।
चौराहों पर विशेष ट्रेंड दल के वॉलेंटियर्स को रोज रिपोर्ट तैयार करना थी। इसकी जिम्मेदारी सी क्यूब टीम के देवव्रत मेहता व हर्ष होलकर को दी थी। 16 महीने बाद आज इन दोनों सड़कों पर अवैध पार्किंग, फुटपाथ पर कब्जे से ट्रैफिक जाम होता है।
तब यह नियम तय किए थे
- दोपहिया वाहन चालकों का हेलमेट पहनना अनिवार्य।
- नो पार्किंग में वाहन रोकना।
- रॉन्ग साइड वाहनों को रोकना।
- वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग नहीं करना।
- बिना कारण हॉर्न नहीं बजाना।
एडीजी के जाते ही संस्था ने काम बंद कर दिया
हां, एडीजी का प्रोजेक्ट था। सी क्यूब संस्था के 1500 वॉलेंटियर ने व्यवस्था संभाली थी, लेकिन उनके जाते ही संस्था ने भी काम करना छोड़ दिया। हमारे पास सीमित बल है। पीक ऑवर्स में हम इन मार्ग पर व्यवस्थाएं करवाते हैं।
-आरएस देवके, एएसपी ट्रैफिक
ग्रेटर कैलाश रोड : सड़क पर ही पार्किंग, रोड मार्किंग भी धुंधली, पुलिस की सख्ती नहीं
- इस मार्ग पर कहीं भी पार्किंग व्यवस्थित नहीं है। दुकानों के बाहर सड़कों पर लोग वाहन खड़े कर इस व्यवस्था को बिगाड़ चुके हैं।
- बस स्टॉप पर बसें रुकती नहीं। कहीं से भी सवारियां बैठा लेती हैं।
- इस मार्ग पर बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट पार्किंग की जगह फुटपाथ पार्किंग हो रही है।
- रोड मार्किंग भी धुंधली पड़ गई है। लेन ड्राइव सिस्टम यहां फॉलो नहीं होता।
- पुलिस की सख्ती भी दिखती नहीं है।
एमजी रोड : न पार्किंग का पालन, न बेसमेंट में हो रही पार्किंग, लेन सिस्टम भी फेल हुआ
- 500 से ज्यादा प्रतिष्ठानों ने सड़क पर पार्किंग नहीं होने देने का संकल्प लिया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
- सभी कॉम्प्लेक्स में बेसमेंट पार्किंग का पूरा उपयोग होना था, जो आज नहीं हो रहा।
- लेन ड्राइव सिस्टम, नो रेड जंप, नो पार्किंग व जेब्रा क्रॉसिंग से ही चौराहा पार करने के निर्देश थे। ऐसा कुछ भी नहीं होता है।
- चौराहों के सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन का प्रयोग कर 40 की स्पीड लिमिट तय की थी। तेज वाहन चालकों के चालान कटना थे।

