नर्मदा घाटी के ग्राम भवरिया के हमारे वर्षों के आंदोलनकारी साथी घनश्याम भाई पाटीदारजी का देहांत अत्यंत दर्दभरी घटना है| घनश्याम भाई ने न केवल अपनी जमीन, अहिंसक संघर्ष के द्वारा बचायी, किंतु मणिबेली, डोमखेड़ी के सत्याग्रह में भी, पहाड़ी में रहकर हर वक्त भोजन और अन्य कार्य में गहरा योगदान दिया|
भवरिया गांव आज भी अपनी मूलभूमी पर नदी किनारे डटा है…. शासन की संवेदनहीनता आधा अधूरा पुनर्वास भुगत रहा है; लेकिन हम सबके साथ जुड़कर अधिकार के प्रति कटिबद्ध घनश्याम भाई जैसे अगुवाही में रहे कार्यकर्ता का चले जाना एक बड़ी दरार है संगठित शक्ति में| अत्यंत शांत, विनम्र और सदा हसमुख, कार्यरत घनश्याम भाई के परिवारजनों के साथ नर्मदा घाटी का, 37 सालों से जुड़ा परिवार भी श्रद्धांजलि में शामिल है|
देवराम कनेरा, मुकेश भगोरिया, कमला यादव, पवन यादव, वाहिद मंसूरी, विजय मरोला,जगदीश पटेल,मेधा पाटकर और सभी साथी

