Site icon अग्नि आलोक

ऐतिहासिक जय स्तंभ पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित अमर शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि 

Share

रीवा । नारी चेतना मंच, समाजवादी कार्यकर्ता समूह एवं विंध्याचल जन आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय ऐतिहासिक जय स्तंभ पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश के अनगिनत अमर शहीदों को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी गई एवं 11:00 उनकी स्मृति में 2 मिनट का मौन रखा गया। इस अवसर पर दीप प्रज्वलित करने के साथ राष्ट्रीय ध्वजारोहण भी किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार मन संतोष क्रांतिवेश छिबौरा जिला सतना ने की।

संपन्न कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विंध्यांचल जन आंदोलन के नेता अजय खरे ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा के विचार सार्वभौमिक हैं जो उनकी हत्या होने के बाद भी पूरी दुनिया में फैल गए और मान्य हैं। गांधीजी को सर्वप्रथम नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने राष्ट्रपिता कहा था । महान विचारों , त्याग और बलिदान ने गांधीजी को विश्व पिता बना दिया । गांधी जी की जघन्य हत्या के बाद उनका विचार दर्शन मरा नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए अमर संदेश बन गया है। गांधी जी के जन्मदिन को पूरी दुनिया में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री खरे ने कहा कि गांधी का रास्ता ही पूरी दुनिया को बचा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मन संतोष क्रांतिवेश ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश की आजादी के आंदोलन का नेतृत्व ही नहीं किया बल्कि सत्य अहिंसा के जरिए पूरी दुनिया को आजादी से जीने का तरीका भी दिया। जिस देश का सूर्यास्त नहीं होता था गांधी जी के आंदोलन से वह देश सिमट कर रह गया ।

नारी चेतना मंच की पूर्व अध्यक्ष संगीता चतुर्वेदी ने कहा कि गांधी जी के आंदोलन से देश को ही नहीं बल्कि गरीब दबे कुचले वर्ग एवं महिलाओं को भी आजादी मिली। गांधी विचार दर्शन पूरी मानवता को बचाने के लिए है। यह भारी दुख का विषय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कातिल देश को धार्मिक उन्माद में झोंकना चाहते हैं, जिससे सावधान रहने की जरूरत है।

संपन्न कार्यक्रम में नारी चेतना मंच की वरिष्ठ नेत्री फूलमनी केवट, शारदा श्रीवास्तव, श्वेता पांडे, माया सोनी , इंदु निशा खान, समाजसेवी श्रवण प्रसाद नामदेव , दीपक गुप्ता एडवोकेट , किसान नेता इंद्रजीत सिंह संखू, सपाक्स के संजय सिंह, मोहम्मद आरिफ आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

Exit mobile version