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भारत पर टैरिफ, कतर पर बम… ‘अपनों’ को गिरा रहे ट्रंप

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अमेरिका-भारत के रिश्ते में तनाव बढ़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति से भारत नाराज है। रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। ट्रंप की टैरिफ नीति से कई अन्‍य सहयोगी देश भी परेशान हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत रूस और चीन के करीब जा सकता है। अमेरिका का प्रभाव कम हो सकता है। 

अमेरिका लंबे समय से चीन के खिलाफ भारत को मजबूत पार्टनर के रूप में देखता आया है। वही भारत अब अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के निशाने पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर प्रतिबंध लगाए हैं। इससे भारत नाराज है। दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं। सिर्फ भारत ही नहीं, अपनी बेतुकी टैरिफ नीति से ट्रंप ने कई और सहयोगियों को भी अमेरिका का दुश्‍मन बना दिया है। इनमें से कई तो ठगा महसूस करने लगे हैं। कतर, पोलैंड और द‍क्ष‍िण कोर‍िया उनमें शाम‍िल हैं। उनके लिए ट्रंप की नीतियां सिरदर्द बन गई हैं।

दशकों से रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं ने भारत को एशिया में महत्वपूर्ण सहयोगी माना है। ट्रंप का भारत पर प्रतिबंध लगाने का कदम उस पुरानी परंपरा से अलग है। इसके अलावा, ट्रंप भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का श्रेय लूटना चाहते थे। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा नहीं होने दिया। यह भी ट्रंप की नाराजगी की वजह बना। एक वरिष्ठ राजनयिक के अनुसार, ट्रंप उम्मीद कर रहे थे कि मोदी उनके विचारों का समर्थन करेंगे। इन सब कारणों से भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आ गई है।

‘अपनों’ में भारत अकेला नहीं जो न‍िशाने पर

भारत इस समय अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है। साथ ही, वह रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। न्‍यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का सख्त रवैया भारत को रूस और चीन के करीब ला सकता है। सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के डेमियन मर्फी का कहना है कि यह कदम ‘कमजोरी, अराजकता और अहंकार’ दिखाता है। उनका मानना है कि रूस के व्लादिमीर पुतिन और इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू जैसे नेता कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं। वे ऐसी चीजें कर रहे हैं जो उन्हें नहीं करनी चाहिए।

भारत अकेला नहीं है जो इस मुश्किल का सामना कर रहा है। जॉर्जिया में हुंडई-एलजी बैटरी प्लांट पर बड़े पैमाने पर छापे से दक्षिण कोरिया हैरान है। दक्षिण कोरिया ने अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश किया है। इस बीच, इजरायल ने कतर के अंदर हमले किए। कतर में अमेरिका का मध्य पूर्व में सबसे बड़ा एयर बेस है। लेकिन, ट्रंप चुप रहे। यूरोप में पोलैंड में 17 रूसी ड्रोन उतरे, जबकि ट्रंप ने यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए रूस से अनुरोध किया था।

अमेर‍िका के दबदबे को खतरा

ट्रंप के सहयोगी इन कदमों को यह कहकर सही ठहराते हैं कि वह सहयोगियों से ऊंचे मानकों की उम्मीद करते हैं। उनका कहना है कि सहयोगी दशकों से ‘फ्री राइडिंग’ कर रहे थे। उनके यूक्रेनी दूत कीथ केलॉग ने इसे ‘अमेरिका फर्स्ट डिप्लोमेसी इन एक्शन’ बताया है। इसका मतलब है कि अमेरिका सबसे पहले अपने हितों को देखेगा।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस रवैये से अमेरिका का प्रभाव कम हो सकता है। शिकागो विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक पॉल पोआस्ट का कहना है, ‘ये बड़ी समस्या के छोटे उदाहरण हैं।’ उनका कहना है कि देश सैन्य कार्रवाई करने के लिए उत्साहित हैं क्योंकि अमेरिका अब दुनिया का पुलिस बल नहीं रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिका अब दुनिया भर में शांति बनाए रखने में पहले जैसी भूमिका नहीं निभा रहा है।

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