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*ट्रंप की गलती ने दे दिया है मौका,चीन क्‍यों भारत से चिपकने के लिए बैठा है तैयार?चीन को मिल जाएगा विशाल बाजार* 

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गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। अब अमरीकी नीतियों के कारण रिश्तों में सुधार हो रहा है। चीन भारत के साथ व्यापार को हथियार बनाकर अमरीका को चुनौती देना चाहता है। अमरीकी अर्थशास्त्री ने भी भारत को चीन के साथ गलत ट्रेड वॉर में शामिल न होने की चेतावनी दी है।

गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्‍तों में तनाव रहा है। तब से दोनों ने एक-दूसरे से लगातार दूरी बनाई है। लेकिन, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की गलत नीतियों के चलते भारत और चीन के रिश्‍तों में जमी बर्फ पिघलने लगी है। भारत कभी किसी के लिए खतरा नहीं बना है। लेकिन, उसका किसी एक पक्ष में हो जाना बहुत मायने रखता है। ट्रंप ने चीन को वही मौका दे दिया है। पड़ोसी होने के नाते चीन को भारत की ताकत का एहसास है। वह जानता है कि उसे भारत के साथ खराब रिश्‍तों का सिर्फ नुकसान है। वहीं, भारत के साथ अच्छे रिश्‍तों से वह बाजी पलट सकता है। अमेरिका को चुनौती देना फिर उसके लिए बाएं हाथ का काम हो जाएगा। यही कारण है कि चीन भारत से चिपकने के लिए तैयार ही बैठा है। वह भारत के साथ ट्रेड को अमेरिका के खिलाफ हथियार बनाएगा।

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत के खिलाफ टैरिफ की दीवार खड़ी कर रहे हैं। उन्‍होंने 25% टैरिफ के बाद भारत पर अतिरिक्‍त 25% टैरिफ लगाने के लिए कहा है। इससे अमेरिका में भारतीय सामानों पर 50% टैर‍िफ हो जाएगा। 27 अगस्‍त से यह अमल में आ जाएगा। रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर ये टैक्‍स थोपे जा रहे हैं। वहीं, ट्रंप की बेतुकी बयानबाजी भी भारत के साथ अमेरिका के रिश्‍तों को बिगाड़ने की वजह बन रही है। इसने भारत को चीन और रूस की तरफ जाने का खुला मौका दे दिया है। चीन काफी दिनों से इस मौके को लपकने की तलाश में ही बैठा था।

चीन को मिल जाएगा विशाल बाजार

भारत और चीन दोनों ही तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं। व्यापार और बाजार के मामले में दोनों एक-दूसरे के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। चीन को भारत में अपने सामान बेचने और निवेश करने के लिए बड़े बाजार की जरूरत है। वहीं, भारत चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाओं का कच्चा माल और मशीनरी जैसी जरूरी चीजें खरीदता है। अगर दोनों देशों के रिश्ते अच्छे होते हैं तो व्यापार करना आसान हो जाएगा। इससे दोनों को फायदा होगा।

भारत को चीन के साथ व्यापार में घाटा होता है। इसका मतलब है कि भारत चीन से ज्यादा सामान खरीदता है और चीन को कम बेचता है। अगर रिश्ते सुधरते हैं तो चीन भारत से ज्यादा सामान खरीदने को तैयार हो सकता है। इससे भारत का व्यापार घाटा कम हो जाएगा।

अमेर‍िका को म‍िलकर क्षेत्र से कर सकते हैं बाहर

भू-राजनीतिक रूप से भी दोस्ती फायदेमंद है। चीन और भारत दोनों ही अमेरिका की ताकत को संतुलित करना चाहते हैं। अगर वे दोस्त बन जाते हैं तो एक मजबूत समूह बना सकते हैं। यह समूह दुनिया के मामलों में पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम कर सकता है। दोनों देश ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां किसी एक देश का दबदबा न हो। वे ब्रिक्‍स और एससीओ जैसे संगठनों में मिलकर काम करते हैं। इससे दुनिया में उनकी स्थिति मजबूत होगी।

भारत और चीन के बीच तनाव से एशिया में अशांति रहती है। अगर दोनों देश सीमा के विवादों को सुलझा लेते हैं तो पूरे क्षेत्र में शांति बनी रहेगी। आपसी सहयोग से भी दोनों देशों को फायदा होगा। चीन AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और रोबोटिक्स जैसी तकनीक में आगे है। वहीं, भारत सॉफ्टवेयर और IT के क्षेत्र में अच्छा है। दोस्ती से दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में विकास कर सकते हैं।

अमेर‍िकी अर्थशास्‍त्री ने भी चेतावनी दी

जाने-माने अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी भारत को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि भारत को पश्चिम के चीन के साथ ‘गलत’ ट्रेड वॉर में शामिल नहीं होना चाहिए। सैक्स का मानना है कि अमेरिका भारत को एक रणनीतिक मोहरे के रूप में देखता है। उनके मुताबिक, भारत का ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में चीन की जगह लेना अवास्तविक और आर्थिक रूप से गलत है। अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों को देखते हुए भारत को रूस, चीन, आसियान और अफ्रीका जैसे देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने चाहिए। सैक्स ने भारत-चीन के बीच तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया है।

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