रूस और चीन की नेवी ने संयुक्त अभ्यास किया है। रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े ने बताया है कि उसकी और चीन की पनडुब्बियों ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त गश्त की है। दोनों देशों की इस क्षेत्र में पनडुब्बियों की यह पहली पेट्रोलिंग है। इस गश्त में डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हुई हैं। यह गश्त इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ।
रूस और चीन की नेवी ने संयुक्त अभ्यास किया है। रूसी नौसेना के प्रशांत बेड़े ने बताया है कि उसकी और चीन की पनडुब्बियों ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त गश्त की है। दोनों देशों की इस क्षेत्र में पनडुब्बियों की यह पहली पेट्रोलिंग है। इस गश्त में डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल हुई हैं। यह गश्त इस महीने की शुरुआत में शुरू हुआ। मॉस्को और बीजिंग के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग में यह एक अहम कदम है। इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संदेश देने की तरह भी देखा जा रहा है।
द न्यूज वीक की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी नौसेना ने इस गतिविधि को द्विपक्षीय अभ्यासों के एक सतत कार्यक्रम का हिस्सा बताया है। इसका हाल के वर्षों में पैमाने और दायरे दोनों में विस्तार हुआ है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के आपसी रिश्ते भी अच्छे हैं। इसका फायदा भी दोनों देशों के संबंधों को मिल रहा है।
यह अभ्यास क्यों महत्वपूर्ण
रूस और चीन ने पहले भी संयुक्त नौसैनिक गश्त की है। हालांकि वह केवल सतही जहाजों तक ही सीमित रहे। इस गश्त में पहली बार रूसी और चीनी पनडुब्बियों को एक साथ उतारा गया। अगस्त की शुरुआत में दोनों नौसेनाओं ने एक द्विपक्षीय युद्धाभ्यास के तहत कृत्रिम पनडुब्बी बचाव अभियान चलाया था। इसके तुरंत बाद संयुक्त गश्त शुरू हो गई।
रूस की सरकारी मीडिया ने इस अभियान को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सहयोग की दोनों नौसेनाओं की तकनीकी क्षमता के प्रदर्शन से जोड़ा है। रूस और चीन ने हाल के वर्षों में घनिष्ठ संबंध बनाए हैं। इसे अमेरिका को संतुलित करने के लिए एक गठजोड़ की तरह देखा गया है। दोनों देशों ने पश्चिमी प्रशांत और दूसरे क्षेत्रों में संयुक्त सैन्य गतिविधियां की हैं।
आगे क्या होगा
रूस और चीन के संयुक्त पनडुब्बी गश्त को दोनों नौसेनाओं के बीच भविष्य के अभियानों की नींव माना जा रहा है। रूसी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि आगे और अभ्यास होंगे। चीनी सरकारी मीडिया ने भी संयुक्त प्रशिक्षण जारी रहने की बात कही है। इससे पता चलता है कि ये सहयोग बढ़ने जा रहा है।
रूस और चीन दोनों अपनी नेवी की ताकत को बढ़ा रहे हैं। रूस ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों को तैनात करने के लिए सुदूर पूर्वी नौसैनिक अड्डे का आधुनिकीकरण किया है। चीन पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का संचालक है और अपनी ताकत को बढ़ाने पर काम कर रहा है।

