निजामाबाद जिले की देहात सीट के गांव डिचपल्ली पहुंचने पर लोगों ने बताया कि यहां पर छह सौ साल पुराना एक किला है और उसमें एक राम मंदिर भी है। मंदिर के युवा पुजारी बिहार से हैं। गांव के सरपंच गड्डम राधा कृष्णा रेड्डी बताते हैं कि यहां बीआरएस यानी मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पार्टी का जोर है। रेड्डी इसकी वजह सरकारी योजनाओं को बताते हैं।

निजामाबाद जिले की पांचों सीटें पिछली बार बीआरएस ने ही जीती थीं। निजामाबाद में मुख्यमंत्री केसीआर की बेटी के कविता काफी सक्रिय हैं। हालांकि, पिछला लोकसभा चुनाव वह भाजपा के डी अरविंद से हार गई थीं। डी अरविंद कुरूटला से विधानसभा चुनाव भी लड़ रहे हैं। अक्तूबर में निजामाबाद आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13,500 करोड़ की परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन का एलान किया था।
निजामाबाद शहर सीट से कांग्रेस ने पूर्व मंत्री शब्बीर अली को उतारा है तो बीआरएस से दो बार के विधायक गणेश गुप्ता हैं। भाजपा से धनपाल सूर्यनारायण हैं। 2.80 लाख वोटर वाले क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता एक लाख हैं। पत्रकारों का कहना है, क्षेत्र में वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना रहती है। भाजपा-कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला हो सकता है।
डिचपल्ली के सरपंच रेड्डी कहते हैं कि हल्दी किसान उचित दाम नहीं मिलने से धान की खेती ज्यादा करते हैं। कुछ जगह गन्ना भी बोया जाता है। किसान टी नरसैया कहते हैं कि बीआरस ने कई योजनाएं दी हैं लेकिन अब कांग्रेस बेहतर विकल्प हो सकती है। गांव अंकापुर की पंचायत में बैठे करीब 20 किसानों ने यूपी का जिक्र छिड़ने पर अपनी टूटी-फूटी हिंदी में सीएम योगी के बारे में पूछा। उनकी राय में अभी मोदी अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन भविष्य में योगी ही बड़ा चेहरा होंगे।
मुस्लिम मतदाता निर्णायक
- तेलंगाना में मुस्लिम आबादी 12 से 14% है। हैदराबाद और निजामाबाद के आसपास इनकी तादात ज्यादा है।
- निजामाबाद शहर सीट पर मुस्लिम वोटर 35 प्रतिशत हैं। बोधन में यह आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत है।
- पिछले दो चुनावों से इलाका बीआरएस का गढ़ बना है। हालांकि मुख्यमंत्री की बेटी के लोकसभा चुनाव हारने से झटका जरूर लगा लेकिन के कविता अब यहां फिर गांव-गांव जाकर प्रचार में सक्रिय हैं। उनके भाई केटीआर हैदराबाद और कामारेड्डी के आसपास के इलाकों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बीड़ी बनाने का काम काफी ज्यादा होता है। यही वजह है, बीआरएस और कांग्रेस दोनों ने पेंशन पर जोर दिया है।
दूसरी खेती की ओर किया रुख
गांव अंकापुर के ग्रामीणों का कहना है कि लोकसभा चुनाव हल्दी के मुद्दे पर लड़ा गया था और अब भी यह मुद्दा हावी है। हल्दी जून में बोई जाती है और फरवरी और मार्च में फसल मिलती है। हल्दी बोर्ड का गठन नहीं हुआ, किसान अपनी समस्याएं किसे बताएं या उचित दाम की मांग किससे करें। गांव के गंगाराम रेड्डी कहते हैं कि इसी कारण किसानों का रुख मक्का, ज्वार और बाजरे की ओर ज्यादा हो गया।
जिले की अन्य सीटों का समीकरण
- निजामाबाद ग्रामीण : दो बार कांग्रेस विधायक रहे बाज गोवर्धन रेड्डी यहां बीआरएस से मैदान में हैं। सवा दो लाख मतदाताओं वाली सीट पर उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. भूपति रेड्डी और भाजपा के दिनेश कुलाचारी से है।
- बालकोंडा : बीआरएस सरकार में मंत्री प्रशांत रेड्डी तीसरी बार मैदान में हैं। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार सुनील रेड्डी पिछली बार भाजपा के टिकट पर लड़े थे। भाजपा ने पूर्व मंत्री अन्नापूर्णा को टिकट दिया है।
- आरमोर : दो बार से बीआरएस विधायक जीवन रेड्डी का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी विनय रेड्डी से है। विनय कभी जीवन रेड्डी के बिजनेस पार्टनर थे। भाजपा ने राकेश रेड्डी को टिकट दिया है।
- बोधन : दो बार से बीआरएस विधायक शकील आमेर फिर ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सुदर्शन रेड्डी और भाजपा ने राइस मिलर मोहन रेड्डी पर दांव लगाया है। यहां मुस्लिम प्रभावी हैं।