तमिलनाडु के करूर में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख और अभिनेता विजय की रैली में भगदड़ मच गई। बताया जा रहा है कि रैली में 39 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन समेत कई सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों ने हादसे पर दुख जताया है। करूर में मची भगदड़ से जुड़ी अपडेट्स…
करूर पहुंचे मुख्यमंत्री स्टालिन, मृतकों को दी श्रद्धांजलि
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन रात में ही करूर पहुंच गए। यहां उन्होंने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों से भी मुलाकात की। सीएम स्टालिन ने कहा, ‘अब तक 39 लोगों की मौत हो चुकी है। हमारे राज्य के इतिहास में किसी राजनीतिक दल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान कभी नहीं गई और भविष्य में भी ऐसी त्रासदी कभी नहीं होनी चाहिए। फिलहाल 51 लोगों का गहन चिकित्सा इकाई में इलाज चल रहा है। भारी मन से मैं उन लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं, जिन्होंने अपनी जान गंवाई है। मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। घायलों को 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। मैंने एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक जांच आयोग के गठन का आदेश दिया है।’
तमिलागा वेट्री कझगम (टीवीके) के प्रमुख और अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय की करूर रैली में भगदड़ से 31 लोगों की मौत हो गई और 46 लोग घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि उस समय भगदड़ मची जब भीड़ अचानक आगे बढ़ी, जिसके चलते कई लोग बेहोश हो गए और स्थिति बेकाबू हो गई। मरने वालों में बच्चे भी हैं। लोगों ने पुलिस और बदइंतजामी को भगदड़ की वजह बताई है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अनुमान लगाया कि रैली स्थल पर “कम से कम 30,000 लोग” मौजूद थे, जहां विजय को नामक्कल में अपनी पिछली रैली के बाद भाषण देना था। हालांकि, विजय का आगमन छह घंटे से अधिक देरी से हुआ, जिसके कारण भीड़ अनियंत्रित रूप से बढ़ गई।
स्टालिन ने मौके पर अपने मंत्रियों की ड्यूटी लगाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, “करूर से आई खबरें हृदयविदारक हैं। मैंने बेहोश हुए लोगों के लिए फौरन इलाज के आदेश दिए हैं और स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर, पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को सहायता के निर्देश दिए हैं। एडीजीपी को स्थिति सामान्य करने का जिम्मा सौंपा गया है। मंत्री अंबिल महेश को युद्धस्तर पर मदद पहुंचाने के लिए कहा गया है। मैं जनता से पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील करता हूं।”
विजय की रैलियों पर सवाल, समर्थक कानून मानने को तैयार नहीं
यह पहली बार नहीं है जब विजय की रैलियों पर सवाल उठे हैं। इस महीने की शुरुआत में तिरुचिरापल्ली में उनकी पहली रैली में भारी भीड़ ने उनके काफिले को हवाई अड्डे से रैली स्थल तक छह घंटे तक रोके रखा, जिससे शहर में यातायात ठप हो गया। सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पुलिस ने टीवीके की रैलियों के लिए 23 शर्तें लागू की थीं, जिनमें काफिले में शामिल होने, सार्वजनिक स्वागत और गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए ऑनलाइन आयोजन देखने की सलाह शामिल थी। हालांकि, विजय के बार-बार अनुरोध के बावजूद, उनके समर्थकों ने इन शर्तों की खुलेआम अवहेलना की। कई लोग बच्चों और शिशुओं को साथ लाए थे।
तमाम प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों की मौत का शोक मना रहे हैं, लेकिन विजय ने इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक इस घटना पर कोई बयान जारी नहीं किया है। जांच के आदेश दे दिए गए हैं, और यह त्रासदी भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सबक के रूप में सामने आई है।
मद्रास हाईकोर्ट भी जवाबदेही पर सवाल उठा चुका है
मद्रास हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में टीवीके की याचिका पर सुनवाई करते हुए, पुलिस द्वारा लगाई गई “कठिन और अव्यवहारिक शर्तों” पर सवाल उठाया था। जस्टिस एन. सतीश कुमार ने 13 सितंबर को तिरुचिरापल्ली रैली में हुई अव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा, “अगर कुछ अनहोनी हो जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता? पार्टी अध्यक्ष के रूप में विजय को भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी शर्तें सभी पार्टियों पर समान रूप से लागू की जा रही हैं।
टीवीके ही करूर घटना के लिए जिम्मेदार
करूर की त्रासदी ने टीवीके की जवाबदेही और पुलिस की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या विजय की देरी से भीड़ का दबाव बढ़ा और क्या यह उनकी लोकप्रियता दिखाने का जानबूझकर किया गया प्रयास था? क्या पिछली रैलियों के संकेतों के बावजूद इस तरह की आपदा को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय किए गए थे?
टीवीके पदाधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज
पुलिस ने टीवीके के करूर पश्चिम जिला सचिव वीपी मथियाझागन के खिलाफ भगदड़ के सिलसिले में मामला दर्ज किया है। कार्यक्रम के दौरान मानदंडों के उल्लंघन के लिए चार धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
दोपहर 3 से रात 10 बजे तक दी गई थी सभा की अनुमति
तमिलनाडु के प्रभारी डीजीपी जी. वेंकटरमण ने कहा, ‘सभा की अनुमति दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक दी गई थी, लेकिन भीड़ सुबह 11 बजे से ही जुटनी शुरू हो गई थी। जब विजय शाम 7:40 बजे पहुंचे, तब तक भीड़ बिना पर्याप्त भोजन और पानी के घंटों इंतजार कर रही थी। यही सच्चाई है। विजय ने खुद पुलिस की भूमिका की सराहना की, लेकिन जोर देकर कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस को 27,000 की पूरी भीड़ के बराबर संख्या में तैनात करना चाहिए। इस दुखद घटना के पीछे के कारणों का पता जांच के बाद ही चलेगा। एक सदस्यीय आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है। तब तक, मैं इस पर और कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।’
अब तक 38 लोगों की हो चुकी है मौत: डीजीपी
तमिलनाडु के प्रभारी डीजीपी जी. वेंकटरमण ने कहा कि यह एक बेहद दुखद घटना है। अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 12 पुरुष, 16 महिलाएं और 10 बच्चे (पांच लड़के और पांच लड़कियां) शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘घटना के बाद, हमने पुलिस द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की समीक्षा की। इससे पहले TVK की रैलियों में कम भीड़ होती थी, लेकिन इस बार उम्मीद से कहीं ज्यादा लोग जुटे। हालांकि आयोजकों ने करूर में एक बड़े मैदान की मांग की थी, और लगभग 10,000 लोगों के आने की उम्मीद थी, लेकिन लगभग 27,000 लोग इकट्ठा हुए। जिस प्रचार स्थल पर विजय को जनता को संबोधित करना था, वहां 500 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे।’
जांच आयोग गठित, मुआवजे की घोषणा
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि सरकार ने भगदड़ की घटना के कारणों की जांच के लिए एक आयोग की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुणा जगदीशन करेंगे। उन्होंने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा भी की। प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये और घायल व्यक्ति को 1 लाख रुपये दिए जाएंगे।

