अग्नि आलोक

90,000 मज़दूरों को इज़रायल भेजने के फैसले की बारह मज़दूर यूनियनों ने की भर्त्सना

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इज़रायल पिछले 75 वर्षों से फ़िलिस्तीनी जनता को उसकी जगह-ज़मीन से उजाड़कर उसे बुरी तरह से कुचलता आ रहा है। पिछले एक महीने में तो इसने दमन की सारी सीमाएँ लाँघ दी हैं। इस दौरान इज़रायल ने गाज़ा में लगातार अन्धाधुन्ध बमबारी करके 11,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी लोगों का जनसंहार किया है जिनमें लगभग 4,500 बच्चे शामिल हैं। तमाम अन्तरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए इज़रायल ने अस्पतालों, स्कूलों और यहाँ तक कि शरणार्थी शिविरों को भी नहीं बख़्शा है। इज़रायल ने उन अस्पतालों पर भी निर्दयतापूर्ण हमले किये हैं जिनमें घायलों का इलाज चल रहा था और जहाँ लोग हवाई हमलों से बचाव के लिए शरण ले रहे थे। ऐसे ही एक अस्पताल में इज़रायल के हमले में 500 से अधिक घायलों व शरणार्थियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हमारी नज़रों के सामने जारी फ़िलिस्तीनीयों के इस नरसंहार पर अधिकांश देश मूक दर्शक बने बैठे हैं या महज़ खोखले बयान जारी कर रहे हैं।

भारत ने 1948 के बाद से ही फ़िलिस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष का लगातार समर्थन किया है, लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत का इज़रायल की ओर झुकाव बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं, भारत सरकार ने 90,000 भारतीय कामगारों को इज़रायल भेजने की घोषणा की है। इज़रायल द्वारा फ़िलिस्तीन पर जारी युद्ध के कारण हज़ारों फ़िलिस्तीनीयों के वर्क परमिट रद्द कर दिये गये हैं और उन्हें विस्थापित कर दिया गया है। इन श्रमिकों की जगह इज़रायल ने भारत से 1,00,000 श्रमिकों को भेजने का अनुरोध किया, जिसे भारत सरकार ने तुरन्त मंजूरी दे दी।

चाहे वह भारतीय मज़दूर हों या दुनिया के किसी भी देश के मज़दूर हो, हमें यह सनद रहनी चाहिए कि भारत सरकार या कोई अन्य बुर्जुआ सरकार मज़दूरों की भलाई के लिए उन्हें इज़रायल नहीं भेजेगी। वे अपने पूँजीवादी साम्राज्यवादी मित्रों की सेवा करने और उनके मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए मज़दूरों को इज़रायल भेज रहे हैं, जिसका इस्तेमाल अन्ततः फ़िलिस्तीनी जनता के बर्बर दमन के लिए किया जायेगा। भारत में सत्तासीन भाजपा ने सभी श्रम क़ानूनों को ख़त्म करने, मज़दूर अधिकारों का हनन करने और जनता के बीच हिन्दू-मुस्लिम और जातिगत बँटवारे के बीज बोने का ही काम किया है। मज़दूरों के हितों के प्रति इसे ज़रा भी इत्तेफ़ाक़ नहीं है। दुनियाभर में मज़दूर वर्ग के यही हालात हैं। ऐसे वक़्त में यह ज़रूरी है कि मज़दूर वर्ग इज़रायल द्वारा फ़िलिस्तीनीयों के नरसंहार के खिलाफ़ अपना प्रतिरोध दर्ज करे। हमें अपने-अपने देशों की सरकारों को बाध्य करना चाहिए कि वे अन्तरराष्ट्रीय दबाव बनाकर ज़ायनवादी हमले को तत्काल बन्द करवाएँ।

निम्नलिखित यूनियनों की ओर से हम भारत सरकार के इज़रायल में भारतीय निर्माण मज़दूरों को भेजने के फैसले की भर्त्सना करते हैं। हम माँग करते हैं कि इस फैसले को तत्काल वापस लिया जाये। इसके साथ ही, भारत सरकार को चाहिए कि वह इज़रायल द्वारा फ़िलिस्तीन पर जारी हमले को तत्काल बन्द कराने का प्रयास करे। भारत फ़िलिस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष का समर्थन करे व इज़रायल के साथ अपने सभी राजनीतिक सम्बन्धों को ख़त्म करे।

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