Site icon अग्नि आलोक

दो मुख्यमंत्री-दो मिजाज:ममता ने PM मोदी से 20 हजार करोड़ की मदद मांगी, पटनायक बोले- कोरोना के दौरान केंद्र पर बोझ नहीं डालेंगे

Share

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को समुद्री तूफान यास से प्रभावित ओडिशा और पश्चिम बंगाल पहुंचे। उनके दौरे के दौरान राजनीति के दो रंग दिखाई दिए। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मिजाज में हमेशा की तरह तल्खी और आक्रामकता दिखी। वे PM की ओर से बुलाई गई रिव्यू मीटिंग में भी शामिल नहीं हुईं। वहीं, ओडिशा के CM नवीन पटनायक PM मोदी की बैठक में शामिल हुए और किसी भी तरह की मदद मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हम अपने संसाधनों के बलबूते ही राज्य के लोगों की मदद करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ओडिशा पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से तूफान से हुए नुकसान की जानकारी ली।

राहत पैकेज पर पटनायक बोले- कुछ नहीं चाहिए
ममता बनर्जी ने PM मोदी से मिलकर 20 हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी। इसमें दीघा और सुंदरबन के लिए 10-10 हजार करोड़ रुपये की मांग की। वहीं, पटनायक ने प्रधानमंत्री से किसी राहत पैकेज की मांग नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि देश में कोरोना महामारी पीक पर है। केंद्र सरकार पर कोई बोझ न आए इसलिए हमने तुरंत कोई वित्तीय सहायता नहीं मांगी है। हम चाहते हैं कि इस संकट से अपने संसाधनों की मदद से ही निपटें।

बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए मदद मांगी
पटनायक ने PM मोदी के सामने ओडिशा के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की मांग जरूर रखी। उन्होंने कहा कि पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्र के किनारों पर बने तटबंध को इस तरह तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान उसे नुकसान न हो, क्योंकि हम हर साल इस तरह के खतरों से बार-बार जूझते हैं।

पटनायक ने प्रधानमंत्री को चक्रवात से पहले राज्य की ओर से उठाए गए कदमों और राहत के लिए की जा रही कोशिशों के बारे में भी बताया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी एजेंसियों को प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द हालात सामान्य करने की सलाह दी।

समुद्री तूफान यास की वजह से ओडिशा में 3 लोगों की मौत हुई है। यहां लोगों की मदद के लिए NDRF की 46 टीमें तैनात की गईं थीं।

26 मई को ओडिशा पहुंचा था चक्रवात
समुद्री तूफान यास ने 26 मई को ओडिशा में दस्तक दी थी। इसकी वजह से राज्य में 3 लोगों की मौत हुई है। इससे निपटने के लिए NDRF की 106 टीमों को तैनात किया गया था। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 46-46 टीमें तैनात की गईं। इन्होंने एक हजार से ज्यादा लोगों को बचाया और सड़क पर गिरे 2500 से ज्यादा पेड़ों / खंभों को हटाया।

Exit mobile version