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शराब के खिलाफ पत्थरबाजी की नौटंकी नहीं , सत्याग्रह करें उमा भारती : नारी चेतना मंच

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शिवराज सरकार पूरे प्रदेश को नशाखोर बना रही है
रीवा
। नारी चेतना मंच ने कहा है कि शिवराज सरकार द्वारा जिस तरह से शराब को बढ़ावा दिया जा रहा है , उसके चलते सामाजिक एवं पारिवारिक विघटन बढ़ता जा रहा है और वह दिन दूर नहीं है जब मध्यप्रदेश नशाखोर प्रदेशों में सबसे आगे होगा । यह अत्यंत आपत्तिजनक बात है कि शराब की दुकानों में बैठने की उत्तम व्यवस्था बनाकर शराबियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है वहीं शराब की दुकानों में महिलाओं को भी बैठाने जैसी बात अत्यंत आपत्तिजनक है । प्रदेश का कोई ऐसा गांव नहीं है , जहां शराबियों का प्रकोप न हो । यह भारी विडंबना है कि शराबबंदी की मांग मानने के बजाय शिवराज सरकार शराब को कुटीर उद्योग के रूप में बढ़ावा देने जा रही है । शराब को एक वर्ग विशेष की सांस्कृतिक धरोहर बताकर उसे बर्बाद किया जा रहा है । गरीब वर्ग की आमदनी का बड़ा हिस्सा नशाखोरी में जाने से उसका विकास अवरुद्ध है । नारी चेतना मंच अपने शुरुआती दौर से ही शराब का विरोध करती आई है , जिसके चलते महिला कार्यकर्ताओं पर झूठे मामले बनाकर परेशान किया जाता है ।
इधर भाजपा नेत्री उमा भारती के द्वारा राजधानी भोपाल में शराब की एक दुकान में एक पत्थर मार कर जिस तरीके से शराब का विरोध दर्ज कराने की कोशिश की गई , वह सस्ती लोकप्रियता पाने का अत्यंत शर्मनाक और पाखंडी चरित्र प्रदर्शन है। नारी चेतना मंच ने कहा कि प्रायोजित भीड़ के साथ शराब की दुकान पर पत्थर फेंक कर आखिरकार उमा भारती क्या बताना चाहती हैं ? यदि दम हो तो इसे पूरे प्रदेश में सत्याग्रह के रूप में शुरू करें और सबसे पहले अपने दल में शराब के विरोध में वातावरण बनाएं । 18 वर्ष पहले सन 2003 में जब उमा भारती प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थीं तब उन्होंने शराबबंदी के सवाल पर कभी कोई पहल नहीं की थी । इधर शराब विरोध की नौटंकी करके राजनीतिक पुनर्जीवन की कोशिशें अच्छी बात नहीं है। नारी चेतना मंच ने कहा कि कश्मीर के पत्थरबाज बदनाम हैं , लेकिन उमा भारती को उनकी तरह पत्थरबाजी करने की क्या जरूरत है ? शराब के खिलाफ पत्थरबाजी की नौटंकी करने के बजाय उमा भारती को सत्याग्रह करना चाहिए । मध्यप्रदेश में सरकार तो उन्हीं की है , धरना देकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से पूरे प्रदेश में शराबबंदी की मांग मनवाती क्यों नहीं हैं ?

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