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उमा भारती ने सोशल मीडिया पर लिखा- ब्यूरोक्रेट्स किसी राजनैतिक दल के नौकर नहीं

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ब्यूरोक्रेसी पर दिए गए बयान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती घिर गई हैं। पार्टी की तरफ से भी कोई बचाव में नहीं आया है। सफाई देने के बाद भी उमा भारती ने खुद ही इस मसले पर मोर्चा संभाल लिया है। वे वायरल वीडियो पर लगातार सफाई देने के साथ ही सत्तारूढ़ नेताओं से ईमानदार अफसरों को दूर रहने की नसीहत भी दे रही हैं। इसको लेकर उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा ट्वीट सिलसिलेवार तरीके से किए हैं। उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेट्स किसी राजनैतिक दल के नौकर नहीं हैं। ईमानदार अफसरों को निकम्मे सत्तारूढ़ नेताओं से दूर रहने की सलाह भी उमा भारती ने दी है।

इसके साथ ही ब्यूरोक्रेसी कैसे नेताओं के सामने नतमस्तक रहती है, उसका एक किस्सा बताया है। यह किस्सा बिहार के पूर्व सीएम और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से जुड़ा हुआ है। उमा भारती ने कहा है कि मेरे सामने ही एक सीनियर IAS अफसर ने लालू यादव का पीकदान उठाया था।

उन्होंने लिखा- 2000 में मैं अटली जी की सरकार में पर्यटन मंत्री थी। तब बिहार में वहां की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके पति लालू यादव के साथ पटना से बोधगया हेलिकॉप्टर से जाने का दौरा हुआ। हेलिकॉप्टर में हमारे सामने की सीट पर बिहार के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी बैठे थे। लालू यादव ने मेरे ही सामने अपने पीकदान में ही थूका और उस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के हाथ में थमाकर उसको खिड़की के बगल में नीचे रखने को कहा और उस अधिकारी ने ऐसा कर भी दिया।

कैसे बदल गया था अफसरों का चलने का तरीका
उमा भारती ने आगे बताया कि 6 दिसंबर के अयोध्या की घटना के बाद हमारी सरकार के गिरते ही मध्य प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा फिर चुनाव और कांग्रेस की सरकार बनी। इसके बाद अधिकारियों का मिलने और चलने का तरीका बदला गया। मुझे इस पर आश्चर्य हुआ लेकिन परेशानी नहीं हुई क्योंकि मैं तो जनहित के काम, जनता की शक्ति की कृपा से ही करवा लेती थी।

मेरे मना करने पर भी कलेक्टर-SP घर आते थे
उन्होंने कहा कि ब्यूरोक्रेसी पर दिए गए बयान से एक सार्थक विचार-विमर्श निकल सकता है जो कि नए प्रशासनिक सेवा में भर्ती हुए युवाओं के काम आ सकता है। इसलिए अब मैं इस बहस को भी आगे चलाऊंगी, क्योंकि यह देश के लोकतंभ और विकास के लिए आवश्यक है। मैं अपने अनुभवों का विवरण आपको देती हूं। 1990 में एमपी में पटवा जी की सरकार बनी तो मैं खजुराहो से सांसद थी। तब मेरे मना करने पर भी कलेक्टर, एसपी मेरे घर ही आ जाते थे जबकि मैं रेस्ट हाऊस में मिलने का सुझाव देती थी।

विवाद की जड़ में उन्हें नजर आ रही साजिश
उमा भारती ने चप्पल विवाद के दूसरे दिन भी सफाई दी है। उमा भारती ने कहा कि 18 सितंबर 2021 को मेरे निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें हमने 15 जनवरी 2022 से शराबंदी अभियान की घोषणा की थी। मेरी स्वंय की भागीदारी के संबंध में घोषणा के बाद मैं आशंकित थी कि इस मुद्दे की शक्ति कम करने के लिए कुछ घट सकता है और मेरी आशंका सच्चाई में बदल गई। ब्यूरोक्रेसी पर मेरे दिए बयान पर मीडिया ने कोई तोड़मरोड़ नहीं किया लेकिन मीडिया तक इसे पहुंचाने के लिए 20 तारीख को चुना गया।

शराबबंदी से नहीं हटने दूंगी ध्यान
उमा भारती ने कहा कि मैं मध्य प्रदेश में शराबबंदी के अपने परम लक्ष्य से लोगों का ध्यान हटने नहीं दूंगी। इसलिए मैंने असंयत भाषा के प्रयोग को ज्यों का त्यों स्वीकार करते हुए अपना रंज व्यक्त किया। मैंने अपनी टिप्पणी में मेरी नहीं बल्कि हमारी यानी बहुवचन का प्रयोग किया है। मैं तो किसी को अपने पांव भी नहीं छूने देती तो किसी से मेरी चप्पल उठाने की बात कैसे कह सकती हूं।

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