शशिकांत गुप्ते
कल-आज और कल, भूत-भविष्य और वर्तमान।
आने वाला कल, आज का भविष्य है, और बीता कल, आज का इतिहास है।
भावीपीढ़ी जब इतिहास पढ़ेगी तो उसे आश्चर्य होगा, महात्मा गांधी जैसा कोई व्यक्ति भी इस धरा पर पैदा हुआ था,जो सत्य और अहिंसा का पुजारी था।
दुर्भाग्य से वह स्वयं हिंसा का शिकार हो गया।
जब भावीपीढ़ी गांधीजी के जीवन चरित्र में यह पढ़ेगी की विश्व विख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधीजी के लिए यह कहा था।
अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी जी के बारे में कहा था कि “भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था।” आइंस्टीन ने गांधी जी के बारे जो बातें कही वो अपने आप में बड़ी बात थी। गांधी अपने में एक विचार थे, गांधी युवा पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। गांधी के विचारों ने दुनिया भर के लोगों को न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि करुणा, सहिष्णुता और शांति के दृष्टिकोण से भारत और दुनिया को बदलने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भावीपीढ़ी को आश्चर्य होना स्वाभाविक है,कारण गांधीजी के देश में लॉडस्पीकर (loudspeaker)
मतलब भोंगों पर राजनीति चल रही है।
भावीपीढ़ी का आश्चर्य तब और बढ़ेगा जब भावीपीढ़ी सन 1957 में प्रदर्शित फ़िल्म नया दौर यह गीत की कुछ पंक्तियां सुनेगी इस गीत को लिखा है,गीतकार
साहिर लुधियानवी ने।
ये देश है वीर जवानों का,
अलबेलों का मस्तानों का,
इस देश का यारों क्या कहना,
ये देश है दुनिया का गहना।।
यहाँ चौड़ी छाती वीरों की,
यहाँ भोली शक्लें हीरों की,
इसीतरह भावीपीढ़ी सन 1965 में प्रदर्शित फ़िल्म ,
सिंकदर-ए-आजम के इस गीत की कुछ पंक्तिया सुनेंगी तब भावीपीढ़ी को विश्वास ही नहीं होगा। अपने देश भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। यह गीत लिखा है, गीतकार राजेंद्र कृष्णजी ने।
गीत कुछ पंक्तिया प्रस्तुत है।
जहाँ सत्य अहिंसा और धरम का
पग -पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
जय भारती जय भारती
ये धरती वो जहाँ ॠषि मुनि
जपते प्रभु नाम की माला..
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का
चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा
आज के नोनिहाल देश की भावीपीढ़ी देश की स्तुति के लिए लिखे गए गीतों सुनेगी, तब क्या सोचेगी?
भावीपीढ़ी को जानकर इस बात पर भी आश्चर्य होगा।आज भगवान की स्तुति गाने के लिए आपस में वैमनस्यता पैदा की जा रहा है?
भावीपीढ़ी को यही संदेश है कि जब भी इतिहास पढ़ें,इतिहास पर लिखे शोधग्रंथ पढ़ें।
अंत में सन 1967 में प्रदर्शित फ़िल्म उपकार के गीत इन पंक्तियों प्रस्तुत कर लेख को पूर्ण विराम देता हूँ।
गीत के गीतकार है,गुलशन बावरा
मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
ये बाग़ है गौतम नानक का खिलते हैं चमन के फूल यहां
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक,
ऐसे हैं अमन के फूल यहां
रंग हरा हरी सिंह नलवे से
रंग लाल है लाल बहादुर से
रंग बना बसंती भगत सिंह रंग अमन का वीर जवाहर से
भावीपीढ़ी को एक नेक सलाह है,स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भी जरूर पढ़ना चाहिए।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





