एसकेएम मांग करता है कि भारत की राष्ट्रपति वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करें, जिन्होंने भारतीय कृषि को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोलने की घोषणा की है, और प्रधानमंत्री को जन-विरोधी अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश दें।
वित्त मंत्री से मांग: धान/गेहूं किसानों को दिए जाने वाले बोनस को समाप्त करने संबंधी किसान-विरोधी अर्ध-सरकारी (डी.ओ.) पत्र को वापस लिया जाए।
एसकेएम कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर व्यय सचिव वी. वुअलनम (IAS) को हटाने की मांग करेगा, जिन्होंने उक्त अर्ध-सरकारी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
9 मार्च 2026 (संसद के आगामी सत्र के प्रथम दिन) से पहले देशभर में गांव स्तर पर जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
27 फरवरी 2026 को सभी राज्यों में एसकेएम प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता से मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की मांग करेगा कि वह अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करे, अर्ध-सरकारी पत्र वापस ले, राज्यों को वर्तमान 33% के बजाय उपकर एवं अधिभार सहित विभाज्य कर पूल का 60% हिस्सा दे, कृषि आधुनिकीकरण के लिए संसाधन विकसित करे और सी2+50% की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य और ऋण माफी के लिए कानून बनाए।
संयुक्त किसान मोर्चा देशभर के किसानों से अपील करता है कि वे 9 मार्च 2026, संसद के अगले सत्र का पहला दिन, से पहले गांव स्तर पर जनसभाएं आयोजित करें। इन सभाओं में चर्चा कर प्रस्ताव पारित किए जाएं और भारत के राष्ट्रपति को खुला पत्र भेजा जाए, जिसमें प्रधानमंत्री को किसान-विरोधी अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश देने की मांग की जाए तथा कृषि और डेयरी क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोलकर भारत की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता से समझौता करने में भूमिका निभाने वाले वाणिज्य मंत्री को बर्खास्त करने का आग्रह किया जाए।
एसकेएम वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग करता है कि वे तुरंत किसान-विरोधी अर्ध-सरकारी (डी.ओ.) पत्र को वापस लें। एसकेएम कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर उक्त डी.ओ. पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले व्यय सचिव वी. वुअलनम (IAS) को पद से हटाने की मांग करेगा।
एसकेएम की राज्य समन्वय समितियों के प्रतिनिधिमंडल 27 फरवरी 2026 या उपलब्धता के अनुसार बाद की किसी तिथि को संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता से मिलेंगे और उनसे आग्रह करेंगे कि वे केंद्र सरकार से अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर आघात करने और किसानों के लाभकारी मूल्य के अधिकार का विरोध करने वाले अर्ध-सरकारी पत्र को वापस लेने की मांग करें।
एसकेएम मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता से यह भी मांग करेगा कि वे राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा करें, संसद में प्रतिगामी जीएसटी अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्तियों की बहाली सुनिश्चित करें, वर्तमान 33% के बजाय उपकर एवं अधिभार सहित विभाज्य कर पूल का 60% हिस्सा राज्यों को दिलाएं, ताकि राज्य कृषि आधुनिकीकरण, कृषि-आधारित औद्योगिकीकरण हेतु योजनाएं विकसित कर सकें, तथा सभी फसलों के लिए सी2+50%नकी डर से न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ सुनिश्चित खरीद और खेत मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने हेतु कानून बनाया जा सके।
जारीकर्ता: मीडिया सेल | संयुक्त किसान मोर्चा
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